14/03/2021
आओ समझते हैं ब्रह्मांड कैसे बना
ब्रह्मांड निर्माण की थ्योरी
प्रारंभिक ब्रह्मांड
Theory of the hole energy
Shashank sullere के अनुसार
ब्रह्मांड का प्रारंभिक काल जब कुछ भी नहीं था संसार शून्य था। तब कालांतर में अधिक समय तक एकांतता के कारण एक एनर्जी जनरेट होती है।
एनर्जी जनरेट होने का प्रमाण – जिस प्रकार अत्यधिक समय तक ध्यान करने पर मनुष्य की बॉडी में एक अकल्पनीय एनर्जी जनरेट हो जाती है ठीक उसी प्रकार शून्यता में कोई एनर्जी जनरेट हुई होगी।
क्या यह मानना सही होगा।– जी हां क्योंकि इस दुनिया में पहले शून्यता थी और हमारा और प्रकृति का निर्माण बाद में हुआ है इस आधार पर हम यह कह सकते हैं कि एकांतता के कारण एनर्जी जनरेट हुई होगी।-
और मैं इस एनर्जी को नाम देता हूं। The hole energy । यह नाम इसलिए क्योंकि जब एनर्जी जनरेट हुई होगी तब उस एनर्जी ने शून्यता में गमन भी किया होगा । गमन करने के पश्चात एनर्जी ने अपना रास्ता भी बनाया होगा रास्ता बनाने के कारण शून्यता में हुए होल । या जो होल हुए हैं। या जो काल्पनिक छेद हुए हैं। उन का आकार डिपेंड नहीं करता कि छोटा है या बड़ा है लेकिन ऐसा हुआ होगा ।
एनर्जी का एक प्राकृतिक गुण होता है जिसे हम आकर्षण कहते हैं या आकर्षित करना।
एनर्जी में आकर्षण का गुण क्यों होता है क्योंकि जो आकर्षित करता है या अपनी तरफ खींचता है उसे हम इनर्जी कहते हैं। इस प्रकार यह सिद्ध हो चुका है। कि एनर्जी और आकर्षण का पति पत्नी की तरह जोड़ है। जिससे दुनिया का निर्माण हुआ।
क्योंकि एनर्जी नहीं होगी तो आकर्षण भी नहीं होगा आकर्षण तभी होगा जब एनर्जी होगी 100% सिद्ध है।
ब्रह्मांड निर्माण अवधारणा - शून्यता एकांतता तथा एकाग्रता में एनर्जी का जनरेट होना और जब एनर्जी जनरेट होगी तब वह एनर्जी गमन भी करेगी मतलब स्थानांतरण करेगी एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाएगी। एरिया का कम या ज्यादा होना मान्यता नहीं रखती। लेकिन उस एनर्जी ने कुछ क्षेत्र तो गिरा ही होगा यह बात सिद्ध है। और नहीं है तो मुझे गलत सिद्ध करके दिखाओ।
वह एनर्जी जहां से गुजरी होगी वहां पर आकर्षण हुआ होगा । सरल शब्दों में कहें तो एक रास्ते का निर्माण हुआ होगा। जिसे मैंने हॉल नाम दिया है। जिसे हम काल्पनिक भेदना या छेद करना या रिक्त स्थान बनाना कह सकते हैं। उस हॉल के अंदर बाहर जो आकर्षण हुआ होगा ।उससे कुछ कठोर कणों का निर्माण हुआ होगा या हम इनको सूक्ष्म तत्व भी बोल सकते हैं। जिसमें कुछ छोटे कुछ बड़े कण हुए। होंगे तब जो बड़े कण है। उसमें ज्यादा एनर्जी रही होगी या ज्यादा एनर्जी अवशोषित होगी। जिस कारण से बड़े कणों में एनर्जी अधिक होने के कारण बड़े कण छोटे कणों को अपनी तरफ आकर्षित कर अपने में समाहित कर लेंगे जिससे उस बड़े कण की एनर्जी और आकार बढ़ेगा जिससे बहुत सारे छोटे कण उस बड़े कण से जाकर मिलने लगेंगे और अधिक बड़े कणों का निर्माण होना प्रारंभ हुआ होगा ।
जो एक बार हुआ है। वह निश्चित ही दूसरी बार हुआ होगा। क्योंकि यह संसार का सिद्धांत है। और यह होने की संभावना भी है।
तो फिर हो सकता है कि यह एनर्जी पुनः उस एनर्जी के आस-पास या उससे दूर किसी और स्थान पर जनरेट हुई होगी। और हो सकता है कि यह प्रक्रिया करोड़ों बार हुई हो करोड़ों जगह हुई हो।
यदि उसी स्थान पर हुई होगी तो उसी प्रकार के तत्व तो बने ही होंगे और जो कण पहले से बन चुके थे उन कणों के आसपास से उस एनर्जी के गुजरने के कारण उन कणों की एनर्जी और नव कणों का निर्माण और यह नव कणों की एलर्जी के कारण दोनों में प्रतिकर्षण होने के कारण कहीं ना कहीं घर्षण की उत्पत्ति हुई होगी। घर्षण की उत्पत्ति होने के कारण कणों में रगड़न होना प्रारंभ हो गया होगा जिससे कणों में चुंबकत्व उत्पन्न होने लगे होंगे जिससे गुरुत्व का उत्पन्न होना या गुरुत्वाकर्षण का आविष्कार हुआ होगा। इस समय कण बहुत पावरफुल हो गया था क्योंकि कण के पास अब काफी कुछ था जैसे आकार घर्षण गुरुत्वाकर्षण प्लस एनर्जी थी। इस कण को वैज्ञानिकों ने अणु कहां है।
अणु के बाद की साइंस विज्ञानिक काफी कुछ समझा चुके है।
। Theory of The hole energy के कारण ही ब्रह्मांड में अणुओं का निर्माण हुआ है। और यह करोड़ों अरबों अणुओं से या अनगिनत अणुओं के मिलने से एक विशाल पिंड का निर्माण हुआ होगा। अब उस विशाल पिंड के पास आकार आकर्षण चुंबकत्व प्लस घर्षण गुरुत्वाकर्षण प्लस एनर्जी आदि तत्व थे।
ऐसी परिस्थिति में पिंड का केंद्र अपने तरफ अत्यधिक आकर्षण उत्पन्न करता जिससे सभी घर्षण, एनर्जी चुंबकत्व, अपनी क्रिया तीव्र गति से करना शुरू कर देती हैं और पिंड सिकुड़ना शुरू हो जाता है। तथा पिंड में एनर्जी और ताप अपने चरम पर पहुंच जाता है जिससे बहुत भयानक विस्फोट होता है।
इस भयानक विस्फोट को वैज्ञानिकों ने बिगबैंग नाम दिया । जिसके आगे की प्रक्रिया विज्ञानिक समझा चुके हैं।
और जो मेरी कल्पना है वह बिग बैंग सिद्धांत से पहले की कल्पना है।
मेरे मतानुसार दुनिया का प्रारंभिक निर्माण एनर्जी और आकर्षण के आधार पर हुआ है ।
स्टूडेंट- श्री कृष्णा यूनिवर्सिटी छतरपुर मध्य प्रदेश इंडिया शशांक सुल्लेरे 2021