रिद्धि सिद्धि

रिद्धि सिद्धि Consulting/Business Service

15/06/2026

*"ईश्वर" से शिकायत क्यों है ?*
*उन्होने पेट भरने की जिम्मेदारी*
*ली है, पेटियां भरने की नहीं...*

14/06/2026

अगर आपको नींद ना आ रही हो
तो हाथ में जल लेकर
शिवजी की पांच बेटियों के नाम
जया, विषहरा, शामलिबारी, देव, दोतलि जप
लो
और फिर उस जल लो फूंक मारकर पी लो
तुरन्त नींद आ जाएगी ।

14/06/2026

अगर आप किसी भी साध्य या असाध्य रोग से पीड़ित हैं, दवा चल रही है परन्तु असर कम हो रहा है या नहीं हो रहा है तो नियमित रूप से सुबह शाम 108 बार यानी एक एक माला रुद्राक्ष या तुलसी की माला से जाप करें। जल अभिमंत्रित कर पियें, निश्चित लाभ होगा ।

भगवान विष्णु के इन पवित्र नामों—ॐ अच्युताय नमः, ॐ अनन्ताय नमः, ॐ गोविन्दाय नमः—का जाप शारीरिक-मानसिक कष्टों और अकाल मृत्यु के भय को दूर करने के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।

07/06/2026

Astro Vastu ज्योतिष (कुंडली) और वास्तु शास्त्र का एक अनूठा मिश्रण है。 इसमें घर की दिशाओं और आपकी राशि/ग्रहों का विश्लेषण करके समाधान निकाले जाते हैं。 बिना किसी तोड़-फोड़ के, ग्रहों की स्थिति के अनुसार स्थान और रंगों में बदलाव करके वास्तु दोष दूर किए जा सकते हैं。🌌 जन्म कुंडली और दिशाओं के अनुसार एस्ट्रो वास्तु उपाय अपनी राशि या ग्रह के अनुसार स्थान बदलने से जीवन में सकारात्मकता और समृद्धि आती है -सूर्य (पूर्व दिशा): घर का पूर्वी भाग हमेशा साफ और खुला रखें。 इस दिशा में तांबे के बर्तन या सूर्य यंत्र लगाना शुभ होता है。चंद्रमा (उत्तर-पश्चिम दिशा): यह दिशा मन और धन से जुड़ी है। यहाँ जल का स्थान या एक्वेरियम रखने से मानसिक शांति और धन लाभ होता है。मंगल (दक्षिण दिशा): ऊर्जा और साहस के कारक मंगल के लिए इस दिशा में लाल रंग का प्रयोग या हनुमान जी का चित्र लगाना लाभकारी है।बुध (उत्तर दिशा): व्यापार और बुद्धि के लिए उत्तर दिशा में मनी प्लांट (हरा रंग) रखें या लड्डू गोपाल की पूजा करें。बृहस्पति (उत्तर-पूर्व/ईशान कोण): ज्ञान और धन के लिए इस कोने को सबसे पवित्र रखें。 यहाँ पीले रंग का प्रयोग और पूजा स्थल बनाना श्रेष्ठ है。शुक्र (दक्षिण-पूर्व/आग्नेय कोण): सुख-सुविधाओं के लिए रसोई की दिशा सही होनी चाहिए。 यहाँ सफेद क्रिस्टल या शुक्र यंत्र रखना लाभप्रद है।

💫 बिना तोड़-फोड़ के अचूक उपाय (General Astro Vastu)यदि घर की बनावट में कोई दोष है, तो इन सरल उपायों से नकारात्मक ऊर्जा दूर की जा सकती है -नमक का पोछा: घर में समुद्री नमक (Sea Salt) मिले पानी से पोछा लगाने से घर की नकारात्मक ऊर्जा खत्म हो जाती है。बांसुरी के उपाय: वास्तु दोष निवारण के लिए बुधवार या गुरुवार को घर की उत्तर दिशा में भगवान कृष्ण की बांसुरी रखना अत्यंत शुभ माना जाता है。पिरामिड का उपयोग: बिना तोड़-फोड़ के वास्तु दोष को ठीक करने के लिए घर के मुख्य द्वार या समस्या वाले स्थान पर वास्तु पिरामिड लगाएं।यदि आप किसी विशिष्ट समस्या (जैसे- धन, करियर, या स्वास्थ्य) का सामना कर रहे हैं, तो आप astro vastu को अपना सकते हैं ।

01/06/2026

➡️वात के 80 प्रकार के रोग⬇️

➡️नखभेद 👉नाखूनों का टूटना।
➡️ विपादिका 👉हाथ-पैर फटना।
➡️ पादशूल 👉पैरों में दर्द होना।
➡️पादभ्रंश 👉पैरों पर नियंत्रण न हो पाना।
➡️ पादसुप्तता 👉पैरों का सुन्न होना।
➡️ वात खुड्डता 👉पैर व जांघ की संधियों में वात जन्य वेदना का होना, पिंडली वाली दो हड्डियां, घुटनों के नीचे वाली दो हड्डियों (जंघास्थि और अनुजंघास्थि) टखने से एड़ी तक के हिस्से के जोड़ों में दर्द और लंगड़ापन।
➡️गुल्फ ग्रह 👉 (गुल्फ प्रदेश का जकड़ जाना)- एड़ी के आसपास सात हड्डियों के समूह को गुल्फ प्रदेश कहते हैं।
➡️. पिडिकोद्वेष्टन 👉 पैर की पिंडलियों में ऐंठन जैसा दर्द।
➡️ ग्रध्रसि 👉सायटिका का दर्द। इसमें कमर से कूल्हे की हड्डी में होकर पैर तक एक सायटिका नाड़ी (ग्रध्रसि नाड़ी) में सुई की चुभन जैसा दर्द होता है।
➡️जानू भेद 👉 घुटनों के ऊपर वाली हड्डी। ये दोनों पैरों पर होती है। इसमें टूटने जैसा दर्द।
➡️जानुविश्लेष 👉जानू की संधियों का शिथिल हो जाना।
➡️उरूस्तंभ 👉जानू हड्डी का जकडऩा। यदि दर्दनाशक तेल मलने से दर्द बढ़े तो उरूस्तंभ वात रोग होता है वर्ना नहीं।
➡️ ऊरूसाद 👉ऊरूप्रदेश में अवसाद यानी शिथिलता का अनुभव होना।
➡️पांगुल्य 👉लंगड़ापन।
➡️गुदभ्रंश 👉 गुदा बाहर निकलना।
गुदा प्रदेश में दर्द।
➡️ वृषणोत्क्षेप (अंडग्रंथियों का ऊपर चढ़ जाना)।
➡️शेफ स्तंभ 👉मूत्रेन्द्रियों में जकड़ाहट।
➡️ वंक्षणानाह 👉वंक्षण प्रदेश में बंधन के समान पीड़ा होना।
➡️श्रोणिभेद 👉कूल्हे वाली हड्डी में तोडऩे जैसा दर्द।
➡️ विड्भेद 👉मल स्थान के आसपास तोडऩे जैसी पीड़ा।
➡️ उदावर्त 👉पेट की गैस ऊपर की ओर आना।
➡️ खंजता 👉लंगड़ापन आना।
➡️कुब्जता 👉कूबड़ का होना।
➡️ वामनत्व 👉उल्टी होना।
➡️त्रक ग्रह 👉पृष्ठ ग्रह- पीठ व नीचे तक बैठक वाली स्थान की हड्डी त्रिकास्थि में दर्द होना।
➡️पाश्र्वमर्द 👉पाश्र्व प्रदेश में मर्दन के समान पीड़ा होना।

➡️ उदरावेष्ट 👉पेट में ऐंठन होना।
दिल बैठने जैसा महसूस होना।
➡️हृदद्रव हृदय में द्रवता अर्थात् शीघ्रता से गति का होना।
➡️वक्षोद्घर्ष (वक्षप्रदेश में घिसने के समान पीड़ा)।
➡️ वक्षोपरोध 👉वक्ष:स्थल की गतियां यानी फुफ्फुस व हृदय गति में रुकावट का अनुभव।
➡️वक्ष:स्तोद 👉छाती में सुई चुभने जैसी पीड़ा।
➡️बाहूशोष : भुजा से अंगुली तक मांसपेशियों में दर्द, ऐंठन व जकडऩ। हाथ ऊपर न उठना।
➡️ग्रीवास्तम्भ 👉 गर्दन का जकड़ जाना।
➡️मंथा स्तम्भ 👉गर्दन के पीछे लघु मस्तिष्क के नीचे के हिस्से में जकडऩ व पीड़ा।
➡️कंठोध्वंस 👉गला बैठ जाना।
➡️हनुभेद 👉ठोडी में पीड़ा।
➡️ओष्ठभेद 👉होंठों में दर्द।
➡️अक्षिभेद 👉 आंखों में दर्द।
➡️दन्तभेद 👉दांतों में पीड़ा।
➡️दन्तशैथिल्य 👉दांतों का हिलना।
➡️मूकत्व 👉गूंगापन।
➡️ बाक्संग 👉आवाज बंद होना।
➡️कषायास्यता 👉मुंह कड़वा होना।
➡️ मुखशोष 👉 मुंह का सूखना।
➡️अरसज्ञता 👉रस का ज्ञान न होना।
➡️घ्राणनाश 👉गंध का ज्ञान न होना।
➡️कर्णमूल 👉कान की जड़ में दर्द(कान के पीछे वाला हिस्सा कंठ से कुछ पूर्व का भाग तक) कनफेड़ रोग इसी में होता है।
➡️अशब्द श्रवण 👉 ध्वनि न होते हुए भी शब्दों का सुनना।
➡️उच्चै:श्रुति : ऊंचा सुनना।
➡️ बहरापन।
➡️वत्र्म स्तंभ 👉आंखों की पलकें ऊपर- नीचे नहीं होना।
➡️ वत्र्म संकोच 👉नेत्र में सूजन व पलकें सिकुड़ जाती हैं जिससे आंखें खोलने में परेशानी होने लगती है।
➡️ तिमिर 👉आंखों से धुंधला व कम दिखाई देना।
➡️नेत्रशूल 👉 आंखों में दर्द होना।
➡️ अक्षि व्युदास 👉नेत्रों का टेढ़ा होना।
➡️ भ्रूव्य दास 👉भौंहों का टेढ़ा होना।
➡️ शंखभेद 👉कनपटी में दर्द।
➡️ललाट भेद 👉आंखों के ऊपर वाले हिस्से में पीड़ा।
➡️शिर 👉सिरदर्द।
➡️ केशभूमिस्फुट 👉बालों की जड़ों में विकृति होना।
➡️ अर्दित 👉 मुंह का लकवा।
➡️ एकाग घात 👉 इसमें पेशी शिथिल हो जाती है।
➡️सर्वांगघात 👉यह जन्मजात मस्तिष्क का रोग है।
➡️आक्षेपक 👉 हाथ पैरों को जमीन पर पीटना व बार-बार उठाना, मस्तिष्क में वातनाड़ी दूषित होने पर मिर्गी जैसे झटके आना।
➡️दंडक👉शरीर में वात दृष्टि से पूरे शरीर की मांसपेशियां डंडे की तरह स्थिर हो जाती हैं। इसे दंडापतानक कहते हैं।
➡️तम👉 तमदोष: झुंझलाहट होना।
➡️भ्रम👉 चक्कर आना।
➡️ वेपथु👉कंपकंपी होना,
➡️ जंभाई 👉उबासी आना।
➡️ हिचकी।
➡️विषाद् 👉दुखी रहना।
➡️ अतिप्रलाप👉 बिना बात के निरर्थक बोलना।
➡️शरीर में रूक्षता👉 रुखापन।
➡️ शरीर में परुषिता👉 शिथिलता आना।
➡️ शरीर का काला होना।
➡️शरीर का रंग लाल होना।
➡️नींद न आना।
➡️चित्त स्थिर न रहना।

➡️जानकारी अच्छी लगे तो शेयर जरूर करें 🙏

25/05/2026

आप सभी से आग्रह है हमारे पेज को अधिक से अधिक संख्या में अपने मित्रों, रिश्तेदारों को शेयर करें ।

जल्द ही साइटिका, सर्वाइकल, कमर दर्द, घुटने के दर्द, फ्रोजन शोल्डर, माइग्रेन, सर दर्द के रोगियों की समस्याओं का समाधान इस पेज के माध्यम से किया जाएगा ।

जय गुरुदेव

25/05/2026

यदि आप या आपके परिवार में कोई साइटिका, सर्वाइकल, फ्रोजन शोल्डर, कमर दर्द, गठिया बाय के दर्द से पीड़ित है तो हरसिंगार (पारिजात) के पत्तों का रस या काढ़ा आमतौर पर 15 दिन से लेकर 1 महीने (30 दिन) तक पीना चाहिए ।

जोड़ों के दर्द और साइटिका जैसी समस्याओं में इसे 3-4 सप्ताह तक पीने की सलाह दी जाती है ।

लंबे समय तक सेवन करने से पहले किसी आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें ।

हरसिंगार के सेवन का सही तरीका और सावधानियां:

मात्रा: एक दिन में लगभग 5 से 7 ताज़ी पत्तियों का इस्तेमाल करना चाहिए । इन्हें अच्छी तरह धोकर, पीसकर रस निकालें या 1 गिलास पानी में तब तक उबालें जब तक पानी आधा न रह जाए ।

समय: इसे सुबह खाली पेट लेना सबसे फायदेमंद माना जाता है ।

सावधानी: इसके पत्ते स्वाद में बहुत कड़वे (कसैले) होते हैं । इसे पीने के बाद आधे घंटे तक कुछ न खाएं।

Address

CHARSOO GATE, GHATIYA AZAM KHAN, AGRA
Agra
282003

Telephone

8923903488

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when रिद्धि सिद्धि posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share