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29/04/2023
आज कई युवा अपना स्टार्टअप करना चाहते हैं, लेकिन कई बार वे स्टार्टअप के प्रति समर्पित नहीं रहते और असफल हो जाते हैं। लेकि...
09/04/2023

आज कई युवा अपना स्टार्टअप करना चाहते हैं, लेकिन कई बार वे स्टार्टअप के प्रति समर्पित नहीं रहते और असफल हो जाते हैं। लेकिन यदि आपके पास अच्छा बिज़नेस आईडिया हो और आप उसके लिए समर्पित हों, तो आप सफल हो सकते हैं, इसकी मिसाल है "समोसा सिंह" के फाउंडर्स शिखर वीर सिंह और निधि सिंह, जिन्होंने अपनी अच्छी खासी सैलरी वाली नौकरियां छोड़कर खुद के आईडिया समोसा सिंह के लिए काम किया।

समोसा सिंह को शुरू करने में और फिर उसे आगे बढ़ाने में दोनों को तकलीफों का सामना करना पड़ा, यहाँ तक कि अपना फ्लैट भी बेचना पड़ा, लेकिन वे अपने आईडिया पर और अपने बिज़नेस पर डटे रहे। आज जानिये कैसे शिखर वीर सिंह और निधि सिंह ने समोसा बेचने के एक आईडिया को कैसे एक ब्रांड "समोसा सिंह" में बदल दिया -

कौन हैं समोसा सिंह के फाउंडर
नाम: समोसा सिंह
कब: फरवरी 2016, बेंगलुरु
फाउंडर्स: शिखर वीर सिंह और निधि सिंह
वर्तमान स्थिति: 45 करोड़ टर्नओवर सालाना


समोसा सिंह के फाउंडर शिखर वीर सिंह और निधि सिंह हैं। निधि और शिखर की पहली मुलाकात कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में बीटेक के दौरान हुई। निधि के पिता एक वकील हैं, वहीं शिखर के पिता का चंडीगढ़ में ज्वेलरी शोरूम है। बीटेक करने के बाद शिखर ने हैदराबाद के जीवन विज्ञान संस्थान से एमटेक किया और बायोकोन में मुख्य वैज्ञानिक के रूप में जॉब की। निधि ने भी गुरुग्राम में एक फार्मा कंपनी जॉइन की।

ऐसे हुई समोसा सिंह की शुरुआत :

एमटेक के दौरान शिखर को समोसे का बिज़नेस करने का आईडिया आया, लेकिन निधि ने इस आईडिया को मजाक में टाल दिया। एक बार निधि ने किसी फ़ूड कोर्ट में एक बच्चे को समोसे के लिए रोते देखा, तब उन्हें शिखर के आईडिया में दम लगा। 2015 में दोनों ने अपनी अच्छे पैकेज वाली नौकरी छोड़ दी और समोसे का बिज़नेस करने के आईडिया पर काम करने लगे।

समोसा सिंह का पहला आउटलेट :

आईडिया पर काम करते हुए उन्हें लगभग 1 साल का समय लगा और फिर फरवरी 2016 में समोसा सिंह का पहला आउटलेट लांच हुआ। उन्होंने इस आउटलेट को शुरू कर दिया, लेकिन जल्द ही उन्हें खुद के किचन की ज़रूरत महसूस हुई, लेकिन अब उनके पास उनकी सेविंग्स नहीं बची थी। तब उन्हें रेंट पर किचन लेने के लिए अपना 85 लाख रुपये का फ्लैट बेचना पड़ा। लेकिन शिखर और निधि को इसका कोई दुःख नहीं था, क्योंकि उनका यह फैसला जल्द ही रंग लाने वाला था।

आज समोसा सिंह की स्थिति :

एक समय था, जब शिखर और निधि को समोसा सिंह के लिए अपना फ्लैट बेचना पड़ा था। आज वही समोसा सिंह दिन दूनी और रात चौगुनी तरक्की कर रहा है। आज बेंगलुरु के अपने किचन में वे हर महीने 30 हजार से ज्यादा समोसे बनाते हैं। आज उनका समोसा बहुराष्ट्रीय कम्पनियों, एयरलाइन्स और मल्टीप्लेक्स में खाया जाता है। इसके अलावा आज उनके पास 8 अन्य शहरों में 50 क्लाउड किचन हैं और उनका सालाना टर्नओवर 45 करोड़ से ज्यादा का है।

आज शिखर और निधि ने यह साबित कर दिया है कि यदि आपके बिज़नेस आईडिया में दम है और आप उसके लिए पूरी तरह समर्पित हैं, तो आप अच्छा ख़ासा मुकाम हासिल कर सकते हैं।

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05/04/2023

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डॉ विवेक बिंद्रा की इन 3 Golden Statement से हासिल करें अपना Goal
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Editor's Desk
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Apr 05, 2023 01:21 PM IST
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डॉ विवेक बिंद्रा की इन 3 Golden Statement से हासिल करें अपना Goal
डॉ विवेक बिंद्रा की इन 3 Golden Statement से हासिल करें अपना Goal
किसी भी बिज़नेस में सफलता हासिल करने का एक लक्ष्य का होना बहुत ही जरूरी है। यह उतना ही आवश्यक है जितना जिंदा रहने के लिए ऑक्सीजन । बिना लक्ष्य के व्यक्ति का जीवन दिशाहीन होता है, उसे यह नहीं पता होता कि क्या करना है और क्यों करना है। जीवन में लक्ष्य ही आपको आगे बढ़ने में मदद करता है। कल्पना करो कि आप सफर कर रहे हैं और आपको यह ही नहीं पता कि ‘आप कहां जा रहे हैं, क्यों जा रहे हैं तो परिणाम क्या होगा ? यदि आपको पता है आप कहां और क्यों जा रहे हैं तो आप अपने गंतव्य तक आसानी से पहुंच जाएंगे अन्यथा आप चलते ही जाएंगे और आपको पता ही नहीं होगा कि रूकना कहां हैं। जीवन में आगे बढ़ने के लिए जितना ज्यादा ज़रूरी लक्ष्य को बनाना है उतना ही ज्यादा ज़रूरी उसे पाना भी है।

किसी भी लक्ष्य को पाने में आपका मोटिवेशन बहुत बड़ी भूमिका निभाता है। अगर आपके अंदर मोटिवेशन नहीं होगा तो आप कभी अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर पाएंगे। मोटिवेशन इंसान को विपरीत परिस्थितियों में भी लड़ना सिखाता है। यह उसे आगे बढ़ने में मदद करता है। आज मोटिवेशनल गुरू और बिज़नेस कोच डॉ विवेक बिंद्रा के जन्मदिन पर आइए जानते हैं उनके कहे कुछ गोल्डन स्टेटमेंट। जिनसे ना जाने कितने लोगों की जिंदगी बदल गयी है।

छोटी सोच और पांव की मोच इंसान को आगे बढ़ने नहीं देती :

डॉ विवेक बिंद्रा के द्वारा कही गई यह बात हर इंसान के जीवन पर सटीक बैठती हैं। इंसान की छोटी सोच और पांव की मोच उसे आगे बढ़ने नहीं देती। अगर आपके पैर में मोच आ जाए तो आप चलने-फिरने में असमर्थ हो जाएंगे। आपका लक्ष्य सामने होते हुए भी आप वहां तक नहीं पहुंच पाएंगे। यही बात इंसान की सोच पर भी लागू होती है। जिस इंसान की सोच छोटी होगी उसे दूसरों में केवल कमियां और नकारात्मकता ही दिखाई देगी। जिसके कारण वो कभी आगे नहीं बढ़ पाएगा। यह सब उसके पैर में पड़ी बेड़ियां या मोच के समान होगी। जिसकी वजह से लाख कोशिशों के बावजूद वो आगे नहीं बढ़ पाएगा। इसलिए इंसान को हमेशा अपनी सोच बड़ी करनी चाहिए और बड़े लक्ष्य बनाने चाहिए। जिस इंसान की सोच सकारात्मक होती है उसके सामने बड़े से बड़ा लक्ष्य भी छोटा हो जाता है। इसलिए अपनी सोच का विस्तार करिए और अपने लक्ष्य को हासिल करिए।

जो लक्ष्य में खो गया, समझो वही सफल हो गया :

किसी भी इंसान के जीवन में लक्ष्य का होना बहुत जरूरी है। लेकिन उस लक्ष्य को पाने के लिए उसका उस लक्ष्य में खोना आवश्यक है क्योंकि जिसने अपने लक्ष्य को अपना जुनून नहीं बनाया वो सफलता का स्वाद कभी चख नहीं सकता। लक्ष्य व्यक्ति को एक सही दिशा देता है। उसे बताता है कि कौन सा काम उसके लिए जरूरी है और कौन सा नहीं। यदि लक्ष्य साफ हो तो उसे पाने के रास्ते भी साफ़ नज़र आने लगते हैं और इंसान उसी दिशा में अपने कदम बढ़ा देता है। आपने देखा होगा कि यूपीएससी की तैयारी हर साल लाखों स्टूडेंट करते हैं लेकिन सफलता उन्हीं को मिलती है जो दिन-रात की परवाह किए बिना केवल अपने लक्ष्य पर ही ध्यान केंद्रित करते हैं। अगर आपको अपने जीवन में बड़ी सफलता प्राप्त करनी है तो आपको लक्ष्य पर ही अपना सारा ध्यान लगाना होगा इसके लिए आप मोटिवेशनल स्पीकर (Motivational Speaker In India) डॉ विवेक बिंद्रा की वीडियो भी देख सकते हैं । दिन-रात, उठते-बैठते उसी के बारे में सोचना होगा, उसी पर काम करना होगा। तभी आप अपने लक्ष्य को प्राप्त कर पाएंगे।

खुद के मन की स्थिति को बदलिए परिस्थितियां खुद ही बदल जायेगी :

अपनी टीम को आगे बढ़ाने के लिए सबसे पहले उन्हें परिस्थितियों से लड़ना सिखाएं। मोटिवेशनल स्पीकर डॉ विवेक बिंद्रा का कहना है कि खुद के मन की स्थिति को बदलिए परिस्थितियां खुद ही बदल जायेगी। अगर आप अपने टीम मेंबर्स को परिस्थितियों से लड़ना ही नहीं सिखाएंगे तो वो परिस्थितियों के आगे घुटने टेक देंगे। हमेशा अपनी टीम में सकारात्मक माहौल बनाएं।

सकारात्मकता लोगों को कठिन से कठिन परिस्थिति में भी शांत रहना और उससे लड़ना सिखाती हैं। सकारात्मक लोग हमेशा गिलास को आधा भरा देखते हैं आधा खाली नहीं । वो बड़ी से बड़ी मुसीबतों में भी अवसर तलाश लेते हैं, वहीं नकारात्मक लोग छोटी-छोटी परेशानियों में भी घबरा जाते हैं। अगर टीम के लोगों में ही आगे बढ़ने की ललक और इच्छा नहीं होगी तो कंपनी पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ेगा। इसलिए अपनी टीम के हर मेंबर से समय-समय पर बात करते रहना चाहिए। उन्हें प्रेरित करना चाहिए और विषम परिस्थितियों से लड़ने के लिए उन्हें तैयार करना चाहिए।

ज्यादातर लोगों का नज़रिया होता है कि जब जिंदगी मिली है तो जीना तो है ही। जीवन का मकसद न होने से हमें जीवन में कुछ खास नजर नहीं आता है और उत्साह और जोश की कमी झलकती है। इस नज़रिये को छोडि़ए और इन 3 गोल्डन स्टेटमेंट को अपने जीवन में उतार लीजिए। यह आपको आपकी सफलता को प्राप्त करने में बड़ी मदद कर सकते हैं। अपने जीवन के लक्ष्य को प्राप्त करने में आप इनकी सहायता ले सकते हैं और आगे बढ़ सकते हैं।

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03/04/2023

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रिटेल बिज़नेस क्या होता है और इसके प्रकार | Bada Business
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Editor's Desk
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Apr 03, 2023 03:57 PM IST
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रिटेल बिज़नेस क्या होता है और इसके प्रकार | Bada Business
Retail Business Definition | Types of Retail Business.
बिज़नेस करना जितना आसान है, बिज़नेस को सफल बनाना उतना ही मुश्किल। आज के समय में सबसे ज्यादा चिंता का विषय यह बन जाता है कि कौन सा बिज़नेस किया जाए और कौन सा नहीं। बिज़नेस के क्षेत्र में लगातार कॉम्पिटिशन बढ़ता जा रहा है। जिसके कारण अच्छे बिज़नेस आइडिया की कमी हो गई है। लेकिन पिछले कुछ सालों में रिटेल बिज़नेस में तेजी से उछाल देखने को मिला है।

छोटे शहरों में रिटेल बिज़नेस ने तेज़ी से जोर पकड़ा है। यही कारण है कि कई दिग्गज कंपनियां भी रिटेल बिज़नेस से जुड़ गई हैं। आने वाले समय में रिटेल बिज़नेस के अंदर बहुत संभावनाएं नज़र आ रही हैं। अगर आप भी कोई बिज़नेस शुरू करने की सोच रहे हैं तो आज हम आपको 5 ऐसे रिटेल बिज़नेस के बारे में बताएंगे जिससे आप अच्छा खासा मुनाफा कमा सकते हैं। साथ ही आप रिटेल बिज़नेस से जुड़े सभी पहलुओं को भी समझ जाएंगे।

रिटेल बिज़नेस क्या है?
स्टोर खोलकर या ऑनलाइन से वस्तुओं और सेवाओं की छोटी मात्रा में बिक्री ही रिटेल बिज़नेस कहलाता हैं।

आसान शब्दों में कहें तो रिटेल बिज़नेस आप बहुत ही कम पैसों में शुरू कर सकते हैं। यह खुदरा व्यापार आप किराना शॉप, मोबाइल शॉप, खिलौनों की दुकान खोलकर शुरू कर सकते हैं। रिटेल का मतलब ही दुकान और दुकानदार से होता है। आप अपने पास ही के गांव या शहर में इन दुकानों को खोलकर अपना खुद का बिज़नेस शुरू कर सकते हैं। इस बिज़नेस की खासियत यह है कि इसे शुरू करने के लिए आपको विशेष कौशल की आवश्यकता नहीं होती आपके पास मात्र व्यवहारिक ज्ञान होना चाहिए। रिटेल बिज़नेस में चीजें ग्राहक को सीधे फायदे कमाने के दृष्टिकोण से बेची जाती हैं। इस बिज़नेस में किसी भी तरीके का बैकप्रोफिट नहीं होता है। सीधे मैन्युफैक्चर से चीजें खरीदी जाती हैं और अपना मार्जिन जोड़कर अपने स्टोर पर रखकर ग्राहकों को बेच दी जाती हैं।

रिटेल बिज़नेस कितने प्रकार के होते हैं?
रिटेल बिज़नेस के अगर प्रकारों की बात की जाए तो ये सामान्यत: तीन प्रकार के होते हैं।

स्टोर रिटेलिंग: स्टोर रिटेलिग में एक तय जगह पर सामान बेचते हैं। ये किसी भी तरह की दूकान या स्टोर हो सकता है। इसके लिए डिपार्टमेंटल स्टोर ग्राहकों को आकर्षित करने का सबसे अच्छा स्वरूप है। स्टोर रिटेलिंग में अपने अलग-अलग कंपटीटर के हिसाब से सामानों के दाम के लिए रणनीति अपनाई जाती है। जिससे आप अपने स्टोर को सफलतापूर्वक चलाने में सफल हो सकें।
नॉन स्टोर रिटेलिंग: जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि जब माल या सामान किसी स्टोर या दुकान के माध्यम से न बेचकर वैसे ही बेचा जाता है, तो इसे नॉन स्टोर रिटेलिंग कहा जा सकता है। नॉन स्टोर रिटेलिंग भी अनेक प्रकार की होती है जिन्हें इन रूपों में बांटा जा सकता है -
डायरेक्ट मार्केटिंग: डायरेक्ट मार्केटिंग नॉन स्टोर रिटेलिंग का ही एक स्वरूप है। इसमें माल या सामान किसी दुकान के माध्यम से नहीं बेचा जाता है। बल्कि इस प्रक्रिया में कंपनी द्वारा नियुक्त कर्मचारी उपभोक्ताओं के दरवाजे तक माल या सामान को डिलीवर करते हैं। इस प्रक्रिया में डायरेक्ट मेल मार्केटिंग, कैटलॉग मार्केटिंग, टेलीमार्केटिंग, ऑनलाइन शॉपिंग इत्यादि शामिल हैं।
डायरेक्ट बिक्री: डायरेक्ट सेलिंग को बहुस्तरीय बिक्री या फिर नेटवर्क बिक्री के रूप में भी जाना जा सकता है। इसी में घर-घर जाकर उत्पाद या सामान बेचना शामिल है। इस प्रक्रिया में कंपनी द्वारा या कंपनी के किसी एजेंट द्वारा किसी विशेष एरिया में एक होस्ट नियुक्त किया जाता है। और वह होस्ट उस एरिया में उपस्थित लोगों को किसी एक स्थान पर आमंत्रित करता है। उसके बाद कंपनी का सेल्स पर्सन वहां पर जाकर उत्पादों को दिखाता है और आर्डर लेता है।
ऑटोमैटिक वेंडिंग: अपने सामान एवं उत्पाद की बिक्री के लिए अपने ग्राहकों को ऑटोमैटिक वेंडिंग मशीन प्रदान करना भी नॉन स्टोर रिटेलिंग में शामिल है। यद्यपि कम्पनियों द्वारा इन्हें ऑफिस, फैक्ट्री, गैसोलीन स्टेशन, बड़े स्टोर को ही दिया जाता है क्योंकि इनकी उपभोग क्षमता व्यक्तिगत व्यक्ति से कहीं अधिक होती है। ये अपने कर्मचारियों या ग्राहकों को विभिन्न उत्पाद जैसे चाय, कॉफ़ी, कोल्ड ड्रिंक इत्यादि ऑफर कर रहे होते हैं।
कॉर्पोरेट रिटेलिंग: कॉर्पोरेट रिटेलिंग से हमारा आशय उस प्रक्रिया से है जब कोई कंपनी या व्यक्ति एक नहीं बल्कि अनेकों रिटेल स्टोर को एक चेन के तरीके से संचालित करता है। इसमें इंडिपेंडेंट रिटेलर की तुलना में कॉर्पोरेट रिटेलर की संख्या थोड़ी होती है लेकिन उपभोक्ता बाजार का एक बहुत बड़ा हिस्सा कमाने में ये सक्षम होते हैं।
कॉर्पोरेट रिटेलिंग आम तौर पर कम्पनी या किसी बिज़नेस इकाई द्वारा फंडेड और संचालित होती हैं। कहने का मतलब यह है कि इसमें कॉर्पोरेट चेन स्टोर, फ्रैंचाइज़ी, रिटेलर और कंज्यूमर को ऑपरेटिव जैसे संगठन शामिल हैं।

कैसे कर सकते है अच्छी कमाई?

रिटेल बिज़नेस के रूप में आप किसी भी तरीके की दुकान खोल सकते हैं। इसके लिए आपको सामान खरीदना है और अपना मुनाफा जोड़ कर उसे बेचना है। इसके लिए आप चाहें तो खिलौने की शॉप या कस्टमाइज्ड गिफ्ट शॉप खोल सकते हैं। इसके अलावा आप चाहें तो कॉस्मेटिक और परप्यूम शॉप भी खोल सकते हैं। मोबाइल स्टोर, किराने की दुकान या फिर स्टेशनरी की शॉप जैसी कोई भी दुकान खोल कर आप अच्छे पैसे कमा सकते हैं।

रिटेल बिज़नेस शुरू करने के बाद इसके आगे बढ़ने की काफी संभावनाएं हैं। लेकिन किसी भी बिज़नेस की शुरूआत करने से पहले उसके बारे में अच्छे रिसर्च ज़रूर कर लें। आप इन बिज़नेस आइडिया की मदद से अपना बिज़नेस शुरू कर सकते हैं और अच्छी कमाई कर सकते हैं।

फिल्म थ्री-इडियट्स का एक फेमस डायलॉग है कि ‘सफलता के पीछे मत भागो, काबिल बनों, सफलता ज़रूर मिलेगी’ और इस बात को सच कर दिख...
03/04/2023

फिल्म थ्री-इडियट्स का एक फेमस डायलॉग है कि ‘सफलता के पीछे मत भागो, काबिल बनों, सफलता ज़रूर मिलेगी’ और इस बात को सच कर दिखाया है श्रीधर वेम्बू ने। सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट कंपनी जोहो कॉर्प (Zoho Corp) के फाउंडर श्रीधर वेम्बू ने अमेरिका में अपनी कंपनी चलाने के बाद भी तमिलनाडु के एक गांव में स्कूल खोला।

श्रीधर वेम्बू ने पीएचडी करने के बाद सैन डिएगो स्थित क्वालकॉम में नौकरी शुरू की लगभग 2 साल नौकरी करने के बाद उन्होंने अपनी नौकरी को अलविदा कह दिया। उन्होंने अपने बिजऩेस की शुरुआत एक सॉफ्टवेयर वेंचर एडवेंट नेट से की। अपनी कड़ी मेहनत की बदौलत पहले ही साल में इन्होंने 500 मिलियन डॉलर का रेवेन्यू प्राप्त किया। आज 18 मिलियन से भी ज्यादा लोग इस सॉप्टेवेयर का उपयोग करते हैं। लेकिन श्रीधर के लिए यह सफर आसान नहीं था। तो आइए जानते हैं उनके जीवन के प्रेरक सफर के बारे में।

कौन हैं श्रीधर वेम्बू?
1968 में चेन्नई के एक साधारण परिवार में जन्में श्रीधर वेम्बू को शुरू से ही पढ़ाई में रूचि थी। उन्होंने तमिल भाषा में ही अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। वे पढ़ाई में शुरू से ही तेज थे जिसकी वजह से IIT मद्रास में उनका एडमिशन हो गया। यहां से अपना ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद वे इलेक्ट्रॉनिक फील्ड में करियर बनाना चाहते थे। लेकिन उन्होंने कंप्यूटर साइंस में करियर बनाया। श्रीधर ने आगे की पढ़ाई के लिए विदेश का रुख किया। वर्ष 1989 में श्रीधर वेम्बू ने Princeton University से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में अपनी डॉक्टरेट की पढ़ाई पूरी की।

ऐसे मिला समाज सेवा करने का उद्देश्य
पीएचडी की पढ़ाई के दौरान ही श्रीधर ने पॉलिटिकल साइंस और इकोनॉमिक्स पर काफी ज्यादा ध्यान दिया। पढ़ाई के दौरान ही उन्हें एहसास हुआ कि भारत में अभी भी सोशलिज्म सबसे बड़ी समस्या है और इसे सही करने की ज़रूरत है। बस फिर क्या था वे इस काम को करने में जुट गए।

नौकरी छोड़ शुरू किया बिज़नेस
श्रीधर वेम्बू ने पीएचडी करने के बाद सैन डिएगो स्थित क्वालकॉम में नौकरी शुरू की। लगभग 2 साल नौकरी करने के बाद उन्होंने अपनी नौकरी को अलविदा कह दिया। इसके बाद वे भारत लौट आए और उन्होंने अपने एंटरप्रेनरशिप की शुरुआत एक सॉफ्टवेयर वेंचर एडवेंट नेट से की। उनके नौकरी छोड़ने के फैसले से कई लोग हैरान थे। लेकिन उन्होंने अपना बिज़नेस करने की ठानी थी। इसी के तहत कड़ी मेहनत के बाद उनके 100 से अधिक ग्राहक बन गए। लेकिन साल 2000 में उन्होंने कुछ नया करने का सोचा।

ऐसे हुई जोहो (Zoho) की शुरूआत
कुछ नया करने की चाह में श्रीधर वेम्बु ने जोहो (Zoho) को लांच किया। श्रीधर ने अपने पहले ही साल में इससे 500 मिलियन डॉलर का रेवेन्यू प्राप्त किया। जोहो सुईट से हर महीने मात्र 10 डॉलर के खर्च में ही कंपनियां अपने कस्टमर रिलेशनशिप मैनेजमेंट को अच्छे से मैनेज कर सकती हैं। आज इसका उपयोग 18 मिलियन से भी ज्यादा लोग करते हैं।

गांव के बच्चों को कर रहे हैं शिक्षित
करोड़ों की कंपनी स्थापित करने के बाद भी श्रीधर वेम्बु ने अपने गांव के बच्चों के लिए कुछ करने की ठानी। आज वे अपने गांव में शिक्षा को बढ़ावा देने में लगे हैं। वे बच्चों को मुफ्त में पढ़ा रहे हैं, ताकि वे अपने जीवन में कुछ अच्छा कर सकें। उनका सपना गांव के स्कूलों में पढ़ाई के लिए स्टार्टअप खोलने का है ताकि लोग काबिल बनें। इतने पैसे कमाने के बाद भी वे एक सामान्य शिक्षक की तरह बच्चों को शिक्षित करने में जुटे हुए हैं।

आज श्रीधर वेम्बू लाखों लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं। उन्होंने अपनी मेहनत से सफलता की कहानी लिखी है। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि अगर आपके अंदर काबिलियत है तो कोई भी मंजिल दूर नहीं है।

कहा जाता है "Age is just a number", इसी बात को सही साबित किया है 94 साल की एथलिट दादी ने। जिस उम्र में लोग रिटायर होकर घ...
02/04/2023

कहा जाता है "Age is just a number", इसी बात को सही साबित किया है 94 साल की एथलिट दादी ने। जिस उम्र में लोग रिटायर होकर घर परिवार के साथ समय बिताते हुए आराम करते हैं। उस उम्र में एथलिट दादी ने ना सिर्फ वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड जीता है, बल्कि नेशनल रिकॉर्ड भी बनाया है।

दिल्ली के नजफगढ़ की रहने वाली 94 साल की भगवानी देवी डागर ने फ़िनलैंड में हुई वर्ल्ड मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 100 मीटर की रेस में गोल्ड जीता। इसके साथ ही गोला फेंक और डिस्कस थ्रो में कांस्य पदक जीता। एथलेटिक दादी विश्व रिकॉर्ड बनाने में 1 सेकंड से पीछे रह गयीं। आज एथलेटिक दादी कई युवाओं के लिए प्रेरणा स्त्रोत बन चुकी हैं।

02/04/2023

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𝐓𝐡𝐨𝐮𝐠𝐡𝐭 𝐨𝐟 𝐓𝐡𝐞 𝐃𝐚𝐲
12/07/2022

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11/07/2022

कबीर दास जी कहते हैं कि सारी उम्र तो भगवान को याद किया नहीं अब बुढ़ापे में पछताने से क्या होगा। समय रहते फसल को चिड़ियों से बचाया नहीं, जब चिड़िया ने खेत को चुग लिया ही है तो अब पछताने से क्या फायदा ।

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10/07/2022

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कबीर दास जी कहते हैं कि एक सज्जन पुरुष को सूप जैसा होना चाहिए। जैसे सूप गंदगी को दूर कर सिर्फ अनाज को ही अपने पास रखता ह...
10/07/2022

कबीर दास जी कहते हैं कि एक सज्जन पुरुष को सूप जैसा होना चाहिए। जैसे सूप गंदगी को दूर कर सिर्फ अनाज को ही अपने पास रखता है वैसे ही सज्जन पुरुष को बेकार की चीज़ों को छोड़कर सिर्फ अच्छी बातें ही ग्रहण करनी चाहिए।
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