Anita Sharma. Digital Mom

Anita Sharma. Digital Mom महिलाओं के लिए घर बैठे बिजनेस करने का एक सुनहरा मौका! women power..

23/02/2026

क्या आपने कभी इस पर ध्यान दिया है।नहीं ना तो आगे से ध्यान दीजिए देखिए आपके आसपास तो यह ऐसा घटित नहीं हो रहा है, शहरों मे...
23/02/2026

क्या आपने कभी इस पर ध्यान दिया है।
नहीं ना तो आगे से ध्यान दीजिए देखिए आपके आसपास तो यह ऐसा घटित नहीं हो रहा है, शहरों में जगह जगह हाई प्रोफाइल लोकेशन में कम उम्र, वयस्क युवतियां और महिलाएं आपको मेहंदी लगवाती दिख जाएंगी।

करवाचौथ और त्यौहारी सीजन में तो इतनी भीड़ हो जाती है कि मेहंदी लगाने वाले लड़के मुँह मांगे पैसे वसूल करते हैं।

आज ही मैंने देखा कि 4 लड़के 4 लड़कियों के हाथों में मेहंदी लगा रहे थे और काफी स्मार्ट और मेन्टेन लग रहे थे। मेरी समझ में ये नहीं आया कि क्या उन स्मार्ट पड़ी लिखी लड़कियों को ये नही दिखता कि गली गली यूँ मेहँदी लगाने वालों के पास इतना सजने सवरने के लिए समय और पैसा कहाँ से आता होगा ।
या इनके पास पैसा है तो ये छोटा सा काम क्यों कर रहे हैं?

4 लड़के मेहँदी लगा रहे थे मैं इस तरह वहाँ खड़ा हो गया कि वो लड़के मुझे किसी युवती का भाई या कोई रिश्तेदार समझें। एक युवक ने मेहंदी लगाने के बाद युवती से कहा कि आपका हाथ गज़ब लग रहा है मैडम " युवती शर्मा गई और युवक ने आँखों-आँखों में मुस्कान फेंकी ..और कुछ न कुछ ऐसे बोलना कि वो नव यौवनाएं उनसे प्रभावित हों।

फिर युवती गदगद मन से 200 रु देकर मेहंदी लगा हाथ सँभालते हुए रवाना हो गई। शहरी क्षेत्र में अनेक इंजीनियरिंग और एमबीए की स्टूडेंट्स पीजी के रूप में रहती हैं। मेरे समझ के बाहर की बात है कि अपने शहर से दूर पढ़ने के लिए आई युवती को मेहंदी और सौंदर्य प्रसाधनों की आवश्यकता क्यों है।

बहरहाल मैंने चारों लड़कों से उनके नाम पूछे लड़के हिचकिचाये, कुछ और नाम बताये, मैंने कहा कि ID दिखाओ, ID में लड़कों के नाम
चारों नाम गौर से पढ़िए
1.रुसलान 2.अल्तमष 3.मुज़म्मिल 4.वहीद

साथियो, हमारी बेटियों बहनो का हाथ पकड मेहंदी लगाते यह शातिर शिकारी लोग इन भोली-भाली बच्चियों को किधर मोड़ ले जाएं, कुछ मालूम नहीं !!
मेरे समझ के बाहर का विषय है कि अब घर में माँ बहन और बेटी एक दूसरे के हाथ में मेहंदी क्यों नहीं लगा सकती...
बाहर जाकर मेंहदी लगवाना कौनसा फैशन है!

20/02/2026

माय लॉर्ड, मुझे सिर्फ 10 मिनट चाहिए... और उन 10 मिनटों में एक साधारण छात्र ने देश की सबसे बड़ी अदालत को अपना फैसला बदलने...
17/02/2026

माय लॉर्ड,
मुझे सिर्फ 10 मिनट चाहिए... और उन 10 मिनटों में एक साधारण छात्र ने देश की सबसे बड़ी अदालत को अपना फैसला बदलने पर मजबूर कर दिया।

जबलपुर के अथर्व चतुर्वेदी की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है। NEET में 530 अंक आए थे। सरकारी कॉलेज थोड़े से अंकों से चूक गया और निजी कॉलेजों में EWS आरक्षण नहीं था। पिता की इतनी हैसियत नहीं थी कि प्राइवेट की पूरी फीस भर सकें या सुप्रीम कोर्ट में महंगा वकील कर सकें।

अथर्व ने हार मानने के बजाय भारत का संविधान उठाया। खुद कानून पढ़ा। खुद अपनी याचिका ड्राफ्ट की। दिल्ली जाने के पैसे नहीं थे, तो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जबलपुर से ही पैरवी की।

सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में ऐसा कम ही होता है जब कोई 18-19 साल का लड़का CJI की बेंच के सामने खड़ा होकर दलीलें दे। उनकी मासूमियत और तर्कों में इतना दम था कि सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 —जो कोर्ट को 'पूर्ण न्याय' करने की विशेष शक्ति देता है,उसका इस्तेमाल किया और अथर्व को MBBS में प्रवेश देने का आदेश सुनाया। इस फैसले से सब लोग आश्चर्य है। अथर्व के जज़्बे को सलाम।

ना थके हैं कभी पैर,ना कभी हिम्मत हारी है, हौसला है जिंदगी में ,कुछ कर दिखाने का , इसीलिए अभी सफ़र जारी है...........    ...
02/02/2026

ना थके हैं कभी पैर,ना कभी हिम्मत हारी है,
हौसला है जिंदगी में ,कुछ कर दिखाने का ,
इसीलिए अभी सफ़र जारी है...........

20/01/2026

19/01/2026

11/01/2026

🙏 मेरी उड़ान को रोक पाना आसान नहीं
मैं उन पंखों से उड़ती हूँ जो तूफानों में बने हैं 🙏😎

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