27/02/2026
❤️🩹 बच्चा पीटा जा रहा है…
और हम इसे ‘परवरिश’ कहकर नज़र फेर लेते हैं।
आचार्य प्रशांत कहते हैं
मनुष्य का बच्चा बड़ा करना एक भारी प्रोजेक्ट है
जिस बच्चे को डरा-डरा कर बड़ा किया गया,
वह या तो हमेशा के लिए टूट जाएगा
या फिर वही डर आगे फैलाएगा।
🔴 तथ्य जिन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता
▪️ भारत में हर दूसरा बच्चा
शारीरिक दंड या घरेलू हिंसा झेलता है।
(स्रोत: यूनिसेफ़ – भारत)
▪️बाल्यावस्था में हिंसा झेलने वाले बच्चों में
अवसाद, अत्यधिक चिंता, आक्रामकता व नशे की प्रवृत्ति
का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
(स्रोत: विश्व स्वास्थ्य संगठन)
▪️शोध बताते हैं कि लगातार मार-पीट से बच्चे के दिमाग़ के
भय और तनाव से जुड़े हिस्सों पर गहरा और दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
⚠️ हिंसा पर चुप रहना भी हिंसा को बढ़ावा देना है।
आचार्य प्रशांत लगातार अज्ञान और क्रूरता के विरुद्ध कार्य कर रहे हैं
▪ माता-पिता को आत्मबोध की शिक्षा देकर
▪ यह समझाकर कि बच्चा काबू में रखने की वस्तु नहीं बल्कि एक संवेदनशील और जागरूक चेतना है
✨ आपका योगदान
घरों के भीतर छिपी इस हिंसा के चक्र को तोड़ने में
एक निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
यदि कोई साहस कर रहा है कि हमें समय रहते चेताए,
तो उसका साथ देना हमारा धर्म है।