04/02/2026
*पैरालिसिस हाथ-पैर की नहीं, बल्कि दिमाग की बीमारी है… एक्सपर्ट्स बताते हैं ठीक होने का सही फ़ॉर्मूला*
पैरालिसिस एक बीमारी है। इसके बारे में अभी भी कई गलतफ़हमियां हैं। कुछ लोग मानते हैं कि यह पैरालाइज़्ड जगह पर खून जमा होने से होता है। इस गलतफ़हमी की वजह से, बहुत से लोग कीड़े के काटने और असर वाली जगह पर गर्म सिकाई जैसे घरेलू नुस्खे अपनाते हैं। ये न सिर्फ़ बेअसर होते हैं बल्कि खतरनाक भी हो सकते हैं।
पैरालिसिस दिमाग और मांसपेशियों के बीच कम्युनिकेशन नेटवर्क के टूटने की वजह से होता है। जब दिमाग से मांसपेशियों को मिलने वाले सिग्नल में रुकावट आती है, तो शरीर का वह हिस्सा ठीक से काम करना बंद कर देता है। इसलिए, पैरालिसिस असर वाले हाथ-पैर की मूवमेंट और ताकत को पूरी तरह या थोड़ा कम कर देता है।
ब्रेन स्ट्रोक के मुख्य कारण हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज़, कोलेस्ट्रॉल, स्ट्रेस और स्मोकिंग की आदतें हैं। तो आइए जानते हैं कि पैरालिसिस को कैसे पहचानें और इसके लिए क्या इलाज दिए जा सकते हैं।
पैरालिसिस असल में क्या है?
स्ट्रोक एक रहस्यमयी बीमारी है। यह स्ट्रोक का नतीजा है। जैसे हार्ट अटैक से दिल पर असर पड़ता है, वैसे ही स्ट्रोक से दिमाग का एक हिस्सा डैमेज हो जाता है।
*स्ट्रोक मुख्य रूप से तीन तरह के होते हैं-*
*इस्केमिक स्ट्रोक-* इसमें खून की नस ब्लॉक हो जाती है
*हेमरेजिक स्ट्रोक*- इसमें खून की नस फट जाती है और दिमाग में खून बहने लगता है
*TIA (मिनी स्ट्रोक)-* भविष्य के खतरे की चेतावनी
*स्ट्रोक के कारण*
इस्केमिक और हेमरेजिक स्ट्रोक के सबसे आम कारण हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल हैं। बहुत से लोग रेगुलर अपनी दवाएं नहीं लेते या अपनी अनियमित लाइफस्टाइल पर ध्यान नहीं देते। गलत खान-पान, देर रात तक जागना, शराब पीना, स्मोकिंग और स्ट्रेस। लंबे समय तक ऐसा करने से धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचता है और आखिर में स्ट्रोक हो सकता है।
*‘BE FAST’ पैरालिसिस का पता लगाने का तरीका*
B- बैलेंस (बैलेंस लॉस)
E- आंखें (धुंधला दिखना)
F- चेहरा (चेहरा एक तरफ झुक जाना)
A- आर्म्स (हाथों और पैरों में कमजोरी)
S- स्पीच (बोलना धीमा होना)
T- टाइम (जितनी जल्दी हो सके डॉक्टर के पास ले जाएं)
*क्या पैरालिसिस ठीक हो सकता है?*
सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि पैरालिसिस लाइलाज है। अगर सही समय पर सही इलाज शुरू किया जाए तो पैरालिसिस ठीक हो सकता है। स्ट्रोक के बाद पहले छह महीने शरीर के लिए बहुत ज़रूरी होते हैं। इस दौरान, दिमाग में न्यूरोप्लास्टिसिटी नाम का एक प्रोसेस एक्टिव रहता है। इस दौरान, दिमाग खुद को ठीक करने की कोशिश करता है। पहले तीन महीनों में रिकवरी सबसे तेज़ होती है, जबकि अगले तीन महीनों को गोल्डन पीरियड कहा जाता है। अगर इस दौरान सही इलाज दिया जाए, तो मरीज़ के पूरी तरह ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है।
*पुराने लकवे में भी उम्मीद है*
ऐसा नहीं है कि एक साल या कई सालों से मौजूद लकवे के लिए कुछ नहीं किया जा सकता। लंबे समय से लकवाग्रस्त मरीज़ों में भी, मॉडर्न टेक्नोलॉजी, ब्रेन-बेस्ड थेरेपी, सही एक्सरसाइज़, बैलेंस्ड डाइट और ज़रूरी सप्लीमेंट्स के ज़रिए ब्रेन को फिर से एक्टिवेट किया जा सकता है। ट्रीटमेंट सिर्फ़ अंगों पर ही नहीं, बल्कि ब्रेन पर भी फोकस करना ज़रूरी है। क्योंकि लकवा दिमाग की बीमारी है, मसल्स की नहीं।
*लकवे के मरीज़ों को अक्सर हल्का या उबला हुआ खाना दिया जाता है।* हालांकि, इस समय शरीर को सही न्यूट्रिशन की भी ज़रूरत होती है। मसल्स कमज़ोर हो जाती हैं और ब्रेन-बॉडी का कनेक्शन टूट जाता है, इसलिए एक कस्टमाइज़्ड डाइट और एक्सरसाइज़ प्लान ज़रूरी है। हर मरीज़ की ज़रूरतें अलग-अलग होती हैं। कुछ में विटामिन B12 की कमी हो सकती है, जबकि दूसरों में विटामिन D या कैल्शियम की कमी हो सकती है, और इन ज़रूरतों के हिसाब से ट्रीटमेंट किया जाना चाहिए।
*जागरूकता सबसे अच्छा ऑप्शन है*
*पैरालिसिस के बारे में आधी-अधूरी जानकारी सबसे ज़्यादा नुकसान करती है।* गलत तरीकों और झूठे इलाज से दूर रहना और समय पर एक्सपर्ट की मदद लेना बहुत ज़रूरी है। सही जानकारी, सही इलाज और सब्र की मदद से मरीज़ पैरालिसिस से ठीक होकर फिर से नॉर्मल ज़िंदगी जी सकता है।
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प्रवीण नेचुरोपैथी आयुर्वेदिक रिसर्च ट्रेनिंग एंड ट्रीटमेंट सेंटर.. बोरीवली
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