SarlaShyam

SarlaShyam Writer,poet,lyricist in Hindi,Enlish,Sanskrit&Bhojpuri.

24/01/2024

रूठे सजना को कैसे मनाऊ' मै?
लागे अब रूठकर टूट जाऊ' मै
किस्मत का खेल भी बडा अजीब हूआ है
दिल की तिजोरी बन्द करके गरीब हुआ है
देखकर मुह फेरता है आते जाते
बता देता कि किसने कान भरा तो उसे समझाते
कब तक किस्मत आजमाऊ' मै
रूठे सजना को....
सूने पडे दिल के सि'हासन पर उसको बिठाते
सोलहो' सि'गार करते और पिया को रिझाते
मै बनकर दुल्हन उसके घर जाती
लाखो' बहाने करती फिर रात भर सिर दबवाती
खुद को कितना फुसलाऊ' मै
रूठे सजना को....
ग्रहन लगा दू'गी राजा तुझको शौत को न दू'गी
अब तो तेरे संग जिऊ'गी और तेरे संग मरू'गी
तूने छेडा है मेरे दिल का तराना
सब कुछ तेरे हवाले करू'गी अब तो आ मान जा ना
खुद को कितना रुलाऊ' मै
रूठे सजना को.....
मै जनम जनम मिलन के वादे आज ही करू'गी
तुझको पुकारने के बाद यहा' फिर मै ना रुकू'गी
इस घडी के बाद ना मिलू'गी मै
तुमको पुकारती हुई' जिन्दगी भर हा'थ मलू'गी मै
तुम मूरख को कैसे समझाऊ' मै
रूठे सजना को...
नोट:नायिका पहले खुद से बात करती है बाद मे नायक से बात करती है!
गीत:हिन्दी
गीतकार अमितेन्द्र कुमार

24/01/2024

नोट:तवायफ कहती है
तुम यू* मेरे दिल पे हा'थ ना रक्खो कि मै बदनाम बहुत हू
अब मै और सह ना सकू'गी कि मै अब परेशान बहुत हू'
इन्सानियत मर गयी मेरी पडी हू' एक बुत की तरह
लाखो' अरमान खेलते है' मुझमे एक रुत की तरह
लोग अपना घर भूल जाते है' इतनी सी मै पहचान बहुत हू'
तुम यू* मेरे....
मर्दो' के जज्बात का मात्र शौक बनकर रह गयी हू'
मेरे पीछे कोई मत आना परिवार से कहकर गयी हू'
देखने मे ईद का चा'द हू' और पाने को मै आसान बहुत हू'
तुम यू* मेरे दिल पे......
मेरे जिस्म की प्यास मे जहान है पर कोई मेरा नही है
एक अंधेरे कमरे मे कैद हू' यहा' कोई सवेरा नही है
अपने घर से भटक गयी हू इसीलिये तो मै आम बहुत हू'
तुम मेरे दिल....
बाप से बिछड़ कर के परायो' की दुल्हन बन गयी हू'
ज़ख्मो पे क्रीम रख दो मै घाव असहन बन गयी हू'
टूटे दिलो' की दूकान हू' इसी कारण से मै सरेआम बहुत हू'
तुम मेरे दिल पे.....
गीत:हिन्दी गज़ल
गीतकार:अमितेन्द्र कुमार

17/07/2023

मुझे अपनी किताब मे कही' न रखते होगे
हम दिल तुम्हारे नाम लिखते है'!
आप हमे पहचानते भी नही जरा सा और
आप हमारे दिल मे रहते है'!!

What an amazing pick to some one.From the cute croud which is a run.No fairy can tame to a rigid soldier.Who fills brave...
06/06/2023

What an amazing pick to some one.
From the cute croud which is a run.
No fairy can tame to a rigid soldier.
Who fills bravery in each the folder.
What a joyous word Love is clearly!
Which drips the romance all overly.
Beautiness is discosted by Heart.
There is no doubt and place for flirt.
A fair man is defeated by the black.
Who collects the sweetness in sack.
All have to deliver like the present.
Crimson pack of bangle very decent.
Once the love starts for never stays.
A slow sound roars to block the ways.
Foreheads bent down and silently darks.
The ritual of forefathers alaround barks.
A new man has abolished caste level.
How he is deared who is a blood rebel!
What the taste of a homeless unguess!
The couple runs in the eyes in the press.
Poet:Amitendra Kumar Shukla'Shukla'

सिकन्दर हू* यार मै अपनी तकदीर सेमुझे क्या लेना किसी पीर से फकीर  से
06/06/2023

सिकन्दर हू* यार मै अपनी तकदीर से
मुझे क्या लेना किसी पीर से फकीर से

11/05/2023

जाने कउन रोगवा धराइल बा,पखवारी भर से हमके निदिया न आइल बा!पखवारी भर से2.....
कउन कसूर के सजा पाइल बा,पखवारी भर से हमके निदिया न आइल बा!
तोहरा मीलब भइल बाटे पाप
बेअसर भइल जादू मन्तर जाप2
जाने कउन करनी कमाइल बा,पखवारी भर से........
रब्बा मउत हो नाही हो प्यार
पागल हो गइल जियरा हमार
निभावे के किरिया उठाइल बा,पखवारी भर से.......
केहू गइल त ओकर नाम भइल
रहबे ही दुनिया मे मोहाल भइल
पिरितिया के रब उपरे बसाइल बा,पखवारी भर से.......
गीतभाषा:भोजपुरी
गीत भाव:बिरह
गीत का प्रकार:लोकगीत

10/05/2023

In the kingdom of Mahishmati, Shivudu falls in love with a young warrior woman. While trying to woo her, he learns about the conflict-ridden past of his fami...

10/05/2023

Song: Jaa Re Kaare Badra BalamMovie: Dharti Kahe Pukar ke (1969)Actor(s): Nanda & JeetendraSinger(s): Lata MangeshkarMusic: Laxmikant PyarelalLyricist: Majr...

07/05/2023

अपना बनकर क्यो' घात किया ये बता दो
किस बिल अब मे रहती हो अपना पता दो
अच्छा व्यापार है तुम्हारा ये मोहब्बत का
जान से ही खेलना पेशा है कमबखत का
मुझसे रहो सावधान ये गेट पर लिखा लो
अपना.....
नागिने भी यार को डसती नही ये सुना था
अपना बनाकर कत्ल होते है' अनसुना था
क्यो' रंज है तुम्हे ये बताकर मुझे सजा दो
अपना......
हमसे ही मान्ग लेती हमारी जान को तुम
हँसकर हो जाते हम पूरे जहान से गुम
दामन पे बिखरे मेरे खून के छी'टे मिटा लो
अपना.....
विश्वास से खेलना बन्द कर दीजिये आप
अब किसी पर कभी होगा नही बाप रे बाप
पकड़ गयी हो अपने गुनाहो' से पर्दाहटा दो
अपना.....
दुश्मनी करके जिन्दा हम होते मरमिटे प्यार मे
शहर की दाल न गली लुट गये हम बाजार मे
गुजारिश है अपनी दुकान पे रेट बोर्ड टँगा दो
अपना....
कवि:अमितेन्द्र कुमार शुक्ला'शुकुल'

27/03/2023

तुम लौट आओ कि तबियत बडी उदास रहने लगी है
जी रहा हू* मै जुगाड़ से पर मौत आवाज देने लगी है
कभी सोचता हू मनाऊ तुम्हे कभी सोचता हू रूठ जाऊ
कभी सोचता हू पास आऊ तेरे कभी सोचता हू दूर जाऊ
पुकारने को तुम्हे मेरा दिल चाहता है लिए शिकवा शिकायत
कभी तुम मजबूर दिखते हो कभी लगते हो करते अदावत
अपने पैगामो मे तुम्हे अब हवा भी बेवफा कहने लगी है
जी रहा हू...
कभी आपने दिल जलाया तो कभी जलाया दामन
कमी हमारी है क्यो चुना था हमने आपको साजन

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