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17/04/2022

We are starting our series on astrology and it's role in life please give your suggestions and questions about it.

|| प्राचीन भारत में मंदिर बनाने का नक्शा |||| कुण्डलिनी जाग्रत करने के स्थान थे प्राचीन मंदिर || प्राचीन भारत में मंदिर ...
25/11/2021

|| प्राचीन भारत में मंदिर बनाने का नक्शा ||
|| कुण्डलिनी जाग्रत करने के स्थान थे प्राचीन मंदिर ||

प्राचीन भारत में मंदिर बनाने से पहले जगह और दिशा का विशेष महत्व होता था | मंदिरो का निर्माण अलग अलग शैलियों के हिसाब से हुआ करता था पर अधिकतर मंदिर ऐसी पद्धति से बनते थे जिसमे हर एक कुण्डलिनी चक्र के हिसाब से गर्भगृह, मंडप, प्रस्थान, परिक्रमा आदि का निर्माण होता था और जिस चक्र के हिसाब से उस जगह का निर्माण होता था वहा व्यक्ति को चलकर या बैठकर उस चक्र को जागृत करने में सहयोग मिलता था | यही कारण होता है की प्राचीन मंदिरो में आज भी जाने पर व्यक्ति मानसिक रूप से शांति और संतुष्टि का अनुभव होता है | एक चित्र साझा कर रहे है जिसमे आपको बताया गया है की मंदिर निर्माण का विचार कैसा होता था |

14/05/2021

If anyone you know is suffering with covid19 and need help with healing, I being a professional healer request you to send me a photo of the patient and I will try my best to pray for his well being.

Every Tuesday free Vastu consultancy morning 10 am to 12 noon. Feel free to call at 9434745678...
06/02/2021

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13/09/2020

आज सुबह 10:45 से मध्यान 12 बजे के मध्य किसी भी देव मंत्र , स्तुति या चालीसा का पाठ अपनी मनोकामना का ध्यान करते हुए करना अत्यंत शुभफलदायी रहेगा 🙏🏻

12/09/2020

If in this tough time anyone need reiki healing to get rid of the covid19 impact please feel free to contact me it's free and effective wish you all good health and strong will power...

17/07/2020

Difficult time demands strong hearts and steady minds......

06/07/2020

🌹🚩🔱ॐ नमः शिवायः 🔱🚩🌹

*शिव जी के पवित्र श्रावण महीने के आगमन ओर पहले सोमवार की* .......
*आपको और आपके* *पूरे परिवार को मेरी और से हार्दिक शुभकामनाये*.....
*बाबा भोले नाथ आपकी जिंदगी खुशियों से भर दें*

‼️‼️‼️🙏‼️‼️‼️
*🕉 हरहर महादेव 🕉*
‼️‼️‼️🙏‼️‼️‼️

29/06/2020

1जुलाई को देवशयनी एकादशीसे चातुर्मास शुरू हो रहे हैं। चातुर्मास मतलब वो चार महीने जब शुभ काम वर्जित होते हैं, त्योहारों का सीजन होता है। देवशयनी एकादशी से देवप्रबोधिनी एकादशी के बीच के समय को चातुर्मास कहते हैं। इस बार अधिक मास के कारण चातुर्मास चार की बजाय पांच महीने का होगा go। श्राद्ध पक्ष के बाद आने वाले सारे त्योहार लगभग 20 से 25 दिन देरी से आएंगे।

इस बार आश्विन माह का अधिकमास है, मतलब दो आश्विन मास होंगे। इस महीने में श्राद्ध और नवरात्रि, दशहरा जैसे त्योहार होते हैं। आमतौर पर श्राद्ध खत्म होते ही अगले दिन से नवरात्रि आरंभ हो जाती है लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा। 17 सितंबर 2020 को श्राद्ध खत्म होंगे और अगले दिन से अधिकमास शुरू हो जाएगा, जो 16 अक्टूबर तक चलेगा। 17 अक्टूबर से नवरात्रि आरंभ होगी। इस तरह श्राद्ध और नवरात्रि के बीच इस साल एक महीने का समय रहेगा। दशहरा 26 अक्टूबर को और दीपावली 14 नवंबर को मनाई जाएगी। 25 नवंबर को देवउठनी एकादशी रहेगी और इस दिन चातुर्मास खत्म हो जाएंगे।



160 साल बाद लीप ईयर और अधिक मास एक ही साल में

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार 19 साल पहले 2001 में आश्विन माह का अधिकमास आया था। अंग्रेजी कैलेंडर का लीप ईयर और आश्विन के अधिकमास का योग 160 साल बाद बन रहा है। इससे पहले 1860 में ऐसा अधिकमास आया था, जब उसी साल लीप ईयर भी था।

हर तीन साल में आता है अधिकमास

पं. शर्मा के अनुसार एक सूर्य वर्ष 365 दिन और करीब 6 घंटे का होता है, जबकि एक चंद्र वर्ष 354 दिनों का माना जाता है। दोनों वर्षों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर होता है। ये अंतर हर तीन वर्ष में लगभग एक माह के बराबर हो जाता है। इसी अंतर को दूर करने के लिए हर तीन साल में एक चंद्र मास अतिरिक्त आता है, जिसे अतिरिक्त होने की वजह से अधिकमास का नाम दिया गया है। अधिकमास के पीछे पूरा वैज्ञानिक दृष्टिकोण है। अगर अधिकमास नहीं होता तो हमारे त्योहारों की व्यवस्था बिगड़ जाती है। अधिकमास की वजह से ही सभी त्योहारों अपने सही समय पर मनाए जाते हैं।

चातुर्मास में तप और ध्यान करने का विशेष महत्व

चार्तुमास में संत एक ही स्थान पर रुककर तप और ध्यान करते हैं। चातुर्मास में यात्रा करने से यह बचते हैं, क्योंकि ये वर्षा ऋतु का समय रहता है, इस दौरान नदी-नाले उफान पर होते है तथा कई छोटे-छोटे कीट उत्पन्न होते हैं। इस समय में विहार करने से इन छोटे-छोटे कीटों को नुकसान होने की संभावना रहती है। इसी वजह से जैन धर्म में चातुर्मास में संत एक जगह रुककर तप करते हैं। चातुर्मास में भगवान विष्णु विश्राम करते हैं और सृष्टि का संचालन भगवान शिव करते हैं। देवउठनी एकादशी के बाद विष्णुजी फिर से सृष्टि का भार संभाल लेते हैं।

अधिकमास को मलमास क्यों कहते हैं?

अधिकमास में सभी पवित्र कर्म वर्जित माने गए हैं। इस पूरे माह में सूर्य संक्राति नहीं रहती है। इस वजह से ये माह मलिन हो जाता है। इसलिए इसे मलमास कहते हैं। मलमास में नामकरण, यज्ञोपवित, विवाह, गृहप्रवेश, नई बहुमूल्य वस्तुओं की खरीदी जैसे शुभ कर्म नहीं किए जाते हैं।

अधिकमास को पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं

मान्यता है कि मलिन मास होने की वजह से कोई भी देवता इस मास का स्वामी होना नहीं चाहता था, तब मलमास ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की। मलमास की प्रार्थना सुनकर विष्णुजी ने इसे अपना श्रेष्ठ नाम पुरषोत्तम प्रदान किया। श्रीहरि ने मलमास को वरदान दिया कि जो इस माह में भागवत कथा श्रवण, मनन, भगवान शिव का पूजन, धार्मिक अनुष्ठान, दान करेगा उसे अक्षय पुण्य प्राप्त होगा।

20/06/2020

🌓 *ग्रहण की जानकारी* 🌓

*दिनांक* 21 जून रविवार को खंडग्रास सूर्यग्रहण होगा जो कि *भारत में दिखेगा*।अतः इस ग्रहण का नियम पालन आवश्यक होगा।

ग्रहण का स्पर्श(लगना): सुबह 10.09
ग्रहण का मोक्ष(छूटना): दोपहर 01.43
ग्रहण का सूतक(छाया): दिनांक 20 जून शनिवार को रात 10.09 से दूसरे दिन दोपहर 01.43 तक।

इस समय घर में ही रह कर अध्यात्म का अध्ययन करना चाहिए एवं अपनी अपनी राशि के अनुसार दान करें। छोटे बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं को विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए। नारियल हाथ में/ गोद में लेकर बैठना चाहिए।

*कृपया समाज के अन्य ग्रुप्स में इस पोस्ट को शेयर करें ताकि सभी तक यह जानकारी पंहुचे🙂🙏🏻*

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