Md saqib miftahi

Md saqib miftahi techer

15/12/2022

14/12/2022
01/11/2022

بڑھتی ہوئی مہنگائی و گھٹتی ہوئی اکنومی
اس سلسلہ میں ماقابل میں ایک تحریر قلم بند کر چکا ہوں
اسی کے متعلق یہ تحریر ہے
مہنگائی سے ہر بشر پریشان ہے بلکہ پوری دنیا پریشانی کے عالم میں ہیں کرونا کے بعد سے ہر محکمہ میں اکنومی کی صورت حال بہت خراب ہے نوکری سرکاری ہو یا پرائویٹ بہت کم ہوتی جا رہی ہے اور حکومت کی طرف سے اس طرف کوئی ٹھوس قدم اٹھانا یا تسلی بخش جواب آنا بہت مشکل ہے جو لوگ کرونا سے قبل ایک لاھ یا پچاس ہزار یا اس سے کم کماتے تھے یا انکی نوکری تھی تو اب وہ نصف رہ گئی ہے یہ عام و گریجویٹ لوگوں کی بات ہے
اب آتے ہیں مسجد و مدرسہ میں خدمت انجام دینے والوں کی طرف جن میں علماء و حفاظ خدمت انجام دیتے ہیں جو کرونا سے پہلے ہی معمولی سی تنخواہ پر زندگی بمشکل بسر کر رہے تھے
پھر کرونا کے بعد مدارس والوں نے بچوں کی کمی کے باعث یا دیگر وجوہات کی بناء پر جہاں پہلے 10 لوگ کام کرتے تھے اب وہاں 5 لوگ کرتے ہیں یہ الگ موضوع ہے کہ وہ ایسا کیوں کر رہے ہیں
خیر جو لوگ مدرسہ ومسجد میں ملازمت کرتے ہیں اس میں گھر کا خرچہ چلنا بہت مشکل ہوتا ہے اتنی تنخواہ میں انسان گھر کا خرچہ چلالے وہ ہی بہت بڑی بات ہے بچوں کو صحیح تعلیم سے آراستہ کرانا اور ان کو اچھے پیشے سے آشنا کرانا یہ بھی بہت مشکل ہے
اور نا ہی بچہ مستقبل میں ایک خود دار انسان کے طور پر زندگی بسر کر سکتا ہے
اگر ہمیں اپنے بچوں کو بھی اسی حالت میں رکھنا ہے جس طرح ہماری گزر رہی ہے تو پھر مبارک ہو یہ زندگی
لیکن میرے دوست اس متعلق سوچنا ضرور کہ آپ اپنے بچوں کو کہاں دیکھنا چاھتے ہیں ؟
اپنی جگہ یا دوسری جگہ اگر ڈیلی روٹین سے کچھ الگ کرنا ہے اور اس گھسی پٹی زنگی سے خود کو نکالنا ہے تو تحریر آپ کے لئے ہے ورنہ آپ اپنے قیمتی وقت کا ضیاع کر رہے ہیں تحریر پڑھ کر
سوال ؟؟ پیدا ہوتا ہے کہ آخر کیاراستہ اختیار کیا جائےجس کے باعث ہم وہ سب کر سکیں جو ہم سے علاوہ لوگ کر رہے ہیں دین کی خدمت بھی نہایت ضروری ہے یہ میں ہر گز نہیں کہ سکتا کہ آپ یہ سب چھوڑ کر کوئی دوسرا کام تلاش کرلیں
بس اسی کے ساتھ ساتھ ہمیں بزنس تجارت ودیگر کام کو کرنا ہےجو نا ممکن نہیں ہے پر اتنا ضرور کہونگا کہ دوستوں مشکل ضرور ہے ایسا بلکل بھی نہیں کہ ہم لوگ یہ سب نہیں کر سکتے ضرور کر سکتے ہیں
بس ضرورت ہے محنت و صبر ومنزل یعنی ٹارگیٹ فکس کرنے کی

تحریر بہت لمبی ہوتی جا رہی ہے ان شاء اللہ آپ سب کی دعاء سے بہت جلد تحریر لکھونگا
گر آپ سب کا حکم ہوا تو

دعاوں کا طالب محمد ثاقب مفتاحی

13/01/2022

यकीनी तौर पर मुसलमानों को अब बीजेपी को हराने की सियासत छोड़कर अपनी सियासी ताकत बनाकर एकजुट हो जाना चाहिए इससे मुसलमान मजबूत होंगे चाहे भाजपा जीते या हारे लेकिन अपने आपको सेकूलर कहने वाली पार्टियों को यह सिखा देना चाहिए कि यदि आप मुसलमानों के मसाईल और मुद्दों को अपने राजनीतिक मुद्दों में शामिल नहीं करेंगे तो कभी देश की राजनीति मैं कामयाब नहीं हो पाएंगे बेशक इसके लिए मुसलमानों को कुछ और 5 या 10 साल मुसीबतें झेलनी पड़ेगी लेकिन इसके बाद जब ताकतवर हो जाएंगे तो यह मुसीबतें हमेशा के लिए खत्म होंगी वरना बीजेपी को हराने के चक्कर में सभी सेकुलर पार्टियां आपको इस्तेमाल करते हुए कभी राजनीति में आप को मजबूत होने नहीं देगी यकीनी तौर पर यह उनके एजेंडे में शामिल है कि मुसलमान मजबूत वोटर ना बनकर मजबूर वोटर बना रहे जैसा कि समाजवादी और आरएलडी गठबंधन टिकटों के बंटवारे में खेल खेल रहा है

13/01/2022

बीजेपी को हराने से मुसलमानों को क्या मिलेगा.?
और
सपा को जिताने से मुसलमानों क्या मिलेगा.?

आज 22 मई है । आज के ही दिन 1987 में मेरठ के समीप हाशिमपुरा - मलियाना में मुसलमानों का नरसंहार हुआ था । वो रमज़ान का जुमा ...
22/05/2021

आज 22 मई है । आज के ही दिन 1987 में मेरठ के समीप हाशिमपुरा - मलियाना में मुसलमानों का नरसंहार हुआ था । वो रमज़ान का जुमा अलविदा का दिन था। राजीव गांधी सरकार के दौर में जब बाबरी मस्जिद का ताला खोला गया था । जिसकी वजह से देश मे कई स्थानों पर सापप्रदायिक दंगे भड़क उठे थे उस वक़्त यू पी मे बहादुर सिंह की सरकार थी उ प्र के मेरठ जिला मे भी सांप्रदायिक दंगा भड़क गया था जिसमें भारी जानी और माली नुकसान हुआ था केन्द सरकार, उत्तर प्रदेश शासन व प्रशासन के इशारे पर मलियाना और हाशिम पुरा से PAC ने 42 मुसलमानो को एक ट्रक मे लेजाकार उनकी हत्या कर के नहर में फेंक दिया था । मलियाना हाशिम पुरा नर संहार की कहानी कुछ इस प्रकार है
फरवरी 1986 में केंद्र सरकार ने बाबरी मस्जिद के ताले खोलने का आदेश दिया, तो वेस्ट यूपी में माहौल गरमा गया था। इसके बाद 14 अप्रैल 1987 से मेरठ में धार्मिक उन्माद शुरू हुआ। कई लोगों की हत्या हुई, तो दुकानों और घरों को आग के हवाले कर दिया गया था। हत्या, आगजनी और लूट की वारदातें होने लगीं। इसके बाद भी मेरठ में दंगे की चिंगारी शांत नहीं हुई थी। मई का महीना आते आते कई बार शहर में कर्फ्य जैसे हालात हुए और कर्फ्यू लगाना भी पड़ा।

जब माहौल शांत नहीं हुआ और दंगाई लगातार वारदात करते रहे, तो शहर को सेना के हवाले कर दिया गया था। इसके साथ ही बलवाइयों को काबू करने के लिए 19 और 20 मई को पुलिस, पीएसी तथा सेना के जवानों ने सर्च अभियान चलाया था। हाशिमपुरा के अलावा शाहपीर गेट, गोला कुआं, इम्लियान सहित अन्य मोहल्लों में पहुंचकर सेना ने मकानों की तलाशी लीं। इस दौरान भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक सामग्री मिली थीं। या यूँ कह लीजिये सेना ने फ़र्ज़ी दिखाई थी सर्च अभियान के दौरान हजारों लोगों को पकड़ा गया और गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। इसी दौरान 22 मई की रात हाशिमपुरा हत्या कांड हुआ।

हापुड़ रोड पर गुलमर्ग सिनेमा के सामने मेरठ के हाशिमपुरा मोहल्ले में 22 मई 1987 को पुलिस, पीएसी और मिलिट्री ने सर्च अभियान चलाया था। आरोप है यहां रहने वाले किशोर, युवक और बुजुर्गों सहित कई सौ लोगों को ट्रकों में भरकर पुलिस लाइन ले जाया गया था। एक ट्रक को दिन छिपते ही पीएसी के जवान दिल्ली रोड पर मुरादनगर गंग नहर पर ले गए थे। उस ट्रक में करीब 50 लोग थे। वहां ट्रक से उतारकर लोगों को गोली मारने के बाद एक एक करके गंग नहर में फेंका गया। कुछ लोगों को ट्रक में ही गोलियां बरसाकर ट्रक को गाजियाबाद हिंडन नदी पर ले गए। उन्हें हिंडन नदी में फेंका गया था। इनमें से जुल्फिकार, बाबूदीन, मुजीबुर्रहमान, मोहम्मद उस्मान और नईम गोली लगने के बावजूद सकुशल बच गए थे। बाबूदीन ने ही गाजियाबाद के लिंक रोड थाने पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसके बाद हाशिमपुरा हत्या कांड पूरे देश में चर्चा का विषय बना।
उस समय गाज़ियाबाद के रहे पुलिस कप्तान विभुति नारायण राय अपने एक लेख में लिखते हैं "22 मई, 1987 को रात लगभग साढ़े दस बजे मुझे हाशिमपुरा नरसंहार की घटना की जानकारी हुई । शुरू में तो मुझे इस सुचना पर यक़ीन नही हुआ , पर जब कलक्टर और दूसरे अधिकारियों के साथ मैं घटना स्थल पर पंहुचा , तब जाकर मुझे यह एहसास हुआ की मैं धर्मनिरपेक्ष भारतीये गणराज्य के सबसे शर्मनाक हादसे का साक्षी बनने जा रहा हूँ । मैं उस समय गाज़ियाबाद का पुलिस कप्तान था और पीएसी ने मेरठ के हाशिमपुरा महल्ले से उठाकर कई दर्जन मुसलमानो को मेरे इलाके में लाकर मार दिया था ।
22 -23 मई 1987, की आधी रात दिल्ली - ग़ाज़ियाबाद सीमा पर मकनपुर गाँव से गुजरने वाली नहर की पटरी और किनारे पर उगे सरकंडों के बीच टार्च की रौशनी में खून से लथपथ धरती पर मृतको के बीच किसी जीवित को तलाशना और हर कदम उठाने से पहले यह सुनिश्चित करना की वह किसी जीवित या मृत शरीर पर न पड़े - मेरी स्म्रति पटल पर किसी हॉरर फ़िल्म की तरह अंकित है । मैंने पी ए सी के विरुद्ध एफ आई आर दर्ज़ कराई और करीब 28 वर्षो तक उन सारे प्रयासो का साक्षी रहा हूँ , जो भारतीय राज्य के विभिन्न अंग दोषियों को बचाने के लिए करते रहे हैं ।
हाशिमपुरा संबधी मुक़दमे ग़ाज़ियाबाद के लिंक रोड और मुरादनगर के लिंक रोड थानो में दर्ज़ थे । मगर कुछ घंटो में उसकी ताफ्तिशे राज्य के कांग्रेस के मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह के आदेश से सी आई डी को सौंप दी गयी । सी आई डी ने पहले दिन से ही दोषी पुलिसवालों को बचाने का काम शुरू कर दिया ।
कुल उन्नीस अभियुक्तों में सबसे वरिष्ट ओह्देदार एक सब इस्पेक्टर था । मैं कभी यह नही मान सकता की बिना वरिष्ट अधिकारियो की शह और अभयदान के मजबूत आशवासन के एक जूनियर अधिकारी बयालीस लोगो के कत्ल का फैसला कर सकता हैं ।
मामला सिर्फ पुलिस - प्रशासन और जाँच एजेंसी का ही नही था । हकीकत तो यह है राजनेताओ और मीडिया ने भी अपराधिक चुप्पी अख्तियार की । जिस समय यह हत्या कांड हुआ उस वक़्त लखनऊ और दिल्ली , दोनों जगह कांग्रेस की सरकार थी । मैं नही मानता उत्तर प्रदेश की किसी भी सरकार ने इस केस को गंभीरता से लिया ।"..

काण्ड के बाद 34 साल का समय, हर तारीख पर अगली तारीख मिलने का दर्द। और उसके बाद यह दर्दनाक गलत अदालत का फैसला ...
अब इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट मे जुलाई में सुनवाई होना है । सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केस को यूपी से दिल्ली ट्रांसफर कर दिया गया था । इस केस पर नए नये सिरे से काम करने और मजबूती से पैरवी करने की ज़रूरत है
आज जब अफ्तार करें तो इन शहीद मज़लूमो के लिए भी दुआ करें
मुईद हाशमी
जॉइंट कन्वीनर पश्चिमी उत्तर प्रदेश
एसडीपीआई

 #अंतिम_मार्गसारी दुनिया का कॉरोना भारत में आकर टाडंव कर रहा है जिन लोगों पर विश्वास कर के दैश सोंपा था उन्होंने साथ छोड...
24/04/2021

#अंतिम_मार्ग

सारी दुनिया का कॉरोना भारत में आकर टाडंव कर रहा है जिन लोगों पर विश्वास कर के दैश सोंपा था उन्होंने साथ छोड़ दिया मरने वालों को आधुनिक प्रौद्योगिकी व टैक्नालोजी बचाने में बुरी तरह विफल हो रही है गलियां सुनसान घर बेरोनक और चहरे उदास हैं यह मानवता की वास्तविकता की प्राक्रतिक व्याख्या है अंतिम ईश्वरीय वाणी "कुरआन में कहा गया" وخلق الإنسان ضعيفا " मानव कमज़ोर बनाया गया है यह सारी परिस्थितियाँ वही ईश्वरीय चैतावनियाँ हैं जो मानवता के मार्गदर्शन के लिए आती हैं कुरआन में कहा فكيف عذابي ونذر" कैसी थघ? पिछली मानव जातियों पर आने वाली हमारी यातनाएं और चेतावनियां!
कॉरोना का अनियंत्रित होजाना यही ईश्वरीय सत्ता की तरफ़ से समस्त विश्व और विशेष रूप से भारतीय जनता को चेतावनी है लेकिन मानवता इस हकीकत को समझने में असमर्थ है इसका कारण यह है कि भारतीय समाज की चेतना पर अज्ञानता और लापरवाही के पर्दे पड़े हुए हैं इसीलिए जनता को इस वास्तविकता और अटल सत्य से परिचित कराना उन लोगों का काम था जो ईश्वरीय सत्ता को स्वीकार करते हैं लेकिन अफसोस की बात यह है कि की यह लोग भी इसी मोह माया से लिसडे समाज का अंग हैं इसीलिए अपना कर्तव्य निभाना नहीं चाहते।
इक्कीसवीं सदी में ऐसी बातें करने वालों को पागल समझा जाता है लेकिन इसमें इक्कीसवीं सदी ही की क्या विशेषता है जब कभी महा पुरषों द्वारा मानवता को चताया गया तो क्या उनका परिहास नहीं क्या गया और जब यही वास्तविकता 6सदी में अंतिम महापुरुष मुहम्मद ﷺ ने मानवता को बताई तो उन्हें पागलपन से लेकर जादूगरी के टूच्छ ताने नहीं दिए गए? ऐसा हूआ है और होगा और आप में से भी कई लोग मेरी इस छोटी सी लेखनी पर मुझे पागल ही कहेंगे लेकिन यह अटल सत्य है कि इंसान कमजोर है और करोना या दुसरी बिमारीयां ईश्वरीय चैतावनियाँ हैं जब यह आती हैं तो फिर समस्त मानवजाति को इश्वर से क्षमा याचना करने की अवेशकता होती है
ोगो_अल्लाह_से_सच्ची_तोबा_करो

ملعون وسیم رضوی غلاظت سے لبریزفتنہ آور ذھنیت کا مالک جھوٹی شان کا طلب گار یہود و نصاری کا فالتو کتا سنگھیوں سے اپنا رشتہ...
12/03/2021

ملعون وسیم رضوی غلاظت سے لبریزفتنہ آور ذھنیت کا مالک جھوٹی شان کا طلب گار
یہود و نصاری کا فالتو کتا سنگھیوں سے اپنا رشتہ ہموار کرنے کے لئے اپنی نجس العین جیسی صورت سے ایسی مغلظات بکتا رہتا ہے
حقیقت یہی ہے کہ یہ انسان ایسی ناقبل برداشت حرکتیں تبھی کرتا ہے
جب اس کو لوگ بھول جاتے ہیں اس کو بس لوگوں کی نظروں میں رہنے کا شوق ہو گیا ہے
ایسی حرکتیں کرنے کا اسکا مقصد صرف جھوٹی شان کمانا ہے
اور یہ سید الحمقاء اجھل من الشمس اور بغیر دال کا بودم اور بغیر الف کا ساگ نہیں جانتا
کہ وتعز من تشاء وتذل من تشاء
احباب سے گزارش ودیگر قوم کی فکر رکھنے والی شخصیات سے التماس ہے اس نا ہنجار انسان کو اسکی حالت پر چھوڑ دیا جائے
رب کریم اس کو راہ ہدایت سے ہم کنار کرینگے
یا دنیا و آخرت میں اس ملعون کو ذلیل وخوار کرینگے

نوٹ انا نحن نزلناالذکر وانا لہ لحافظون
🖋محمد ثاقب مفتاحی

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