11/08/2026
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) को निर्देश दिया है कि किसी भी व्यक्ति के लापता होने पर (चाहे उसकी उम्र या लिंग कुछ भी हो) तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए। कोर्ट ने इस बात पर हैरानी जताई कि कुछ राज्यों को यह गलतफहमी थी कि उसका पिछला निर्देश सिर्फ लापता बच्चों के मामले में लागू होता था। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और आर. महादेवन की बेंच ने इस व्याख्या को जानबूझकर और गलत नीयत से खड़ा किया गया बहाना बताया। बेंच ने कहा कि जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक 22 मई के आदेश का पालन करने में नाकाम पाए जाएंगे, उनके खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई होगी और उन्हें हुई चूक के बारे में सफाई देने के लिए अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा। 'जानकर और गलत नियत से फैलाई ये बात' सोमवार को जारी 5 अगस्त के आदेश में बेंच ने कहा, “हमें यह जानकर हैरानी हुई कि कुछ राज्यों को लगता है कि व्यक्ति शब्द का मतलब सिर्फ बच्चे हैं और इसमें वयस्क शामिल नहीं हैं। हमें लगता है कि ऐसे राज्यों ने जान-बूझकर और गलत नीयत से यह बात फैलाई है।”