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न जायते म्रियते वा कदाचिन्ना, यं भूत्वा भविता वा न भूयः।अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणो, न हन्यते हन्यमाने शरीरे॥अर्थात् -:...
11/02/2022

न जायते म्रियते वा कदाचिन्ना, यं भूत्वा भविता वा न भूयः।
अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणो, न हन्यते हन्यमाने शरीरे॥

अर्थात् -: आत्मा किसी काल में भी न जन्मता है और न मरता है और न यह एक बार होकर फिर अभावरूप होने वाला है। आत्मा अजन्मा, नित्य, शाश्वत और पुरातन है, शरीर के नाश होने पर भी इसका नाश नहीं होता।

08/02/2022

एक संत थे जो हमारी किशोरीजी श्री जानकी जी को अपनी बहन मानते थे..

हमेशा राघव जी से शिकायत करते कि हमने तो बड़ा यश सुनकर आपको अपनी बहन दी थी पर आपने हमारी सुकुमारी लाडली को बहुत कष्ट दिया..

हमने तो लाडली को धरती पे पाँव भी नहीं रखने दिए और आपने उन्हें वन की पथरीली-काटों वाली ज़मीन पे चला दिया..

हमने धूप की एक किरण भी उन पर नहीं पड़ने दी और आपने अग्नि परीक्षा करवा दी..

इतने पर भी आपको सन्तोष नहीं हुआ आपने हमारी बहन को आश्रम भेज दिया..
हमने तो अपनी समझ से अच्छे घर में ब्याहा था पर..

( संतों के भाव उन्हीं के होते हैं, उन्हें जानने को हमें खुद संत होना होगा, या उन भावों को जानकर हम स्वयं संत हो जायेंगे )

संत जी यही सोच कर हमेशा आँखों से आँसू बहाया करते थे..

एक बार की बात है कि ‘विवाह-पंचमी’ आयी.
आज संत जी ने सोचा कि राघव कैसे भी हैं, हैं तो अपने दामाद ही..
उनके लिये रच के माला बनाई, लेकर कनक-बिहारी जू के पास पहुँचे..

पुजारी जी को दे कर बोले इन्हें माला पहना दो..
उत्सव के बीच प्रभु का अद्भुत श्रृंगार था, सो उस माला को किनारे रख दिया गया..

अब संत जी को बहुत कष्ट हुआ, वो मंदिर के पीछे जाकर फूट-फूट कर रोने लगे कि मेरी माला तक नहीं पहनी, इनको इतना घमंड।
इन्हें अपनी पत्नी के भाई का कोई मान नहीं..

इतना रोये इतना रोये कि अब श्री सीताराम जी से नहीं रहा गया..

वो दोनों वहाँ प्रगट हो गए..

बोलिए श्री युगल सरकार की जय !..

राघव ने वही माला पहन रखी थी और श्री किशोरी जी ने संत जी को राखी बांधी..

संत जी प्रेम में मग्न थे, कुछ बोल न सके..
आज जीवन का फल मिल चुका था, श्री सीताराम जी में ही लीन हो गए।

*-प्रस्तुतिकरण-*
*पं. ऋषि राज मिश्रा*
*(ज्योतिष आचार्य)*

*।।जय जय श्री राम।।*
*।।हर हर महादेव।।*

23/01/2022

‼️ मेरे ठाकुरजी‼️
वडोदरा के पास एक गांव, गांव में कृष्ण भगवान के परम भक्त ऐसे मनसुख मास्टरजी स्कूल में बच्चों को बहुत अच्छे से पढ़ाते अच्छी शिक्षा के साथ साथ बच्चों में अच्छे संस्कार देते ।
प्रभु का हर पल चिंतन करते रहते ।

मनसुख मास्टरजी हर पूनम को डाकोर ठाकुरजी के दर्शन के लिए जाते । स्कूल में उन्होंने बच्चों को इतना होशियार बना दिया था कि जिस दिन मास्टरजी ठाकुरजी के दर्शन के लिए जाते उस दिन कोई एक बच्चा स्कूल के सभी विद्यार्थियों को बहुत अच्छी तरह से पढाता ।

इस प्रकार अच्छी तरह से स्कूल की नौकरी और ठाकुर जी की भक्ति से मनसुख मास्टरजी का जीवन चल रहा था ।

गांव के कुछ ईर्ष्यालु लोगों ने वडोदरा के शिक्षणाधिकारी से मनसुख मास्टरजी की शिकायत की कि हमारे गांव के मास्टरजी बच्चों को पढ़ाने के बदले डाकोरजी ठाकुर दर्शन के लिए चले जाते हैं जिससे बच्चों की पढ़ाई खराब होती है ।

दो बार जांच करने के लिए शिक्षणाधिकारी की आफिस से कुछ साहब आए पर उस दिन पूनम न होने के कारण मनसुख मास्टरजी स्कूल में हाजिर थे और स्कूल की प्रार्थना और बच्चों की पढ़ाई और संस्कार देखकर जांच अधिकारी बहुत खुश हुए और ईनाम के रूप में पगार बढ़ाते गये ।

गांव के लोगों को जब इस बात का पता चला तो सभी ने निश्चय किया फिर से शिकायत की जाय इस बार स्पष्ट शब्दों में पूनम के दिन जांच की जाए ऐसा लिखा गया जिससे मास्टरजी हाथों-हाथ पकड़ें जाय और इस बार शिक्षणाधिकारी स्वयं जांच के लिए आए इस पर जोर दिया गया ।

पूनम के दिन सुबह की पहली ट्रेन में मास्टरजी डाकोरजी ठाकुर दर्शन के लिए निकले गये । दूसरी ओर ठीक 11 बजे स्कूल में जांच के लिए शिक्षणाधिकारी साहब गांव में आए । गांव के लोगों ने शिक्षणाधिकारी साहब का स्वागत किया । मास्टरजी की पत्नी को जब इस बात का पता चला गांव में जांच के लिए साहब आएं हैं और मास्टरजी ठाकुर दर्शन के लिए गए हैं । तुरंत वह दौड़ती दौड़ती घर में गयी ठाकुर जी की मूर्ति के समक्ष घी का दीपक जलाया और और ठाकुर जी से कहने लगी हे रणछोड़ राय मेरे पति की नौकरी चली जाए उसकी मुझे कोई चिंता नहीं पर कल सुबह जब यह बात सभी को पता चलेगी तो आप पर कौन भरोसा करेगा । हे ठाकुरजी हमारी लाज रखना । दूसरी ही क्षण डाकोर के ठाकुरजी की मूर्ति में से साक्षात ठाकुरजी अपने भक्त की लाज रखने के लिए मनसुख मास्टरजी का रूप धारण कर गांव की स्कूल में बच्चों को पढ़ाने लग गये । जैसे ही गांव के लोग और शिक्षणाधिकारी जांच करने के लिए आए उन्होंने देखा मास्टरजी आंखें बंद करके कृष्ण की प्रार्थना गा रहे हैं और बच्चे उतनी ही सुंदरता से उनके पीछे पीछे गा रहें हैं । प्रार्थना पूरी होने के बाद मास्टरजी के रूप में आए भगवान ने कहा साहब मुझे पहले खबर कर दी होती तो आप सभी के स्वागत की अच्छे से तैयार करता । शिक्षणाधिकारी ने बच्चों से प्रश्न पूछे होशियार बच्चों ने सभी प्रश्नों का विस्तार से अच्छे जवाब दिए । बच्चों की शिक्षा और संस्कार देखकर शिक्षणाधिकारी साहब बहुत खुश हुए । शिक्षणाधिकारी साहब ने इनाम के रूप में पगार में बढ़ोतरी और एक इन्क्रीमेंट देने की घोषणा की । गांव के लोग अंदर ही अंदर जल कर राख हो गये ।

सही घटना तो अब घटती है, शिक्षणाधिकारी खुश होकर वडोदरा जाने के लिए रेल्वे स्टेशन पहुंचते हैं अचानक सामने से डाकोर जी से ठाकुरजी का दर्शन करके मनसुख मास्टरजी ट्रेन से उतरे, मनसुख मास्टरजी को देख शिक्षणाधिकारी चोंक गये ?

मास्टरजी भी शिक्षणाधिकारी को देखकर घबरा गये, घबराते हुए कहने लगे साहब मुझे अगर पता होता कि आज आप आने वाले हैं तो मैं डाकोर जी ठाकुरजी के दर्शन के लिए नहीं जाता ।

शिक्षणाधिकारी साहब ने कहा मनसुखजी आप मजाक कर रहे हैं ? मैं आपकी स्कूल में जांच करने गया आप खुद पूरे दिन हमारे साथ रहे ? ये सब क्या है ? मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है ?

मनसुख मास्टरजी की आंखें भर आईं और रोते रोते कहने लगे साहब मैं समझ गया, मेरे भगवान ने मेरी लाज रखने के लिए, मेरी नौकरी बचाने के लिए मेरे डाकोर जी के ठाकुरजी कृष्ण भगवान को मास्टरजी बनकर नौकरी करनी पड़ी, वाह मेरे ठाकुरजी, भक्तों के लिए आप कितने रूप धारण करके उनका काम करते हैं । शिक्षणाधिकारी और गांव के लोगों ने जब सारी वास्तविकता सुनी सभी की आंखों से आंसू निकल पड़े । मनसुख मास्टरजी ने तुरन्त एक कागज निकाला और उस पर अपना राजीनामा लिखकर शिक्षणाधिकारी को देते हुए बोले मेरे बदले मेरे ठाकुरजी को नौकरी करनी पड़े ऐसी नौकरी मुझे नहीं करनी है ।
शिक्षणाधिकारी साहब ने गांव के लोगों ने बहुत समझाया गांव के लोग अपनी भूल पर पछताने लगे मास्टरजी से माफी मांगने लगे । मास्टरजी स्कूल में गये जिस कुर्सी पर मुरलीधर भगवान श्री कृष्ण मेरे ठाकुरजी बैठे थे उसकी चार परिक्रमा कर उसे प्रणाम कर चौंधार आंसुओं से रोने लगे, हे मेरे नाथ अखिल ब्रह्माण्ड के मालिक आज आपको मेरे जैसे तुच्छ मानव के कारण मास्टर का रूप धारण कर नौकरी करनी पड़ी, हे प्रभु आज़ आपने यह साबित कर दिया कि आप अपने भक्तों के लिए किसी भी हद तक जा सकते हो वाह मेरे ठाकुरजी वाह ।
🍁🍁🍁🍁
मूल कहानी गुजराती में है। हिन्दी में अनुवाद दिनेशराज पी लीलन द्वारा किया गया ।
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
*शुभम् मंगलम्*

🙏 कान्हा तोमर 🙏

🚩 भीष्म सिलार सेना 🚩

Jain Mandir at Mehasana Gujarat
21/01/2022

Jain Mandir at Mehasana Gujarat

16/01/2022

अधमाः धनमिच्छन्ति धनं मानं च मध्यमाः !*
*उत्तमाः मानमिच्छन्ति मानो हि महताम् धनम् !!*

भावार्थ: *निम्न कोटि के लोगो को सिर्फ धन की इच्छा रहती है, ऐसे लोगो को सम्मान से मतलब नहीं होता. एक मध्यम कोटि का व्यक्ति धन और सम्मान दोनों की इच्छा करता है वही एक उच्च कोटि के व्यक्ति के सम्मान ही मायने रखता है. सम्मान धन से अधिक मूल्यवान है.*
🙏जय श्री राम🙏

HAPPY MAKAR SANKRANTI TO ALL .....
14/01/2022

HAPPY MAKAR SANKRANTI TO ALL .....

13/01/2022

*हमारे परम लाड़ले, भवसागर के महारत्न।
*"""परम पूज्य श्री गुरुदेव जी"""* *के श्री मुख से श्रवण की गई दिव्य अमृतवाणी को आप सभी गुरु-भक्तों के बीच में प्रस्तुत कर रहा हूं।* *प्रस्तुत दिव्य अनमोल वचन के एक-एक शब्द परम पूज्य श्री गुरुदेव जी के श्री मुख से कहे गए दिव्य रत्न है।*
__________________________________________________

*रहता सभी के संग,*
*पर करता न किंचिंत संग है।*
*जो रंग पक्के में रंगा,*
*चढ़ता न कच्चा रंग है।*
*जो भोग आवे भोगता,*
*पर होता न विषयासक्त है।*
*ऐसा विवेकी प्राज्ञ नर,*
*इच्छा बिना ही मुक्त है।।*

रावण द्वारा मारीच को कहना पूज्य गुरुवर की दिव्य वाणी में

*तू चल कर माया मृग बन,*
*जा मैं बाबा जी बन जाऊंगा।*
*तू राम-लखन को बहकाना,*
*मैं सीता को हर लाऊंगा।।*

*मारीच* द्वारा *रावण* को कहना परम पूज्य *श्री गुरुदेव जी* की दिव्य वाणी के द्वारा--

*हरना ही है तो निज दोष हरो,*
*सीता का हरना ठीक नहीं।*
*करना है तो शुभ कार्य करो,*
*चोरी का करना ठीक नहीं।।*
*अच्छे कर्मों के करने से,*
*घर में प्रकाश हो जाता है।*
*और नारी पराई आने से,*
*घर का विनाश हो जाता है।।*

यह वचन *मारीच* के सुनकर *रावण* जब *मारीच* को मारने दौड़ा तो *मारीच* ने निर्णय लिया पूज्य *गुरुवर* की *दिव्य वाणी* के द्वारा---

*परवश तो क्या परवशता है,*
*हर तरह मौत ही आई है।*
*इस और गिरूं तो कुएं में,*
*और इस और गिरूं तो खाई है।।*

*मरना ही है तो रावण के हाथों,*
*मरना निष्फल सा है।*
*प्रभु श्री राम बाण के मरने से,*
*हर तरह पार ये बेड़ा है।।*

और जब मारीच मायावी मृग बनकर पंचवटी की कुटिया में आया तो मां *जानकी* प्रभु श्री राम जी से मृग को पाने का निवेदन करती हैं----

*भला कहीं संसार में,*
*सोने का मृग होय।*
*पर होनहार तो होकर रहे,*
*मिटा सका न कोय।।*

और जब प्रभु *श्री राम* मायावी *मृग* के पीछे- पीछे अपने *धनुष पर प्रत्यंचा* चढ़ाकर चलते हैं तो मन ही मन सोचते हैं-----

*कैसा शिकार और कैसा मृग?*
*वह एक तिलस्मी छाया थी।*
*और मायापति जान रहे थे,*
*वह सब जो होने वाली माया थी।*
*धनुवा पर डोर, डोर पर शर,*
*शर चुटकी में चटकाते थे।*
*और माया मृग के पीछे-पीछे,*
*मायापति भागे जाते थे।।*

श्री लक्ष्मण जी पंचवटी की कुटिया में *लक्ष्मण रेखा* खींचकर जाते हैं और कहते हैं कि

*बोले माता मैं अब जाता हूं,*
*तुम सावधान होकर रहना।*
*आज्ञा के भीतर दास रहा,*
*तुम इस रेखा के भीतर रहना।।*

अब पंचवटी की कुटिया में रावण *बाबा* का रूप धारण करके आता है और *अतिथि* धर्म का पालन करने पर *मां जानकी* *मर्यादा* तोड़ देती है-----

*कितना ऊंचा व्रत है,*
*और कैसा ये भाव विलक्षण है।*
*इस सिया हरण की लीला में,*
*आतिथ्य धर्म ही एक कारण है।*

रावण *बाबा के वेश में* अतिथि बनकर आता है और पंचवटी की कुटिया में बहुत ही अच्छे शब्दों में *भिक्षावृत्ति* की याचना करता है।
परम पूज्य *श्री गुरुदेव जी* के श्री मुख से इस प्रकार है---

ये माई मुझको भिक्षा दे तो,
मस्त बा रहे आला तेरा।
भगवान तुझे जीता रखे,
रहे सदा बोलबाला तेरा।
तू दूधो नहा और पूतो फलो,
और बेटी तू अटल सुहागन हो।
रहे सदा बोलबाला तेरा,
और तू स्वामी की प्रेम पुजारिन हो।

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*🙏सादर जय श्री कृष्ण🙏*
*🌹🌹*

Hari Om
09/01/2022

Hari Om

06/01/2022

*क्षमा*

*एक साधक ने अपने दामाद को तीन लाख रूपये व्यापार के लिये दिये। उसका व्यापार बहुत अच्छा जम गया लेकिन उसने रूपये ससुर जी को नहीं लौटाये।*

*आखिर दोनों में झगड़ा हो गया। झगड़ा इस सीमा तक बढ़ गया कि दोनों का एक दूसरे के यहाँ आना जाना बिल्कुल बंद हो गया। घृणा व द्वेष का आंतरिक संबंध अत्यंत गहरा हो गया। साधक हर समय हर संबंधी के सामने अपने दामाद की निंदा, निरादर व आलोचना करने लगे। उनकी साधना लड़खड़ाने लगी। भजन पूजन के समय भी उन्हें दामाद का चिंतन होने लगा। मानसिक व्यथा का प्रभाव तन पर भी पड़ने लगा। बेचैनी बढ़ गयी। समाधान नहीं मिल रहा था। आखिर वे एक संत के पास गये और अपनी व्यथा कह सुनायी।*

*संतश्री ने कहाः- 'बेटा ! तू चिंता मत कर। ईश्वरकृपा से सब ठीक हो जायेगा। तुम कुछ फल व मिठाइयाँ लेकर दामाद के यहाँ जाना और मिलते ही उससे केवल इतना कहना, बेटा ! सारी भूल मुझसे हुई है, मुझे क्षमा कर दो।'*
*साधक ने कहाः "महाराज ! मैंने ही उनकी मदद की है और क्षमा भी मैं ही माँगू !"*

*संतश्री ने उत्तर दियाः- "परिवार में ऐसा कोई भी संघर्ष नहीं हो सकता, जिसमें दोनों पक्षों की गलती न हो। चाहे एक पक्ष की भूल एक प्रतिशत हो दूसरे पक्ष की निन्यानवे प्रतिशत, पर भूल दोनों तरफ से होगी।"*

*साधक की समझ में कुछ नहीं आ रहा था। उसने कहाः- "महाराज ! मुझसे क्या भूल हुई ?"*

*"बेटा ! तुमने मन ही मन अपने दामाद को बुरा समझा – यह है तुम्हारी भूल। तुमने उसकी निंदा, आलोचना व तिरस्कार किया – यह है तुम्हारी दूसरी भूल। क्रोध पूर्ण आँखों से उसके दोषों को देखा – यह है तुम्हारी तीसरी भूल। अपने कानों से उसकी निंदा सुनी – यह है तुम्हारी चौथी भूल। तुम्हारे हृदय में दामाद के प्रति क्रोध व घृणा है – यह है तुम्हारी आखिरी भूल। अपनी इन भूलों से तुमने अपने दामाद को दुःख दिया है। तुम्हारा दिया दुःख ही कई गुना हो तुम्हारे पास लौटा है। जाओ, अपनी भूलों के लिए क्षमा माँगों। नहीं तो तुम न चैन से जी सकोगे, न चैन से मर सकोगे। क्षमा माँगना बहुत बड़ी साधना है।"*

*साधक की आँखें खुल गयीं। संतश्री को प्रणाम करके वे दामाद के घर पहुँचे। सब लोग भोजन की तैयारी में थे। उन्होंने दरवाजा खटखटाया। दरवाजा उनके दोहते ने खोला। सामने नानाजी को देखकर वह अवाक् सा रह गया और खुशी से झूमकर जोर-जोर से चिल्लाने लगाः "मम्मी ! पापा !! देखो कौन आये ! नानाजी आये हैं, नानाजी आये हैं....।"*

*माता-पिता ने दरवाजे की तरफ देखा। सोचा, 'कहीं हम सपना तो नहीं देख रहे !' बेटी हर्ष से पुलकित हो उठी, 'अहा ! पन्द्रह वर्ष के बाद आज पिताजी घर पर आये हैं ।' प्रेम से गला रूँध गया, कुछ बोल न सकी। साधक ने फल व मिठाइयाँ टेबल पर रखीं और दोनों हाथ जोड़कर दामाद को कहाः- "बेटा ! सारी भूल मुझसे हुई है, मुझे क्षमा करो ।"*

*"क्षमा" शब्द निकलते ही उनके हृदय का प्रेम अश्रु बनकर बहने लगा । दामाद उनके चरणों में गिर गये और अपनी भूल के लिए रो-रोकर क्षमा याचना करने लगे। ससुरजी के प्रेमाश्रु दामाद की पीठ पर और दामाद के पश्चाताप व प्रेममिश्रित अश्रु ससुरजी के चरणों में गिरने लगे।* *पिता-पुत्री से और पुत्री अपने वृद्ध पिता से क्षमा माँगने लगी।* *क्षमा व प्रेम का अथाह सागर फूट पड़ा। सब शांत, चुप !सबकी आँखों से अविरल अश्रुधारा बहने लगी। दामाद उठे और रूपये लाकर ससुरजी के सामने रख दिये।* *ससुरजी कहने लगेः "बेटा ! आज मैं इन कौड़ियों को लेने के लिए नहीं आया हूँ। मैं अपनी भूल मिटाने, अपनी साधना को सजीव बनाने और द्वेष का नाश करके प्रेम की गंगा बहाने आया हूँ ।*
*मेरा आना सफल हो गया, मेरा दुःख मिट गया। अब मुझे आनंद का एहसास हो रहा है ।"*

*दामाद ने कहाः- "पिताजी ! जब तक आप ये रूपये नहीं लेंगे तब तक मेरे हृदय की तपन नहीं मिटेगी। कृपा करके आप ये रूपये ले लें।*

*साधक ने दामाद से रूपये लिये और अपनी इच्छानुसार बेटी व नातियों में बाँट दिये । सब कार में बैठे, घर पहुँचे। पन्द्रह वर्ष बाद उस अर्धरात्रि में जब माँ-बेटी, भाई-बहन, ननद-भाभी व बालकों का मिलन हुआ तो ऐसा लग रहा था कि मानो साक्षात् प्रेम ही शरीर धारण किये वहाँ पहुँच गया हो।*

*सारा परिवार प्रेम के अथाह सागर में मस्त हो रहा था। क्षमा माँगने के बाद उस साधक के दुःख, चिंता, तनाव, भय, निराशारूपी मानसिक रोग जड़ से ही मिट गये और साधना सजीव हो उठी।*
*हमें भी अपने दिल में क्षमा रखनी चाहिए अपने सामने छोटा हो या बडा अपनी गलती हो या ना हो क्षमा मांग लेने से सब झगडे समाप्त हो जाते है*
*-प्रस्तुतिकरण-*
*पं. ऋषि राज मिश्रा*
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*

Ye Hamara Hindustan......
05/01/2022

Ye Hamara Hindustan......

05/01/2022

🍁🍁🍁🍁🍁🍁
*कहीं मिलेगी जिंदगी में प्रशंसा.. तो*,,,,,
🌾🌾🌾🌾🌾🌾
*कहीं नाराजगियों का बहाव मिलेगा..*!!!.
🌻🌻🌻🌻🌻🌻
*कहीं मिलेगी सच्चे मन से दुआ.. तो*,,,,,,,
🥀🥀🥀🥀🥀🥀
*कहीं भावनाओं में दुर्भाव मिलेगा..!!!*
🍃🍃🍃🍃🍃🍃
*तू चलाचल राही अपने कर्मपथ पे*,,,,,
🌿🌿🌿🌿🌿🌿
*'जैसा तेरा भाव' वैसा ही '___प्रभाव__' मिलेगा*
☘️☘️☘️☘️☘️
*सुप्रभात*
🙏🙏🙏🙏

04/01/2022

. *_🌹सूर्योदय अभिनन्दन 🌹_*

*किसी विपत्ति के समय आपको ये सात गुण बचायेंगे:*

*आपका ज्ञान,आपकी विनम्रता, आपकी बुद्धि,आपके भीतर का साहस,आपके अच्छे कर्म,सच बोलने की आदत और ईश्वर में विश्वास !!"*

🍁🌹🍁🌹🍁

*पृथ्वी पर कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं है।*
*जिसको समस्या न हो*

💥 *और*💥
*पृथ्वी पर कोई समस्या ऐसी नहीं है।*
*जिसका कोई समाधान न हो…*

*मंजिल चाहें कितनी भी ऊँची क्यों न हो,*
*रास्ते हमेशा पैरों के नीचे ही होते है।*

🦚🦢🦚🦢🦚

*क्रोध में आप खुद को भी नहीं संभाल सकते ,*

*लेकिन प्रेम से आप पूरी दुनिया को संभाल सकते हो ..*.

🌹🦚🌹🦚🌹

*अतीत के बारे में अधिक मत सोचें,*
*यह आँसू लाता है...*
*भविष्य के बारे में भी अधिक मत सोचें,*
*यह भय लाता है ...*
*आज के पल को मुस्कुराहट के साथ जियें,*
*यह आनन्द लाता है।*

*🙏🏻आपका दिन मंगलमय हो🌹*

🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚

*🙏🏻🌄शुभ प्रभात🌄🙏🏻*

*🙏🏻🌹जय श्री श्याम🌹🙏🏻*

*_27/12/2021_*

🌹

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