UP Consumer Welfare Council

UP Consumer Welfare Council as well as in each State and District, with a view to promoting consumer awareness. The National Commission was constituted in the year 1988. Hon’ble Mr. S. K.

The Central Council is headed by Minster, In-charge of the Department of Consumer Affairs in the Central Government and the State Councils by the Minister In-charge of the Consumer Affairs in the State Governments. It also provides for a 3-tier structure of the National and State Commissions and District Forums for speedy resolution of consumer disputes. To provide inexpensive, speedy and summary

redressal of consumer disputes, quasi-judicial bodies have been set up in each District and State and at the national level, called the District Forums, the State Consumer Disputes Redressal Commissions and the National Consumer Disputes Redressal Commission respectively. At present, there are 604 District Forums and 34 State Commissions with the National Consumer Disputes Redressal Commission (NCDRC) at the apex. NCDRC has its office at Janpath Bhawan, A Wing, 5th Floor, Janpath, New Delhi. Each District Forum is headed by a person who is or has been or is eligible to be appointed as a District Judge and each State Commission is headed by a person who is or has been a Judge of High Court. It is headed by a sitting or retired Judge of the Supreme Court of India. The National Commission is presently headed by Hon’ble Mr. Justice Ashok Bhan, former Judge of the Supreme Court of India as President and has eight Members, viz. Anupam Dasgupta, Hon’ble Mr. Naik, Hon’ble Justice R.C. Jain, Hon’ble Justice R.K. Batta, Hon’ble Mr. Justice B.N.P. Singh, Hon'ble Mrs. Vineeta Rai, Hon'ble Mr. Vinay Kumar & Hon'ble Mr. Suresh Chandra. The provisions of this Act cover ‘goods’ as well as ‘services’. The goods are those which are manufactured or produced and sold to consumers through wholesalers and retailers. The services are in the nature of transport, telephone, electricity, housing, banking, insurance, medical treatment, etc. A written complaint, can be filed before the District Consumer Forum for pecuniary value of upto Rupees twenty lakh, State Commission for value upto Rupees one crore and the National Commission for value above Rupees one crore, in respect of defects in goods and or deficiency in service. The service can be of any description and the illustrations given above are only indicative. However, no complaint can be filed for alleged deficiency in any service that is rendered free of charge or under a contract of personal service. The remedy under the Consumer Protection Act is an alternative in addition to that already available to the aggrieved persons/consumers by way of civil suit. In the complaint/appeal/petition submitted under the Act, a consumer is not required to pay any court fees but only a nominal fee. Consumer Fora proceedings are summary in nature. The endeavor is made to grant relief to the aggrieved consumer as quickly as in the quickest possible, keeping in mind the provisions of the Act which lay down time schedule for disposal of cases. If a consumer is not satisfied by the decision of a District Forum, he can appeal to the State Commission. Against the order of the State Commission a consumer can come to the National Commission.

    के  #प्रदर्शन और  #शिकायत पर  #सेंट  #पैट्रिक पर  #पांच  #लाख का  #जुर्माना, निजी स्कूलों की मनमानी पर प्रशासन  कार्...
24/03/2026

के #प्रदर्शन और #शिकायत पर #सेंट #पैट्रिक पर #पांच #लाख का #जुर्माना, निजी स्कूलों की मनमानी पर प्रशासन कार्रवाई की शुरुआत.

लेकिन अभी नहीं मिला पूरा न्याय...

"नई किताबें वापस लो..वापस लो."

जब तक सेंट पैट्रिक की नयी किताबों पर रोक नहीं लगेगी तब तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा, पेरेंट्स से अनुरोध हमारा साथ देने के लिए आगे आयें.

#आगरा. शहर के सेंट पैट्रिक जूनियर कॉलेज पर ड्रेस और किताबों की अनिवार्यता व मनमानी के मामले में प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. यह कार्रवाई उन PAPA NGO के निरंतर प्रदर्शन और शिकायतों और जांच के बाद की गई जिनमें अभिभावकों पर निर्धारित दुकानों से ही महंगी किताबें और ड्रेस खरीदने का दबाव बनाए जाने के आरोप सामने आए थे.

जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित आईजीआरएस बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए कि शिक्षा संस्थानों में किसी भी प्रकार के नियमों का उल्लंघन स्वीकार नहीं किया जाएगा. जांच में यह भी पाया गया कि कई विद्यालयों में सत्र शुरू होने से पहले ही बुक-लिस्ट जारी कर निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकों को अनिवार्य बनाया जा रहा था, जिससे अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ रहा था.

प्रशासन ने ऐसे विद्यालयों की पहचान कर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है और संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि ब्लॉक स्तर पर विशेष अभियान चलाकर ड्रेस, किताब, नोटबुक व अन्य सामग्री की बिक्री के नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाए. साथ ही पूर्व में पाठ्यक्रम या ड्रेस बदलने वाले विद्यालयों की भी सूची तैयार कर कार्रवाई की जा रही है, ताकि भविष्य में ऐसी मनमानी दोहराई न जा सके.

पापा संस्था के दीपक सिंह सरीन द्वारा पिछले कई वर्षों से अभिभावकों के हित में चल रहे सतत प्रयासों और जनजागरूकता अभियानों का ही परिणाम है कि अब प्रशासनिक स्तर पर ठोस कदम उठाए जा रहे हैं. यह कार्रवाई निजी स्कूलों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि शिक्षा को व्यापार बनाने की प्रवृत्ति पर अब कठोर निगरानी और दंडात्मक कार्रवाई होगी.

प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ़ पेरेंट्स अवेयरनेस (PAPA NGO) का मानना है कि शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और समान अवसर सुनिश्चित करना प्रशासन और समाज दोनों की साझा जिम्मेदारी है. ऐसे कदम अभिभावकों के विश्वास को मजबूत करने के साथ शिक्षा व्यवस्था को अधिक न्यायसंगत और संतुलित बनाएंगे.

दीपक सिंह सरीन, राष्ट्रीय संयोजक, प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ़ पेरेंट्स अवेयरनेस (PAPA NGO)


🎊🎉🎉🎊🎊🎉हमारे पेज ने 20 लाख व्यूज़ पार कर लिए हैं. यह सिर्फ़ संख्या नहीं, अभिभावकों की जागरूकता और बच्चों के अधिकार की आवा...
21/02/2026

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हमारे पेज ने 20 लाख व्यूज़ पार कर लिए हैं. यह सिर्फ़ संख्या नहीं, अभिभावकों की जागरूकता और बच्चों के अधिकार की आवाज़ है.

यदि आप भी शिक्षा में पारदर्शिता और समान अवसर के पक्ष में हैं, तो इस अभियान से जुड़ें और पेज को लाइक फॉलो करें और एक पैरेंट और छात्र के तौर पर अपडेट रहें.

दीपक सिंह सरीन
संस्थापक
प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ़ पेरेंट्स अवेयरनेस (PAPA NGO)

https://www.facebook.com/share/p/1Fk1T3MeyV/

धन्यवाद

#20 #लाख #व्यूज का विश्वास, यह सिर्फ़ व्यूज़ नहीं, शिक्षा के क्षेत्र में #अभिभावकों का #जागरण है. 🎉🎊

आज जब हमारे फेसबुक पेज ने 20 लाख व्यूज़ का आँकड़ा पार किया तो यह केवल एक डिजिटल संख्या नहीं रही, यह उन लाखों अभिभावकों की धड़कन है जिन्होंने शिक्षा के नाम पर हो रहे अन्याय के विरुद्ध अपनी मौन स्वीकृति वापस ले ली है.

यह उन बच्चों की उम्मीद है, जो समान अवसर का अधिकार लेकर जन्मे हैं.

हर एक व्यू के पीछे एक कहानी है, कहीं किताबों के बोझ से झुका कंधा, कहीं फीस की चिंता में डूबा परिवार, कहीं मान्यता और “सेटिंग” के खेल में उलझा भविष्य और इन्हीं कहानियों ने पापा एनजीओ को केवल एक संस्था नहीं, बल्कि एक आंदोलन बना दिया.

हमारा उद्देश्य कभी प्रसिद्धि नहीं था, हम बहुत से बच्चों के हितार्थ कार्य आज भी बिना बताए कर रहें हैं, हमारा लक्ष्य हमेशा स्पष्ट रहा था रहा है और रहेगा भी की अभिभावक जागरूक हों, छात्र सुरक्षित हों, शिक्षा पारदर्शी हो.

20 लाख व्यूज़ इस बात का प्रमाण हैं कि सच को दबाया नहीं जा सकता. जब समाज साथ खड़ा होता है तो व्यवस्था को सुनना ही पड़ता है. यह उपलब्धि आप सभी की है.... उन अभिभावकों की जिन्होंने डर के बजाय अधिकार को चुना.

यह यात्रा अभी लंबी है, संघर्ष जारी है और विश्वास पहले से कहीं अधिक मजबूत है, आपका यह साथ ही हमारी असली ताकत है.

चलते-चलते बस यही कहूंगा कि सोशल मीडिया पर ही नहीं वास्तविकता के धरातल पर भी एकजुट हो जाइए शिक्षा के क्षेत्र में परिवर्तन आपको अपने सामने देखने लगेगा.

धन्यवाद
दीपक सिंह सरीन, राष्ट्रीय संयोजक, प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ़ पेरेंट्स अवेयरनेस (PAPA NGO)














29/08/2025

दुकानदार ने कहा कि –
बिका हुआ सामान न तो बदला जाएगा और न ही वापस होगा?"

ग़ुस्से में आकर झगड़ा न करें....
क्योंकि आपके पास है 7 दिन का रिटर्न और रिप्लेसमेंट का कानूनी अधिकार।

• चाहे ऑनलाइन शॉपिंग हो या ऑफलाइन स्टोर – सामान ख़राब मिला तो या तो बदलना पड़ेगा या फिर वापस होगा।

• उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 आपको देता है इसकी पूरी ताक़त। अगर आपका हक़ छीना जाए, तो चुप मत रहिए, राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1800-11-4000 पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज कराए।

क्या कीड़े वाली मिठाई को जब्त कर लिया जाएगा और दुकानदारों को फिर से अगली मिठाई बनाने के लिए छोड़ दिया जाएगा, क्यों नहीं ...
31/10/2024

क्या कीड़े वाली मिठाई को जब्त कर लिया जाएगा और दुकानदारों को फिर से अगली मिठाई बनाने के लिए छोड़ दिया जाएगा, क्यों नहीं मानव के जीवन से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कड़े प्रतिबंध लगाएं जाते हैं

अगर आपकी जानकारी में नहीं है तो आपको बता दें कि अब बिल्डरों की मनमानी पर अंकुश लग सकेगा
30/10/2024

अगर आपकी जानकारी में नहीं है तो आपको बता दें कि अब बिल्डरों की मनमानी पर अंकुश लग सकेगा

कमाल की बात यह है कि क्या देसी घी के नाम पर बेचा जा रहा है मिलावटी घी केवल त्योहार पर ही बनाया जाता है या फिर यह साल भर ...
30/10/2024

कमाल की बात यह है कि क्या देसी घी के नाम पर बेचा जा रहा है मिलावटी घी केवल त्योहार पर ही बनाया जाता है या फिर यह साल भर बनता रहता है और पकड़ा केवल त्योहार पर जाता है.... इसका अर्थ जांच विभाग साल भर सोता है और त्योहार पर ही जागता है

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