02/04/2025
आयुर्वेदिक ऐसी ही एक प्राचीन चिकित्सा पद्धति है।इसका शब्दिक अर्थ है जीवन का विज्ञान और यह मनुष्य के समग्रतावादी ज्ञान पर आधारित है।दुसरे, शब्दों में, यह पद्धति अपने आपको केवल मानवीय शरीर के उपचार तक ही सीमित रखने की बजाय, शरीर मन, आत्मा व मनुष्य के परिवेश पर भी निगाह रखती है।इस पद्धति की एक और उल्लेखनीय विशिष्टिता है।यह औषधीय गुण रखने वाली वनस्पतियों व जड़ी – बूटियों के जरिए बीमारियों का इलाज करती है।
आयुर्वेद में, निदान व उपचार से पहले मनुष्य के व्यक्तित्व की श्रेणी पर ध्यान दिया जाता है।माना जाता है की तमाम व्यक्ति व, प, क, वप, पक, वपक या संतुलित की श्रेणी में आते हैं।यहाँ व का अर्थ है वात, प का पित्त्त, क का कफ और इन्हें किसी व्यक्ति की बुनियादी विशिष्टिता या दोष माना जाता है।ज्यादातर मनुष्यों में कोई एक मुख्य दोष व अन्य गौण दोष होते हैं।इन्हीं से विभिन्न प्रकार के मिश्रित व्यक्तित्व बनते हैं।
आयुर्वेद में, निदान व उपचार से पहले मनुष्य के व्यक्तित्व की श्रेणी पर ध्यान दिया जाता है।माना जाता है की तमाम व्यक्ति व, प, क, वप, पक, वपक या संतुलित की श्रेणी में आते हैं।यहाँ व का अर्थ है वात, प का पित्त्त, क का कफ और इन्हें किसी व्यक्ति की बुनियादी विशिष्टिता या दोष माना जाता है।ज्यादातर मनुष्यों में कोई एक मुख्य दोष व अन्य गौण दोष होते हैं।इन्हीं से विभिन्न प्रकार के मिश्रित व्यक्तित्व बनते हैं।
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Hitesh Pawar.
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