Stress Management Program

Stress Management Program Stress is the reaction people have to excessive pressures or other types of demand placed upon th

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28/05/2021
ये हैं स्ट्रेस मैनेजमेंट की ऐसी प्रभावहीन टेक्निक्स जो बढ़ा देती हैं आपका स्ट्रेस लेवलबहुत बार हम जब स्ट्रेस में होते हैं...
23/05/2021

ये हैं स्ट्रेस मैनेजमेंट की ऐसी प्रभावहीन टेक्निक्स जो बढ़ा देती हैं आपका स्ट्रेस लेवल
बहुत बार हम जब स्ट्रेस में होते हैं तो कुछ ऐसा करने लगते हैं जिससे हमारा स्ट्रेस कम होने के बजाय बहुत बढ़ जाता है. लेकिन, हम फिर भी अपने स्ट्रेस को दूर करने ले लिए वही सब करते रहते हैं. इस आर्टिकल में हम आपके लिए स्ट्रेस मैनेजमेंट की कुछ ऐसी ही प्रभावहीन टेक्निक्स की चर्चा कर रहे हैं.

Stress management techniques that are myths
अगर आप अपने जीवन में तनाव या स्ट्रेस से अक्सर घिरे रहते हैं तो आपको इस सम्बन्ध में ज्यादा फ़िक्र नहीं करनी चाहिए क्योंकि आजकल स्ट्रेस हमारे जीवन का एक हिस्सा ही बन चुका है. इस भाग-दौड़ भरी जिंदगी में भारत सहित पूरी दुनिया में स्ट्रेस आजकल एक महामारी ही बन चुका है. वैसे तो छोटे-छोटे बच्चों सहित हर आयु वर्ग के लोग इन दिनों स्ट्रेस का शिकार बन रहे हैं लेकिन युवा वर्ग विशेष रूप से स्ट्रेस ग्रस्त है. चाहे वह स्कूल, कॉलेज या यूनिवर्सिटी एग्जाम्स में बेहतर प्रदर्शन करना हो या फिर, अपने करियर टारगेट्स को हासिल करना हो अन्यथा, शादी को लेकर कोई दबाव हो; यंग जनरेशन को स्ट्रेस से बचने का कोई रास्ता नहीं दिखता. हालांकि, जीवन जीने का यह मतलब तो कदापि नहीं है कि आप हमेशा स्ट्रेस से ग्रस्त रहें और निराशा तथा चिंता आपके जीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दे. जीवन की सभी हलचलों के बीच में अपना संतुलन कायम रखना ही आज के समय की मांग है. इसलिए आप कभी भी स्टेस को अपने जीवन पर हावी न होने दें लेकिन स्ट्रेस दूर करने के ऐसे तरीकों से बचें जो गलत हैं और ऐसे तरीके अपनाकर आप शायद पहले से भी ज्यादा स्ट्रेस के शिकार बन जायें.
इस आर्टिकल में हम कुछ ऐसी स्ट्रेस मैनेजमेंट टेक्निक्स की चर्चा कर रहे हैं जो आपका स्ट्रेस दूर करने में पूरी तरह से विफ़ल रही हैं. इसलिये, आप अपना स्ट्रेस दूर करने के लिए इन टेक्निक्स का इस्तेमाल करने से जरुर बचें.

Stress can also have a positive effect, spurring motivation and awareness, providing the stimulation to cope with challe...
22/05/2021

Stress can also have a positive effect, spurring motivation and awareness, providing the stimulation to cope with challenging situations.
Stress also provides the sense of urgency and alertness needed for survival when confronting threatening situations.

22/05/2021
22/05/2021

स्ट्रेस क्या है? जानिए इसके कारण, लक्षण और उपचार

हर रोज हम सभी अपनी जिंदगी में तमाम मुश्किलों का सामना करते हैं। कई बार ऐसे हालात आते हैं जिन्हें हम चाहकर भी संभाल नहीं पाते हैं। तो कई बार उनसे निपटते हुए हमें भारी टेंशन का सामना करना पड़ता है।
हम में से कई लोग कुछ किस्म के तनावों को झेलते हुए इतना आदी हो चुके होते हैं कि उन्‍हें महसूस ही नहीं कर पाते। ऐसे तनाव को यूस्ट्रेस (eustress) कहा जाता है। अगर देखा जाए तो ये तनाव आपकी परफॉरमेंस और काम करने की क्षमता पर निगेटिव असर डालता है।
इस आर्टिकल में मैं आपको तनाव/टेंशन क्या है, तनाव के लक्षण, ज्यादा टेंशन लेने से नुकसान, टेंशन से बचने के उपाय और कुछ सरल स्ट्रेस मैनेजमेंट टिप्स (tips for stress management in hindi) के बारे में जानकारी दूंगा।
टेंशन/स्ट्रेस क्या है? (What is stress?) :

स्ट्रेस या तनाव होना सामान्य बात है। ये तब महसूस होता है जब किसी स्थिति से निपटना मुश्किल हो जाता है। टेंशन होने पर एड्रेनालाईन (Adrenaline) हमारे पूरे शरीर में दौड़ने लगता है। दिल की धड़कन बढ़ जाती है और मानसिक और शारीरिक चेतना बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। हमें पसीना आता है, सनसनी महसूस होती है और कई बार पूरे शरीर के रोएं खड़े हो जाते हैं।
कितना खतरनाक है तनाव?

ऐसा नहीं है कि हमारे पूर्वजों की जिंदगी में तनाव नहीं होता था, लेकिन वो 'करो या मरो' की स्थिति को अपनाकर आसानी से इससे पार पा सकते थे। आज हमारे जीवन में तनाव की मात्रा और उनकी आवृत्ति भी कहीं ज्यादा है। लेकिन सबसे मुश्किल की बात यह है कि स्ट्रेस देने वाले हार्मोन जैसे एड्रेलिन और कॉर्टिसोल का उत्सर्जन उस वक्त और ज्यादा खतरनाक हो जाता है जब हमें उनकी जरूरत ना हो।
अगर तनाव (stress in hindi) लंबे वक्त तक रहे तो ये हमारे इम्यून सिस्टम और हृदय को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके अलावा बाहरी बीमारियों से निपटने की हमारी शारीरिक और मानसिक क्षमता भी प्रभावित होती है।
इसका मतलब साफ है कि तनाव उस वक्त और ज्यादा खतरनाक हो जाता है जब आपको हर पांच मिनट में करो या मरो की स्थिति में जाना पड़े। क्या इस स्थिति से निपटने का कोई आसान और स्वस्थ तरीका हो सकता है? ये काम हम कैसे कर सकते हैं? अगर हम ये पता लगा सकें कि जो हम महसूस कर रहे हैं उसका कारण क्या है? तो हम मुश्किलों से और अधिक स्मार्ट तरीके से निपट सकते हैं।
ज्यादा तनाव लेने से होने वाले नुकसान:

हमारा इम्यून सिस्टम और हृदय को नुकसान पहुंच सकता है।
गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
उम्र कम हो जाती है।
सेक्स लाइफ खराब हो सकती है।
तनाव को समझना क्यों जरूरी है? (Why does understanding stress matter?)

तनाव के कारण कई गंभीर मानसिक समस्याएं हो सकती हैं। भारत में हर चार में से एक इंसान हर साल टेंशन की समस्या की चपेट में आ जाता है। यही वो कारण है जिसकी वजह से कई बार हम लोग काम करते हुए भी लंबे वक्त तक काम पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते हैं।
अगर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को लंबे वक्त तक अनदेखा किया जाए जो ये गंभीर समस्या में बदल सकता है। देश में टेंशन और डिप्रेशन का इलाज करवाने वाले मरीजों में से तीन चौथाई महिलाएं हैं। लेकिन जो तीन चौथाई लोग टेंशन और डिप्रेशन के कारण आत्महत्या कर लेते हैं वह पुरुष हैं। चूंकि डिप्रेशन और टेंशन ही सुसाइड के मामलों के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार हैं इसलिए इसके इलाज के महत्व की जरुरत को आसानी से समझा जा सकता है।
इसके अलावा टेंशन होने पर उसके बारे में बात करना किसी कमजोरी की निशानी नहीं है। उसके लिए हिम्मत चाहिए।
क्यों होता है तनाव? (What causes stress?)

आजकल होने वाले तनाव के कुछ सामान्य कारण निम्नलिखित हैं। जैसे -
काम
बेरोजगारी
पैसा
अलगाव और कुछ अन्य कारण जैसे घर छोड़ना
पार्टनर से ब्रेकअप
नौकरी में बदलाव होना
बच्चों का घर छोड़ना
आपका स्वास्थ्य और मूड
मौसम
पार्टनर का निधन होना या करीब न होना
तलाक के कारण परिवार टूट जाना
सेक्स और सेक्स से जुड़ी समस्याएं
नशाखोरी और ड्रिंक करना
बुरी आदतों का शिकार होना
हिंसा या बुरे व्यवहार का शिकार होना
थोड़ी देर के लिए जीवन में उतार-चढ़ाव आना बहुत आम बात है लेकिन अगर ये लंबे वक्त तक बनी रहे जो ये जिंदगी से जुड़ी बाकी चीजों को भी खराब कर सकती है। वैसे भी तनाव इसलिए कभी नहीं होता क्योंकि आप कमजोर हैं बल्कि हमेशा इसलिए होता है कि आप उसकी मौजूदगी होने के बाद भी टेंशन को रहने दे रहे हैं और उसका विरोध नहीं कर रहे हैं।
तनाव होने पर हमेशा चीजों को सकारात्मक तरीके से देखने की कोशिश करनी चाहिए। कुछ मामलों में हो सकता है कि आपको फ्रेश स्टार्ट की भी जरुरत पड़े। लेकिन अगर आप लगातार नौकरियां, पार्टनर या घर बदल रहे हैं तो ऐसे हालात में आपको हालात नहीं बल्कि खुद को बदलने की जरुरत है।
क्या हैं चेतावनी देने वाले लक्षण (​What are the warning signs?)

अगर आपको इतना ज्यादा तनाव होता है कि संभलने का मौका तक नहीं मिलता है, तो ये आपके लिए खतरे की घंटी जैसा हो सकता है। इसलिए ये जानना बहुत महत्वपूर्ण है कि तनाव होने से पहले के कौन से वो लक्षण हैं जिन्हें जानकर आप थोड़ी देर में होने वाले तनाव से पहले ही निपट सकते हैं।
टेंशन से पहले होने वाले सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं।
सामान्य से ज्यादा या कम भोजन करना।
तेजी से मूड बदलना।
आत्मसम्मान में कमी आना।
हर वक्त टेंशन या बेचैनी महसूस करना।
ज्यादा या कम सोना।
कमजोर याददाश्त या भूलने की समस्या।
जरुरत से ज्यादा शराब या ड्रग्स लेना।
जरुरत से ज्यादा थकान या ऊर्जा में कमी होना।
परिवार और दोस्तों से दूर-दूर रहना।
चरित्र से दूर हो जाना।
ध्यान कें​द्रित न करना और काम में संघर्ष करना।
उन चीजों में भी मन न लगना जो पहले आपको पसंद थीं।
विचित्र अनुभव होना, उन चीजों का दिखना जो वहां हैं ही नहीं।
इसके अलावा टेंशन के कुछ शारीरिक लक्षण भी हो सकते हैं जिनमें सिरदर्द, कब्ज या किसी खास अंग या शरीर में दर्द होना शामिल है।
अपने अनुभव के बारे में कैसे बताएं? (How do I talk about how I'm feeling?)

हम सभी जानते हैं कि जब हम किसी से जुड़ाव महसूस करते हैं तो उससे बात करना हमेशा अच्छा होता है। हम लोगों में से कुछ के लिए, सोशल मीडिया इसका सबसे अच्छा माध्यम है। लेकिन रिसर्च हमें बताती है कि सोशल मीडिया ही हम लोगों में से कई की जिंदगी की सबसे बड़ी मुसीबत बनकर उभरा है।
ये कहावत काफी पुरानी है कि 'दर्द बांटने से कम होता है'। लेकिन यकीन मानिए ये बात सच है। ये लोगों को बताने के लिए नहीं है, ना ही ये साबित करने के लिए है कि आप जरुरत में हैं और किस दौर से गुजर रहे हैं। बल्कि ये उनसे समझने के लिए है कि अगर वह उस तकलीफ में होते तो क्या करते?
यकीन मानिए कई बार जब हम टेंशन में होते हैं तो आसान से उपाय भी हमारे दिमाग में नहीं आते हैं। लेकिन दूसरे वही बात सुनकर हमें ऐसे रास्ते सुझा देते हैं जो हमारी हर मुश्किल को आसान बना देते हैं। इसलिए खुलकर संवाद करना भी बहुत जरूरी है। वैसे भी किसी से बात करना कौन सी बड़ी बात है। किसी से बात करना, कपड़े धोने, कार धोने या कंप्यूटर पर गेम खेलने जैसा ही छोटा सा काम है। इसलिए ईमानदारी से बात रखिए और दोस्तों को हर वो बात बता दीजिए जो आपको परेशान कर रही है।
घबराएं नहीं, डॉक्टर से सलाह लें

क्या कभी आपको जुकाम, दस्त या फिर बुखार ​की समस्या हुई है? इन बीमारियों के इलाज के लिए आप जरूर ही डॉक्टर के पास भी गए होंगे। अगर हां, तो फिर टेंशन होने पर डॉक्टर के पास जाने में हिचक क्यों?
अगर आप वाकई टेंशन से उबरने में मुश्किल महसूस कर रहे हों तो बेहतर है कि बिना देर किए डॉक्टर के पास जाएं। मनोचिकित्सक वाकई बहुत धैर्य से मरीज की बात सुनते हैं और वह आपकी समस्या को औरों से बेहतर समझते हैं। उनके सामने बात रखने से वह न सिर्फ आपका सही इलाज कर सकते हैं बल्कि आपकी जिंदगी को नई राह भी दिखा सकते हैं।
टेंशन, डिप्रेशन जैसी समस्याएं भी उतनी ही आम बीमारी है जितनी कि जुकाम या बुखार होना। अगर आप उनके इलाज के लिए डॉक्टर के पास जा सकते हैं तो फिर टेंशन के इलाज के लिए क्यों नहीं? संकोच छोड़ दीजिए और डॉक्टर से इस मामले में बात कीजिए। और टेंशन का सबसे अच्छा डॉक्टर होता है आपका दोस्त ।।।

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Gomti Nagar
Lucknow
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