Ashish Singh Maun

Ashish Singh Maun ASHISH SINGH MAUN

02/09/2025

उपभोक्तावाद सदैव दूसरे पर निर्भरता को बढ़ावा देता है, यदि विचार करें तो भारतीय जीवन शैली जिसमें वस्त्र से लेकर भोजन तक विविधता पूर्ण समृद्ध संस्कृति की छाप स्पष्ट दिखाई पड़ती है, जिसके लिए हमें किसी और संस्कृति पर निर्भरता की आवश्यकता है ही नहीं, इसलिए वैश्विक बाजार में तटस्थ और लचीलापन अपने हक में बनाए रखने के लिए आवश्यकता है तो सिर्फ अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को गौरवपूर्ण तरीके से स्वीकार करने की, गुलामी की मानसिकता से उबरने की और अपनी भारतीय जीवन शैली को आत्मगौरव से उत्सव पूर्ण जीने की।
इसी प्रकार कृषि के क्षेत्र में अनावश्यक रूप से हमने अपनी आत्मनिर्भरता खोयी है, बाजार इतना हावी हो गया है कि उसने कृषि के ऊपर सब्सिडी और लोन के कृत्रिम ढांचे से अपनी पकड़ इतनी मजबूत बना ली है कि अब हम अपनी आदान, बीज और कृषि यंत्रों की स्वतंत्रता लगभग खो चुके हैं।
गौ आधारित प्राकृतिक खेती इसी चुनौती को समाप्त करने का एकमात्र साधन है लेकिन अफसोस है कि किसान से लेकर प्रशासनिक स्तर पर इसके प्रति शून्यता अभी भी बनी हुई है। अपने खाद्य वस्तुओं को जहरीला बनाने में तथा स्वास्थ्य से समझौता करने में भारतीय कृषि तंत्र स्वयं शामिल हुआ है, जिससे कृषि अर्थव्यवस्था कमजोर हुई है मानव श्रम और कार्य क्षमता और दक्षता में कमी आयी है। जिससे रोगों की एक लम्बी वर्णमाला सीमांत, लघु एवं मध्यम किसान परिवारों के ऊपर इस प्रकार हावी हुई है कि जहां एक ओर जीवन प्रत्याशा घटी है तो दूसरी ओर कृषि आधारित परिवारों की आर्थिक बुनियाद की चिकित्सा खर्चों ने कमर तोड़ कर रख दी है।

गौ आधारित प्राकृतिक खेती (आत्मनिर्भर खेती) , देशी वस्त्र और खान-पान (भारतीय जीवन शैली) हमें व्यापक स्तर पर उपभोक्तावाद के माफिया तंत्र से बचा सकती है।

स्वस्थ विचार करें स्वस्थ रहें।

: आशीष कुमार सिंह 'मौन'
02/सितंबर/2025
+91-8052087052

01/06/2024

विगत 22 मई को *अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस* हम सभी ने मनाया इस बार की थीम the theme of IDB 2024 *“Be part of the Plan”* जनसहभागिता बढ़ाने के लिए रही है , प्रत्येक ग्राम पंचायत का अपना एक बायोडायवर्सिटी रजिस्टर मेनटेन होना चाहिए, आगामी 05 जून को हम *विश्व पर्यावरण दिवस* मनाने जा रहे हैं, मेरा निवेदन है कि अभी इस भीषण गर्मी में जल संरक्षण करने व पेड़ लगाने का संकल्प ले लें, स्थान चयन करके २×२ फीट का गड्ढा खोदकर उसमें सड़ी हुई गोबर खाद डाल दें और पहली बारिश का इंतजार करें, इस पौधरोपण के लिए चयनित स्थान व तैयार गड्ढे में छायादार व फलदार वृक्षों की पौध जैसे अर्जुन , नीम ,आम , जामुन, पलाश, महुआ,पीपल , पाकड़, बरगद, गूलर, अमलतास, करंज, गुलमोहर, मौलश्री, कटहल इत्यादि अवश्य लगाना सुनिश्चित करें, The 2024 edition of World Environment Day will focus on *land restoration, desertification and drought resilience* , under the slogan *“Our Land. Our Future".*

07/01/2024
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20/11/2023

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02/09/2023
17/08/2023

वर्ष 2023 में सरकार और समाज दोनों स्तर पर वृहद वृक्षारोपण किए गए और उत्तर प्रदेश राज्य ने 22 जुलाई और 15 अगस्त को मिलाकर 35 करोड़ वृक्षारोपण का निर्धारित लक्ष्य प्राप्त कर लिया ,मानसून की चुनौती और सुरक्षा प्रबंध इस बात के प्रमाण होंगे कि कितने पौधे परिपक्व हो करके वृक्ष बनेंगे।

इन सबके बीच प्रमुख विषय श्रेणीबध्द तरीके से किस किस प्रकार के और कौन-कौन से पौधे हमें किन परिस्थितियों के अनुसार लगाने चाहिए इसकी SOP हमसे ओझल न हो जाए उसकी समीक्षा करना तथा पंजी बनाना अत्यंत आवश्यक है
जैसे:
१. जल स्रोतों के किनारे कौन से वृक्ष लगाए जाएं।
२. किसानों के खेतों की मेड़ों पर किन- किन किस्मों के वृक्ष लगाए जाएं।
३. ग्राम सभा की गोचर भूमि पर किन- किन किस्मों के वृक्ष व वर्ष भर हरा चारा उत्पादन करने के लिए चरी, बरसीम, सहजन तथा दलहनी पौधे, लोबिया , उड़द- मूंगलगाए जाएं।
४. राष्ट्रीय बांस मिशन को अपने क्षेत्र में सर्वोच्च स्थान दिलाने के लिए किए गए प्रयास।
५. राजमार्गों के किनारे किया गया वृक्षारोपण किन- किन किस्मों के वृक्ष लगाए जाएं।
६. शैक्षणिक संस्थानों तथा आवासीय परिसरों एवं शासकीय परिसरों में वृक्षारोपण के लिए उपयुक्त किन किन किस्मों के पौधे लगाए जाएं।
७. औषधि तथा आयुर्वेदिक महत्व के वृक्ष जो वृक्षायुर्वेद तथा ऋतुचर्या के अनुपालन के लिए उपयोगी हैं।
८. स्थानीय क्लाइमेटिक जोन के अनुसार स्थानीय तथा विलुप्त प्राय पौधों का संरक्षण करते हुए बायोडायवर्सिटी रजिस्टर बनाना, ताकि विलुप्तप्राय किस्मों का संरक्षण किया जा सके।
९. स्थान विशेषता के आधार (मैदानी, तराई ,शीतोष्ण,उपोष्ण, समशीतोषण) क्लाइमेटिक जोन के आधार पर, शीघ्र टिकने वाले तथा स्थानीय पौधों को वरीयता
१०. किसानों को फलदार पेड़ों को लगाने के लिए प्रेरित करना तथा मॉडल फॉर्म विकसित करना।
११. सामुदायिक केंद्रों/भवनों, मठ मंदिरों तथा सार्वजनिक स्थानों पर हरिशंकरी ,पंच पल्लव ,पंचवटी, इत्यादि छायादार वृक्षों का तथा उनकी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना।
१२. गौशालाओं में ईंट के अरघे बनाकर वृक्षारोपण कार्य सुनिश्चित करना ताकि गर्मी के दिनों में गोवंशों को पर्याप्त छाया मिल सके।
१३. वृक्षारोपण को आमजन से जोड़ने के लिए ज्योतिष में विश्वास रखने वाले जातकों को अपने जन्म नक्षत्र वृक्ष को अवश्य लगाना चाहिए।
बच्चों के जन्मदिन के अवसर पर उनके जन्म नक्षत्र वृक्ष लगाएं, इसी प्रकार नवग्रह और राशि वाटिका प्रत्येक ग्राम पंचायत में लगना सुनिश्चित हो।
१४. बुंदेलखंड क्षेत्र में विशेष तौर पर औषधि महत्व के वृक्षों की कटान न की जाए विशेष तौर पर चिरौंजी, तेंदू, महुआ और करंज तथा कैंथ तथा पलाश (टेशू/ढाक) के वृक्षों को विशेष जैव विविधता वृक्षों की सूची में डाला जाए।

इस वर्ष हरियाली माह सावन अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) की भांति हमारे सामने था, हमने वृक्षारोपण करने के साथ उसकी सुरक्षा का ध्यान रखा होगा अब जिन स्थान पर नियमित वर्षा नहीं हो पाई, वहां तारु सिंचन अभियान चलाने की आवश्यकता है- ताकि, जितना श्रम करके हमने उस पौधे को लगाया है, उसकी सुरक्षा की व्यवस्था की है,अब उसके प्यास बुझाने की भी व्यवस्था करनी चाहिए‌।
:आशीष कुमार सिंह 'मौन'

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