Mahadev astrology

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09/06/2023

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07/03/2023

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12/01/2023
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15/01/2022

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Hessonite or Gomed (Hindi) is a honey colored Calcium Aluminium Silicate having an important place in the Hindu scriptur...
06/01/2022

Hessonite or Gomed (Hindi) is a honey colored Calcium Aluminium Silicate having an important place in the Hindu scriptures. This stone is believed to be ruled by the Vedic planet ‘Rahu’. Hessonite gets its name from a Greek word 'Hesson' which stands for inferior'. It is named so because 'Rahu' or sometimes 'Dragon-head' in Western Astrology, is a malefic planet
The uniform cow urine colored Gomed neutralizes the evil effect of Vedic planet Rahu and protects the wearer from the negative vibes & energies.
It calms the mind of the wearer and relieves him/her from depression, deep seated anxieties and mental problems.
Gomed helps to boost concentration, focus and gives clear direction to help achieve goals. Therefore, it is quite beneficial for students and people who are working in the field of research.
Hessonite provides professional progress and enhances one's social & financial status
It helps improve the health of the wearer and cures ailments like epilepsy, allergies, infections of the eye & sinus, haemorrhoids and palpitation of the heart.
It also helps in healing diseases like cancer, varicose veins, boils, leprosy, clumsiness, intestinal issues, fatigue, blood pressure and fatigue
A Hessonite brings to its wearer the five fruits of life: Meditation (Dhyaana), Financial Prosperity (Artha), Righteous living (Dharma), Pleasures of the body (K**a) and Salvation/Nirvana (Moksha).
To bring peace and happiness in the marital life, both husband and wife should wear a Hessonite stone to boost love, harmony and peace.
The wearer of a Gomed is not affected by any kind of black magic, is always ahead of his/her enemies and always emerges victorious in times of a competition.
Hessonite is very beneficial for people pursuing public speaking, as it enhances the wearer's influence over large crowds
People into computer jobs, politics, government services, lawyers and scientists are benefited with the magical powers of this stone.

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28/05/2021

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05/05/2021

✳️✳️षष्ठ भाव शुक्र✳️✳️
शुक्र यदि षष्ट भाव में बलि हो तो, ज्ञान व शत्रुओं पर प्रभुत्व प्रदान करता है ।क्षीण शुक्र रोगकारक होगा यह नेत्र रोग भी देगा।विशेषतया यदि दोनों प्रकाशित ग्रह सूर्य चंद्र भी षष्ट स्थान में शुक्र से युक्त हो।
यदि शुक्र पाप ग्रह से दृष्ट अथवा क्षीण है,तो जातक दन्त रोग से भी पीड़ित होगा।
षष्ट स्थान में मंगल युक्त है तो जातक दुर्घटना विशेष से कार दुर्घटना से आहत होने की संभावना है। यदि दशमेश षष्ट स्थान में शुक्र से युक्त है, तो जातक मोटरवाहन सम्बंधित सेवा करेगा।
✳️✳️षष्ट भाव शनि✳️✳️षष्ट स्थान में बलि शनि शत्रु पर प्रभुत्व प्रदान करेगा, परंतु क्षीण शनी व्यक्ति को दासत्व प्रदान करेगा यदि षष्ट स्थान में शनि मंगल युक्त हो तो जातक शत्रु भय ग्रस्त होगा
षष्ट गत शनि जातक को सम्पत्ति प्रदान करता है।यह माता को अस्वस्थता देता है तथा जातक को सन्दिग्ध आचरण देता है।पद रोग से पीड़ित हो सकता है।
यदि शनि षष्ठेश हैं तथा पाप ग्रह इसमें स्थित है, तो जातक रुग्ण होता।
✳️✳️षष्ट भाव राहु✳️✳️
षष्ट गत राहु शत्रुओं से जूझने की क्षमता प्रदान करता है। जातक शत्रु का सन्तोषण करने में सक्षम होगा।
जीवन का आरंभिक काल सुखद नहीं होगा तथा सहोदर ए सहयोगी हो सकते हैं यह दंत पीड़ा दे सकता है यह संकल्प तथा मानसिक बल भी देता है। षष्टस्थान में राहु या केतु होने से सर्प भय होता है, जातक मुख पक रोग होता है ,जातक के ओष्ठ वर्ण या घावों से प्रभावित होंगे।
✳️✳️षष्ट भाव केतु✳️✳️
षष्ट स्थान गत केतु दर्शाता है कि जातक में शारीरिक बल होगा।व्यक्ति अपने ध्येय व अभिलाषाओं में सफलता प्राप्त करेगा व स्वस्थ होगा।
यधपि षष्ट भाव मे केतु शत्रु राशि गत है तो यह जातक को नेत्र विकार व भौतिक हानि दे सकता है।जातक सम्बन्धीयो द्वारा प्रशन्तित होता है, परन्तु मामा से सामंजस्य नहीं होगा। 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 astro mohini sharma

04/05/2021

मई के महीने में आएंगे १६ बड़े व्रत त्यौहार :

७ मई :वरुधिनी एकादशी:हिन्दू पंचांग के अनुसार,वैसाख माह में कृष्ण पक्ष की एकादशी को वरुधिनी एकादशी कहते है। इस दिन भगवन विष्णु का व्रत रखने और विधिवत पूजा करने से सभी दुःख दूर होते है।

८ मई :शनि प्रदोष:- हिन्दू पंचांग के अनुसार हर महीने की त्रियोदशी तिधि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। इस दिन भगवन शिव की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। मई महीने में शनि प्रदोष है। घर पैर ही रहकर शिव जी की पूजा करे।

९ मई :मासिक शिवरात्रि:-हिन्दू धर्म के अनुसार हर महीने में कृष्ण पक्ष की चतृर्दशी तिधि को मासिक शिवरात्रि भी कहते है।

११ मई :वैशाख अमावस्या:-वैशाख महीने की अमावस्या को वैशाख अमावस्या कहते है। इस दिन धार्मिक कार्य ,मन्त्र जाप,पूजा पथ किया जाता है।

१४ मई:अक्षय तृतीया :-हिन्दू धर्म में अक्षय तृतीया को बहुत ही शुभ मन गया है ,इस दिन स्वर्ण खरीदने का विधान है। इसी दिन भगवन परशुराम का जन्मोत्सव मनाया जाता है।

१५ मई :विनायक चतुर्थी:प्रत्येक माह शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते है। धार्मिक मान्यता है की इस दिन व्रत रखने से जातको को सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है।

१८/१९ मई:गंगा सप्तमी:-गंगा सप्तमी पर्व १८/१९ मई को मनाया जायेगा। वैशाख मास शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को माँ गंगा स्वर्ग लोक से भगवान शिव की जटाओ में पहुंची थी,इसलिए इस दिन को गंगा सप्तमी के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष गंगा सप्तमी घर में रहकर ही मनाये।

२१ मई :सीता नवमी :- वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को माँ सीता प्रकट हुई थी ,इस दिन को सीता नवमी के नाम से जाना जाता है

२२/२३ मई:मोहिनी एकादशी:-वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी कहते है। मोहिनी एकादशी के दिन व्रत करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है और पापो का नाश होता है।
२४ मई :सोम प्रदोष :प्रत्येक मास की त्रियोदशी को प्रदोष कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से कष्टों से मुक्ति मिलती है। इस दिन ,२४ मई को सोमवार है इसलिए सोम प्रदोष है।

२५ मई :भगवान नरसिंघ जन्मोत्सव:-भगवान नरसिंघ विष्णु जी के ४ अवतार है ,जिन्होंने हिरणाकश्यप का वध किया था। नरसिंघ जन्मोत्सव हर वर्ष वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिधि को मनाया जाता है।

२६ मई:बुध पूर्णिमा:-वैशाख मास की पूर्णिमा के दिन भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था।

२७ मई :भगवान नारद जन्मोत्सव:-नारद जन्मोत्सव हर वर्ष ज्येठ कृष्ण पक्ष की दुतीय तिथि को मनाया जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार ,नारद मुनि ब्रह्मा जी के मानस पुत्र है।

२९ मई :संकष्टी चतुर्थी:-प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है
ज्योतिषाचार्य मोहिनी शर्मा

06/01/2021

*अच्छाई-बुराई*
〰️🔸🔸〰️
एक बार बुरी आत्माओं ने भगवान से शिकायत की कि उनके साथ इतना बुरा व्यवहार क्यों किया जाता है, जबकी अच्छी आत्माएँ इतने शानदार महल में रहती हैं और हम सब खंडहरों में, आखिर ये भेदभाव क्यों है, जबकि हम सब भी आप ही की संतान हैं।

भगवान ने उन्हें समझाया- ”मैंने तो सभी को एक जैसा ही बनाया पर तुम ही अपने कर्मो से बुरी आत्माएं बन गयीं। सो वैसा ही तुम्हारा घर भी हो गया।“

भगवान के समझाने पर भी बुरी आत्माएँ भेदभाव किये जाने की शिकायत करतीं रहीं और उदास होकर बैठ गयी।

इसपर भगवान ने कुछ देर सोचा और सभी अच्छी-बुरी आत्माओं को बुलाया और बोले- “बुरी आत्माओं के अनुरोध पर मैंने एक निर्णय लिया है, आज से तुम लोगों को रहने के लिए मैंने जो भी महल या खँडहर दिए थे वो सब नष्ट हो जायेंगे, और अच्छी और बुरी आत्माएं अपने अपने लिए दो अलग-अलग शहरों का निर्माण नए तरीके से स्वयं करेंगी।”

तभी एक आत्मा बोली- “ लेकिन इस निर्माण के लिए हमें ईंटें कहाँ से मिलेंगी?”

भगवान बोले- “जब पृथ्वी पर कोई इंसान अच्छा या बुरा कर्म करेगा तो यहाँ पर उसके बदले में ईंटें तैयार हो जाएंगी। सभी ईंटें मजबूती में एक सामान होंगी, अब ये तुम लोगों को तय करना है कि तुम अच्छे कार्यों से बनने वाली ईंटें लोगे या बुरे कार्यों से बनने वाली ईंटें!”

बुरी आत्माओं ने सोचा, पृथ्वी पर बुराई करने वाले अधिक लोग हैं इसलिए अगर उन्होंने बुरे कर्मों से बनने वाली ईंटें ले लीं तो एक विशाल शहर का निर्माण हो सकता है, और उन्होंने भगवान से बुरे कर्मों से बनने वाली ईंटें मांग ली।

दोनों शहरों का निर्माण एक साथ शुरू हुआ, पर कुछ ही दिनों में बुरी आत्माओं का शहर वहाँ रूप लेने लगा, उन्हें लगातार ईंटों के ढेर के ढेर मिलते जा रहे थे और उससे उन्होंने एक शानदार महल बहुत जल्द बना भी लिया। वहीँ अच्छी आत्माओं का निर्माण धीरे-धीरे चल रहा था, काफी दिन बीत जाने पर भी उनके शहर का केवल एक ही हिस्सा बन पाया था।

कुछ दिन और ऐसे ही बीते, फिर एक दिन अचानक एक अजीब सी घटना घटी। बुरी आत्माओं के शहर से ईंटें गायब होने लगीं… दीवारों से, छतों से, इमारतों की नीवों से,… हर जगह से ईंटें गायब होने लगीं और देखते ही देखते उनका पूरा शहर खंडहर का रूप लेने लगा।

परेशान आत्माएं तुरंत भगवान के पास भागीं और पुछा- “हे प्रभु! हमारे महल से अचानक ये ईंटें क्यों गायब होने लगीं …हमारा महल और शहर तो फिर से खंडहर बन गया?”

भगवान मुस्कुराये और बोले- “ईंटें गायब होने लगीं!! अच्छा! दरअसल जिन लोगों ने बुरे कर्म किए थे अब वे उनका परिणाम भुगतने लगे हैं यानी अपने बुरे कर्मों से उबरने लगीं हैं उनके बुरे कर्म और उनसे उपजी बुराइयाँ नष्ट होने लगे हैं। सो उनकी बुराइयों से बनी ईंटें भी नष्ट होने लगीं हैं। आखिर को जो आज बना है वह कल नष्ट भी होगा ही। अब किसकी आयु कितनी होगी ये अलग बात है।“

इस तरह से बुरी आत्माओ ने अपना सिर पकड़ लिया और सिर झुका के वहा से चली गई|

इस कहानी से हमें कई ज़रूरी बातें सीखने को मिलती है, जो हम बचपन से सुनते भी आ रहे हैं पर शायद उसे इतनी गंभीरता से नहीं लेते:
बुराई और उससे होने वाला फायदा बढता तो बहुत तेजी से है। परंतु नष्ट भी उतनी ही तेजी से होता है।
वहीँ सच्चाई और अच्छाई से चलने वाले धीरे-धीरे आगे बढ़ते हैं पर उनकी सफलता स्थायी होती है. अतः हमें हमेशा सच्चाई की बुनियाद पर अपने सफलता की इमारत खड़ी करनी चाहिए, झूठ और बुराई की बुनियाद पर तो बस खंडहर ही बनाये जा सकते हैं।
Astrologer mohini sharma.

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