15/03/2023
बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए रुक्मणी अपने इंजीनियर पति के साथ बच्चे को गोद में लिए 3 घण्टे से लाईन में लगी थी... खुद की स्पाइनल की परेशानी तो जैसे तैसे झेल रही थी मगर अपने बच्चे का रोना और गर्मी से परेशान होना अब उससे सहन नही हो रहा था... मन ही मन रुआँसी सी हो चली थी...
'जीवन में कष्ट तो होते ही हैं' वाले अनुभव के सहारे बहुत देर से पैर जमाये हुए थी मगर ममता के रसायन से सब्र का लोहा अब गल रहा था... मन में प्रार्थना की "हे भोले बाबा~ कोई गलती हुई हो तो माफ़ कर देना, बस आज दर्शन दे दो"... दुई मिनट ना लगे की रुक्मणी की एप्लिकेशन बाबा के दरबार मे पहुँच चुकी थी... गणों ने बाबा के पटल पे रक्खी...
बाबा ने पूछा~ "का हई" ???
गणों ने उत्तर दिया~ "एक माँ के दिल से निकली आह"
अब तो बाबा विश्वनाथ Duty bound थे, सो भैरवनाथ को एंडोर्समेंट हुआ कि "तत्क़ाल दर्शन की व्यवस्था करा के कृत कार्यवाही से अवगत कराया जाए... इधर आदेश अनुपालन के लिए निकला उधर ठण्डी हवा माँ बेटे के लिए बह निकली... रुक्मणी के माथे का पसीना सूख भी ना पाया था कि हूटर बजाती हुई कई सरकारी गाड़ियां आ के रुकी... लाईन में लगे एक बुजुर्ग किसी से कह रहे थे...
"अमाँ नवा एसपी आवा है... उमर से एकदम्मैं लौंडा टाईप है मगर पब्लिक के लिए मीठा पान है... मानवगत उत्सुकता में रुक्मणी भी देखनी लगी...
सुरक्षा में लगे सिपाही हटो ~हटो... हटो करके रास्ता बना रहे थे और खाकी बर्दी में कसा हुआ एक बदन आगे बढ़ा आ रहा था... पास आ के जब उस नये SP की नज़रें रुक्मणी से मिली तो कुछ पल को वो भी ठहर गया, रुक्मणी की तो धड़कनें मिल्खा सिंह और जुबान मनमोहन सिंह हो गयी थी... SP तो तेज कदमों के साथ दर्शन के लिए VIP लाईन की ओर चला गया किन्तु रुक्मणी की आंखों में 'यश प्रताप सिंह’ गुदी हुई वो काली नेम प्लेट ठहर गई थी...
जीवन 5 साल पीछे रिवाइंड होके उस दिन पे चला गया जब वो हज़रतगंज चौराहे पे CCD में यश से आखरी मुलाक़ात का निर्णय कर के मिलने गयी थी, "Look, yes you have to move on coz i have done it, समझने की कोशिश करो तुम सेटल नही हो, मेरी फैमिली नहीं मानेगी, (भीगी आंखों के साथ रुक्मणी का हाथ अपनी दोनों हथेलियों के बीच थामकर यश ने कहा "तुम बस मेरे साथ रहो कुछ ना कुछ कर लूँगा)
नहीं यश... अब इस सबका वक़्त निकल चुका है बोलकर उसने बैग में से अपनी शादी का कार्ड निकाला... और यश के सामने रख दिया था... रुक्मणी उठ के चली गयी मगर कार्ड में लगी हुई डोरी ने यश के अरमानों, खुशियों और जीवन का गला घोंट दिया था... रुक्मणी बीते कल में यात्रा कर ही रही थी कि हटो~हटो~हटिये की आवाज ने फिर से वापस बुला लिया...
नये एस.पी. यश प्रताप सिंह दर्शन कर के वापस आ रहे थे... वापसी में फिर से रुक्मणी के पास आ कर ठहरे और मौजूद जनता की ओर देखा (रुक्मणी के बच्चे को गोद में लेते हुए) सम्बंधित इंसपेक्टर को निर्देश दिया कि जो महिलाएं अपने बच्चों के साथ है उनके शीघ्र दर्शन की व्यवस्था कराइये बच्चे परेशान हो रहे हैं... इनको तत्क़ाल दर्शन कराइये...
एस. पी. साहेब रूक्मणी के बेटे का गाल पुचकारते हुए~
~बेटा नाम क्या है आपका ??
~अंकल विभु
नाम सुन के एस पी साहब मुस्कुरा दिये... कि तभी एक बुजुर्ग महिला ने कहा~~~ लल्ला जनता की सेवा करनी थी इसलिए तुम इतनी छोटी उमर में बड़े साहब बन गए...
एस पी साहब~ अम्मा और राज्यों में होती होंगी ब्रेकअप पार्टियाँ, जब यूपी बिहार का दिल टूटता है ना~ सीधा UPSC निकलता है...(रूक्मणी के लौंडे के गाल पे पुरानी मोहब्बत के हस्ताक्षर कर के एस.पी. साहब जा चुके थे।) 😘❤️
और बैकग्राउंड में बज रहा था... ठुकरा के मेरा प्यार... मेरा इंतकाम देखेगी..!