22/02/2026
किस्मत का पहिया कब घूम जाए, कोई नहीं जानता।
आज जब हम राजपाल यादव के मुश्किल दौर और उनके संघर्ष की बात कर रहे हैं, तो बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन का वो किस्सा याद आता है जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया था। 90 के दशक का वो अंत, जब सदी का 'शहंशाह' अपनी ही कंपनी ABCL की विफलता के कारण अर्श से फर्श पर आ गया था।
90 करोड़ का भारी कर्ज और 55 कानूनी मामले!
उस वक्त अमिताभ बच्चन के खिलाफ 55 से ज्यादा कानूनी मामले चल रहे थे। हालत यहाँ तक पहुँच गई थी कि उनके घर 'प्रतीक्षा' के बाहर लेनदारों की कतार लगी रहती थी। जो इंसान पर्दे पर मुश्किलों से लड़ना सिखाता था, असल ज़िंदगी में उसका परिवार भयंकर मानसिक और आर्थिक तनाव से गुज़र रहा था।
वापसी का वो ऐतिहासिक सफर
अमिताभ बच्चन ने खुद को दिवालिया घोषित होने के कगार पर पाया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अपने पिता हरिवंश राय बच्चन की शिक्षाओं को ढाल बनाकर वे यश चोपड़ा जी के पास गए और काम माँगा। फिल्म 'मोहब्बतें' ने उनके करियर को फिर से जीवन दिया। उन्होंने दिन-रात एक करके कड़ी मेहनत की और धीरे-धीरे अपना एक-एक रुपया चुकाया।
यह कहानी हमें सिखाती है कि वक्त चाहे कितना भी कड़ा इम्तिहान ले, अगर नीयत साफ हो और मेहनत करने का जज्बा हो, तो इंसान राख से भी उठकर फिर से खड़ा हो सकता है।
"इंसान की असली पहचान उसकी सफलता से नहीं, बल्कि मुश्किल वक्त में उसके डटे रहने से होती है। अमिताभ बच्चन के इस 'बाउंस बैक' और राजपाल यादव के मौजूदा संघर्ष पर आपकी क्या राय है? अपनी बात कमेंट्स में ज़रूर साझा करें।" ✍️ हारना तब है, जब आप कोशिश करना छोड़ दें!