07/11/2024
रात के करीब 11 बज रहे थे। विजय अपनी ट्रक ड्राइव करते हुए एक सुनसान राजमार्ग पर था। आसमान में बादल छाए हुए थे और बिजली की कड़कड़ाहट दिल में एक अनजानी सी दहशत पैदा कर रही थी। विजय कई घंटे से ड्राइव कर रहा था, उसकी आँखें भारी हो रही थीं, लेकिन उसे माल सही समय पर पहुँचाना था।
विजय ने अपनी आँखें मलते हुए, रोड पर ध्यान केंद्रित किया। तभी अचानक, सड़क के किनारे एक महिला दिखाई दी। उसने सफेद साड़ी पहनी हुई थी और उसके बाल खुले हुए थे, जो हवा में लहरा रहे थे। विजय ने गाड़ी धीमी की और खिड़की खोल कर उससे पूछा, "आप यहाँ इस समय क्या कर रही हैं? क्या आपको कहीं जाना है?"
महिला ने कोई जवाब नहीं दिया, बस उसे देखती रही। विजय को थोड़ा अजीब लगा, लेकिन उसने सोचा कि शायद वह परेशानी में हो। उसने ट्रक को किनारे लगाकर महिला को बैठने का इशारा किया। महिला चुपचाप ट्रक के कैबिन में आकर बैठ गई। जैसे ही वह अंदर आई, विजय को अजीब सा ठंडापन महसूस हुआ, जैसे हवा एकदम से सर्द हो गई हो।
विजय ने गाड़ी चलाना शुरू कर दिया, लेकिन उसके मन में एक अनजाना सा डर घर करने लगा था। उसने पूछा, "आपको कहाँ जाना है?" महिला ने केवल धीरे से इशारा किया, और कुछ नहीं कहा।
कुछ मिनटों के बाद, विजय ने अपनी बगल में देखा, लेकिन उसे वह महिला दिखाई नहीं दी। वह घबरा गया। उसने ट्रक को रोका और इधर-उधर देखा, मगर महिला गायब थी। अचानक, उसे अपने पीछे से एक हल्की हंसी सुनाई दी। उसकी रीढ़ की हड्डी में ठंडक सी दौड़ गई। उसने डर के मारे शीशे में देखा, और महिला उसके ठीक पीछे बैठी थी, उसकी आँखें लाल हो रही थीं और चेहरे पर एक भयानक मुस्कान थी।
विजय ने तेजी से गाड़ी की रफ्तार बढ़ाई और पूरी ताकत से सड़क पर भागने लगा। जैसे ही वह एक मंदिर के पास पहुँचा, उसने महिला को देखते हुए भगवान का नाम लिया। तभी महिला का चेहरा भयानक रूप से बिगड़ने लगा और वह एक चीख के साथ गायब हो गई।
विजय ने किसी तरह गाड़ी रोकी और हांफते हुए बाहर निकला। मंदिर के पुजारी ने उसे शांत किया और कहा, "इस सड़क पर कई सालों पहले एक दुर्घटना में एक महिला की मौत हो गई थी। कहते हैं, वह महिला अब भी मदद मांगने के लिए यात्रियों को दिखाई देती है।"
उस रात के बाद, विजय ने कसम खाई कि वह उस रास्ते से कभी अकेले नहीं गुजरेगा।