29/10/2020
मरहम ना सही मेरा दर्द तो बांट लो दुनिया के राजनीतिक बादशाहो
#बहुत_दुखद_और_दर्दनाक_जीवन जी रहा है गुर्जर समाज और नेता असो आराम कर रहे हैं उनके वोट पर ध्यान देने वाले जब देश आज़ाद हुआ उससे पहले डुगर पट्टी धौला दाता ,भाटाला ,बीच का भाटाला, नवाडेरा,हैदरा की ढाणी, झकुन्डा, नन्दा का डेरा,आदी गाँव गढमोरा व चिरावन्डा ग्राम पंचायत तहसिल नादौती जिला करौली राजस्थान में पहाड के उपर रहने वाले ग्राम वासी है । प्राचीन काल में समृद्ध थे क्योंकि उस समय पहाड पर अच्छी वर्षा होती थी
गाय भैस पालते थे वहा खेती करते थे समय ने पलटा खाया भीषण गर्मी कि वजह से
तालाबो का पानी सुखने लगा चारे पानी की तलास मे लोग पहाड से पलायन करने लगे जिनके पास पैसे थे उन्होन पहाड से निचे जमीन खरीद कर खेती करना सुरू किया जिनके पास पैसे नही है वे आज भी पहाड पर रह कर जीवन यापन करते है गन्दा पानी पिते है सरकारी सुविधा मौलिक सुविधा के इन्तजार में है और बिजली पानी सड़क की माँग माग की तो पता लगा कि आप तो वन विभाग मे रहते हो वन वासी हो, आदी वासी हो, चरवाहे हो, धुमन्तु हो, बनजारे हो,यह कहकर प्रशासन आँख मुँद कर सो गया देश आजाद होने के बाद इनके घरो के पटटे जमीन का रजिस्ट्रेशन आदी अग्रजों से सत्ता आने पर स्थानिय प्रशासन ने रेवेन्यु रिकार्ड मे दर्ज ही नही किया जिसकी बजह से बहा बिजली पानी ओर रास्ते नही बन सके स्कुल नही खुल सके ओर देखते ही देखते भारत वासी कब आदी वासी वन गये इसका पता किसीको नही
जिस दिन मेने पहाड पर यह फोटे खेची थी बच्चो को गन्दा पानी पिने पाली उस दिन रात को दो बजे गाव से दिल्ली आते समय मुह पर मास्क ना लगाने पर पाच सो रुपये का चालान भरा
परन्तु भारत वासी गन्दा पानी पि रहे