07/09/2016
*महाभारत में माईनिंग इंजीनियर का उल्लेख है।*
महाभारत के युद्ध के बाद एक बार विश्राम करते हुये युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण से प्रश्न किया, "हे माधव! कलियुग मे जब मनुष्य लोभी व अत्याचारी होगा, तब परोपकार, इस संसार का पालन व धर्म का पालन कौन करेगा ?"
श्रीकृष्ण ने उत्तर दिया "हे तात! मैं तुम्हे एक विशेष वर्ग के पुरुषों की कथा सुनाता हूँ। कलियुग में प्रशासक के भिन्न-भिन्न निर्देशों का पालन कर प्रजा की भलाई करने वाले, बुद्धिमान, परोपकारी, परिश्रमी पुरुष जन्म लेंगे। वे विभिन्न कष्टदायक परिस्तिथियों मे भी बिना अन्न जल के भी सूर्यास्त से मध्यरात्रि तक विद्युत द्वारा संचालित यंत्रों पर अनवरत कार्य करेंगे और अपने उच्च पदस्थ अधिकारियों के निर्देशों का पालन करेंगे। वे प्रजा के जीवन को सुखमय बनाने के लिये अपने कुल, देश से दूरस्थ होकर भी तथा नाना प्राकार के कष्टों को झेलते हुए इस संसार का कल्याण करेंगे। वे पराक्रमी पुरुष विकट समस्याओं से भयभीत ना होते हुए न्यूनतम वेतन पर भी श्रम करते रहेंगे। उच्चकुलीन, शालीन, ज्ञानवान व विनम्र होने के कारण वे कभी अपने उच्च पदस्थ अधिकारी व प्रशासक के प्रति आक्रोश व्यक्त नहीं करेंगे तथा न्यूनतम वेतन मे ही किसी प्रकार निर्वाह करेंगे। उच्च पदस्थ अधिकारियों व प्रशासकों द्वारा प्रताड़ित, अपमानित व दण्डित होने पर भी ये लज्जाहीन होकर अपने कर्तव्यों के निर्वहन में संलग्न रहेंगे। हे तात! कालांतर मे ये निरीह परंतु जीवट पुरुष * माईनिंग इंजीनियर* कहलायेँगे तथा संसार का कल्याण करेंगे।"
इति!