Kaif Naseem Shaikh

Kaif Naseem Shaikh छात्र

21/04/2021

A short epilogue for our poetry special

“मरघट का शहंशाह”
लेखन: .singh

उसकी ख़्वाहिशों की तो कोई इंतेहा ही न थी
वो ऊँचे से ऊँचे मक़ामों पर बढ़ता गया
लाशों की सीढ़ियाँ चढ़ता गया
खुदा कहलाने का शौक था जिसे
मरघट का मसीहा बन के रह गया

तुम पत्थर की कब्रें बनाना बंद करो
वो मंच समझकर चढ़ जायेगा
फिर शुरू कर देगा भाषण, ये सोचकर
कोई न कोई मुर्दा तो ज़रूर सुनने आएगा

जिसने दिन रात बस ज़हर घोला हो हवा में
क्यूँ उम्मीद करते हो, तुम्हारे लिए ऑक्सीजन लायेगा
शमशानों कब्रिस्तानों में कम्पटीशन करानेवाला
क्या ख़ाक तुम्हारे लिए हॉस्पिटल बनवायेगा

ऐसा न समझो कि उसे तुमसे मोहब्बत नहीं
या तुम्हारे ज़िंदा रहने में उसे कोई इंटरेस्ट नहीं
बस उससे कुछ कहो मत, सुनते रहो
फिर देख लेना मियाँ, ज़िन्दों की तो क्या ही कहो
वो बहुत जल्द मुर्दों से भी वोट डलवाएगा

Nakuul Mehta

Soft looks, wild thoughts, makes you stronger! 🖤
26/09/2020

Soft looks, wild thoughts, makes you stronger! 🖤

F R I E N D S ❣️
14/08/2020

F R I E N D S ❣️

11/08/2020

अलविदा Dr. Rahat Indori साहब।🙏😭

12/07/2020
24/05/2020

नाम एक दिन में नही बनता
पर एक दिन जरूर बनता है ।

23/05/2020

दोस्त ऐसे बनाओ की अगर कोई तुम्हारे ऊपर उंगली उठाए तो वो उसके ऊपर हाथ उठा दें।
~✍️

Address

Balrampur

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Kaif Naseem Shaikh posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share

Category