26/06/2021
#कबीरसाहेब_सशरीर_प्रकटहुए
*कबीर साहेब का प्रकट दिवस*
परमात्मा कबीर साहेब को आम तौर पर “कबीर दास”, यानी वाराणसी के बुनकर संत (बनारस या काशी, भारत) के नाम से जाना जाता है । विडंबना यह है कि सर्वोच्च भगवान कबीर स्वयं इस धरती पर प्रकट हुए थे, लेकिन दुनिया के लिए एक “दास” (सेवक) के रूप में जाने जाने लगे ।
कलयुग में, वर्ष 1398 (विक्रमी संवत 1455) को जेठ (मई-जून) के महीने की पूर्णिमा के दिन (पूर्णिमा), सुबह-सुबह (ब्रह्म-मुहूर्त) में सर्वोच्च देवता सतलोक से एक शिशु के रूप में अवतरित हुए और भारत की पवित्र धरती पर पवित्र शहर काशी (बनारस) में लहर तारा तालाब में एक परिपक्व कमल के फूल पर दिखाई दिए । जिसके प्रत्यक्ष दृष्टा ऋषि अष्टानन्द थे । जहां से “नीरू और नीमा” नाम के एक निःसंतान जुलाहा दम्पति उन्हें उठा कर घर ले गए। सर्वोच्च ईश्वर की इस विशेषता का उल्लेख ऋग्वेद में भी है ।
ऋग्वेद मंडल 9, सूक्त 96, मंत्र 17 में यह उल्लेख किया गया है कि सर्वोच्च भगवान इस धरती पर एक बच्चे का रूप प्राप्त करके प्रकट होते हैं और फिर अपने शुद्ध ज्ञान (अर्थात तत्वज्ञान) को अपने अनुयायियों को (कविर्गीर्भि) कबीर वाणी के माध्यम से देते हैं।
पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब ही हैं तथा वर्तमान समय में संत रामपाल जी महाराज ही अधिकारी और पूर्ण सतगुरु हैं जो मानवता का उत्थान कर अखंड पृथ्वी का संचालन करेंगे। तो बिना समय व्यर्थ गवांए आन उपासना छोड़कर संत रामपाल जी महाराज से उपदेश लें ।
अधिक जानकारी के लिए सुने सतगुरु रामपाल जी महाराज के अमृत वचन यूट्यूब चैनल पर ।
#संतरामपालजीमहाराज
कबीर परमात्मा कुंवारी गाय का दूध पीते हैं।
गरीब, दूध न पीवै न अन्न भखै, नहीं पालने झूलन्त |
अधर अमान धियान में, कमल कला फुलन्त ||
अन ब्यावर को दूहत है, दूध दिया तत्काल पीवै बालक ब्रह्म गति,
#कबीरसाहेब_सशरीर_प्रकटहुए
आप सभी से विनम्र निवेदन है जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज जी से नि:शुल्क नाम दीक्षा लें और अपना जीवन सफल बनाएं।
👇🏻👇🏻
https://online.jagatgururampalji.org/naam-diksha-inquiry