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08/12/2021
⚜चित्रशाला भित्ति-चित्रों का स्वर्ग (बूंदी चित्रशैली) 🔰➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖👉इस शैली का सर्वाधिक विकास या स्वर्णकाल राव सुर्ज...
26/08/2020

⚜चित्रशाला भित्ति-चित्रों का स्वर्ग (बूंदी चित्रशैली) 🔰
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👉इस शैली का सर्वाधिक विकास या स्वर्णकाल राव सुर्जनसिंह का काल हैं। मेवाड़ व मुगलशैली के मिश्रण से इस शैली उद्भव हुआ। महारावल उम्मेदसिंह के काल में बनी हुई बूंदी में चित्रशाला सर्वाधिक प्रसिद्ध हैं।

👉यह चित्रशाला ’’भित्ति-चित्रों का स्वर्ग’’ कहलाती है।

👉 इस शैली के चित्रकार सुर्जन, रामलाल व अहमद अली थे। यह राजस्थान की एकमात्र ऐसी चित्रशैली है, जिसमें मोर के साथ सर्प का चित्रण हैं।

👉बूँदी चित्रशैली में पशु-पक्षियों का सर्वाधिक चित्रण किया गया है इसलिए इसे पक्षी शैली भी कहते हैं। इस शैली में हरे रंग का सर्वाधिक प्रयोग हुआ हैं तथा खजूर का प्रमुख वृक्ष हैं। प्रमुख पशु शेर व हिरण तथा प्रमुख पक्षी बतख हैं।

👉बूँदी शैली के चित्रों में कविता व कला दोनों पद्धतियों का मिश्रण हैं। इस शैली का प्रमुख चित्र पशु-पक्षी, रागमाला (इस शैली का सबसे प्रमुख चित्र), फल-फूल, घुड़दौड़, बसंत रागीनी, रागीनी भैरव, ऋतु वर्णन, मतिराम के रसराज पर आधारित चित्रण, तीज-त्योंहार व अन्य उत्सव, हाथियों की लडाई आदि है।

⚜चित्रशाला भित्ति-चित्रों का स्वर्ग (बूंदी चित्रशैली) 🔰➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖👉इस शैली का सर्वाधिक विकास या स्वर्णकाल राव सुर्ज...
26/08/2020

⚜चित्रशाला भित्ति-चित्रों का स्वर्ग (बूंदी चित्रशैली) 🔰
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👉इस शैली का सर्वाधिक विकास या स्वर्णकाल राव सुर्जनसिंह का काल हैं। मेवाड़ व मुगलशैली के मिश्रण से इस शैली उद्भव हुआ। महारावल उम्मेदसिंह के काल में बनी हुई बूंदी में चित्रशाला सर्वाधिक प्रसिद्ध हैं।

👉यह चित्रशाला ’’भित्ति-चित्रों का स्वर्ग’’ कहलाती है।

👉 इस शैली के चित्रकार सुर्जन, रामलाल व अहमद अली थे। यह राजस्थान की एकमात्र ऐसी चित्रशैली है, जिसमें मोर के साथ सर्प का चित्रण हैं।

👉बूँदी चित्रशैली में पशु-पक्षियों का सर्वाधिक चित्रण किया गया है इसलिए इसे पक्षी शैली भी कहते हैं। इस शैली में हरे रंग का सर्वाधिक प्रयोग हुआ हैं तथा खजूर का प्रमुख वृक्ष हैं। प्रमुख पशु शेर व हिरण तथा प्रमुख पक्षी बतख हैं।

👉बूँदी शैली के चित्रों में कविता व कला दोनों पद्धतियों का मिश्रण हैं। इस शैली का प्रमुख चित्र पशु-पक्षी, रागमाला (इस शैली का सबसे प्रमुख चित्र), फल-फूल, घुड़दौड़, बसंत रागीनी, रागीनी भैरव, ऋतु वर्णन, मतिराम के रसराज पर आधारित चित्रण, तीज-त्योंहार व अन्य उत्सव, हाथियों की लडाई आदि है।

👉बूँदी शैली राजस्थानी चित्रकला की विचारधारा का प्रमुख केद्र थी तथा वर्षा में नाचता हुआ मोर इस शैली में राजस्थान की एक विशेषता है। इस शैली के चित्रों में रेखाओं का महत्त्व रंगों से ज्यादा है।

तोला पाए के सपना रात म,बिहनिहा सुरता बहुत सतावत हे।एक एक दिन एक साल बरोबर,गिन गिन दिन ह पहावत हे।
24/07/2020

तोला पाए के सपना रात म,बिहनिहा सुरता बहुत सतावत हे।

एक एक दिन एक साल बरोबर,गिन गिन दिन ह पहावत हे।

16/07/2020

तोर मया के बोली खातिर सुधबुध में ह गवां गेंव।
बिना पानी के मछरी बरोबर तड़प के में ह अधिया गेंव।।

M.......
03/01/2018

M.......

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