Yagya सनातनी

Yagya सनातनी सुखदः यात्रा अनुभव

14/07/2023
14/07/2023

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11/07/2023

भारतवर्ष के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी अमरशहीद राजा वीरन अल्गुमुत्थू यादव की 313वीं जयंती पर विशेष :-
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ये बात बहुत कम लोग ही जानते होंगे कि अंग्रेजों के विरूद्ध आज़ादी का बिगुल 1857 की क्राँति से 100 वर्ष पहले ही तमिलनाडू में बज गया था।

आज बात करते हैं भारत के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी तमिलनाडु के कोने यदुराजवंश के वीरन राजा अल्गुमुत्थू की जिन्होंने अंग्रजों के विरुद्ध सर्वप्रथम तलवार उठाई थी दिनांक 11जुलाई सन् 1755-57 में।
जैसे ही हम तमिलनाडु की रजधानी चेन्नई के रेलवे स्टेशन पर हम उतरते हैं तो नजरें वहाँ लगी एक विशाल मूर्ति पर जाती है। यह मूर्ति भारत के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी तमिल टाइगर अमरशहीद महावीरण राजा अल्गुमुत्थू कोने यादव की है।
तमिलनाडु सरकार हर वर्ष 11जुलाई को इस वीर योद्धा के सम्मान में धूमधाम से राजा अल्गुमुत्थू यादव जयंती मनाती है और इस दिन तमिलनाडु में राज्य अवकाश रहता है।

राजा अल्गुमुत्थू जी के नाम पर भारत सरकार ने डाक टिकट भी जारी किया था।

11 जुलाई 1710 को तमिलनाडु के तिरुनेलवेली स्टेट के यदुवंशी (तमिल भाषा में कोनार) कुल के राजघराने में जनमे राजा अल्गुमुत्थू यादव ने सन् 1728-1759 तक राज किया।

तिरूनेलवेली के कोनार यादव मूलतः "Ayi" साम्राज्य के वंशज माने जाते हैं।

अंग्रेज़ो के आत्याचार से जब पुरे भारतवर्ष की धरती कंहार उठी और जब सारे राजा मजबूर और लाचार होकर बैठ गए थे तब 1758 में राजा अल्गुमुत्थू यादव ने अपने यादव सामंतों के साथ मिलकर सेना बना अंग्रेजों से रणभूमि में लोहा लेने के लिए बिगुल बजाया।

भारत को अंग्रेजों की बेड़ियों से आज़ाद कराने के लिए राजा अल्गुमुत्थू ने कडा़ संघर्ष किया और फिर 1759 में हिंदू धर्म और हिंद की रक्षा करते हुए शहीद हो गए।

दुराचारी अंग्रेज़ो ने राजा अल्गुमुत्थू और उनके यादव वीरों को छल से हरा बन्दी बना लिया और विद्रोह को बंद करने के लिये तरह तरह के प्रलोभन और यातनाएं दी लेकिन राजा अल्गुमुत्थू और क्षत्रीय यादव वीरो ने अंग्रेज़ों का माफ़ीनामा ठुकरा अपने जागीर की परवाह न करते हुए तोपों के गरजते गोलो को अपने फौलादी छाती पर ले अमरशहीद हो अपना क्षत्रिय धर्म निभा गए लेकिन कायर अंग्रेज़ो के सामने कभी झुकना स्वीकार नही किया।

चाहते तो ये रणबांकुरे अंग्रेज़ो से संधि कर औरो की तरह अपनी जागीर बचा आज बड़े princely state के मालिक कहलाते, लेकिन इन्हे अपने स्वाभिमान की खातिर शहीद हो जाना मंजूर था लेकिन अंग्रेजों का वजीफेदार होना कतई मंजूर नहीं।

तमिलनाडु में राजा अल्गुमुत्थू यादव की हवेलियां और महल के खण्डहर मौजूद है एवं इनके वंशज भी।
राजा वीरन अल्गुमुत्थू को शत् शत् नमन्।

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****द्वारिका के विनाश के बाद बचे हुए ज्यादातर यदुवंशी ब्रज चले गए एवं थोड़े बहुत यदुवंशी महाऋषि अगस्त्य के साथ दक्षिण में माइग्रेट कर गए।
दक्षिण में यदुवंश को कोने, वाडियार, और आयर नाम से भी जाना जाता है।

"आयर" शब्द आर्य शब्द का अपभ्रंश है इसिलए दक्षिण में यदुवंशी अहीरों को आयर की भी संज्ञा दी गई है।
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Regards: Swords and Glories' team

आज का लंच चोको जीमणआगरा
21/06/2023

आज का लंच चोको जीमण
आगरा

15/03/2023

बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए रुक्मणी अपने इंजीनियर पति के साथ बच्चे को गोद में लिए 3 घण्टे से लाईन में लगी थी... खुद की स्पाइनल की परेशानी तो जैसे तैसे झेल रही थी मगर अपने बच्चे का रोना और गर्मी से परेशान होना अब उससे सहन नही हो रहा था... मन ही मन रुआँसी सी हो चली थी...

'जीवन में कष्ट तो होते ही हैं' वाले अनुभव के सहारे बहुत देर से पैर जमाये हुए थी मगर ममता के रसायन से सब्र का लोहा अब गल रहा था... मन में प्रार्थना की "हे भोले बाबा~ कोई गलती हुई हो तो माफ़ कर देना, बस आज दर्शन दे दो"... दुई मिनट ना लगे की रुक्मणी की एप्लिकेशन बाबा के दरबार मे पहुँच चुकी थी... गणों ने बाबा के पटल पे रक्खी...

बाबा ने पूछा~ "का हई" ???
गणों ने उत्तर दिया~ "एक माँ के दिल से निकली आह"

अब तो बाबा विश्वनाथ Duty bound थे, सो भैरवनाथ को एंडोर्समेंट हुआ कि "तत्क़ाल दर्शन की व्यवस्था करा के कृत कार्यवाही से अवगत कराया जाए... इधर आदेश अनुपालन के लिए निकला उधर ठण्डी हवा माँ बेटे के लिए बह निकली... रुक्मणी के माथे का पसीना सूख भी ना पाया था कि हूटर बजाती हुई कई सरकारी गाड़ियां आ के रुकी... लाईन में लगे एक बुजुर्ग किसी से कह रहे थे...

"अमाँ नवा एसपी आवा है... उमर से एकदम्मैं लौंडा टाईप है मगर पब्लिक के लिए मीठा पान है... मानवगत उत्सुकता में रुक्मणी भी देखनी लगी...

सुरक्षा में लगे सिपाही हटो ~हटो... हटो करके रास्ता बना रहे थे और खाकी बर्दी में कसा हुआ एक बदन आगे बढ़ा आ रहा था... पास आ के जब उस नये SP की नज़रें रुक्मणी से मिली तो कुछ पल को वो भी ठहर गया, रुक्मणी की तो धड़कनें मिल्खा सिंह और जुबान मनमोहन सिंह हो गयी थी... SP तो तेज कदमों के साथ दर्शन के लिए VIP लाईन की ओर चला गया किन्तु रुक्मणी की आंखों में 'यश प्रताप सिंह’ गुदी हुई वो काली नेम प्लेट ठहर गई थी...

जीवन 5 साल पीछे रिवाइंड होके उस दिन पे चला गया जब वो हज़रतगंज चौराहे पे CCD में यश से आखरी मुलाक़ात का निर्णय कर के मिलने गयी थी, "Look, yes you have to move on coz i have done it, समझने की कोशिश करो तुम सेटल नही हो, मेरी फैमिली नहीं मानेगी, (भीगी आंखों के साथ रुक्मणी का हाथ अपनी दोनों हथेलियों के बीच थामकर यश ने कहा "तुम बस मेरे साथ रहो कुछ ना कुछ कर लूँगा)

नहीं यश... अब इस सबका वक़्त निकल चुका है बोलकर उसने बैग में से अपनी शादी का कार्ड निकाला... और यश के सामने रख दिया था... रुक्मणी उठ के चली गयी मगर कार्ड में लगी हुई डोरी ने यश के अरमानों, खुशियों और जीवन का गला घोंट दिया था... रुक्मणी बीते कल में यात्रा कर ही रही थी कि हटो~हटो~हटिये की आवाज ने फिर से वापस बुला लिया...

नये एस.पी. यश प्रताप सिंह दर्शन कर के वापस आ रहे थे... वापसी में फिर से रुक्मणी के पास आ कर ठहरे और मौजूद जनता की ओर देखा (रुक्मणी के बच्चे को गोद में लेते हुए) सम्बंधित इंसपेक्टर को निर्देश दिया कि जो महिलाएं अपने बच्चों के साथ है उनके शीघ्र दर्शन की व्यवस्था कराइये बच्चे परेशान हो रहे हैं... इनको तत्क़ाल दर्शन कराइये...

एस. पी. साहेब रूक्मणी के बेटे का गाल पुचकारते हुए~
~बेटा नाम क्या है आपका ??
~अंकल विभु
नाम सुन के एस पी साहब मुस्कुरा दिये... कि तभी एक बुजुर्ग महिला ने कहा~~~ लल्ला जनता की सेवा करनी थी इसलिए तुम इतनी छोटी उमर में बड़े साहब बन गए...

एस पी साहब~ अम्मा और राज्यों में होती होंगी ब्रेकअप पार्टियाँ, जब यूपी बिहार का दिल टूटता है ना~ सीधा UPSC निकलता है...(रूक्मणी के लौंडे के गाल पे पुरानी मोहब्बत के हस्ताक्षर कर के एस.पी. साहब जा चुके थे।) 😘❤️

और बैकग्राउंड में बज रहा था... ठुकरा के मेरा प्यार... मेरा इंतकाम देखेगी..!

13/03/2023

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12/03/2023

“कौन पूछता है पिंजरे में बंद पंक्षियों को,याद वही आते हैं जो उड़ जाते हैं !!

08/03/2023

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