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A. वास्तु पुरुष मंडल और दिशाओं से संबंधित प्रश्नप्रश्न 1: वास्तु पुरुष मंडल का वास्तविक महत्व क्या है?उत्तर: वास्तु पुरु...
11/01/2026

A. वास्तु पुरुष मंडल और दिशाओं से संबंधित प्रश्न
प्रश्न 1: वास्तु पुरुष मंडल का वास्तविक महत्व क्या है?
उत्तर: वास्तु पुरुष मंडल भवन की ऊर्जा विन्यास का मूल रूपरेखा है, जिसमें 45 देवता और 81 या 64 पद होते हैं। यह तय करता है कि कौन-सी ऊर्जा किस दिशा में प्रबल होगी, जिससे भवन का सही दिशा-निर्देशन संभव होता है।
प्रश्न 2: क्या हर घर के लिए वास्तु अनिवार्य है?
उत्तर: वास्तु अनिवार्य नहीं है, परंतु यह प्राकृतिक ऊर्जा के प्रवाह को संतुलित करता है, जिससे स्वास्थ्य, सुख और मानसिक शांति बेहतर रहती है।
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प्रश्न 3: यदि जमीन वास्तु-अनुकूल नहीं है तो क्या घर बनाना गलत है?
उत्तर: नहीं, वास्तु दोषों का समाधान उपलब्ध है। सही डिज़ाइन और उपायों के माध्यम से इन दोषों को कम किया जा सकता है।
प्रश्न 4: क्या वास्तु केवल हिंदू घरों में लागू होता है?
उत्तर: नहीं, वास्तु शास्त्र सभी धर्मों, जातियों और देशों पर लागू होता है, क्योंकि यह एक वैज्ञानिक प्रणाली है जो भूगोल, दिशा-ऊर्जा, सूर्य पथ और वायु पथ पर आधारित है।
B. घर और वास्तु से जुड़े विशेष प्रश्न
प्रश्न 5: मुख्य द्वार का वास्तु में क्या महत्व है?
उत्तर: मुख्य द्वार घर की ऊर्जा का प्रवेश बिंदु होता है, और इसका सही स्थान घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह सुनिश्चित करता है।
उपाय:
मुख्य द्वार उत्तर या पूर्व दिशा में होना चाहिए।
द्वार के पास कोई अव्यवस्था नहीं होनी चाहिए।
प्रश्न 6: रसोई का स्थान वास्तु के अनुसार क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: रसोई में अग्नि तत्व का नियंत्रण होता है, जो स्वास्थ्य और समृद्धि पर प्रभाव डालता है।
उपाय:
रसोई को दक्षिण-पूर्व दिशा में बनवाना सबसे उत्तम है।
रसोई में कोई अव्यवस्था न रखें और सफाई बनाए रखें।
प्रश्न 7: क्या बेडरूम की दिशा का असर स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति पर पड़ता है?
उत्तर: हां, बेडरूम की दिशा से नींद, मानसिक शांति और रिश्तों पर असर पड़ता है।
उपाय:
उत्तर-पूर्व (ईशान) दिशा में बेडरूम होना सबसे अशुभ है।
इसके स्थान पर हल्का पीला रंग और सही दिशा में सोने से सकारात्मक बदलाव आता है।

18/12/2024
25/07/2024

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*जानिए विवाह में देरी के ज्योतिषीय कारण क्या है, कैसे आती हैं विवाह योग में रुकावटें ?*
किसी कुंडली में मन का कारक चन्द्रमा शुक्र के साथ केंद्र में विराजमान हो और मंगल शनि की युति होकर दोनों में कोई भी एक ग्रह चंद्र शुक्र पर दृष्टि डाले तो भी विवाह नहीं होगा।
कुंडली में विवाह योग -
आज के समय में कई जातक विवाह देरी से होने या ना होने की समस्या से परेशान है। आज इस लेख में हम आपको बताने वाले हैं कि विवाह में देरी का योग कैसे बनता है और अविवाहित जातक कब रह जाता है।

सबसे पहले विवाह में देरी के योग
1- अगर सप्तम भाव में शुक्र बुध और लग्न में मंगल शनि हो तो जातक के विवाह में देरी होगी। स्त्री है तो 36 वर्ष तक विवाह नहीं होता है या होकर टूट जाता है।

2 - सप्तम में शनि हो और उसे सूर्य मंगल देख रहे हो तो भी विवाह देरी से होगा।
3 - अगर सप्तम भाव का स्वामी केतु के साथ बैठ जाए और सप्तम में सूर्य मंगल विराजमान हो तो भी विवाह में देरी की सम्भावना बनती है।
4 - सप्तम भाव में या तो कोई ग्रह नीच राशि में विराजमान हो या सप्तम भाव में कोई दुर्योग बन रहा हो तो भी इस भाव के पीड़ित होने के कारण विवाह में देरी होगी।
5 - अगर किसी महिला की कुंडली में मंगल नीच हो और पति का कारक गुरु शनि राहु से पीड़ित हो तो निश्चित ही उस स्त्री के विवाह में देरी होगी और उसे पति का अल्प सुख ही मिलता है।
अविवाहित रहने के योग कैसे बनते हैं ?

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1 - अगर सप्तम भाव का स्वामी नीच होकर द्वादश भाव में विराजमान हो और लग्न का स्वामी सप्तम भाव में शनि से देखा जाता हो तो जातक विवाह नहीं करेगा।
2 - किसी कुंडली में मन का कारक चन्द्रमा शुक्र के साथ केंद्र में विराजमान हो और मंगल शनि की युति होकर दोनों में कोई भी एक ग्रह चंद्र शुक्र पर दृष्टि डाले तो भी विवाह नहीं होगा।
3 - बुध शुक्र और शनि तीनो एक साथ हो और इनमें से कोई 1 ग्रह नीच राशि में हो तो जातक को विवाह करने में कोई रूचि नहीं होती।
4 - किसी पुरुष की कुंडली में अगर शुक्र नीच राशि में या अष्टम भाव में विराजमान हो और सप्तम भाव में शनि केतु की युति हो तो ऐसे जातक का विवाह नहीं होता।
शीघ्र विवाह के लिए कुछ उपाय

1- पुरुष हो या स्त्री हो अगर विवाह में देरी हो रही है तो हर गुरुवार के दिन जल में हल्दी डालकर स्नान करना चाहिए। ..................
*Vastu Tips:* घर की किस दिशा में हनुमान जी की मूर्ति लगाना शुभ, क्या कहता है वास्तु का नियम?
*इन जगहों पर रखें वास्तु पिरामिड, घर में सदा बनी रहेगी सुख समृद्धि और आएगी खुशहाली*

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22/06/2024

भूखंड की चार दीवारी के साथ मुख्य द्वार के प्रावधान को प्रमुख महत्व दिया गया है। भूखंड के सभी पक्षों (boundary walls) को नौ समान विभाजनों में विभाजित किया जाना चाहिए। यदि द्वार उत्तर या पूर्व की ओर प्रदान किया जाना है तो इसे क्रमशः उत्तर-पश्चिम कोने और उत्तर-पूर्व कोने से तीसरे / चौथे डिवीजनों पर ठीक करें। यदि द्वार पश्चिम की ओर होना है, तो इसे उत्तर-पश्चिम कोने से पांचवें / छठे विभाजन पर तय किया जाना चाहिए। इसी तरह, गेट को दक्षिण-पश्चिम कोने से छठे / सातवें डिवीजनों पर तय किया जाना चाहिए, अगर यह भूखंड के दक्षिण तरफ प्रदान किया जाना है। मुख्य दरवाजा चौकोर होना चाहिए जिसमें डबल पल्ला हो।

मालिक के लिए शयनकक्ष: दक्षिण-पश्चिम कोने।

बच्चों का कमरा: नॉर्थ-वेस्ट, वेस्ट कॉर्नर।

बैठक कक्ष: पूर्व की ओर या उत्तर-पश्चिम का कोना।

भोजन कक्ष: पूर्व की ओर या पश्चिम की ओर।

रहने के जगह (living space): पूर्व की ओर या पश्चिम की ओर या उत्तर-पश्चिम का कोना।

अध्ययन कक्ष: उत्तर या पश्चिम की ओर।

रसोई: दक्षिण-पूर्व कोने या दक्षिण की ओर।

बालकोनी: उत्तर-पूर्व कोने या उत्तर की ओर या पूर्व की ओर

शौचालय: पश्चिम की ओर या दक्षिण की ओर या उत्तर-पश्चिम का कोना।

स्नान कक्ष: पूर्व की ओर अन्यथा उत्तर-पश्चिम या उत्तर की ओर।

सीढ़ी: दक्षिण की ओर या पश्चिम की ओर अन्यथा दक्षिण-पूर्व कोने या दक्षिण-पश्चिम कोने।

लिफ्ट: दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम कोने।

भूमिगत पानी की टंकी/ बोरवेल: उत्तर-पूर्व कोने।

सेप्टिक टैक / सीवेज उपचार संयंत्र: उत्तर-पश्चिम कोने या पूर्व की ओर।

ओवरहेड वॉटर टैंक: दक्षिण-पश्चिम कोने।

विद्युत कक्ष: दक्षिण-पूर्व कोने।

पेट रूम: उत्तर-पश्चिम कोने।

[1]

फुटनोट

[1] Vastu Shastra for Home Planning
दक्षिणमुखी घर के लिए क्या वास्तु उपाय कर लेने चाहियें ?
दक्षिण मुखी मकान सभी के लिए अच्छा नहीं होता सभी के लिए बुरा नहीं होता। इसी प्रकार से सभी दिशाओं का ख्याल है जैसे पूरब मुखी मकान अच्छा माना गया है लेकिन सभी के लिए अच्छा नहीं होता अगर आप दक्षिण मुखी मकान में रहते हैं और अगर आपके घर में कोई लड़ाई झगड़ा नहीं है कोई भी बेऔलाद नहीं है घर में किसी को कैंसर तपेदिक जैसी गंभीर बीमारियां नहीं हुई है तो यह मकान आपके लिए खराब नही है। अगर उपरोक्त समस्याएं हैं तो यह घर आपके लिए खराब है यह दिशा आपके लिए खराब है

घर का मुख्य द्वार, दक्षिण पश्चिम में होना सही है या गलत?
सब से पहले क्वोरा के उन लोगों को बताना चाहूंगा की वास्तु शास्त्र अब IIT खरगपुर के पढ़ाई में शामिल हो गया है |

( कोई मने या न माने ये अपना व्यग्तिकत मामला है | )

घर का मुख्या द्वार दक्षिण पश्चिम में होना बहुत ख़राब मन जाता है | ऐसे में किसी वास्तुकार को लेआउट दिखा कर और साइट विजिट कर के परामर्श लेना ही उचित रहेगा | ( कृपया टिप्स पर ना जाये )
सुख का सार, वास्तु का आधार

अगर घर के उत्तर पूर्व में बाथरूम और टॉयलेट हो तो क्या वास्तु उपाय करने चाहिए ?
श्रीमान जी

आपके प्रश्न के अनुसार निम्नवत विचारणीय पहलू निम्नवत रहेगे

● उत्तर पूर्व दिशा या ईशान कोण अति संवेदनशील शील दिशा वास्तु शास्त्र मे मानी गयी है इस दिशा में यदि बाथरूम और टाॅयलेट है तो निवास करने वाले व्यक्तियो की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होगी विभिन्न प्रकार के रोगों आगमन यथा संतान से संबंधित परेशानी की संभावना रहेगी साथ ही उन्नति मे बाधा, तरक्की प्रभावित होंगी, मानसिक तनाव या अशांति की भी स्थिति बनेगी।

● वास्तु निदान - टाॅयलेट का उपयोग तत्काल बन्द कर दे , स्नानघर के रूप में उपयोग कर सकते हैं ध्यान रहें गन्दा पानी का उपयोग ईशान कोण मे कदापि न करें तथा संभव सफाई का विशेष ध्यान रखे, गन्दगी क

किसी घर का मुख्य द्वार दक्षिण दिशा में है और घर आगे से चौड़ा ज्यादा है तो इसका वास्तुशास्त्र के अकोडिंग उपाय बताएं?
मुख्य द्वार अग्नि कोण में होना चाहिए।

अगर मैं आपसे ऐसा घर बनाने को कहूं जिसकी चारों दिवारे दक्षिण दिशा में हो, तो आप क्या करते ?..तो मैं आपसे आग्रह करता कि अपना प्लॉट सीधा नार्थ पोल पर खरीदें | वहाँ दिशाओं की समस्या बहुत सरल हो जाती है | वहाँ हर तरफ सिर्फ दक्षिण ही दिशा है | जहाँ चाहे दीवार लगाएँ |

इसके अतिरिक्त, अगर आप यही कार्य किसी अन्य स्थल पर मौजूद ज़मीन पर करवाना चाहें, तो सिर्फ एक ही बात कहेंगे, कि दीवारों का काम सिर्फ संरक्षण और निजता देना है | इसलिए यदि आप दक्षिण के अलावा हर दिशा में कोई प्राकृतिक परदे वाली ज़मीन खोज सकें, तो भी काम बन जाएगा | उदाहरण के लिए, यदि आप की ज़मीन पर दक्षिण के अलावा हर दिशा में कोई पहाड़ी/ खाई/ नदी/ घना झुरमुट इत्यादि हो, तो हमें कोई और दीवार बनाने की आवश्यकता ही नहीं रहेगी |

मैं एक आ

घर का मुख्य द्वार अगर दक्षिण दिशा की तरफ हो तो उस पर कैसा रंग होना चाहिए?
घर का मुख्य द्वार अगर आपका दक्षिण दिशा की ओर होता है तो आपके घर का जो रंग होता है यह ब्राउन कलर लकड़ी का कलर या फिर काले रंग का भी आप रख सकते हैं अगर आप अपने घर का मुख्य द्वार दक्षिण दिशा दक्षिण-पश्चिम औरत है आपने डार्क कलर ज्यादा यूज करना चाहिए

यदी घर का दरवाजा दक्षिण दिशा में है, तो किस दिशा में सिर कर के सोना चाहिए?
हेलो आज का सवाल कि अगर हमारे घर का जो दरवाजा है दक्षिण दिशा में हैं तो हमें किस तरफ सिर करके सोना चाहिए

सबसे पहले तो मैं आपको यह बताना चाहूंगा कि अगर हमारे घर में दक्षिण दिशा में दरवाजा नहीं होना चाहिए तो ज्यादा बेहतर होगा अगर आपका दरवाजा पहले से दक्षिण दिशा में है तो कोई बात नहीं पर अगर आप नया घर बनाने जा रहे हैं तो अब दक्षिण दिशा में दरवाजा ना रखें तो ज्यादा अच्छा होगा उसमें भी एक महत्वपूर्ण बात यह होती कि दक्षिण-पश्चिम दिशा मैं दरवाजा नहीं होना चाहिए

लेकिन अब कोई भी दिशा में दरवाजा हो तो भी दरवाजा तो आप रात को बंद ही करेंगे लेकिन अगर हम सोने की बात करते हैं तो सोने की जो दिशा होती है उसमें सब

क्या आप 27x27 फीट का गृह नक्शा वास्तु शास्त्र अनुसार दे सकते हैं जो पश्चिम की ओर मुख करता हो और जिसके उत्तर में मार्ग और पूर्व, दक्षिण में घर हों? क्या उसमें दो शयनकक्ष एक महाकक्ष एक रसोईघर दो स्नान घर व शौचालय हों और एक भंडार कक्ष हो?
क्या आप घर की योजना 27x27 के लिए (पैरों में) पश्चिम की ओर मुख वाले घर के लिए वास्तुशास्त्र के अनुसार भूखंड के उत्तर और पश्चिम में सड़क और पूर्व और दक्षिण में घर के लिए साझा कर सकते हैं? कम से कम 2 शयनकक्ष 1 महाकक्ष रसोईघर और 2 स्नानघर हो सकते हैं?

मैंने इसे अपने घर के लिए बनाया है अब मैं चाहता हूं कि विशेषज्ञ इसकी समीक्षा करें।

यहाँ विवरण हैं-

प्लॉट का आकार 27x27 (यूनिट फीट-इंच)।
दुकान 10x10 फीट (दीवारों के साथ)।
रसोईघर (दीवारों के साथ) भोजनकक्ष के साथ 10x11 फीट।
हॉल महाकाक्ष 14'0x11′6 फुट-इंच (दीवारों के साथ)।
सीढ़ी 10x6 फीट (चौड़ाई -3 फीट) (दीवारों के अंदर)।
सीढ़ियों के नीचे पश्चिमी या जापानी शौच सी
क्या आप मुझे दक्षिणमुखी मकान के लिए कोई उचित सलाह दे सकते हैं? मेरे घर का दरवाजा दक्षिण दिशा में खुलता है. घर के सामने आटा चक्की भी है.
घर कि व्हायब्रेशन इतनी अच्छी रखीए की घर दक्षिण हों या पश्चिम कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए। सुबह शाम घर में गुरु भगवान की आरती पुजा हो।घर में सालासर हनुमानजी फोटो की भी पूजा हो। गायत्री मंत्र,अमृतसंजीवनी मंत्र की ध्वनि गूंजती हो। क्या फर्क पड़ता है।घर कौनसी दिशा में है। भूत प्रेत तो भाग जायेंगे,और दक्षिण दिशा यमराज की दिशा कहते तों यमराज भी आयेंगे और नमस्कार करके चले जायेंगे।

17/06/2024
01/06/2024

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Banswara
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