24/01/2024
रूठे सजना को कैसे मनाऊ' मै?
लागे अब रूठकर टूट जाऊ' मै
किस्मत का खेल भी बडा अजीब हूआ है
दिल की तिजोरी बन्द करके गरीब हुआ है
देखकर मुह फेरता है आते जाते
बता देता कि किसने कान भरा तो उसे समझाते
कब तक किस्मत आजमाऊ' मै
रूठे सजना को....
सूने पडे दिल के सि'हासन पर उसको बिठाते
सोलहो' सि'गार करते और पिया को रिझाते
मै बनकर दुल्हन उसके घर जाती
लाखो' बहाने करती फिर रात भर सिर दबवाती
खुद को कितना फुसलाऊ' मै
रूठे सजना को....
ग्रहन लगा दू'गी राजा तुझको शौत को न दू'गी
अब तो तेरे संग जिऊ'गी और तेरे संग मरू'गी
तूने छेडा है मेरे दिल का तराना
सब कुछ तेरे हवाले करू'गी अब तो आ मान जा ना
खुद को कितना रुलाऊ' मै
रूठे सजना को.....
मै जनम जनम मिलन के वादे आज ही करू'गी
तुझको पुकारने के बाद यहा' फिर मै ना रुकू'गी
इस घडी के बाद ना मिलू'गी मै
तुमको पुकारती हुई' जिन्दगी भर हा'थ मलू'गी मै
तुम मूरख को कैसे समझाऊ' मै
रूठे सजना को...
नोट:नायिका पहले खुद से बात करती है बाद मे नायक से बात करती है!
गीत:हिन्दी
गीतकार अमितेन्द्र कुमार