30/01/2026
मेरे विचार में Uniform Civil Code (UCC) को केवल एक कानूनी व्यवस्था के रूप में देखना एक अधूरी समझ होगी। UCC का वास्तविक उद्देश्य समाज में समानता, न्याय और मानवीय गरिमा स्थापित करना है, और यह तभी संभव है जब इसकी जड़ें हमारी शिक्षा प्रणाली में हों। इसी कारण मैं मानता हूँ कि UCC से जुड़े किसी भी बड़े सामाजिक सुधार के लिए UGC में संशोधन अनिवार्य रूप से होना चाहिए।
Swami Vivekananda के विचारों से प्रेरित होकर मेरा स्पष्ट मत है कि शिक्षा का लक्ष्य केवल रोजगार नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण होना चाहिए। यदि हमारे विश्वविद्यालयों में संविधान, नागरिक कर्तव्य, सामाजिक न्याय और UCC जैसे विषयों को वैज्ञानिक और निष्पक्ष रूप से पढ़ाया जाए, तो समाज में डर, भ्रम और वैचारिक टकराव स्वतः समाप्त होंगे।
मेरे अनुसार 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का अर्थ केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि एक ऐसा समाज बनाना है जहाँ हर नागरिक कानून के सामने समान हो, विचारों में जागरूक हो और जिम्मेदारी में परिपक्व हो। यह लक्ष्य तभी प्राप्त होगा जब UGC के माध्यम से शिक्षा को कानून से जोड़ा जाए और कानून को चेतना से। यही मेरा व्यक्तिगत दृष्टिकोण है — कि UGC सुधार के बिना UCC एक अधूरा सपना रहेगा, और UGC सुधार के साथ वही UCC राष्ट्र निर्माण का सबसे मजबूत आधार बन सकता है।