01/05/2026
इण्डिया गेट के सामने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा का इतिहास बहुत ही गौरवशाली और प्रतीकात्मक है।
1. प्रतिमा का स्थान (कैनोपी)
इण्डिया गेट के पास जिस छतरी (Canopy) के नीचे नेताजी की प्रतिमा लगी है, वहाँ पहले ब्रिटेन के राजा जॉर्ज पंचम (King George V) की मूर्ति हुआ करती थी। 1968 में उस मूर्ति को हटाकर 'कोरोनेशन पार्क' भेज दिया गया था और तब से यह जगह दशकों तक खाली रही थी।
2. होलोग्राम प्रतिमा का अनावरण
23 जनवरी, 2022 को नेताजी की 125वीं जयंती (पराक्रम दिवस) के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उसी स्थान पर नेताजी की एक होलोग्राम (डिजिटल) प्रतिमा का अनावरण किया था। यह एक अस्थायी समाधान था जब तक कि मुख्य ग्रेनाइट की मूर्ति तैयार न हो जाए।
3. भव्य ग्रेनाइट प्रतिमा
सितंबर 2022 में, होलोग्राम की जगह ग्रेनाइट से बनी स्थायी भव्य प्रतिमा ने ले ली।
• ऊंचाई: यह प्रतिमा 28 फीट ऊँची है।
• वजन: इसका वजन लगभग 65 मीट्रिक टन है।
• निर्माण: इसे तेलंगाना से लाए गए एक विशाल अखंड ग्रेनाइट पत्थर (Monolithic Block) को तराश कर बनाया गया है।
• कलाकार: इस प्रतिमा को मैसूर के प्रसिद्ध मूर्तिकार अरुण योगीराज और उनकी टीम ने तैयार किया है।
4. ऐतिहासिक महत्व
• कर्तव्य पथ: इस प्रतिमा का अनावरण उसी समय हुआ जब 'राजपथ' का नाम बदलकर 'कर्तव्य पथ' किया गया।
• प्रतीक: यह प्रतिमा भारत के औपनिवेशिक इतिहास (Colonial Past) को पीछे छोड़कर अपने वास्तविक नायकों को सम्मान देने का प्रतीक मानी जाती है।
आज यह प्रतिमा इण्डिया गेट की भव्यता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो देश के प्रति नेताजी के बलिदान और अदम्य साहस की याद दिलाती है।