18/08/2026
मंगला गौरी व्रत (Mangla Gauri Vrat) हिन्दू धर्म में सावन (श्रावण) मास के मंगलवार को किया जाने वाला एक बेहद महत्वपूर्ण और पवित्र व्रत है। यह व्रत माता पार्वती (माता गौरी) के 'मंगला गौरी' स्वरूप को समर्पित है। इस दिन विधि-विधान से मां पार्वती और भगवान शिव की आराधना की जाती है।
मंगला गौरी व्रत का महत्व (Significance)
* अखंड सौभाग्य और लंबी आयु: सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए यह व्रत रखती हैं।
* मनचाहा वर और विवाह में बाधा निवारण: अविवाहित कन्याएं शीघ्र विवाह और योग्य वर की प्राप्ति के लिए इस व्रत को करती हैं।
* मंगल दोष शांति: ऐसा विश्वास है कि इस व्रत के प्रभाव से कुंडली का मंगल दोष (Mangal Dosha) शांत होता है और वैवाहिक जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
पूजा की मुख्य विशेषता और नियम (Key Rules & Significance of 16)
मंगला गौरी व्रत की पूजा में '16' की संख्या का विशेष महत्व होता है। पूजा की लगभग सभी सामग्रियां 16 की संख्या में ही अर्पित की जाती हैं:
* 16 श्रृंगार की वस्तुएं
* 16 मालाएं या फूल
* 16 प्रकार के फल और सूखे मेवे (पंचमेवा)
* 16 बिस्कुट/लड्डू या आटे के प्रसाद
* आटे का ऐसा दीपक जिसमें 16 बत्तियां जलती हों
पूजन विधि (Puja Vidhi)
* ब्रह्म मुहूर्त और संकल्प: मंगलवार की सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर लाल या पीले रंग के वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
* चौकी स्थापना: एक साफ चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं। उस पर माता मंगला गौरी (माता पार्वती) की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। पास ही भगवान गणेश और कलश की स्थापना करें।
* षोडशोपचार पूजन: सबसे पहले गणेश जी और कलश का पूजन करें। इसके बाद माता मंगला गौरी को जल, दूध, दही, पंचामृत से स्नान कराएं।
* श्रृंगार अर्पण: माता को रोली, चंदन, सिंदूर, महावर, मेहंदी, काजल और 16 प्रकार के श्रृंगार का सामान अर्पित करें।
* प्रसाद और दीप: 16 मुख वाला (या 16 बत्तियों वाला) आटे का दीपक जलाएं। 16, की संख्या में लड्डू, फल, पान, सुपारी, इलायची, और लौंग चढ़ाएं।
* कथा और आरती: मंगला गौरी व्रत की कथा सुनें या पढ़ें, और अंत में कपूर या घी के दीपक से आरती करें।
उद्यापन (Udyapan)
सावन मास के सभी मंगलवार के व्रत पूरे होने के बाद इसका उद्यापन किया जाता है। उद्यापन के दिन हवन किया जाता है और सुहाग की सामग्री, वस्त्र व सामर्थ्य अनुसार दान दक्षिणा सास या किसी सुहागिन ब्राह्मण को दी जाती है।