06/07/2023
ये कहाँ आ गये हम ??
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मित्रों, आज से करीब 30-40 साल पूर्व चलें तो हम पाएंगे कि गार्जियन ने जो विवाह तय कर दिया, वही फाइनल हो गया। अन्तिम सांस तक ये विवाह निभता था, यानि सेपरेशन की कहीं से कोई गुंजाइश नही। रिश्तेदार लोग ही अगुवाई कर, बातचीत कर विवाह सम्पन्न कराते थे। उस समय ज्यादा लोग अशिक्षित और थोड़े बहुत साक्षर हुआ करते थे, सुशिक्षित तो ना के बराबर थे। हर पत्नी अपने पति की परछाईं बनकर एक धर्मपत्नी की तरह रहती थी। पति-पत्नी भरे पूरे परिवार मे बड़े खुश रहते थे। विवाह तय करने मे लड़के/कन्या की मां, बुआ, मौसी, चाची, मामी, बहन इत्यादि की दखलंदाजी ना के बराबर होती थी। गार्जियन के तौर पे पिताजी स्वयं अकेले या मामा जी को साथ लेते थे और लड़का या लड़की देखकर विवाह तय कर आते थे। किसी को कोई आपत्ति नही होती थी। बड़े मजे से चट मंगनी पट शादी सम्पन्न हो जाती थी।
फिर नया दौर आया और सभी हाई टेक हो गए। इन्टरनेट, ई-मेल, फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप, टेलीग्राम, फोनपे, पेटीएम और गूगल पे इत्यादि के साथ सभी लोग कंप्यूटर, टैबलेट और स्मार्ट फ़ोन डिवाइस से लैस होकर चिपक गए। इनके बिना जिन्दगी अधूरी सी लगने लगी और ये लोगों के जीवनसाथी बन गए।
आर्थिक विकास के साथ आज लोगों की सुख सुविधाएं बहुत बढ़ गईं हैं। लड़के एवम कन्याएं सभी सुशिक्षित और वेल सेटल्ड होकर समाज मे अपने माता-पिता का नाम रौशन करने लगे हैं। सबकी सुविधा के लिए ढेरों मैरिज ब्यूरो, शादी डॉट कॉम, जीवन साथी डॉट कॉम, पेड और फ्री के वैवाहिक व्हाट्सऐप ग्रुप इत्यादि स्थापित हो गए हैं, अब तो सबका शादी विवाह आसानी से हो जाना चाहिए लेकिन इन्सान की दिक्कतें रोज बढ़ती ही जा रही हैं। लोगों की आसमान चूमती महत्वाकांक्षा इसका सबसे बड़ा कारण है। परिवारों मे सामंजस्य नही है। विवाह सम्पन्न भी हो जाय तो कुछ लोग सेपरेशन के डर से डरते रहते हैं। *पहले लोग विवाह तय करने के लिए घर से बाहर निकलते थे और ज्यादातर एक ही बार मे फाइनल कर आते थे लेकिन आज जैसे आलू, प्याज, बैंगन इत्यादि सब्जियां बाजार जाकर काटते छांटते हैं वैसे ही ज्यादातर लोग लड़के और कन्याओं को अपने बच्चे के विवाह के लिए छांटते बराते हैं। मां, बुआ, चाची, मौसी, मामी, बहन इत्यादि इसमे दखलंदाजी कर विवाह को और जटिल बना देते हैं। वो अपने विवाह की स्थितियों को भूला देते हैं। इसका परिणाम सभी लोग भुगत रहे हैं। सभी जानते हैं कि इन्सान का विवाह इन्सान से ही सम्पन्न होगा, इसके लिए स्वर्ग से कोई देवता या अप्सरा तो पृथ्वी पे पधारेंगे नही।
बढ़िया से बढ़िया लड़का या लड़की छांटने के चक्कर मे बहुत देर हो जा रही है, फिर सामाजिक लोक लिहाज के डर से येन केन प्रकारेन समझौता कर कहीं भी विवाह कर डालते हैं। सुशिक्षितों और अति समझदारों को कोई समझा सकता है क्या ? अर्थात् कभी नही।
नेक एवम महत्वपूर्ण निवेदन : विवाह के इच्छुक हर ब्राह्मण गार्जियन को पहली नजर मे जहां कहीं भी कोई लड़का या लड़की उत्तम एवम योग्य लगे, जरूरी संवाद कर तुरन्त विवाह सम्पन्न करें। हीला हवाली कर देर करने की कोई जरूरत नही है। याद रहे कि कोई भी गार्जियन अपने बच्चों के भाग्य का मालिक नही हो सकता है।
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पांडेय जी कहिन.......