29/04/2021
आह बनारस !! वाह बनारस !! -
वरुणा और अस्सी नदी के किनारे बसा एक शहर .. गंगा की पावन धरती काशी भी इसी में समाहित है .. कहते हैं भोले शंकर के त्रिशूल पर बसा है बनारस शायद इसीलिए जहाँ पूरे देश में लोग एक दूसरे से "राम राम" करके मिलते हैं बनारस में "महादेव" के नारे से मिलते हैं । लोग जहाँ मृत्यु के बाद बनारस आने की इच्छा रखते हैं .. हम तो पैदा और पले बढ़े भी वहीं पर हैं । आईए बात आगे बढ़ाते हैं.. महादेव !!
हर जगह की कुछ ना कुछ खासियत होती है.. बनारस की खासियत ये है कि वो बनारस है । काशी विश्वनाथ मंदिर हो या काल भैरव, गंगा आरती हो या संकट मोचन का हनुमान चालीसा पाठ,गोदौलिया चौराहे की ठंडई हो या कचौड़ी गली की भूलभुलैया गलियां,दुर्गाकुंड का सरोवर हो या तुलसी मानस मंदिर .. बनारस की बात ही अलग है ।
कुछ लोग कहते हैं कि बहुत भीड़ है बनारस में .. उन्हें करीना कपूर की "जब वी मेट" का वो डायलाग सुनना चाहिए "भीड़ हम जैसे लोगों से ही तो होती है" ..भीड़ की वजह से ही तो करीबी बढ़ती है .. यही करीबी बनारस में दिखेगी आपको । लोग गंगा के प्रदूषण के बारे में बोलेंगे मगर मरते वक्त उसी का जल अपने मुँह में चाहते हैं ..कभी शाम को अस्सी या दशाश्वमेध घाट या फिर नाँव पर बैठ कर गंगा आरती देखिए बड़े बड़े से बड़े नास्तिक भी आस्तिकता की ओर ना मुड़ जाएं तो कहना ।
गोदौलिया की लस्सी या ठंडई पी कर कलेजे में ठंड ना बैठ जाये तो कहना, पीले पत्तों वाला बनारसी पान जो मुँह में जाते ही घुल जाता है उसे खा कर तसल्ली ना मिले तो कहना, गंगा जी मे डुबकी मार कर निकलो और वहीं गोलगप्पे वाले का ठेला मिल जाये जिसमे दिल्ली के गोलगप्पों की तरह पुदीने का पानी नहीं बल्कि इमली का चटपटा और तीखा पानी मिले जो आत्मा तृप्त न कर दे तो कहना, BHU के अंदर जाकर अनपढ़ को भी पढ़ने का मन ना करने लगे तो कहना, बनारसी साड़ी पहन कर बंदरिया भी माधुरी दीक्षित ना लगने लगे तो कहना, संकटमोचन के बने शुद्ध घी के बेसन के लड्डू देख कर अपना डायबिटीज ना भूल जाओ तो कहना, भेलूपुर के केरला कैफ़े की कॉफ़ी पीकर उसैन बोल्ट को ना पछाड़ दिया तो कहना.. बनारस जाकर बनारस को अगर भूल पाए तो कहना ...
शिक्षा की नगरी,मंदिरों की नगरी, 4-4 यूनिवर्सिटी वाला शहर, बड़े बड़े तीसमार खां को बेवकूफ बनाने वाले ठगों का शहर जहां का रिक्शेवाला भी विदेशियों को देख कर "where madam?", "100 rupees only" बोलता है वो है बनारस, जिसके किनारे बसे सारनाथ में महात्मा बुद्ध ने अपना पहला प्रवचन दिया था ..कालभैरव जिसके कोतवाल कहे जाते हैं वो कोतवाली है बनारस ।
अपनी ही मस्ती के रंग में रंगा है बनारस,जो जाता है उसी का होकर रह जाता है .. मरने के बाद तो सभी जाते हैं राख के रूप में .. हाड़ माँस के शरीर और खुले दिमाग से जाइये तो समझ आएगा बनारस ।
बनारस का रस ही ऐसा है शायद इसीलिए वाराणसी से अधिक बनारस नाम प्रसिद्ध है .. "बना" रहे जिसका "रस" तब तक के लिए "महादेव" .. दोनों हाथ उठा कर बोलो .. "महादेव" 🙌 !!