MINTU Consultancy Services

MINTU Consultancy  Services real estate, ayurvedic medicines and panch karna ...

07/11/2024

साभार ::--

*अमृत कथा
*"जैसा खाया अन्न वैसा बना मन"*

बासमती चावल बेचने वाले एक सेठ की स्टेशन मास्टर से साँठ-गाँठ हो गयी। सेठ को आधी कीमत पर बासमती चावल मिलने लगा। सेठ ने सोचा कि इतना पाप हो रहा है, तो कुछ धर्म-कर्म भी करना चाहिए।
एक दिन उसने बासमती चावल की खीर बनवायी और किसी साधु बाबा को आमंत्रित कर भोजनप्रसाद लेने के लिए प्रार्थना की। साधु बाबा ने बासमती चावल की खीर खायी। दोपहर का समय था। सेठ ने कहाः "महाराज ! अभी आराम कीजिए। थोड़ी धूप कम हो जाय फिर पधारियेगा। साधु बाबा ने बात स्वीकार कर ली।
सेठ ने 100-100 रूपये वाली 10 लाख जितनी रकम की गड्डियाँ उसी कमरे में चादर से ढँककर रख रखी थी जिसमें साधु बाबा आराम करने गये थे। खीर थोड़ी हजम हुई। साधु बाबा के मन में हुआ कि इतनी सारी गड्डियाँ पड़ी हैं, एक-दो उठाकर झोले में रख लूँ तो किसको पता चलेगा ? साधु बाबा ने एक गड्डी उठाकर रख ली। शाम हुई तो सेठ को आशीर्वाद देकर चल पड़े।
सेठ दूसरे दिन रूपये गिनने बैठा तो एक गड्डी (दस हजार रुपये) कम निकली। सेठ ने सोचा कि महात्मा तो भगवतपुरुष थे, वे क्यों लेंगे ? नौकरों की धुलाई-पिटाई चालू हो गयी। ऐसा करते-करते दोपहर हो गयी। इतने में साधु बाबा आ पहुँचे तथा अपने झोले में से गड्डी निकाल कर सेठ को देते हुए बोलेः "नौकरों को मत पीटना, गड्डी मैं ले गया था।"
सेठ ने कहाः "महाराज ! आप क्यों लेंगे ? जब यहाँ नौकरों से पूछताछ शुरु हुई तब कोई भय के मारे आपको दे गया होगा। और आप नौकर को बचाने के उद्देश्य से ही वापस करने आये हैं क्योंकि साधु तो दयालु होते है।"
साधुः "यह दयालुता नहीं है। मैं सचमुच में तुम्हारी गड्डी चुराकर ले गया था।" साधु ने फिर कहा, "सेठ, तुम सच बताओ कि तुम कल खीर किसकी और किसलिए बनायी थी ?"
सेठ ने सारी बात बता दी कि स्टेशन मास्टर से चोरी के चावल खरीदता हूँ, उसी चावल की खीर थी।
साधु बाबाः "चोरी के चावल की खीर थी इसलिए उसने मेरे मन में भी चोरी का भाव उत्पन्न कर दिया। सुबह जब पेट खाली हुआ, तेरी खीर का सफाया हो गया तब मेरी बुद्धि शुद्ध हुई कि 'हे राम!. यह क्या हो गया ?
मेरे कारण बेचारे नौकरों पर न जाने क्या बीत रही होगी। इसलिए तेरे पैसे लौटाने आ गया..!!
*🙏🏿🙏🏻🙏जय श्री कृष्ण*🙏🏾🙏🏽🙏🏼

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31/10/2024

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30/10/2024

साभार ::--

एक सभा में गुरु जी ने प्रवचन के दौरान एक 30 वर्षीय युवक को खडा कर पूछा कि

- आप मुम्बई मेँ जुहू चौपाटी पर चल रहे हैं और सामने से एक सुन्दर लडकी आ रही है , तो आप क्या करोगे ?

युवक ने कहा - उस पर नजर जायेगी, उसे देखने लगेंगे।

गुरु जी ने पूछा - वह लडकी आगे बढ गयी , तो क्या पीछे मुडकर भी देखोगे ?

लडके ने कहा - हाँ, अगर धर्मपत्नी साथ नहीं है तो। (सभा में सभी हँस पडे)

गुरु जी ने फिर पूछा - जरा यह बताओ वह सुन्दर चेहरा आपको कब तक याद रहेगा ?

युवक ने कहा 5 - 10 मिनट तक, जब तक कोई दूसरा सुन्दर चेहरा सामने न आ जाए।

गुरु जी ने उस युवक से कहा - अब जरा कल्पना कीजिये.. आप जयपुर से मुम्बई जा रहे हैं और मैंने आपको एक पुस्तकों का पैकेट देते हुए कहा कि मुम्बई में अमुक महानुभाव के यहाँ यह पैकेट पहुँचा देना...

आप पैकेट देने मुम्बई में उनके घर गए। उनका घर देखा तो आपको पता चला कि ये तो बडे अरबपति हैं। घर के बाहर 10 गाडियाँ और 5 चौकीदार खडे हैं।

उन्हें आपने पैकेट की सूचना अन्दर भिजवाई , तो वे महानुभाव खुद बाहर आए। आप से पैकेट लिया। आप जाने लगे तो आपको आग्रह करके घर में ले गए। पास में बैठाकर गरम खाना खिलाया।

चलते समय आप से पूछा - किसमें आए हो ?
आपने कहा- लोकल ट्रेन में।

उन्होंने ड्राइवर को बोलकर आपको गंतव्य तक पहुँचाने के लिए कहा और आप जैसे ही अपने स्थान पर पहुँचने वाले थे कि उस अरबपति महानुभाव का फोन आया - भैया, आप आराम से पहुँच गए..

अब आप बताइए कि आपको वे महानुभाव कब तक याद रहेंगे ?

युवक ने कहा - गुरु जी ! जिंदगी में मरते दम तक उस व्यक्ति को हम भूल नहीं सकते।

गुरु जी ने युवक के माध्यम से सभा को संबोधित करते हुए कहा — "यह है जीवन की हकीकत।"

"सुन्दर चेहरा थोड़े समय ही याद रहता है, पर सुन्दर व्यवहार जीवन भर याद रहता है।"

बस यही है जीवन का गुरु मंत्र... अपने चेहरे और शरीर की सुंदरता से ज़्यादा अपने व्यवहार की सुंदरता पर ध्यान दें.. जीवन अपने लिए आनंददायक और दूसरों के लिए अविस्मरणीय प्रेरणादायक बन जाएगा..
🙏🏻🙏🏻🙏🏻😊😊😊🙏🏻🙏🏻🙏🏻

16/10/2024

साभार ::--

*"सम्राट अशोक" की जन्म-जयंती हमारे देश में क्यों नहीं मनाई जाती ??*

*बहुत सोचने पर भी, "उत्तर" नहीं मिलता! आप भी इन "प्रश्नों" पर विचार करें!*
🤔🤔🤔🤔🤔🤔🤔🤔

*सम्राट अशोक*
*पिताजी का नाम - बिन्दुसार गुप्त*
*माताजी का नाम - सुभद्राणी*

*जिस "सम्राट" के नाम के साथ संसारभर के इतिहासकार “महान” शब्द लगाते हैं*

*जिस -"सम्राट" का राज चिन्ह "अशोक चक्र" भारतीय अपने ध्वज में लगाते है l*

*जिस "सम्राट" का राज चिन्ह "चारमुखी शेर" को भारतीय "राष्ट्रीय प्रतीक" मानकर सरकार चलाते हैं l और "सत्यमेव जयते" को अपनाया है l*

*जिस देश में सेना का सबसे बड़ा युद्ध सम्मान, सम्राट अशोक के नाम पर, "अशोक चक्र" दिया जाता है l*
🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
*जिस सम्राट से पहले या बाद में कभी कोई ऐसा राजा या सम्राट नहीं हुआ"...जिसने "अखंड भारत" (आज का नेपाल, बांग्लादेश, पूरा भारत, पाकिस्तान, और अफगानिस्तान) जितने बड़े भूभाग पर एक-छत्र राज किया हो l*

*सम्राट अशोक के ही, समय में "२३ विश्वविद्यालयों" की स्थापना की गई l जिसमें तक्षशिला, नालन्दा, विक्रमशिला, कंधार, आदि विश्वविद्यालय प्रमुख थे l इन्हीं विश्वविद्यालयों में विदेश से छात्र उच्च शिक्षा पाने भारत आया करते थे।*
🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞
*जिस -"सम्राट" के शासन काल को विश्व के बुद्धिजीवी और इतिहासकार, भारतीय इतिहास का सबसे "स्वर्णिम काल" मानते हैं।*
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*जिस "सम्राट" के शासन काल में भारत "विश्व गुरु" था l "सोने की चिड़िया" था l जनता खुशहाल और भेदभाव-रहित थी l*
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*जिस सम्राट के शासन काल में, सबसे प्रख्यात महामार्ग "ग्रेड ट्रंक रोड" जैसे कई हाईवे बने l* *2,000 किलोमीटर लंबी पूरी "सडक" पर दोनों ओर पेड़ लगाये गए l "सरायें" बनायीं गईं..l*
*मानव तो मानव..,पशुओं के लिए भी, प्रथम बार "चिकित्सा घर" (हॉस्पिटल) खोले गए l*
*पशुओं को मारना बंद करा दिया गया*
*ऐसे*
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*"महान सम्राट अशोक"*
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*जिनकी जयंती उनके अपने देश भारत में क्यों नहीं मनायी जाती ?? न ही कोई छुट्टी घोषित की गई है?*

*दुख: है कि, जिन नागरिकों को ये जयंती मनानी चाहिए...वो अपना इतिहास ही भुला बैठे हैं, और जो जानते हैं, वो ना जाने क्यों मनाना नहीं चाहते??*

*"जो जीता वहीचंद्रगुप्त"*
*ना होकर,* 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 *"जो जीता वही सिकन्दर"* *कैसे हो गया??* 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
*जबकि ये बात सभी जानते हैं, कि सिकन्दर की सेना ने चन्द्रगुप्त मौर्य के प्रभाव को देखते हुए ही लड़ने से मना कर दिया था। बहुत ही बुरी तरह से मनोबल टूट गया था और सिकंदर को "वापस लौटना" पड़ा था।*🚩🇮🇳

*आइए हम सब मिलकर इस "ऐतिहासिक भूल" को सुधार करने की शपथ लें।🙏🏻*

*कम से कम पांच ग्रुप मैं जरूर भेजे*
*कुछ लोग नही भेजेंगे*
*लेकिन मुझे यकीन है आप जरूर भेजेंगे*
👍👍👍

🙏🏻 *|| साभार ||* 🙏🏻

03/10/2024

साभार व सादर ::--

*प्रेरक_प्रसंग*

दिन की आखिरी ट्रेन अगर स्टेशन से निकल गई तो फिर कल सुबह ही अगली ट्रेन मिलने की कल्पना किए एक बूढी महिला के पैर तेजी से स्टेशन की तरफ बढ़े जा रहे थे किंतु स्टेशन पहुंचते पहुंचते आखिर ट्रेन छूट गई तो महिला निढाल होकर एक बेंच पर बैठ गई,,उनके चेहरे पर चिंता के भाव थे,,
एक कुली ने इसे देखा और माँ से पूछा।

- माईजी, आपको कहाँ जाना था?
- मैं अपने बेटे के पास दिल्ली जाऊंगी....
- पर आज कोई ट्रेन नहीं माई अब कल सुबह मिलेगी।।

महिला बेबस लग रही थी तो कुली ने कहा,,,, माई अगर आपका घर दूर हो तो यहीं प्रतीक्षालय में आपके लेटने का प्रबंध कर दूं और भोजन भी आपको पहुंच जाएगा,कोई दिक्कत की बात नही है,,,,,,,,
वैसे दिल्ली में आपका बेटा क्या काम करता है???

माँ ने जवाब दिया कि उसका बेटा रेल महकमे में काम करता है।
माई आप जरा बेटे का नाम बताइए,, देखूंगा अगर संपर्क संभव होगा तो तार (प्राचीन भारत का टेलीफोनिक सिस्टम) से आपकी बात करवा दूंगा,,,,, कुली ने कहा,,,
- वह मेरा लाल है, मैं उसे लाल ही बुलाती हूं मगर
उसको सब लाल बहादुर शास्त्री कहते हैं !
(माँ ने जवाब दिया)
वृद्ध महिला के मुंह से उनके बेटे का नाम सुनकर कुली के पैरों तले जमीन खिसक गई वो अवाक रह गया,,भागकर स्टेशन मास्टर के कमरे में पहुंचा और एक ही सांस में पूरी बात कह सुनाया।
स्टेशन मास्टर तुरंत हरकत में आए कुछ लोगो से आनन फानन तार से बात की और अपने मातहतों के साथ भागकर बूढ़ी महिला के पास पहुंच गए,,,,,,,,
महिला को सादर प्रणाम कर स्टेशन मास्टर ने पूछा,,,,,, मां जी आपके बेटे ने कभी आपको बताया नही की वोह रेल महकमे में क्या काम करते हैं????
बताया था ना मुझे,,,बोला था की अम्मा मैं रेलवे के दिल्ली दफ्तर में छोटा सा मुलाजिम हूं!!
मां जी,,आपकी शिक्षा वा संस्कारों ने आपके बेटे को बहुत बड़ा वा महान बना दिया है,,जानना नही चाहेंगी की आपके बेटे जी रेल महकमे में कौन सा काम करते हैं??? स्टेशन मास्टर की बात सुनके महिला के चेहरे पर विस्मय के भाव थे......
मां जी,,,इस पूरे भारत में जितनी ट्रेन चलती है और जितने मेरे जैसे लाखों रेलवे के मुलाजिम हैं उन सबके वो मुखिया और अगुआ हैं,,वो भारत के माननीय रेल मंत्री है।।
स्टेशन मास्टर वा वृद्ध महिला के बीच चल रहे वार्तालाप के बीच ही स्टेशन का माहौल पूरी तरह बदल चुका था,,,सायरन की हुंकार के साथ जिले के पुलिस कप्तान जिला कलेक्टर सहित रेलवे पुलिस बल के जवान वा अधिकारी स्टेशन पर पहुंच चुके थे एंबेसडर कार भी आ चुकी थी।। वृद्ध मां को सलामी देते हुए उनको पूरे सम्मान के साथ रेलवे के सुरक्षा गार्डों के सुपुर्द कर शास्त्री जी के पास दिल्ली रवाना कर दिया गया।। बनारस के छोटे से स्टेशन पर चल रहे इस बड़े घटनाक्रम से दिल्ली दरबार में बैठा वो "छोटे कद का बड़ा आदमी" पूरी तरह अनजान था........
ऐसे थे भारत मां के सच्चे सपूत श्री लाल बहादुर शास्त्री जी❣️
आज उनकी 120 वीं जन्म जयंती पर कृतज्ञ राष्ट्र की विनम्र श्रद्धांजलि
🙏🌹🌹🌹🙏
साहित्यिक पत्रिका से प्राप्त प्रेरक प्रसंग का आवर्धित संस्करण!
प्रस्त

26/09/2024

साभार ::--
#स्त्रियां
बाथरूम मे जाकर कपड़े भिगोती हैं,बच्चो और पति की शर्ट की कॉलर घिसती है,बाथरूम का फर्श धोती है ताकि चिकना न रहे,फिर बाल्टी और मग भी मांजती है तब जाकर नहाती है
और तुम कहते हो कि स्त्रियां नहाने में कितनी देर लगातीं है।

#स्त्रियां
किचन में जाकर सब्जियों को साफ करती है,तो कभी मसाले निकलती है।बार बार अपने हाथों को धोती है,आटा मलती है,बर्तनों को कपड़े से पोंछती है। दही जमाती घी बनाती है
और तुम कहते हो खाना में कितनी देर लगेगी ???

#स्त्रियां
बाजार जाती है।एक एक सामान को देखती है,अच्छी सब्जियों फलों को छाटती है,पैसे बचाने के चक्कर में पैदल चल देती है,भीड में दुकान को तलाशती है।और तुम कहते हो कि इतनी देर से क्या ले रही थी ???

#स्त्रियां
बच्चो और पति के जाने के बाद चादर की सलवटे सुधारती है,सोफे के कुशन को ठीक करती है,सब्जियां फ्रीज में रखती है,कपड़े प्रेस करती है,राशन जमाती है,पौधों में पानी डालती है,कमरे साफ करती है,बर्तन सामान जमाती है,और तुम कहते हो कि दिनभर घर में क्या कर रही थी ???

#स्त्रियां
कही जाने के लिए तैयार होते समय कपड़ो को उठाकर लाती है,दूध खाना फ्रिज में रखती है बच्चो को हिदायते देती है,नल चेक करती है,दरवाजे लगाती है,फिर खुद को खूबसूरत बनाती है ताकि तुमको अच्छा लगे और तुम कहते हो कितनी देर में तैयार होती हो।

, #स्त्रियां
बच्चो की पढ़ाई डिस्कस करती,खाना पूछती,घर का हिसाब बताती,रिश्ते नातों की हालचाल बताती,फीस बिल याद दिलाती और तुम कह देते हो कि कितना बोलती हो।

#स्त्रियां
दिनभर काम करके थोड़ा दर्द तुमसे बाट लेती है,मायके की कभी याद आने पर दुखी होती है,बच्चों के नंबर कम आने पर परेशान होती है,थोड़ा सा आंसू अपने आप आ जाते है,मायके में ससुराल की इज़्ज़त,ससुराल में मायके की बात को रखने के लिए कुछ बाते बनाती और तुम कहते हो की स्त्रियां कितनी नाटकबाज होती है।

पर स्त्रियां फिर भी तुमसे ही सबसे ज्यादा प्यार 😘
करती है...

#स्त्रियां

एक बेटी ने पापा से आंगन में खड़े एक पेड़ को बाहर लगाने को पूछा तो पापा ने कहा नहीं बिटिया ये 4 साल पुराना है यहां से बाहर ले जाने पर ये मर जायेगा नई जगह नया वातावरण ये झेल नहीं पायेगा।
तब बिटिया ने कहा पापा एक पेड़ और आपके आंगन में खड़ा है जो 22 साल पुराना है उसे कैसे दूसरे लोगो और दूसरे वातावरण में लगाने की सोच रहे है। वो नही मरेगा क्या..? तब पापा ने अपनी बिटिया से कहा यह शक्ति पूरी कायनात में भगवान ने बस स्त्री को ही दी है कि वो अपनी जड़े छोड़ कर दूसरे आंगन में बस जाति है और सबकी सेवा करती है। फिर भी तुम कहते हो स्त्रियां ऐसी होती है उन्हे तमीज़ नही होती,उनकी अक्ल घुटने में होती है।
सभी स्त्रियों को समर्पित।
नारी शक्ति को नमन
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

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26/09/2024

साभार ::--

26 सितम्बर/जन्म-दिवस
समाजसेवी रानी रासमणि

कोलकाता के दक्षिणेश्वर मंदिर और उसके पुजारी श्री रामकृष्ण परमहंस का नाम प्रसिद्ध है; पर वह मंदिर बनवाने वाली रानी रासमणि को लोग कम ही जानते हैं। रानी का जन्म 26 सितंबर 1793 को बंगाल के 24 परगना जिले के हाली शहर के गंगा के तट पर बसे ग्राम कोना में हुआ था। उनके पिता श्री हरेकृष्ण दास एक साधारण किसान थे। परिवार का खर्च चलाने के लिए वे खेती के साथ ही जमींदार के पास कुछ काम भी करते थे। उसकी चर्चा से रासमणि को भी प्रशासनिक कामों की जानकारी होने लगी। रात में उनके पिता लोगों को रामायण, भागवत आदि सुनाते थे। इससे रासमणि को भी निर्धनों के सेवा में आनंद मिलने लगा।

रासमणि जब बहुत छोटी थीं, तभी उनकी मां का निधन हो गया। ऐसे में उनका पालन उनकी बुआ ने किया। तत्कालीन प्रथा के अनुसार 11 वर्ष की अवस्था में उनका विवाह बंगाल के बड़े जमींदार प्रीतम बाबू के पुत्र रामचंद्र दास से हो गया। ऐसे घर में आकर भी रासमणि को अहंकार नहीं हुआ। 1823 की भयानक बाढ़ के समय उन्होंने कई अन्नक्षेत्र खोले तथा आश्रय स्थल बनवाये। इससे उन्हें खूब ख्याति मिली और लोग उन्हें ‘रानी’ कहने लगे।

विवाह के कुछ वर्ष बाद उनके पति का निधन हो गया। तब तक वे चार बेटियों की मां बन चुकी थीं; पर उनके कोई पुत्र नहीं था। अब सारी सम्पत्ति की देखभाल का जिम्मा उन पर ही आ गया। उन्होंने अपने दामाद मथुरानाथ के साथ मिलकर सब काम संभाला। सुव्यवस्था के कारण उनकी आय काफी बढ़ गयी। सभी पर्वों पर रानी गरीबों की खुले हाथ से सहायता करती थीं। उन्होंने जनता की सुविधा के लिए गंगा के तट पर कई घाट और सड़कें तथा जगन्नाथ भगवान के लिए सवा लाख रु. खर्च कर चांदी का रथ भी बनवाया।

रानी का ब्रिटिश साम्राज्य से कई बार टकराव हुआ। एक बार अंग्रेजों ने दुर्गा पूजा उत्सव के ढोल-नगाड़ों के लिए उन पर मुकदमा कर दिया। इसमें रानी को जुर्माना देना पड़ा; पर फिर रानी ने वह पूरा रास्ता ही खरीद लिया और वहां अंग्रेजों का आवागमन बंद करा दिया। इससे शासन ने रानी से समझौता कर उनका जुर्माना वापस किया। एक बार शासन ने मछली पकड़ने पर कर लगा दिया। रानी ने मछुआरों का कष्ट जानकर वह सारा तट खरीद लिया। इससे अंग्रेजों के बड़े जहाजों को वहां से निकलने में परेशानी होने लगी। इस बार भी शासन को झुककर मछुआरों से सब प्रतिबंध हटाने पड़े।

एक बार रानी को स्वप्न में काली माता ने भवतारिणी के रूप में दर्शन दिये। इस पर रानी ने हुगली नदी के पास उनका भव्य मंदिर बनवाया। कहते हैं कि मूर्ति आने के बाद एक बक्से में रखी थी। तब तक मंदिर अधूरा था। एक बार रानी को स्वप्न में मां दुर्गा ने कहा कि बक्से में मेरा दम घुट रहा है। मुझे जल्दी बाहर निकालो। रानी ने सुबह देखा, तो प्रतिमा पसीने से लथपथ थी। इस पर रानी ने मंदिर निर्माण का काम तेज कर दिया और अंततः 31 मई, 1855 को मंदिर में मां दुर्गा की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा हो गयी।

इस मंदिर में मुख्य पुजारी रामकुमार चटर्जी थे। वृद्ध होने पर उन्होंने अपने छोटे भाई गदाधर को वहां बुला लिया। यही गदाधर रामकृष्ण परमहंस के नाम से प्रसिद्ध हुए। परमहंस जी सिद्ध पुरुष थे। एक बार उन्होंने पूजा करती हुई रानी को यह कहकर चांटा मार दिया कि मां के सामने बैठकर अपनी जमींदारी का हिसाब मत करो। रानी अपनी गलती समझकर चुप रहीं।

रानी ने अपनी सम्पत्ति का प्रबंध ऐसे किया, जिससे उनके द्वारा संचालित मंदिर तथा अन्य सेवा कार्यों में भविष्य में भी कोई व्यवधान न पड़े। अंत समय निकट आने पर उन्होंने अपने कर्मचारियों से गंगा घाट पर प्रकाश करने को कहा। इस जगमग प्रकाश के बीच 19 फरवरी, 1861 को देश, धर्म और समाजसेवी रानी रासमणि का निधन हो गया। दक्षिणेश्वर मंदिर के मुख्य द्वार पर लगी प्रतिमा उनके कार्यों की सदा याद दिलाती रहती है।

26/09/2024

साभार ::--

एक बार मैं अपने गाँव जा रहा था। रास्ते में एक छोटे से स्टेशन पर ट्रेन रुकी। वहाँ 15 मिनट का ठहराव था, इसलिए मैं थोड़ी देर टहलने के लिए प्लेटफार्म पर उतर गया। स्टेशन पर काफी भीड़ थी। मेरी नजर अचानक एक बेंच पर बैठे एक व्यक्ति पर पड़ी। मैं उसे गौर से देख ही रहा था कि ट्रेन का हॉर्न बजा, और मैं जल्दी से अपनी सीट पर लौट आया।

ट्रेन में बैठते ही मैंने चाय का आर्डर दिया। चाय पीते-पीते मेरे दिमाग में पुरानी यादें तैरने लगीं। मुझे वह रात याद आई जब मैं खुद रेलवे स्टेशन पर बैठा था, अपनी जिंदगी की परेशानियों से जूझ रहा था।

रात गहराने लगी थी। तभी एक व्यक्ति ने मुझसे माचिस मांगी। मैंने जवाब दिया, मैं सिगरेट नहीं पीता।

वह मुस्कुराकर बोला, भाई! मैंने सिगरेट नहीं, माचिस मांगी है।

मैं थोड़ा चिढ़ते हुए बोला, जब मैं सिगरेट नहीं पीता, तो माचिस क्यों रखूं?

वह हंसते हुए चायवाले से माचिस और चाय मंगवाने लगा। फिर मुझसे कहा, हाँ, आपकी बात सही है, पर मैंने सोचा...

मैंने उसकी बात बीच में काटते हुए कहा, आप क्या सोचते हैं, इससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। आप बेवजह मुझे परेशान कर रहे हैं। अपना काम कीजिए।

इतना कहकर मैं दूसरी बेंच पर जाकर बैठ गया। थोड़ी देर बाद चायवाला आया और मुझे चाय देने लगा।

मैंने हैरान होकर पूछा, मैंने चाय कब ऑर्डर की?

वह बोला आपने नही उन साहब ने आपके लिए मंगवाई है

अब मैं और गुस्से में जाकर उस व्यक्ति से भिड़ गया, आपकी प्रॉब्लम क्या है? मुझे क्यों परेशान कर रहे हैं?

वह शांत स्वर में बोला, भाई, मैंने सोचा बारिश हो रही है, ठंड भी है, आप थके हुए लग रहे हैं। चाय से शायद थोड़ा आराम मिलेगा।

मैंने फिर चिढ़कर कहा, यही तो हमारे देश की समस्या है, कोई किसी को चैन से बैठने भी नहीं देता। मैंने सोचा था स्टेशन पर आराम से बैठूंगा, लेकिन आप आ गए।

इतना कहकर मैं उसे छोड़कर जाने को हुआ, लेकिन वह अब भी शांत था। उसने मुस्कुराते हुए कहा, क्यों परेशान हो? क्या हुआ?

इस बार उसकी शांति ने मुझे कुछ सोचने पर मजबूर कर दिया। मैंने थोड़ा रुककर पूछा, आपको जानकर क्या मिलेगा?"

वह बोला, शायद तुम्हारी परेशानी का हल मिल जाए, या कम से कम तुम्हारे दिल का बोझ थोड़ा हल्का हो जाए।

उसकी बातों में एक सुकून था। मैंने हिम्मत जुटाई और उसे अपने जीवन की कहानी सुनाने लगा। मैंने बताया कि मेरे पिताजी एक सरकारी दफ्तर में चपरासी थे, और मेरी माँ लोगों के घरों में काम करके मुझे पढ़ा रही थीं। मेरे पिताजी का सपना था कि मैं आईपीएस अफसर बनूं, लेकिन मेरा सपना अलग था। मुझे नौकरी करने से ज्यादा लोगों को नौकरी देना अच्छा लगता था।

पिताजी ने मेरे सपनों का सम्मान करते हुए गाँव की ज़मीन बेचकर मुझे पैसे दिए, और मैंने अपना व्यापार शुरू किया। सब कुछ अच्छा चल रहा था। मैंने शादी भी कर ली, और दो प्यारे बच्चे भी हो गए। शुरुआती कुछ सालों में व्यापार बहुत अच्छा चला। मैं बहुत खुश था, लेकिन एक गलत निवेश ने सब कुछ बर्बाद कर दिया। धीरे-धीरे सारी संपत्ति खत्म हो गई। अब सिर्फ मकान बचा है, और अगर कल किस्त नहीं भरी तो वो भी नीलाम हो जाएगा।

मेरी बात सुनकर वह व्यक्ति गंभीरता से बोला, तुम अपने आप को एक और मौका क्यों नहीं देते? हो सकता है सब ठीक हो जाए।

फिर उसने पूछा, क्या तुमने कभी अभिषेक वर्मा का नाम सुना है?

मैंने सोचा, क्या वही जो काफी फेमस बिजनेसमैन है?

वह बोला, हाँ, वही! कुछ साल पहले वह भी बर्बादी की कगार पर था। उसके पास चाय के पैसे तक नहीं थे। लेकिन उसने अपने आप को एक और मौका दिया, और आज वह पहले से ज्यादा सफल है।

मैंने उसकी बात सुनकर कहा, ये सब फिल्मी बातें हैं, असल जिंदगी में ऐसा नहीं होता। और फिर आपकी हालत भी तो मुझसे बेहतर नहीं लग रही। कपड़े फटे हुए, चश्मा टूटा हुआ, और हाथों में लकड़ी! वैसे आप हैं कौन?

उसने धीरे से मुस्कुराते हुए कहा, मैं ही अभिषेक वर्मा हूँ।

यह सुनकर मैं हक्का-बक्का रह गया। उसने बेंच से उठते हुए कहा, मैं रोज़ इस समय अपने पुराने दिनों की यादों को ताजा करने स्टेशन आता हूँ। और अगर मुझे कोई मेरी जैसी हालत में मिलता है, तो उससे बातें कर लेता हूँ।"

इतना कहकर वह बाहर निकला और एक चमचमाती कार में बैठकर चला गया।

उस रात के बाद मैंने भी अपने आप को एक और मौका देने का फैसला किया। अगले दिन मैंने बैंक जाकर अपनी समस्या बताई, और थोड़ी मोहलत मांगी। बैंक ने मेरा रिकॉर्ड देखकर मुझे थोड़ा वक्त दिया और फाइनेंस की भी व्यवस्था कर दी। मैंने फिर से अपने व्यवसाय को शुरू किया और धीरे-धीरे सबकुछ पटरी पर आने लगा। आज मैं फिर से सफल हूँ।

ट्रेन की सीट पर बैठा मैं ये सब सोच ही रहा था कि टीटी की आवाज़ ने मुझे वर्तमान में खींच लिया। मैंने टिकट दिखाया और देखा कि मेरा स्टेशन भी आने वाला था। कुछ देर बाद मैं ट्रेन से उतर कर टैक्सी में बैठा और घर की ओर चल पड़ा।

हो सकता है, आप भी कभी जीवन की कठिनाइयों से हार मान बैठे हों। शायद आपके पास कोई "अभिषेक वर्मा" न आए, लेकिन फिर भी, खुद को एक और मौका देना कभी बंद मत कीजिए। हो सकता है, आपकी ज़िंदगी भी बदल जाए। याद रखें, जब तक हम खुद को एक और मौका नहीं देंगे, तब तक हमें कभी पता नहीं चलेगा कि हम क्या कर सकते हैं।

08/09/2024

चाय मे मक्खी गिरे तो चाय फेंकता हैं, और
घी मे गिरे तो मक्खी फेंकता हैं।
इंसान घाटा और मुनाफा देखकर सिद्धान्त बनाता हैं।

09/08/2024

👉🏻1. जीरा (Cumin seeds)

✨जीरे की परख करने के ल‍िए थोड़ा सा जीरा हाथ में लीजि‍ए और दोनों हथेल‍ियों के बीच रगड़‍िए।

✨अगर हथेली में रंग छूटे तो समझ जाइए क‍ि जीरा म‍िलावटी है क्‍योंक‍ि जीरा रंग नही छोड़ता।

👉🏻2. हींग (Hing)

✨हींग की गुणवत्‍ता जांचने के ल‍िए उसे पानी में घोल‍िए।

✨अगर घोल दूध‍िया रंग का हो जाए तो समझ‍िए क‍ि हींग असली है।

✨ दूसरा तरीका है हींग का एक टुकड़ा जीभ पर रखें अगर हींग असली होगी तो कड़वापन या चरपराहट का अहसास होगा।

👉🏻3. लाल मि‍र्च पाउडर (Red chilli powder)

✨लाल म‍िर्च पाउडर में सबसे ज्‍यादा म‍िलावट की जाती है।

✨ इसकी जांच करने के ल‍िए पाउडर को पानी में डालिए, अगर रंग पानी में घुले और बुरादा जैसा तैरने लगे तो मान ल‍ीज‍िए की म‍िर्च पाउडर नकली है।

👉🏻4. सौंफ और धन‍िया (Fennel & Coriander)

✨इन द‍िनों मार्केट में ऐसी सौंफ और धन‍िया म‍िलता है जिस पर हरे रंग की पॉल‍िश होती है ये नकली पदार्थ होते हैं,

✨इसकी जांच करने के ल‍िए धन‍िए में आयोडीन म‍िलाएं,

✨अगर रंग काला हो जाए तो समझ जाइए क‍ि धन‍िया नकली है।

👉🏻5. काली म‍िर्च (Black pepper)

✨काली म‍िर्च पपीते के बीज जैसी ही द‍िखती है इसल‍िए कई बार म‍िलावटी काली म‍िर्च में पपीते के बीज भी होते हैं।

✨इसको परखने के ल‍िए एक ग‍िलास पानी में काली म‍िर्च के दानें डालें।

✨ अगर दानें तैरते हैं तो मतलब वो दानें पपीते के हैं और काली म‍िर्च असली नहीं है।

👉🏻6. शहद (Honey)

✨शहद में भी खूब म‍िलावट होती है।

✨शहद में चीनी म‍िला दी जाती है, इसकी गुणवत्‍ता जांचने के ल‍िए शहद की बूंदों को ग‍िलास में डालें,

✨ अगर शहद तली पर बैठ रहा है तो इसका मतलब वो असली है नहीं तो नकली है।

👉🏻7. देसी घी (Ghee)

✨घी में म‍िलावट की जांच करने के लिए दो चम्‍मच हाइट्रोक्‍लोर‍िक एस‍िड और दो चम्‍मच चीनी लें और उसमें एक चम्‍मच घी म‍िलाएं।

✨अगर म‍िश्रण लाल रंग का हो जाता है तो समझ जाइए क‍ि घी में म‍िलावट है।

👉🏻8. दूध (Milk)

✨दूध में पानी, म‍िल्‍क पाउडर, कैम‍िकल की म‍िलावट की जाती है।

✨ जांच करने के ल‍िए दूध में उंगली डालकर बाहर न‍िकाल‍ लीज‍िए।

✨अगर उंगली में दूध च‍िपकता है तो समझ जाइए दूध शुद्ध है। अगर दूध न च‍िपके तो मतलब दूध में म‍िलावट है।

👉🏻9. चाय की पत्‍ती (Tea)

✨चाय की जांच करने के ल‍िए सफेद कागज को हल्‍का भ‍िगोकर उस पर चाय के दाने ब‍िखेर दीज‍िए।

✨ अगर कागज में रंग लग जाए तो समझ जाइए चाय नकली है क्‍योंक‍ि असली चाय की पत्‍ती ब‍िना गरम पानी के रंग नहीं छोड़ती।

👉🏻10. कॉफी (Coffee)

✨कॉफी की शुद्धता जांचने के ल‍िए उसे पानी में घोल‍िए।

✨शुद्ध कॉफी पानी में घुल जाती है, लेक‍िन अगर घुलने के बाद कॉफी तली में च‍िपक जाए तो वो नकली है।

जानकारी अच्छी लगी हे तो page को follow जरूर करे।

24/07/2024

जो प्राप्त है, वो ही पर्याप्त हैं ।
इस विचारधारा से सदैव सुखी रहा जा सकता है

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