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27/12/2017

*🚩🌺 -जाने क्याँ हैं तिलक का महत्व-🌺🚩*
तिलक - धार्मिक एवं वैज्ञानिक महत्व
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भारतीय संस्कृति में पूजा-अर्चना, संस्कार, संस्कार विधि, मंगल कार्य, यात्रा गमन, शुभ कार्यों के प्रारंभ में माथे पर तिलक लगाकर उसे अक्षत से विभूषित किया जाता है । तिलक केवल धार्मिक मान्यता नहीं बल्कि इसके पीछे कई वैज्ञानिक कारण भी है । ज्योतिष के अनुसार तिलक लगाया जाए तो कुंडली के कई ग्रह दोष स्वतः ही समाप्त हो जाते हैं । तिलक पूजा और भक्ति का प्रमुख अंग है । तिलक का अर्थ है भारत में पूजा के बाद माथे पर लगाया जानेवाला निशान । उत्तर भारत में आज भी तिलक आरती के साथ आदर सत्कार स्वागत कर तिलक लगाया जाता है ।
हिन्दू आध्यात्म की असली पहचान है तिलक । तिलक का आध्यात्मिक महत्व यह है कि माथे के बीचों बीच आज्ञाचक्र होता है जो कि प्रमुख तीन नाड़ियों इड़ा, पिंगला व सुषुम्ना का त्रिवेणी या संगम है और यह गुरू स्थान भी कहलाता है । यह चेतना का केन्द्र होने से पूरे शरीर का संचालन करता है । ध्यान योग करते समय मन को इसी स्थान पर एकाग्र किया जाता है । तिलक लगाने से दो प्रभाव दिखते हैं पहला जो तिलक लगाता है उसके स्वभाव में सुधार और दूसरा देखने वाले पर सात्विक प्रभाव होता है ।
तिलक हमेशा भौंहो के बीच ‘‘ आज्ञाचक्र ’’ भ्रुकुटी पर किया जाता है जो कि चेतना केंद्र भी कहलाता है एवं हमारे चिंतन-मनन का स्थान है , यह चेतन-अवचेतन अवस्था में भी जागृत एवं सक्रिय रहता है । तिलक कई पदार्थों जैसे हल्दी, सिन्दूर, केशर, भस्म और चंदन आदि से लगाया जा सकता है पर पुरूष को चंदन व स्त्री केा कुंकुंम भाल में लगाना मंगलकारक कहा गया है । ‘‘ स्नाने दाने जपे होमो देवता पितृकर्म च । यदि तिलक लगाये बिना तिर्थ स्नान, जप कर्म, दान कर्म, यज्ञ होमादि, पितर हेतु श्राद्ध कर्म तथा देवों को पुजनार्चन कर्म किये जाएं तो ये कर्म निष्फल हो जाते हैं ।
*सोमवार - भगवान शंकर का दिन एवं इस वार का स्वामी ग्रह चंद्रमा है । मस्तिष्क को शीतल और शांत रखने के लिए सफेद चंदन का तिलक लगाएं । विभूति या भस्म तिलक भी लगा सकते हैं ।
*मंगलवार - भगवान हनुमान जी का दिन एवं स्वामी ग्रह मंगल है । मंगल लाल रंग को प्रतिनिधित्व करता है, लाल चंदन या चमेली के तेल में घुला हुआ सिंदूर का तिलक लगाने से ऊर्जा और कार्यक्षमता का विकास होता है ।
*बुधवार- मां दुर्गा एवं गणेश का दिन माना जाता है । इस ग्रह का स्वामी बुध ग्रह है इस दिन सूखे ंिसंदूर का तिलक इससे बौद्धिक क्षमता तेज होती है ।
*गुरूवार - बृहस्पतिवार का दिन बृहस्पति ऋषि देवताओं का गुरू है । इस ग्रह का देवता ब्रहमा जी एवं स्वामी ग्रह बृहस्पति ग्रह है । गुरू को पीला या सफेद मिश्रित पीला रंग प्रिय है । सफेद चंदन एवं केसर मिलाकर लेप को माथे पर लगाना चाहिए इससे मन पवित्र और सकारात्मक विचार तथा अच्छे भावों का उद्भव तथा आर्थिक परेशानीयों का हल निकल आता है ।
*शुक्रवार - यह दिन भगवान विष्णु की पत्नी लक्ष्मीजी का है तथा ग्रह स्वामी शुक्र ग्रह है । लाल चंदन का तिलक तनाव दूर करता है तथा भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि होती है । इस दिन सिंदूर भी लगा सकते है ।
*शनिवार - यह भैरव, शनि और यमराज का दिन जिसका ग्रह स्वामी शनि ग्रह है । इस दिन विभूत, भस्म या लाल चंदन लगाने से भैरव प्रसन्न हो जाते हैं
तिलक लगवाते समय सिर पर हाथ इसलिए रखते हैं कि सकारात्मक ऊर्जा हमारे शीर्ष चक्र पर एकत्र हो साथ ही हमारे विचार सकारात्मक हो व कार्यसिद्ध हो । हाथ की चारों अंगूलियों और अंगूठे का एक विशेष महत्व है , अनामिका अंगुली शांति प्रदान करती है, मध्यमा अंगुली मनुष्य की आयु वृद्धि करती है । अंगूठा प्रभाव और ख्याति तथा आरोग्य प्रदान करता है, तर्जनी मोक्ष देने वाली अंगुली है । ज्योतिष के अनुसार अनामिका तथा अंगूठा तिलक करने में सदा शुभ माने गए हैं । अनामिका सूर्य पर्वत की अधिष्ठाता अंगुली है । यह अंगुली सूर्य का प्रतिनिधित्व करती है । अंगूठा हाथ में शुक्र का प्रतिनिधित्व करता है और शुक्र ग्रह जीवन शक्ति का प्रतीक है ।
तिलक लगाने के मंत्र:
1. केशवानन्न्त गोविन्द बाराह पुरूषोत्तम ।
पुण्यं यशस्यमायुष्यं तिलकं में प्रसीदतु ।।
2.कान्ति लक्ष्मीं धृतिं सौख्यं सौभाग्यमतुलं बलम्। ददातु चन्दनं नित्यं सततं धारयाम्यहम् ।।
संकलन:9270519292

26/12/2017

*धूनी या धूप देने से होने वाले लाभ।*
:- हिंदू धर्म के अनुसार घरों में धूनी (धूप) देने की परंपरा काफी प्राचीन है। धूप देने से मन को शांति और प्रसन्नता मिलती है। साथ ही, मानसिक तनाव दूर करने में भी इससे बहुत लाभ मिलता है। घरों में धूनी देने के लिए कई तरह की चीज़ें आती है। आइए जानते है किस चीज़ की धूनी करने से क्या फायदे होते है।

कर्पूर और लौंग (Karpoor and Laung Ki Dhooni)-
रोज़ाना सुबह और शाम घर में कर्पूर और लौंग जरूर जलाएं। आरती या प्रार्थना के बाद कर्पूर जलाकर उसकी आरती लेनी चाहिए। इससे घर के वास्तुदोष ख़त्म होते हैं। साथ ही पैसों की कमी नहीं होती।

गुग्गल की धूनी (Guggul Ki Dhooni)-
हफ्ते में 1 बार किसी भी दिन घर में कंडे जलाकर गुग्गल की धूनी देने से गृहकलह शांत होता है। गुग्गल सुगंधित होने के साथ ही दिमाग के रोगों के लिए भी लाभदायक है।

पीली सरसों (Pili Sarson)-
पीली सरसों, गुग्गल, लोबान, गौघृत को मिलाकर सूर्यास्त के समय उपले (कंडे) जलाकर उस पर ये सारी सामग्री डाल दें। नकारात्मकता दूर हो जाएगी।

धूपबत्ती (Dhoopbatti)-
घर में पैसा नहीं टिकता हो तो रोज़ाना महाकाली के आगे एक धूपबत्ती लगाएं। हर शुक्रवार को काली के मंदिर में जाकर पूजा करें।

नीम के पत्ते (Neem Ke Patte)
घर में सप्ताह में एक या दो बार नीम के पत्ते की धूनी जलाएं। इससे जहां एक और सभी तरह के जीवाणु नष्ट हो जाएंगे। वही वास्तुदोष भी समाप्त हो जाएगा।

षोडशांग धूप
अगर, तगर, कुष्ठ, शैलज, शर्करा, नागर, चंदन, इलायची, तज, नखनखी, मुशीर, जटामांसी, कर्पूर, ताली, सदलन और गुग्गल, ये सोलह तरह के धूप माने गए हैं। इनकी धूनी से आकस्मिक दुर्घटना नहीं होती है।

लोबान धूनी (Loban Dhoop)
लोबान को सुलगते हुए कंडे या अंगारे पर रख कर जलाया जाता है, लेकिन लोबान को जलाने के नियम होते हैं इसको जलाने से पारलौकिक शक्तियां आकर्षित होती है। इसलिए बिना विशेषज्ञ से पूछे इसे न जलाएं।

दशांग धूप (Dashang Dhoop)
चंदन, कुष्ठ, नखल, राल, गुड़, शर्करा, नखगंध, जटामांसी, लघु और क्षौद्र सभी को समान मात्रा में मिलाकर जलाने से उत्तम धूप बनती है। इसे दशांग धूप कहते हैं। इससे घर में शांति रहती है।

गायत्री केसर (Gayatri Kesar)
घर पर यदि किसी ने कुछ तंत्र कर रखा है तो जावित्री, गायत्री केसर लाकर उसे कूटकर मिला लें। इसके बाद उसमें उचित मात्रा में गुग्गल मिला लें। अब इस मिश्रण की धूप रोज़ाना शाम को दें। ऐसा 21 दिन तक करें।

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