Awaneesh Soni Astrologer

Awaneesh Soni Astrologer वैदिक ज्योतिष, वास्तु, लाल किताब, अंक ज?

07/11/2024
*कुछ महत्वपूर्ण ज्योतिषी जानकारी**1-जब गोचर में शनि ग्रह धनु, मकर, मीन व कन्या राशियों में गुजरता है तो भयंकर अकाल रक्त ...
04/11/2024

*कुछ महत्वपूर्ण ज्योतिषी जानकारी*

*1-जब गोचर में शनि ग्रह धनु, मकर, मीन व कन्या राशियों में गुजरता है तो भयंकर अकाल रक्त सम्बन्धी विचित्र रोग होते हैं।*

*2-"स्त्री की कुंडली में यदि चन्द्र वृष कन्या या सिहं राशी में स्थित हो तो स्त्री के कम पुत्र होते हैं "।*

*3-"जन्म लग्न में चन्द्र व शुक्र हो तो स्त्री क्रोधिनी परन्तु सुखी होती है "।*

*4-"किसी देश का राष्ट्राध्यक्ष सोमवार ,बुध या गुरूवार को शपथ ले तो उसे प्रजा एवं राष्ट्राध्यक्ष के लिए शुभ माना जाता है"।*

*5-"सप्तमेश शुभ युक्त न होकर षष्ठ ,अष्टम,या द्वादश भाव में हो और नीच या अस्त हो तो जातक के विवाह में बाधा आती है"।*

*6-"चन्द्र से सम्बंधित चार विभिन्न योग बनते हैं जब कोई ग्रह चन्द्र से 10वें 7वें, 4थे, ओर पहले हो तो क्रमश:उत्तम,मध्यम, अधम ओर अधमाधम योग बनता है। यदि इनमें अंतिम योग बनता हो तो कुंडली के अन्य योग कमजोर और निष्फल हो जाते हैं"।*

*7-जन्म कुंडली में मंगल को भूमि का मुख्य कारक माना गया है. जन्म कुंडली में चतुर्थ भाव या चतुर्थेश से मंगल का संबंध बनने पर व्यक्ति अपना घर अवश्य बनाता है. जन्म कुंडली में जब एकादश का संबंध चतुर्थ भाव से बनता है तब व्यक्ति एक से अधिक मकान बनाता है लेकिन यह संबंध शुभ व बली होना चाहिए।*

*8-जन्म कुंडली में लग्नेश, चतुर्थेश व मंगल का संबंध बनने पर भी व्यक्ति भूमि प्राप्त करता है अथवा अपना मकान बनाता है. जन्म कुंडली में चतुर्थ व द्वादश भाव का बली संबंध बनने पर व्यक्ति घर से दूर भूमि प्राप्त करता है या विदेश में घर बनाता है।*

*9-जन्म कुंडली का चतुर्थ भाव प्रॉपर्टी के लिए मुख्य रुप से देखा जाता है. चतुर्थ भाव से व्यक्ति की स्वयं की बनाई हुई सम्पत्ति को देखा जाता है. यदि जन्म कुंडली के चतुर्थ भाव पर शुभ ग्रह का प्रभाव अधिक है तब व्यक्ति स्वयं की भूमि बनाता है।*

*10-कोई भी ग्रह पहले नवाँशा में होने से जातक को एक प्रगतिशील और साहसिक नेता बनाता है ऐसे ग्रह की दशा /अन्तर्दशा के समय में जातक सक्रिय होता है।। और अपने सम्वन्धित क्षेत्र में सफलता पाता है।*

*11-सूर्य चन्द्र मंगल और लगन से गर्भाधान का विचार किया जाता है वीर्य की अधिकता से पुरुष तथा रक्त की अधिकता से कन्या होती है। रक्त और रज का बरावर होने से नपुंसक का जन्म होता है"।*

*12-जन्म से चार वर्ष के भीतर बालक की मृत्यु का कारण माता के कुकर्मों, चार से आठ वर्ष के बीच मृत्यु पिता के पाप कर्मों और आठ से बारह वर्ष की आयु के मध्य मृत्यु स्वयं के पूर्वजन्म के पापों के कारण मानी गई है.*

*13-शनि वायु का कारक और लिंग में नपुंसक है. वायु का प्रभाव वैचारिक भटकाव की आशंका उत्पन्न करता है.शनि तैलार्पण शनि से उत्सर्जित हो रही वैराग्यात्मक ऊर्जा का (तेल) द्वारा शमन है. पुरुषों को अनुमति है की वे अपना कुछ बृहस्पति अंश (धन एवं ज्ञान) इस प्रक्रिया हेतु व्यय कर सकते हैं.लेकिन सनातन व्यवस्था स्त्रियों को इसकी अनुमति कदापि नहीं देती. स्त्रियों की प्रकृति पृथ्वी के समान ग्राहीय है और उन पर जन्म देने की जिम्मेदारी है. उनके लिए वैराग्य की अपेक्षा भक्ति पर जोर दिया गया है।*

*14-राशिचक्र के २७ नक्षत्रों के नौ भाग करके तीन-तीन नक्षत्रों का एक-एक भाग माना गया है। इनमें प्रथम 'जन्म नक्षत्र', दसवाँ 'कर्म नक्षत्र' तथा उन्नीसवाँ 'आधान नक्षत्र' माना गया है। शेष को क्रम से संपत्, विपत्, क्षेम्य, प्रत्वर, साधक, नैधन, मैत्र और परम मैत्र माना गया है।*

*15-किसी भी प्रकार का रिसाव राहु के अंतर्गत आता है.रिसाव किसी भी चीज का हो सकता है द्रव , शक्ति , धन , मान सम्मान या ओज का.।*

*16-बुध के निर्बल होने पर कुंडली में अच्छा शुक्र भी अपना प्रभाव खो देता है क्योंकि शुक्र को लक्ष्मी माना जाता है और विष्णु की निष्क्रियता से लक्ष्मी भी अपना फल देने में असमर्थ हो जाती हैं.*

*17-शनि वचनबद्धता , कार्यबद्धता और समयबद्धता का कारक ग्रह है. जिस भी व्यक्ति के जीवन में इन तीनो चीजों का अभाव होगा तो समझना चाहिए की उसकी पत्रिका में शनि की स्थिति अच्छी नहीं है।*

*18-नीलम को शनि रत्न माना जाता रहा है. लेकिन इस रत्न की तुरंत प्रतिक्रिया की प्रवृत्ति मन में संदेह उत्पन्न करती है की क्या यह वास्तव में शनि रत्न है. क्योंकि तुरंत प्रतिक्रिया शनि का स्वभाव नहीं है. शनि एक मंदगामी ग्रह है. इसीलिये इसे शनैश्चर भी कहा गया है. जबकि तुरंत और अचानक प्रतिक्रिया राहु का स्वाभाव है. राहु नीलवर्णी माना गया है. सभी प्रकार के विषों का अधिपत्य राहु कोप्राप्त है.। इधर ज्योतिष की अपेक्षाकृत ‘लाल किताब’ भी नीलम को राहु की कारक वस्तु मानती है.। यह बात नीलम के स्वभाव से मेल खाती है. फिर नीलम रत्न का अधिपति कौन है. शनि या राहु.*

*19-ज्योतिष में व्यवस्था है की पीड़ित ग्रहों की वस्तुएं दान की जाएं. यह ग्रहपीड़ा शांति के लिए किया जाने वाला महत्वपूर्ण उपाय है. इस उपाय में ग्रह की कारक वस्तु को मंदिर , डाकोत , अपाहिजों और गरीबों में दान किया जाता है. इससे अनिष्टकारक ग्रह के प्रकोप में कमी आ जाती है. इस उपाय में कुंडली विवेचना उपरांत ही तय किया जाता है की अमुक वस्तु कितनी बार दान करनी है. कई बार यह उपाय केवल एक बार करना होता है तो कभी कई बार दोहराना होता है।*

*20-"लड़कों जैसे छोटे बाल रखने वाली स्त्रियां दुखी रहती हैं.वे भले ही उच्च पदस्थ अथवा धनी हों उनके जीवन में सुख नहीं होता. खासतौर पर पति सुख या विपरीत लिंगी सुख. ऐसी स्त्रियों को पुरुषों के प्यार और सहानुभूति की तलाश में भटकते देखा जा सकता है. यदि वे विवाहित हैं तो पति से नहीं बनती और अलगाव की स्थिति बन जाती है और अधिकांश मामलों में पति से संबंध विच्छेद हो भी जाता है."।*

*21-व्यक्ति तीन प्रकार से मांगलिक दोष से ग्रस्त होता है – पहला लग्न से, दूसरा जन्मस्थ चंद्र से और तीसरा जन्मस्थ शुक्र से. इनमे शुक्र वाली अवस्था सबसे उग्र और चंद्र वाली सबसे हल्की मानी जाती है. यदि व्यक्ति तीनों ही स्थितियों में मांगलिक हो तो वह प्रबल मांगलिक माना जाएगा।*

*22-शुक्र तथा शनि आमने-सामने हो दोनों में से कोई एक अथवा दोनों लग्न के या सप्तम के स्वामी हो या चंद्रेश हो तो व्यक्ति समलैंगिक होता है । अगर ये दोनों लग्न और सप्तम में आमने-सामने तो अवश्य ही ऐसा होता है ।*

*23-ज्योतिष में सभी 27 नक्षत्रों को त्रिगुण स्वभावानुसार वर्गीकृत किया गया है. यह गुण हैं सतोगुण, रजोगुण और तमोगुण. सूर्य, चंद्रमा और बृहस्पति को सतोगुणी, बुध एवं शुक्र को रजोगुणी और मंगल, शनि, राहु, केतू को तमोगुणी माना गया है. एकादशी, चतुर्दशी, अमावस्या, पूर्णिमा, सूर्य- संक्रान्ति, शनिवार, मंगलवार, गुरुवार, व्रत तथा श्राद्ध के दिन बाल एवं नाखून नहीं काटने चाहिए, ना ही दाढ़ी बनवानी चाहिए।*

--------------------------------------------------------------ग्रहों की शांती पेड़ पौधों की जड़ों से भी -- सस्ता और सुन्दर...
04/11/2024

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ग्रहों की शांती पेड़ पौधों की जड़ों से भी -- सस्ता और सुन्दर

सूर्य
यदि आपकी कुंडली में सूर्य नीच का होकर तुला राशि में है और केंद्र में या लग्नस्थ है तो कृत्त्वा नक्षत्र वाले दिन बेल का एक जड़ प्रात:काल तोडक़र,शिवालय में शिवजी को समर्पित करें और ऊँ भास्कराय ह्रीं मंत्र का जाप करने के पश्चात गुलाबी धागे से धारण करें. प्रतिदिन इस मंत्र का जाप करते रहें. रोग,संतानहीनता जैसी अन्य कई समस्याओं का समाधान होगा.

चंद्र
यदि आप की कुंडली में चंद्र नीच का होकर वृश्चिक राशि में है,या राहु,केतु और शनि द्वारा प्रभावित है तो, रोहिणी नक्षत्र वाले दिन खिरनी की जड़, शुद्ध करके शिवजी को समर्पित करें और ऊँ श्रां श्रीं श्रौं स:चंद्रमसे नम:
मंत्र का जाप कर के सफेद धागे में धारण करें. फेफड़े सम्बंधित रोग,एकाकीपन और भावनात्मक समस्याओं का समाधान होगा.

मंगल
आपकी कुंडली में मंगल नीच का होकर कर्क राशि में हो या आप मांगलिक हों तो मृगशिरा नक्षत्र वाले दिन अनंतमूल की जड़ शुद्धिकरण के पश्चात हनुमान जी की पूजा कर के ऊँ अं अंगारकाय नम: मंत्र का जाप कर के नारंगी धागे से धारण करें. क्रोध,अवसाद और वैवाहिक बाधा से मुक्ति मिलेगी

बुध
यदि आपकी कुंडली में बुध द्वादश,अष्टम भाव में या नीच का होकर मीन राशि में है, तो आप आश्लेषा नक्षत्र वाले दिन विधारा की जड़ गणेश भगवान को को समर्पित करने के पश्चात ऊँ बुं बुधाय नम: मंत्र का जाप कर के हरे रंग के धागे में धारण करें. इस से बुद्धि विकसित होगी तथ निर्णय लेने में हो रही त्रुटि का भी समाधान होगा.

गुरु
आपकी कुंडली में यदि गुरु राहु द्वारा युक्त है,राहु द्वारा दृष्ट है या नीच का होकर मकर राशि में है,तो शुद्ध और ताजी हल्दी की गाँठ पीले धागे में, पुनवर्सु नक्षत्र वाले दिन कृष्ण भगवान या बृहस्पति देव जी की पूजा कर के ऊँ बृं बृहस्पतये नम: मंत्र का जप करके धारण करें. व्यवसाय,नौकरी,विवाह सम्बन्धी समस्या और लीवर सम्बन्धी रोगों में लाभ होगा.

शुक्र
यदि आपकी कुंडली में शुक्र अष्टम भाव में है या नीच का होकर कन्या राशि में है, तो आप सरपोंखा की जड़, भरणी नक्षत्र वाले दिन सफेद धागे से सायंकाल के समय लक्ष्मी जी का पूजन कर ऊँ शुं शुक्राय नमः मंत्र का जाप कर के धारण करें. संतानहीनता,कर्ज की अधिकता और धन के अभाव जैसी समस्या से मुक्ति मिलेगी.

शनि
आपकी कुंडली में यदि शनि सूर्य युक्त है,सप्तम भाव में है या नीच का होकर मेष राशि में है तो आप अनुराधा नक्षत्र वाले दिन बिच्छू या बिच्छौल की घांस को नीले धागे से काली जी की पूजा के पश्चात ऊँ शं शनैश्चराय नम:
मंत्र का जाप कर के धारण करें. कार्यों में हो रहे विलम्ब,कानूनी अड़चन और रोगों से मुक्ति मिलेगी.

राहु
आपकी कुंडली में राहु लग्न,सप्तम या भाग्य स्थान मे है, तथा शुभ ग्रहों से युक्त है तो आप आद्र्रा नक्षत्र वाले दिन चन्दन की लकड़ी का टुकड़ा शिव जी का अभिषेक कर के भूरे धागे में ऊँ रां राहवे नम: मंत्र का जाप कर के धारण करें. रोग,चिड़चिड़ापन,क्रोध,बुरी आदतों तथा अस्थिरता से मुक्ति मिलेगी.

केतु
यदि आपकी कुंडली में केतु,चन्द्र या मंगल युक्त होकर लग्नस्थ है, तो आप अश्विनी नक्षत्र वाले दिन गणेश जी का पूजन करने के पश्चात शुद्ध की हुई असगन्ध या अश्वगन्धा की जड़ ऊँ कें केतवे नम: मंत्र का जाप करने के पश्चात, नारंगी धागे से धारण करें. चर्म सम्बन्धी रोग,किडनी रोगों और वैवाहिक समस्याओं में लाभ होगा.
याद रखें कि समस्या की पूर्ण मुक्ति के लिये, आपको मंत्रों का जाप प्रतिदिन करना होगा.

धनतेरस यम दीपदान विशेष〰️〰️🌼〰️🌼〰️🌼〰️〰️कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन भगवान धनवन्तरि अमृत कलश के साथ सागर मंथन...
29/10/2024

धनतेरस यम दीपदान विशेष
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कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन भगवान धनवन्तरि अमृत कलश के साथ सागर मंथन से उत्पन्न हुए हैं। इसलिए इस तिथि को धनतेरस के नाम से जाना जाता है।

धन्वन्तरी जब प्रकट हुए थे तो उनके हाथो में अमृत से भरा कलश था। भगवान धन्वन्तरि कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए ही इस अवसर पर बर्तन खरीदने की परम्परा है। कहीं कहीं लोकमान्यता के अनुसार यह भी कहा जाता है कि इस दिन धन (वस्तु) खरीदने से उसमें 13 गुणा वृद्धि होती है। इस अवसर पर धनिया के बीज खरीद कर भी लोग घर में रखते हैं। दीपावली के बाद इन बीजों को लोग अपने बाग-बगीचों में या खेतों में बोते हैं।

दीपावली की रात भी लक्ष्मी माता के सामने साबुत धनिया रखकर पूजा करें। अगले दिन प्रातः साबुत धनिया को गमले में या बाग में बिखेर दें। माना जाता है कि साबुत धनिया से हरा भरा स्वस्थ पौधा निकल आता है तो आर्थिक स्थिति उत्तम होती है।

धनिया का पौधा हरा भरा लेकिन पतला है तो सामान्य आय का संकेत होता है। पीला और बीमार पौधा निकलता है या पौधा नहीं निकलता है तो आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

धनतेरस के दिन चांदी खरीदने की भी प्रथा है। अगर सम्भव न हो तो कोइ बर्तन खरिदे। इसके पीछे यह कारण माना जाता है कि यह चन्द्रमा का प्रतीक है जो शीतलता प्रदान करता है और मन में संतोष रूपी धन का वास होता है। संतोष को सबसे बड़ा धन कहा गया है। जिसके पास संतोष है वह स्वस्थ है सुखी है और वही सबसे धनवान है। भगवान धन्वन्तरि जो चिकित्सा के देवता भी हैं उनसे स्वास्थ्य और सेहत की कामना के लिए संतोष रूपी धन से बड़ा कोई धन नहीं है। लोग इस दिन ही दीपावली की रात लक्ष्मी गणेश की पूजा हेतु मूर्ति भी खरीदते हें।

दाहं तेरस पौराणिक कथा
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कार्तिकस्यासिते पक्षे त्रयोदश्यां निशामुखे।
यमदीपं बहिर्दद्यादपमृत्युर्विनिश्यति ।।

धनतेरस की शाम घर के बाहर मुख्य द्वार पर और आंगन में रंगोली बना कर दीप जलाने की प्रथा भी है। इस प्रथा के पीछे एक लोक कथा है, कथा के अनुसार किसी समय में एक राजा थे जिनका नाम हेम था। दैव कृपा से उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। ज्योंतिषियों ने जब बालक की कुण्डली बनाई तो पता चला कि बालक का विवाह जिस दिन होगा उसके ठीक चार दिन के बाद वह मृत्यु को प्राप्त होगा। राजा इस बात को जानकर बहुत दुखी हुआ और राजकुमार को ऐसी जगह पर भेज दिया जहां किसी स्त्री की परछाई भी न पड़े। दैवयोग से एक दिन एक राजकुमारी उधर से गुजरी और दोनों एक दूसरे को देखकर मोहित हो गये और उन्होंने गन्धर्व विवाह कर लिया।

विवाह के पश्चात विधि का विधान सामने आया और विवाह के चार दिन बाद यमदूत उस राजकुमार के प्राण लेने आ पहुंचे। जब यमदूत राजकुमार प्राण ले जा रहे थे उस वक्त नवविवाहिता उसकी पत्नी का विलाप सुनकर उनका हृदय भी द्रवित हो उठा परंतु विधि के अनुसार उन्हें अपना कार्य करना पड़ा। यमराज को जब यमदूत यह कह रहे थे उसी वक्त उनमें से एक ने यमदेवता से विनती की हे यमराज क्या कोई ऐसा उपाय नहीं है जिससे मनुष्य अकाल मृत्यु से मुक्त हो जाए। दूत के इस प्रकार अनुरोध करने से यमदेवता बोले हे दूत अकाल मृत्यु तो कर्म की गति है इससे मुक्ति का एक आसान तरीका मैं तुम्हें बताता हूं सो सुनो। कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी रात जो प्राणी मेरे नाम से पूजन करके दीप माला दक्षिण दिशा की ओर भेट करता है उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है। यही कारण है कि लोग इस दिन घर से बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीप जलाकर रखते हैं।

धन तेरस पूजा सामान्य विधि
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इस दिन लक्ष्मी-गणेश और धनवंतरी पूजन का भी विशेष महत्व है। धनतरेस पर धनवंतरी और लक्ष्मी गणेश की पूजा करने के लिए सबसे पहले एक लकड़ी का पट्टा लें और उस पर स्वास्तिक का निशान बना लें।इसके बाद इस पर एक तेल का दिया जला कर रख दें दिये को किसी चीज से ढक दें दिये के आस पास तीन बार गंगा जल छिड़कें इसके बाद दीपक पर रोली का तिलक लगाएं और साथ चावल का भी तिलक लगाएं इसके बाद दीपक में थोड़ी सी मिठाई डालकर मीठे का भोग लगाएं फिर दीपक में 1 रुपया रखें। रुपए चढ़ाकर देवी लक्ष्मी और गणेश जी को अर्पण करें इसके बाद दीपक को प्रणाम करें और आशीर्वाद लें और परिवार के लोगों से भी आशीर्वाद लेने को कहें। इसके बाद यह दिया अपने घर के मुख्य द्वार पर रख दें, ध्यान रखे कि दिया दक्षिण दिशा की ओर रखा हो।

यमदीपदान विधि
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यमदीपदान विधि में नित्य पूजा की थाली में घिसा हुआ चंदन, पुष्प, हलदी, कुमकुम, अक्षत अर्थात अखंड चावल इत्यादि पूजा सामग्री होनी चाहिए। साथ ही आचमन के लिए ताम्रपात्र, पंच-पात्र, आचमनी ये वस्तुएं भी आवश्यक होती हैं। यमदीपदान करने के लिए हलदी मिलाकर गुंथे हुए गेहूं के आटे से बने विशेष दीप का उपयोग करते हैं ।

यमदीपदान प्रदोष काल में करना चाहिए। इसके लिए मिट्टी का एक बड़ा दीपक लें और उसे स्वच्छ जल से धो लें। तदुपरान्त स्वच्छ रुई लेकर दो लम्बी बत्तियाँ बना लें। उन्हें दीपक में एक-दूसरे पर आड़ी इस प्रकार रखें कि दीपक के बाहर बत्तियोँ के चार मुँह दिखाई दें। अब उसे तिल के तेल से भर दें और साथ ही उसमें कुछ काले तिल भी डाल दें।

प्रदोषकाल में इस प्रकार तैयार किए गए दीपक का रोली, अक्षत एवं पुष्प से पुजन करें। उसके पश्चात् घर के मुख्य दरवाजे के बाहर थोड़ी-सी खील अथवा गेहूँ से ढेरी बनाकर उसके ऊपर दीपक को रखना है। दीपक को रखने से पहले प्रज्वलित कर लें और दक्षिण दिशा की ओर देखते हुए निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुए चारमुँह के दीपक को खील (लाजा) आदि की ढेरी के ऊपर रख दें।

मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन च मया सह।
त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतामिति ।।

अर्थात् त्रयोदशी को दीपदान करने से मृत्यु, पाश, दण्ड, काल और लक्ष्मी के साथ सूर्यनन्दन यम प्रसन्न हों।

उक्त मन्त्र के उच्चारण के पश्चात् हाथ में पुष्प लेकर निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुए यमदेव को दक्षिण दिशा में नमस्कार करें।

धनतेरस पूजा मुहूर्त
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धनत्रयोदशी या धनतेरस के दौरान लक्ष्मी पूजा को प्रदोष काल के दौरान किया जाना चाहिए जो कि सूर्यास्त के बाद प्रारम्भ होता है और लगभग 2 घण्टे 24 मिनट तक रहता है। प्रदोषकाल में दीपदान व लक्ष्मी पूजन करना शुभ रहता है।

प्रदोषकाल पूजन मुहूर्त
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धनतेरस पूजा मुहूर्त
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धन त्रयोदशी या धनतेरस के दौरान लक्ष्मी पूजा को प्रदोष काल के दौरान किया जाना चाहिए जो कि सूर्यास्त के बाद प्रारम्भ होता है और लगभग 2 घण्टे 24 मिनट तक रहता है। प्रदोषकाल में दीपदान व लक्ष्मी पूजन करना शुभ रहता है।

प्रदोषकाल पूजन मुहूर्त
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कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ: 29 अक्टूबर मंगलवार की प्रातः 10 बजकर 30 मिनट से तथा कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि का समापन: 30 अक्टूबर दिन 01 बजकर 15 मिनट पर होगा। ऐसे मे धनतेरस की पूजा 29 अक्टूबर की शाम करना ही श्रेष्ठ रहेगा क्योंकि धनतेरस पर लक्ष्मी पूजन तथा यम के लिए दीपदान त्रयोदशी तिथि मे प्रदोष काल के समय किया जाता है जबकि खरीददारी आदि करने के लिए उदया तिथि की मान्यता है।

ऋषिकेश के आसपास के शहरों में धन तेरस पूजा मुहूर्त 29 अक्टूबर की शाम 06 बजकर 23 मिनट से रात 08 बजकर 07 मिनट तक रहेगा।

वृषभ काल: 29 अक्टूबर शाम 06 बजकर 24 मिनट से रात 08 बजकर 27 मिनट तक पंचांग के अनुसार, स्थिर लग्न पूजा के लिए आदर्श समय है। इस मुहूर्त समय में पूजा होने के से घर-परिवार में स्थायी लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।

धनतेरस पर खरीददारी के लिये शुभ मुहूर्त 29 अक्टूबर 2024
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सुबह 9:14 से दोपहर 01:23 तक चर, लाभ एवं अमृत चौघड़िया।

दोपहर 02:46 से 04:09 बजे तक शुभ चौघड़िया।

शाम 07:07 से रात 08:46 बजे तक लाभ चौघड़िया।

ध्यान रखें राहुकाल में खरीदारी न करें। राहुकाल 29 अक्टूबर की दोपहर 02:49 बजे से शाम 04:07 बजे तक रहेगा।

यम दीपदान का समय
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सायं 05:31 से 06:47 तक।

राशियों के अनुसार जाने धनतेरस पर क्या खरीदना शुभ होगा
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मेष🐐
इस राशि का स्वामी मंगल है। धनतरेस के शुभ मुहूर्त पर मेष राशि के जातकों के लिए ताबें की वस्तुएं खरीदना शुभ माना जाता है। इस दिन आप चाहें तो भूमि में भी निवेश कर सकते हैं। अगर आप इस दिन तांबे की कोई वस्तु नहीं खरीदना चाहते तो आप चांदी या इलेक्ट्रॉनिक का भी कोई समान खरीद सकते हैं। वहीं इस राशि के लोगों को शेयर, केमिकल, चमड़े, लोहे से संबंधित काम में निवेश करने से बचना चाहिए।

वृष🐂
वृषभ राशि का स्वामी शुक्र है। इन राशि के लोग धनतेरस के दिन चांदी का कोई सामान खरीद सकते हैं। इसके अलावा धनतेरस के दिन चावल अवश्य खरीदने चाहिए। इस खास मौके पर अनाज, कपड़ा, चांदी, चीनी, चावल, ब्यूटी प्रोडक्ट्स, परफ्यूम, दूध और उससे बने पदार्थ, प्लास्टिक, खाद्य तेल, कपड़े, और रत्नों में निवेश करने या खरीदने से लाभ होगा। इससे मां लक्ष्मी हमेशा कृपा बरसाती रहेंगी।

मिथुन👫
मिथुन राशि के जातकों का स्वामी बुध है। बुध व्यापारियों को लाभ देने वाला ग्रह है। मिथुन राशि के जातक धनतेरस पर स्टील के बर्तन खरीद सकते हैं। धनतेरस के दिन आपका वाहन खरीदना या सोने में निवेश करना भी शुभ माना जाता है। इस दिन आप सफेद वस्त्र का दान करें, जिससे आपकी वित्तीय स्थिति बेहतर हो जाएगी। इसके अलावा धनतेरस के दिन कागज, लकड़ी, पीतल, गेहूं, दालें, कपड़ा, स्टील, प्लास्टिक, तेल, सौदर्य सामग्री, सीमेंट, खनिज पदार्थ आदि का व्यापार करने वाले और खरीदने वाले को लाभ मिलेगा।

कर्क🦀
कर्क राशि का स्वामी चंद्र है। धनतेरस के दिन आपका कंपनियों के शेयर और फाइनेंस कंपनियों में निवेश करना लाभदायी होगा। कर्क राशि के लोग धनतेरस के दिन चांदी की वस्तुएं खरीद सकते हैं। इसके अलावा चाहें तो आप स्टील के बर्तन भी खरीद सकते हैं। इस दिन इलेक्ट्रॉनिक का आइटम खरीदना आपके लिए शुभ होगा, यदि आप ऐसा करते हैं तो आपके घर में मां लक्ष्मी का वास हमेशा बना रहेगा।

सिंह🦁
सिंह राशि का स्वामी सूर्य है। इन राशि के जातकों को नौकरी पसंद नहीं होती है ये केवल व्यापार करने में विश्वास रखते हैं। धनतेरस के दिन आप शेयर या जमीन-जायदाद में निवेश कर सकते हैं। इस दिन सिंह राशि के जातक तांबे या कांसे की वस्तुओं को खरीद सकते हैं। आप चाहें तो इस खास मौके पर सोने मे निवेश कर सकते हैं या इलेक्ट्रॉनिक का कोई आइटम खरीद सकते हैं। इस दिन आप नए कपड़े भी खरीद सकते हैं ऐसा करने से मां लक्ष्मी का आशीर्वाद आप पर हमेशा बना रहेगा।

कन्या👩
कन्या राशि का स्वामी बुध है, जिसे चंद्रमा का शत्रु माना जाता है। इन राशि के लोगों के लिए धनतेरस के दिन तांबे के गणेश जी खरीदना शुभ माना जाता है। वहीं इस खास मौके पर आप रसोई के लिए कोई आइटम भी खरीद सकते हैं। इस खास मौके पर अगर आप चाहें तो कांसे या हाथी के दांत से बनी चीजें भी खरीद सकते हैं।

तुला⚖️
तुला राशि का स्वामी शुक्र है। इस ऱाशि वालों को इलेक्ट्रॉनिक सामान और तेल में निवेश करना शुभ माना जाता है। तुला राशि के जातक धनतेरस के दिन चांदी या स्टील से बनी कोई भी चीजें खरीद सकते हैं। इसके अलावा आप कोई ब्यूटी प्रोडक्ट्स या घर को सजाने वाली किसी वस्तु को खरीद सकते हैं। ऐसा करने से आपको ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

वृश्चिक🦂
इस राशि के जातकों का स्वामी मंगल है। इस राशि वाले लोगों को धनतेरस के दिन जमीन, मकान, दुकान और वस्त्रों में निवेश करना चाहिए। इस खास मौके पर सोने की वस्तु को खरीदना काफी शुभ माना जाता है। यदि आप चाहें तो इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं भी खरीद सकते हैं। यदि आप इन वस्तुओं को खरीदते हैं तो आपको धनलाभ के कई योग बनेंगे।

धनु🏹
इस राशि के लोगों का स्वामी गुरु है। गुरु व्यापारियों को लाभ प्रदान कराने वाला ग्रह है। धनतेरस के दिन सोने का आइटम और अनाज खरीदना शुभ माना जाता है। इसके अलावा आप इस दिन आभूषण, रत्न, अनाज, चांदी और ब्यूटी प्रोडक्टस भी खरीद सकते हैं। यदि आप इस दिन कोई पीली वस्तु खरीद लें तो आपके ऊपर लक्ष्मी के साथ-साथ बृहस्पति देव का भी आशीर्वाद बना रहेगा।

मकर🐊
मकर राशि का स्वामी शनि है। धनतेरस के दिन इलेक्ट्रॉनिक सामान, वाहन, इत्र, स्टील और ब्यूटी प्रोडक्ट्स में निवेश से लाभ प्राप्त होता है। मकर राशि के लोग धनतेरस के दिन वाहन खरीद सकते हैं क्योंकि उनके लिए यह दिन काफी शुभ है। इसके अलावा आप मां लक्ष्मी के पूजन के लिए वस्त्र और चांदी का सिक्का भी खरीद सकते हैं। इस पावन अवसर पर यह सब चीजें खरीदने से आपके घर में समृद्धि का वास होगा।

कुंभ🍯
इस राशि के जातकों का स्वामी शनि है। धनतेरस के दिन लोहे, इलेक्ट्रॉनिक सामान, वाहन, इत्र, स्टील आदि वस्तुएं खऱीद सकते हैं। इस दिन आप चाहें तो नीलम रत्न भी खरीद सकते हैं। यह काफी शुभ माना जाता है। यदि आप चाहें तो इस दिन भगवान गणेश और धन की देवी लक्ष्मी के चित्र वाला सोने का सिक्का भी खरीद सकते हैं। ऐसा करने से आपकी आर्थिक स्थिति बेहतर रहेगी।

मीन🐳
मीन राशि वालों का स्वामी गुरु है। चंद्रमा का घनिष्ठ मित्र माना जाता है। धनतेरस के दिन सोना, चांदी, रत्न, आभूषण आदि सामग्रियों को खरीदना शुभ माना जाता है। इसके अलावा आप इस दिन चांदी के बर्तन भी खरीद सकते हैं। अगर आप चाहें तो कोई इलेक्ट्रॉनिक आइटम भी खरीद सकते हैं। ये सब खरीदते हैं तो आप पर मां लक्ष्मी की कृपा हमेशा बनी रहती है।

कुछ अन्य उपाय टोटके
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धन तेरस पर धन प्राप्ति के अनेक उपाय बताए जाते हैं लेकिन सभी उपायों से बढ़कर है धन और आरोग्य के देवता धन्वं‍तरि का पावन स्तोत्र।

धन्वं‍तरि स्तो‍त्र
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ॐ शंखं चक्रं जलौकां दधदमृतघटं चारुदोर्भिश्चतुर्मिः।
सूक्ष्मस्वच्छातिहृद्यांशुक परिविलसन्मौलिमंभोजनेत्रम॥
कालाम्भोदोज्ज्वलांगं कटितटविलसच्चारूपीतांबराढ्यम।
वन्दे धन्वंतरिं तं निखिलगदवनप्रौढदावाग्निलीलम॥

ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वंतराये:
अमृतकलश हस्ताय सर्व भयविनाशाय सर्व रोगनिवारणाय
त्रिलोकपथाय त्रिलोकनाथाय श्री महाविष्णुस्वरूप
श्री धन्वं‍तरि स्वरूप श्री श्री श्री औषधचक्र नारायणाय नमः॥

इस स्तो‍त्र को कम से कम 11 बार पढ़ें।

👉 पूर्ण भाव से भगवान धन्वंतरि जी का पूजन करें।

👉 घर में नयी झाडू और सूपड़ा खरीद कर लाये और विधि से पूजन करें।

👉 सायंकाल दीपक प्रज्वलित कर अपने मकान , दुकान आदि को सुन्दर सजाये।

👉 माँ लक्ष्मी को गुलाब के पुष्पों की माला पहनाये और उन्हें सफेद मिठाई का भोग लगाये।

👉 अपनी सामर्थ्य अनुसार तांबे, पीतल, चांदी के गृह-उपयोगी नवीन बर्तन व आभूषण क्रय करते हैं।

👉 हल जुती मिट्टी को दूध में भिगोकर उसमें सेमर की शाखा डालकर तीन बार अपने शरीर पर फेरें।

👉 धनतेरस के दिन सूखे धनिया के बीज खरीद कर घर में रखने से परिवार की धन संपदा में वृ्द्धि होती है।

👉 कुबेर देवता का पूजन करें। शुभ मुहूर्त में अपने व्यावसायिक प्रतिष्ठान में नई गड़ी बिछाएं।

👉 सायंकाल पश्चात 13 दीपक जलाकर तिजोरी में भगवान कुबेर धन के देवता का पूजन करें।

👉 मृत्यु के देवता यमराज के निमित्त दीपदान करें।

👉 तेरस के सायंकाल किसी पात्र में तिल के तेल से युक्त दीपक प्रज्वलित करें। पश्चात गंध, पुष्प, अक्षत से पूजन कर दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके यम से निम्न प्रार्थना करें-

‘मृत्युना दंडपाशाभ्याम्‌ कालेन श्यामया सह।
त्रयोदश्यां दीपदानात्‌ सूर्यजः प्रयतां मम।
अब उन दीपकों से यम की प्रसन्नता के लिए सार्वजनिक स्थलों को प्रकाशित करें।
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https://youtu.be/edif1ryRHy4?si=VGQm33oniXTxsKI1
27/10/2024

https://youtu.be/edif1ryRHy4?si=VGQm33oniXTxsKI1

दीपावली का महा समाधान 2024 | 31 October ya 1 November Diwali | ज्योतिषाचार्य डॉ. अवनीश सोनी ----------------------------------------------------------------...

16/10/2024

दीपावली 1 नवम्बर को ही है ।
इसका शास्त्रीय प्रमाण का
वीडियो भी कल शाम को
आप लोगो को शेयर कर दिया जाएगा 🙏

https://youtu.be/JPEtuv6xO0M?si=6IADHkObMxUIGXEO
03/10/2024

https://youtu.be/JPEtuv6xO0M?si=6IADHkObMxUIGXEO

नवरात्रि मैं करें अपनी मनोकामनाएं पूरी | Navratri Upay Power & Money । Jyotishacharya Awaneesh Soni----------------------------------------------------------...

"ग्रह व उनसे संबंधित बिमारी व उपाय"〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰1 - सूर्य -  पित प्रकृति  स्वास्थ्य का कारक, हृदय, हड्डिया, दायी आंख ।सिर ...
21/09/2024

"ग्रह व उनसे संबंधित बिमारी व उपाय"
〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰
1 - सूर्य - पित प्रकृति
स्वास्थ्य का कारक, हृदय, हड्डिया, दायी आंख ।

सिर में दर्द, गंजापन, हृदय रोग, हड्डियों के रोग, मिर्गी, नेत्र रोग, कुष्ट रोग, पेट की बिमारियां, बुखार, दर्द, जलना, रक्त संचार में गढ़बड़ी, शस्त्र व गिरने से चोट लगना etc.

2- चंद्रमा - कफ व कुछ वात प्रकृति ।
शरीर से बाहर निकलने वाले तरल, मानसिक स्तर, बायीं आंख ।

मानसिक रोग, क्षय रोग, रक्त संबंधी रोग, कफ तथा खांसी से बुखार, फेफड़ों में पानी भरना, पानी से होने वाली बिमारियां, जल व जलीय वस्तुओं से भय आदि।

स्त्रियों की माहवारी में गड़बड़ी तथा स्त्रियों की प्रजनन प्रणाली के रोग चंद्रमा के कारण होते है । स्त्रियों के स्तन रोग तथा दूध के बहाव का पता भी चंद्रमा से लगाया जाता है।

"चंद्रमा-मंगल" - स्त्रियों में मासिक धर्म व उसको नियंत्रित करता है।

3- मंगल - पित्त प्रकृति
शरीर में पूर्ति का कारक, सिर, अस्थि, मज्जा, हीमोग्लोबिन, मांसपेशिया, अंर्त गभाँशय ।

दुर्घटना, चोट लगना, शल्य चिकित्सा, जल जाना, खून के रोग, उच्च रक्तचाप, पित्त की थैली में stone, तेज बुखार, चेचक , बवासीर, गभ्रपात, सिर में चोट, लड़ाई में चोट , शस्त्र से चोट व गर्दन से ऊपर के रोग भी मंगल इंगित करता हैं ।

4 - बुध - वात, पित्त और कफ, त्वचा, गला, नाक, फेफड़े, दिमाग का अगला हिस्सा।

त्वचा संबंधी रोग, मानसिक विचलन, धैर्यहीनता, अभद्र भाषा प्रयोग, बहरापन, कान का बहना, हकलाना, तुतलाना, गूंगापन, नाक-कान-गले के रोग, श्वेत कुष्ट, नापुसंकता, अचानक गिरना, दु:स्वपन आदि।

4- बृहस्पति - कफ व
रोग का निवारक करने वाला ग्रह, अमाशय, पित्त की थैली, तिल्ली, अग्नाश्य का कुछ भाग, कान का अंदरूनी भाग, शरीर में चर्बी व आलस्य का कारक। लंबी बीमारी, पित्त की थैली के रोग, मोटापा, शुगर, तिल्ली के रोग, कान के रोग, पीलिया आदि।

5- शुक्र - वात व कुछ कफ प्रकृति ।
चेहरा, आंखे, नेत्र ज्योति, यौन क्रियाएं, भोग विलास, वीर्य, मूत्र प्रणाली, किडनी, गुर्दे ।

यह एक जलीय ग्रह है और इसका संबंध शरीर के हार्मोन से है ।

शुक्र यौन विकार, जननांग के रोग तथा मूत्र प्रणाली, चेहरे के रोग, नेत्र रोग, श्वेत कुष्ट रोग, मोतियाबिंद, ऐड्स, नापुसकंता, थायरड, प्रमेह।

7- शनि - वात तथा कुछ कफ प्रकृति ।
यह बहुत धीरे चलने वाला ग्रह है और इस कारण इससे होने होने वाले रोग असाध्य या दीघृ कालिक होते है ।
शनि का अधिकार क्षेत्र टांगे, पैर, नाड़ी, बड़ी आंत का अंतिम भाग, लसिका वाहिनी तथा गुदा है, यह लंबे अवधि वाले रोग कैंसर, गठिया बाय, बवासीर, थकान, पैर के रोग व चोट, पत्थर से चोट लगना आदि

8- राहु - शनि जैसे रोग ( असाध्य रोग )

हिचकी, फोबिया, कुष्ट रोग, तव्चा रोग, छाले, उन्माद, सर्प भय, जख्म का ठीक ना होना etc.

* राहु-चंद्र - फोबिया, भय ।

9- केतु - इसकी दशा में बिमारी का पता लगाना मुश्किल है ।

डेंगू, मलेरिया, पेट में कीडे़, स्वाइन फ्लू, वायरल आदि।

केतु का द्वितीय भाव व बुध से संबंध हो तो जन्मजात रोग, तुतलाना, शल्य चिकित्सा ।

उपाय - 1. प्रतिदिन एक माला महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें ।

2. तांबे के पात्र में प्रतिदिन सूर्य को जल दे ।

3. आदित्यहृदय स्रौत का पाठ करें ।

4. बृहस्पति का बीज मंत्र - ऊं ग्रां ग्रीं ग्रौं सं गुरुवे नमः।। इस मंत्र का जाप करे तथा किसी भी रोग की बिमारी की दवाई को बृहस्पतिवार से लेना शुरू करें क्योंकि बृहस्पतिदेव रोग निवारक ग्रह है ।

5 - लग्न व लग्नेश को मजबूत करें व लग्नेश का रत्न धारण करें ।
( क्योंकि लग्न-लग्नेश हमारी शारीरिक क्षमता को दिखाता है )
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ज्योतिष अनुसार जानिए किस दिन, किस काम की शुरुआत रहती है शुभरविवार को करना चाहिए ये कामऔषधि यानी दवाइयों का सेवन का शुरू ...
23/08/2024

ज्योतिष अनुसार जानिए किस दिन, किस काम की शुरुआत रहती है शुभ
रविवार को करना चाहिए ये काम
औषधि यानी दवाइयों का सेवन का शुरू कर सकते हैं, सवारी, वाहन, नौकरी, पशु खरीदी, यज्ञ, पूजन, अस्त्र-शस्त्र-वस्त्र की खरीदी, धातु की खरीदी, वाद-विवाद के लिए सलाह लेना शुभ है।
सोमवार को कर सकते हैं ये काम
कृषि संबंधी यंत्र खरीदी, बीज बोना, बगीचे में फल के वृक्ष लगाना, वस्त्र तथा रत्न धारण करना, क्रय-विक्रय करना, भ्रमण- यात्रा, कला कार्य, स्त्री-प्रसंग, नए काम की शुरुआत, आभूषण धारण करना, पशुपालन के लिए सोमवार होता है शुभ।
मंगलवार को करना चाहिए ये काम
जासूसी कार्य, भेद लेना, ऋण देना, गवाही देना, अग्नि संबंधी कार्य, सेना-युद्ध और नीति से संबंधी काम, वाद-विवाद का निर्णय करना, साहसिक कार्य आदि के लिए मंगलवार के लिए शुभ है। मंगलवार को ऋण लेना शुभ नहीं है।
बुधवार को कर सकते हैं ये काम
ऋण देना, शिक्षा-दीक्षा संबंधित काम, विद्या की शुरुआत, बहीखाता बनाना, हिसाब करना, शिल्प कार्य, निर्माण कार्य, नोटिस देना, गृहप्रवेश करना, राजनीति से संबंधित काम के लिए बुधवार शुभ है।
गुरुवार को करना चाहिए ये काम
ज्ञान-विज्ञान की शिक्षा लेना, धर्म न्याय संबंधित काम, यज्ञ-अनुष्ठान करना, कला संबंधित शिक्षा का आरंभ करना, गृह शांति पूजन करना, मांगलिक कार्य, नया पद ग्रहण करना, आभूषण धारण करना, यात्रा, नए वाहन का चालन, औषधि सेवन की शुरुआत करना व निर्माण कार्य की शुरुआत के लिए गुरुवार शुभ है।
शुक्रवार को कर सकते हैं ये काम
पारिवारिक काम की शुरुआत करना, गुप्त बातों पर विचार करना, प्रेम व्यवहार, मित्रता, वस्त्र धारण करना, मणि रत्न धारण करना, निर्माण कार्य की शुरुआत, इत्र, नाटक, फिल्म, संगीत संबंधित काम की शुरुआत के लिए शुक्रवार शुभ है। साथ ही, अनाज भंडार भरना, खेती करना, धान्य रोपण, शिक्षा प्राप्ति के लिए भी ये दिन शुभ है।
शनिवार को करना चाहिए ये काम
नए घर में प्रवेश करना, नौकर रखना, धातु मशीनरी से संबंधित काम, गवाही देना, नया व्यापार प्रारंभ करना, वाद-विवाद का निपटारा, वाहन खरीदना आदि कार्य शनिवार को किए जा सकते हैं। बीज बोना, कृषि संबंधित काम शनिवार से प्रारंभ नहीं करना चाहिए।

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