01/06/2021
6 तरह की भूत बाधाओं को जानिए
आज के वैज्ञानिक युग में भूत-प्रेत और पारलौकिक शक्तियों से जुड़ी घटनाओं पर कोई विश्वास नहीं करता। ऐसी घटनाओं के पीछे कोई वैज्ञानिक आधार नहीं होता, लेकिन लोग इन्हें सच मानते हैं। बहुत से लोगों को भूत बाधा से ग्रसित माना जाता है और इसके लिए वे उन्हें किसी बाबा की मजार या समाधि पर ले जाते हैं, जहां उनकी भूत बाधा को दूर किया जाता है।
भूत के प्रकार : हिन्दू धर्म में गति और कर्म अनुसार मरने वाले लोगों का विभाजन किया है- भूत, प्रेत, पिशाच, कूष्मांडा, ब्रह्म राक्षस, वेताल और क्षेत्रपाल। उक्त सभी के उपभाग भी होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार 18 प्रकार के प्रेत होते हैं। भूत सबसे शुरुआती पद है या कहें कि जब कोई आम व्यक्ति मरता है तो सर्वप्रथम भूत ही बनता है।
इसी तरह जब कोई स्त्री मरती है तो उसे अलग नामों से जाना जाता है। माना गया है कि प्रसूता, स्त्री या नवयुवती मरती है तो चुड़ैल बन जाती है और जब कोई कुंवारी कन्या मरती है तो उसे देवी कहते हैं। जो स्त्री बुरे कर्मों वाली है उसे डायन या डाकिनी कहते हैं। इन सभी की उत्पति अपने पापों, व्यभिचार से, अकाल मृत्यु से या श्राद्ध न होने से होती है।
भूत-प्रेत बाधाओं, जादू-टोनों आदि के प्रभाव से भले-चंगे लोगों का जीवन भी दुखमय हो जाता है। ज्योतिष तथा शाबर ग्रंथों में इन बाधाओं से मुक्ति के अनेकानेक उपाय उपाय बताए गए हैं।
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भूत पीड़ा : बहुत से लोग भूत पीड़ा से ग्रस्त रहते हैं। भूत पीड़ा की प्रारंभिक अवस्था में व्यक्ति या तो अत्यधिक क्रोधी और चिड़चिड़ा रहेगा या फिर अत्यधिक शराब का सेवन करने वाला होगा।
भूत पीड़ा से पूर्ण रूप से ग्रस्त व्यक्ति किसी विक्षिप्त की तरह बात करता हुआ नजर आता है। मूर्ख होने पर भी उसकी बातों से लगता है कि वह कोई ज्ञानी व्यक्ति है। उसमें गजब की शक्ति आ जाती है। क्रुद्ध होने पर वह कई व्यक्तियों को एकसाथ पछाड़ सकता है। उसकी आंखें लाल हो जाती हैं और उसकी देह कांपती रहती है।
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यक्ष पीड़ा : लाल रंग में अत्यधिक रुचि लेने के दो मतलब हो सकते हैं पहला यह कि या तो आप मानसिक रूप से पीड़ित हैं और दूसरा यह कि आप यक्ष नामक आत्मा के प्रभाव से ग्रस्त हैं। यक्ष प्रभावित व्यक