18/01/2026
शहर से निकलते वक्त लगा था बस सफर है,
पर यहां आकर महसूस हुआ — ये तो इलाज है।
टूटी हुई सांसें यहाँ आकर जुड़ने लगीं,
भरी हुई ज़िंदगी यहाँ आकर हल्की लगने लगी।
न कोई जल्दी, न कोई दबाव,
बस रास्ते, हवा और खामोश पहाड़।
⛰️✨