11/10/2020
(Sunday Special)
उम्मीदों को पंख लगने लगे हैं,
उड़ान संभव लग रही है,
अभिनव राजस्थान में लैंडिंग की सम्भावना दिखाई देने लगी है.
पिछले तीन महीनों के भ्रमण से ऐसा लगने लगा है.
साथियों,
इन तीन महीनों में मैं राजस्थान के कई जिलों में गया हूँ. अनेक लोगों से मिला हूँ, अपने तरीके से. एक एक व्यक्ति को, एक एक परिवार को अनुभव की किताब की तरह पढ़ने की कोशिश की है. बहुत कुछ सीखा है और पहले से सीखे हुए की पुष्टि भी हुई है. अब लग गया है कि जो बातें मैंने 2010 में लिखी थी, जो लोगों को सपने जैसी लगी थीं, वे बातें सच थीं और हकीकत में उतर सकती हैं, इसी समय में, इसी राजस्थान में.
मैं अक्सर कहता हूँ कि एक बीघे में लाखों कमा सकते हो.....बरसात के पानी से. लोग अचरज से, हैरान होकर सुनते हैं....ऐसा कैसे हो सकता है ? पर मैं अब फील्ड में जाकर उनको बता पा रहा हूँ, प्रमाण के साथ. परसों, मैंने ग्रामीण जयपुर के बसेड़ी गाँव में थाकण परिवार की प्रगति दिखाई थी. ऐसे अनेकों उदहारण राजस्थान में मिलेंगे. मैंने कुछ दिन पहले नागौर के पास के गाँव कालड़ी में जांगू परिवार के खेत में खेती और पशुपालन से हो रहे चमत्कार को भी दिखाया था. बताया था कि देशी गाय का घी कैसे दो हजार रूपये किलो बिक सकता है.
मैंने आपको जालोर जिले के आहोर में राजपुरोहित परिवार के कुटीर उद्योग के बारे में भी बताया था. नींबू के अचार को कैसे अमेजन पर महंगे भाव में बेचा जा सकता है, यह सीधे वहीं से दिखाया था. पाली जिले में बाड़ी के पास एक जर्मन महिला की मेहनत के बारे में भी आपको बताया था. ऊंटनी का दूध तीन सौ रूपये किलो और चीज तीन हजार रूपये किलो बिकते हैं.
लेकिन मैंने जो कमी पाई है, वह है ...समाज और सरकार का समन्वय, आपसी विश्वास, आगे बढने का भाव. मुझे ऐसा लगा कि जैसे चारों तरह तीन ही चस्के हैं... इधर उधर की बेकार बातें, चुनावों में समाज को बांटने वाली रुचि और जीमण के साथ फालतू असामाजिक खर्चे. इनके कारण माथा काम ही नहीं करता है.
मैं जो बातें कर रहा हूँ, हमारी पार्टी के साथी जो बातें कर रहे हैं...ऐसी बातें और कोई पार्टी नहीं कर रही है. वे कर भी नहीं पायेंगे....इसमें मेहनत बहुत लगती है. वे कम मेहनत का काम करते हैं...व्यक्तिगत सतही आरोपबाजी, राज का दुरूपयोग, टिकिट का जुगाड़ और लाशनीति (यह नई नीति आजकल जोरों पर है). हमें उसमें कोई दिलचस्पी नहीं है. हमारे कई शुभचिंतक हमको कहते हैं कि हम ऐसा करके लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींच सकते हैं !
मैं उनको यही कहता हूँ....ध्यान बाजार में नंगा होकर भी खींचा जा सकता है....सुन्दर, शालीन वस्त्र से भी...आप पर निर्भर करता है कि आप क्या करते हैं. इसलिए हम अपनी तय नीति और प्रक्रिया से काम कर रहे हैं. विश्वास हो गया है कि अभिनव राजस्थान बना देंगे.
पार्टी चलाने के लिए पैसों की भी जरूरत पड़ती है. पर पैसे मांगने और रसीद लेकर घूमने की आदत नहीं होने के कारण दिक्कत आती है. कई बार थोड़ा संकोच कम करके अपील भी करता हूँ. कुछ लोग आगे आते भी हैं और उनके कारण जितना भी काम चल सकता है, चल रहा है. मैं तो जब भी किसी साथी के सहयोग की सूचना पाता हूँ तो उसके पीछे छुपे हुए भाव को महसूस करने लगता हूँ. मनोविज्ञान के अनुसार ! कि क्या भाव आया होगा और कैसे उँगलियाँ जेब तक पहुंची होगी ! शुक्रिया......
पर अधिकतर लोग इस अपील को अनदेखा करते हैं. उनसे कोई शिकायत नहीं होती है...अब बहुत बदल गया हूँ ! उनके मन को समझता हूँ. उनका अविश्वास, उनकी शंकाएं, किसी विचारधारा से बंधन, उनको सौ रूपये देने से भी रोक लेती हैं, जो आज के युग में बड़ी राशि नहीं है.
पहले मुर्गी या अंडे वाली बात है....पहले हमारे पास बहुत पैसा हो और फिर सभी दे देंगे ...या पहले जागरूक नागरिक सहयोग करके संबल दें........हमें दूसरी आप्शन में दम नजर आता है. इससे भागीदारी बढ़ेगी.
यह साल 2020 और 2021 हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है. राजस्थान के लिए भी. मैं विश्वास से कहता हूँ कि राजस्थान के लिए इतना बड़ा और व्यवहारिक प्लान लेकर कोई दूसरा संगठन निकट भविष्य में सामने नहीं आएगा. अगर राजस्थान ने साथ दिया तो हम कुछ कर देंगे....अगर नहीं दिया तो भी हम संतुष्ट होंगे कि....एक पत्थर तो तबीयत से उछाला, निराशा के आसमान पर.
रुकेंगे नहीं पर झुकेंगे भी नहीं और मार्ग भी नहीं बदलेंगे...क्योंकि हमें पता है कि वर्तमान रास्ते अंधी गलियां हैं, भूलभुलैया हैं....उन रास्तों से हमारी सफलता में जनता फिर हार जाएगी. हमें जनता को जीताना है, उसका अपना शासन लाना है और आम परिवार की समृद्धि और सुविधा बढ़ानी है. इसलिए हमारे तय रास्ते से चलना है.
इस साल पंद्रह मुद्दों पर हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. गायों, किसानों, पशुपालकों, कारीगरों, युवाओं और कर्मचारियों के लिए हम इन मुद्दों के माध्यम से व्यापक जनजागरण कर रहे हैं.
और एक आख़िरी बात. मैं शालीनता और अनुशासन में, गरिमा में रहने वाला व्यक्ति हूँ. मुझे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर घटिया कमेंट्स या व्यक्तिगत आक्षेप पसंद नहीं है, मैं ऐसे लोगों तुरंत ब्लॉक करता हूँ. मेरे विचारों का, नीतियों का खुलकर विरोध करें, कोई तकलीफ नहीं. उस स्वस्थ परंपरा का सम्मान होगा.
मैं तो किसी और सार्वजनिक जीवन वाले व्यक्ति के लिए भी इस तरह बोलने लिखने वालों को भी ब्लॉक कर देता हूँ....ऐसे लोगों से दूर ही रहना ....दो गज नहीं, दो किमी ! कोरोना से भी खतरनाक हैं, जहरीले और समाज को गाँव से दिल्ली तक बांटने वाले कुटील लोग. राजस्थान और भारत, भाईचारे, स्नेह और सम्मान से ही समृद्ध होगा. वर्तमान बांटने वाली प्रक्रिया का हाल तो सत्तर साल में देख लिया है. सामाजिक, आर्थिक बर्बादी.
सभी सक्रिय साथियों, आर्थिक सहयोगकर्ताओं, शुभचिंतकों, किनारे बैठे लोगों, दर्शकों (!) को शुभकामनाएँ.
अभिनव अशोक,
अभिनव राजस्थान पार्टी
#आपणोराजस्थान