Astrologer Brij Mohan Bhardwaj

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आटा गूंथने के बाद गृहणियां उस पर उँगलियों से निशान क्यूँ बनाती हैं!!सनातन परम्परा में अगर ऐसा नहीं किया जाए तो आटे को पि...
11/07/2022

आटा गूंथने के बाद गृहणियां उस पर उँगलियों से निशान क्यूँ बनाती हैं!!

सनातन परम्परा में अगर ऐसा नहीं किया जाए तो आटे को पिंड का रूप मानते हैं जो कि हिंदू धर्म में अशुभ होता है

हिंदू धर्म में पूर्वजों एवं मृत आत्माओं को संतुष्ट करने के लिए पिंड दान की विधि बताई गई है।

पिंडदान के लिए जब आटे की लोई (जिसे पिंड कहते हैं ) बनाई जाती है तो वह बिल्कुल गोल होती है। इसका आशय होता है कि यह गूंथा हुआ आटा पूर्वजों के लिए है।

मान्यता है कि इस तरह का आटा देखकर पूर्वज किसी भी रूप में आते हैं और उसे ग्रहण करते हैं।

यही कारण है कि जब मनुष्यों के ग्रहण करने के लिए आटा गूंथा जाता है तो उसमें उंगलियों के निशान बना दिए जाते हैं।

ताकि वह पिंड न रहे, यह निशान इस बात का प्रतीक होते हैं कि रखा हुआ आटा या लोई पूर्वजों के लिए पिंड नहीं, बल्कि परिजनो के लिए है।

इस कारण से आटे पे उंगलियों से निशान बनाए जाने की प्रथा प्रचलित है

यह भारतीय #सनातन_संस्कृति है जो आदि काल से चली आ रही है 🙏🏻

02/07/2022

2 जुलाई 2022.
7 मे से 6 ग्रह अपने ही घर में रहेंगे.......
No1, मेष में - मंगल
No 2, वृषभ मे - शुक्र
No 3, मिथुन मे - बुध
No 4, कर्क मे - चण्द्रमा
No 5, कुम्भ मैं - शनि
No 6, मीन मे - Guru
नोट : श्रीं राम और श्रीं कृष्ण भगवान के पांच ग्रह स्वग्रही और उच्च थे पर इस बार छह ग्रह स्वग्रही है,
कहा जाता है कि ऐसे ही ग्रहो की माला मे युग पुरुष का जन्म होता है

कोई शुभ कार्य की शुरूवात कर लीजिए जरूर सफल होगा

अपने आसपास या रिश्तेदारो मे किसी बालक - बालिका का जन्म हो तो उसके दर्शन जरूर करना, सम्भव हो तो पैर छु लेना

21/08/2021
14/12/2020 कोसोमवती अमावस्या है इस दिन किये गए उपाय ज्यादा कारगर होते है। इस लिए अगर किसी को विवाह में विलंभ हो रहा है त...
11/12/2020

14/12/2020 को
सोमवती अमावस्या है इस दिन किये गए उपाय ज्यादा कारगर होते है। इस लिए अगर किसी को विवाह में विलंभ हो रहा है तो जल में हल्दी मिला कर पीपल के वृक्ष को चढ़ाए लाभ होगा।
कर्ज मुक्ति के लिए तिल मिलाकर जल पीपल के वृक्ष पर चढ़ाएं कर्ज से मुक्ति मिलेगी।
ग्रह दोष के लिए सरसों के तेल का दीपक पीपल के वृक्ष के आगे जलाएं लाभ होगा।
अगर किसी के घर मे रोज झगड़ा, पति-पत्नी में झगड़ा, गृह क्लेश, व्यपार में नुकसान, आर्थिक तंगी हो तो #शिव-आराधना करें मृत्युंजय मंत्र का जप करें, भगवान शिव की कृपा से सब सही हो जाएगा।

किसी भी प्रकार की समस्याओं का समाधान पाने के लिए संपर्क करें- 9988223800

06/07/2020

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जन्म पत्रिका में कब और कैसे बनते हैं जेल योग
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ज्योतिष के अनुसार मुख्य रूप से शनि, मंगल एवं राहु ये तीन ग्रह कारागार के योग निर्मित करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इसके अतिरिक्त सभी लग्नों में द्वादशेश, षष्ठेश एवं अष्टमेश भी इस तरह के योग बनाने में अपनी भूमिका निभाते हैं। इस प्रकार के योगों के साथ-साथ यदि दशा भी अशुभ ग्रहों की हो, तो उन योगों को घटित होने के लिए उपयुक्त स्थिति मिल जाती है और इस प्रकार की घटना होती है।
कई बार जन्मकुण्डली में ही इस प्रकार के योग बनते हैं, तो कई बार गोचर एवं दशा-अन्तर्दशा के फलस्वरूप अल्प समय के लिए ऐसे योग बन जाते हैं| इस लेख में उक्त आधार पर ही जेल जाने से सम्बन्धित या बन्धन में पड़ने के योगों की चर्चा की जा रही है।
जन्मपत्रिका में सूर्यादि ग्रह समान संख्या में लग्न एवं द्वादश, तृतीय एवं एकादश, चतुर्थ एवं दशम, पंचम एवं नवम, षष्ठ एवं अष्टम में स्थित हो जाएँ, तो यह एक प्रकार का बन्धन योग बनता है यथा; किसी जन्मपत्रिका में द्वितीय भाव में शनि एवं द्वादश भाव में मंगल स्थित है, तो इस स्थिति में यह योग निर्मित होगा, लेकिन यदि द्वितीय में शनि और द्वादश में मंगल के साथ एक और पाप या शुभ ग्रह स्थित हो जाए, तो यह योग भंग हो जाएगा, क्योंकि उक्त दोनों भावयुगलों में समान संख्या में पाप ग्रहों का स्थित होना आवश्यक होता है। इस योग के फलस्वरूप चाहे कोई व्यक्ति कैसा भी क्यों न हो? उसे जीवन में कभी न कभी जेल अवश्य जाना पड़ता है| इस योग में बन्धनयोग कारक उन ग्रहों पर शुभ ग्रहों की दृष्टि भी हो, तो इस योग के फल बहुत अल्पमात्रा में प्राप्त होते हैं| इस जेल यात्रा से जातक को अधिक कष्ट भी नहीं होता है, लेकिन यदि यह योग बनाने वाले पापग्रहों पर अन्य पाप ग्रहों या द्वादशेश की दृष्टि पड़ रही हो, तो यह जेल यात्रा कष्टकारक हो सकती है और लम्बे समय के लिए भी हो सकती है।
यह योग यदि शुभ ग्रहों से निर्मित हो रहा हो, तो इसका अर्थ है कि जातक ने कोई अपराध नहीं किया है अथवा बहुत छोटे से अपराध के लिए उसे सजा भोगनी पड़ी, लेकिन यदि यह योग पाप ग्रहों से निर्मित हो रहा हो, तो इसका अर्थ है उस व्यक्ति ने क्रोध, लालच, ईर्ष्या या द्वेष की भावना के वशीभूत होकर निश्‍चित रूप से अपराध किया है।
यह योग बनाने वाले ग्रह यदि शनि-मंगल या राहु में से कोई होें और साथ ही षष्ठ एवं द्वादश भावों के स्वामी भी यही हों, किसी शुभ ग्रह की इन पर दृष्टि भी नहीं हो और पापग्रहों की दशा भी चल रही हो, ऐसी स्थिति में व्यक्ति को मृत्युदण्ड या उम्रकैद की सजा मिलने की पूर्ण आशंका रहती है|
मिथुन, कन्या एवं मीन लग्न में यह योग अधिक नुकसानदायक होता है, क्योंकि इन लग्नों में त्रिक भावों में किन्हीं दो भावों के स्वामी पाप ग्रह होते हैं, जबकि तुला लग्न में यह योग कम फलप्रद होता है, क्योंकि तीनों त्रिक भावों के स्वामी सौम्य ग्रह हैं| शेष लग्नों में यह योग सामान्य फल देता है।
जन्मपत्रिका में लग्न भाव जातक का स्वयं का प्रतीक होता है। यदि लग्नेश के साथ षष्ठेश (शत्रु कारक) की युति केन्द्र अथवा त्रिकोण भाव में हो और राहु या केतु भी इनके साथ स्थित हों, तो इस स्थिति में भी कारावास योग बनता है| यदि इन दोनों (लग्नेश एवं षष्ठेश) की स्थिति पूर्वोक्त ही हो अर्थात् केन्द्र या त्रिकोण में ही हो और इनकी युति शनि से बन रही हो, तो जातक को जेल जाना पड़ता है| इतना ही नहीं जेल में उसे यातना एवं भूख-प्यास भी सहनी पड़ती है।
तीन ग्रहों की युति के कारण भी जेल योग बनता है यथा; जातक की जन्मपत्रिका के नवम भाव में सूर्य, शुक्र एवं शनि की युति हो, तो किसी अनैतिक कार्य के लिए या ऐसा कार्य जो समाज में अत्यन्त निन्दित हो, के लिए जेल यात्रा होती है| यदि पंचमेश अथवा सप्तमेश शुक्र की युति नवम भाव में शनि एवं मंगल के साथ हो, तो स्त्री सम्बन्धी किसी मामले के कारण कोर्ट केस होता है और कुछ दिन जातक को जेल में ही रहना पड़ता है।
यदि द्वादश भाव में शनि एवं नवम भाव में मंगल स्थित हो, तो जातक को अपने जन्मस्थान से दूर किए गए किसी अपराध के लिए जेल जाना पड़ता है। इतना ही नहीं इस मामले में उसका काफी धन भी खर्च होता है|
द्वितीय एवं पंचम ये दोनों ही भाव व्यक्ति की आर्थिक स्थिति को प्रभावित करते हैं। द्वितीय भाव जहॉं स्थायी धन का कारक है, वहीं पंचम भाव आकस्मिक धन और एकादश भाव से सप्तम होने के कारण लाभ का भी प्रतीक है| यदि शनि, राहु, मंगल, सूर्य एवं केतु ये ग्रह इन दोनों भावों में स्थित हो जाएँ, तो व्यक्ति को टैक्स चोरी, तस्करी, कालाबाजारी इत्यादि धन सम्बन्धित मामलों के कारण जेल जाना पड़ता है| यह भी हो सकता है कि वह किसी अन्य कार्य से जेल जाए, लेकिन उसे आर्थिक हानि बहुत अधिक हो जाए या उसकी सम्पत्ति जब्त कर ली जाए।
प्रसिद्ध ज्योतिषी वराहमिहिर के अनुसार यदि किसी जातक का जन्म सर्प द्रेष्काण, निगड़ द्रेष्काण या आयुध द्रेष्काण में हो, तो कारावास एवं दण्ड के योग बनते हैं। सर्प द्रेष्काण में केवल कारावास या ऩजरबन्दी होती है। आयुध द्रेष्काण में कारावास नहीं होता है, लेकिन प्रताड़ना होती है, जबकि निगड़ द्रेष्काण में कारावास और सजा दोनों प्राप्त होते हैं।
द्वादश भाव जैसा कि हम पूर्व में बता चुके हैं सजा, बन्धन, दबाव इत्यादि से विशेष सम्बन्ध रखता है, में पापग्र्रहों की स्थिति बहुत परेशानीदायक होती है। यदि द्वादश भाव के साथ-साथ द्वितीय भाव में भी उतने ही ग्रह स्थित हो जाएँ, तो स्पष्ट रूप से बन्धन योग बनेगा, लेकिन यदि शनि, राहु या सूर्य इसमें स्थित हों, तो यह आवश्यक नहीं है कि जातक को जेल जाना पड़े, लेकिन ऐसा जातक सदैव किसी न किसी के दबाव में या वश में रहता है। यह दबाव पिता का, माता का, पत्नी का, मित्र का या किसी प्रभावशाली व्यक्ति का भी हो सकता है। ऐसा व्यक्ति कोई भी महत्त्वपूर्ण निर्णय स्वयं नहीं ले सकता है, अन्य किसी व्यक्ति का हस्तक्षेप उसमें अवश्य होता है| इस कारण वह जातक बहुत मानसिक क्लेश और पीड़ा का अनुभव करता है|
यदि द्वादश भाव में मेष, सिंह, वृश्‍चिक, मकर या कुम्भ राशि हो, सूर्य, मंगल, शनि, राहु या केतु में से कोई एक या अधिक ग्रह इस भाव में स्थित हों, षष्ठेश, अष्टमेश या द्वादशेश की इन पर दृष्टि हो, कोई शुभ ग्रह द्वादश भाव को नहीं देख रहा हो और द्वादशेश नवांश में त्रिक भावगत, नीच अथवा शत्रु राशिगत हो, तो इस स्थिति में जातक को अल्पायु में ही जेलयात्रा करनी पड़ती है। यदि अल्पायु में जेल का कष्ट नहीं प्राप्त हो, तो फिर उसे और उसके अन्य परिजनों को भी उसके कारण जेल के दु:ख भोगने पड़ते हैं।
कुछ समय का जेलयोग
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जन्मपत्रिका में नहीं होने पर भी दशा-अन्तर्दशा और गोचर के ग्रहों की अशुभ स्थिति के फलस्वरूप जेलयात्रा हो जाती है यथा; शनि या मंगल की महादशा में द्वादशभावस्थ राहु की अन्तर्दशा आ जाए, गोचरानुसार जन्मकालीन सूर्य पर से शनि या राहु का गोचर हो और द्वादश एवं लग्न भाव भी पाप ग्रह के प्रभाव में हो, तो इसके फलस्वरूप भी बन्धन में पड़ने या कुछ समय के लिए जेल जाने के योग बन सकते हैं।
कैसे बचें कारावास योग से?
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यदि समय रहते आपको कारावास सम्बन्धी योग पता चलते हैं या इस तरह की स्थिति आपके सामने आती है, तो रेमेडियल एस्ट्रोलॉजी की सहायता से आप इस योग को समाप्त या उसकी तीव्रता को कम कर सकते हैं। इस प्रकार के योगों से बचने के लिए निम्नलिखित उपायों का सहारा लेना चाहिए :-
1. सर्वप्रथम यह पता करें कि किन ग्रहों के कारण यह योग निर्मित हो रहा है। फिर उस ग्रह की शान्ति के लिए उसके चतुर्गुणित जप करवाएँ, हवन करें, निश्‍चित संख्या में उससे सम्बन्धित वार के व्रत करें और तदनुसार सम्बन्धित वस्तुओं का दान करें।
2. शुभ मुहूर्त में भगवान् शिव के नर्मदेश्‍वर शिवलिंग पर सात सोमवार तक सहस्रघट करवाएँ।
3. अपनी आयु वर्षों के चतुर्गुणित संख्या में किलोग्राम ज्वार लें और जिस ग्रह के कारण यह योग बन रहा हो, उस ग्रह के वार को या शनिवार को प्रारम्भ कर ज्वार एक-एक मुट्ठी डालते हुए कबूतरों को खिलाएँ।
4. यदि आपने वास्तव में अपराध किया है, तो यह निश्‍चित है कि आपको उसकी सजा मिलेगी, इतना अवश्य है कि उपाय करने से या प्रायश्‍चित से वह सजा कम हो जाएगी। जिस व्यक्ति के प्रति आपने अपराध किया है, उससे क्षमा मॉंगें। इसके अतिरिक्त शनिवार से प्रारम्भ कर किसी शिव मन्दिर में जाएँ और भगवान् के समक्ष अपने सारे अपराध स्वीकार करें| यह ध्यान रखें कि मन्दिर आपके घर के पास में नहीं हो, थोड़ा दूर हो और वहॉं आप नंगे पैर ही जाएँ।
5. शनिवार से प्रारम्भ कर चालीस दिनों तक मूँगा के हनुमान् जी की मूर्ति के समक्ष हनूमान् चालीसा के प्रतिदिन 100 पाठ करें या करवाएँ। पाठ से पूर्व संक्षेप में हनुमान जी की पूजा भी करें।
6. शुभ मुहूर्त में प्रारम्भ कर 11 पण्डितों से ‘बन्दीमोचन स्तोत्र’ के 3100 पाठ करवाएं।

04/07/2020

तवा

तवा और कढ़ाई राहु का प्रतिनिधित्व करते हैं। रसोई को साफ रखें। यदि कोई महिला गंदे तवे या फिर गंदी कढ़ाई को इस्तेमाल में लाती हैं तो इसका सीधा प्रभाव उसे पति पर पड़ता है। इसके अलावा आपके घर के बच्चे या पति नशे में लिप्त हो जाते हैं तो मान कर चलें कि ऐसा राहु के कुप्रभाव के कारण हो रहा है।

इन कारणों से भी घर में वास्तु दोष होता है
1. रसोई अगर गंदी हो या अव्यवस्थित तरीके से रखी जाए तो इससे घर के मुखिया पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
2. बार-बार एक ही तवे या गंदी कढ़ाही को बिना धुले रोटी बनाई जाए तो इससे पुरुषों खास कर पति पर कुप्रभाव पड़ता है।
3. रात में खाना बनाने के बाद बर्तनों को जूठा छोड़ देना। खासकर तवा हमेशा धो कर सुखा कर ही रखें।
4. जो तवा प्रयोग में न हो उसे किचन में न रखें, उसे वहां से हटा कर ऐसी जगह रखें जहां किसी की नजर न पड़े। उसे किसी अलमारी आदि में रख दें।
5. आप जहां भी बर्तन रखते हों वहां यह ध्यान दें कि तवा या कढ़ाही उल्टा न रखा जाएं। यह शुभ नहीं होता।
6. गैस बंद करने के बाद तवा कभी उसके ऊपर न छोड़ें, बल्कि जब वह ठंडा हो जाए तो धो कर बर्तन स्टैंड में रख दें।
7.तवा या कढ़ाई के रखने की जगह आपके खाना बनाने के दाहिने ओर होने चाहिए।
8 तवा नींबू और नमक मिला कर साफ करें। यानी तवा जितना चमकेगा आपकी किस्मत भी उतनी ही चमकेगी।

14/06/2020

आज पढ़े वास्तु नींव खोदने का विचार)
मित्रो,
किसी भी स्तिथी में कभी भी मंगलवार से भूमि पर खुदाई, चिनाई, महुर्त या भूमि सम्बंधी काम नही करने चाहिये। पानी के लिये बोरिंग सदा सोमवार को लाभकारी है, पर राहूकाल बचाना चाहिये।
बाकी महुर्त व प्रारम्भ और पढ़े-
★सूर्य वृष, मिथुन या कर्क (ज्येष्ठ, आषाढ़ या श्रावण) में हो, तो नींव की खुदाई का प्रारंभ नैऋत्य (दक्षिण-पश्चिम) कोण में करें।
★सूर्य सिंह, कन्या या तुला (भाद्र., आश्वि. या तुला) में हो, तो नींव की खुदाई का प्रारंभ आग्नेय कोण (पूर्व-दक्षिण) से करें।
★सूर्य वृश्चिक, धनु या मकर (मार्ग., पौष या माघ) में हो, तो नींव की खुदाई का आरम्भ ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) से करें।
★सूर्य मेष, कुम्भ या मीन (वैशाख, फाल्गु. या चैत्र) में हो, तो नींव की खुदाई का आरम्भ वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम) से करें।

ज्योतिषी बृज मोहन भारद्वाज
मो-9988223800

16/01/2020

# # किचन में न हो मंगल-गुरु योग # #
वास्तु शास्त्र के अनुसार किचन में मंदिर या पूजा स्थल नहीं होना चाहिए। यदि किचन में मंदिर हो या मंदिर के ठीक ऊपर बिजली का मीटर अथवा बिजली का कोई उपकरण लगा हुआ हो तो ऐसे स्थान पर मंगल-गुरु योग प्रभावी होने से अशुभ फल मिलने लगते हैं, जिससे घर के मालिक या उसके किसी पुत्र को रक्त संबंधी रोग होने तथा घर के सदस्यों के घमण्डी व तुनकमिजाज होने की संभावना बनी रहती है।
ज्योतिषी बृज मोहन भारद्वाज
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16/01/2020

।। जय गुरु देव ।।

#ज्योतिष में #ब्रहस्पति

गुरु ज्ञान धन तथा संतान का कारक ग्रह है यदि कुंडली में संतान सुख देखना है तो सबसे पहले गुरु ग्रह की स्थिति को देखा जाता है। गुरु ग्रह विवेक, ज्ञान, ज्योतिषी, पुरोहित, परामर्शी, सत्य, विदेश में घर, भविष्य, सहायता, तीर्थयात्रा,नदी, मीठा खाद्य पदार्थ,विश्वविद्यालय, पान,शाप, मंत्र, दाहिना कान, नाक, स्मृति, पदवी, बडा़ भाई, पवित्र स्थान, धामिर्क ग्रन्थ का पठन, पाठन, गुरु, अध्यापक, धन बैंक,शरीर की मांसलता, धार्मिक कार्य ईश्वर के प्रति निष्ठा, दार्शिकता, दान, परोपकार, फलदार वृक्ष, पुत्र, पति, पुरस्कार, जांघ, लिवर, हार्निया इत्यादि का कारक ग्रह है।

जिन जातको की जन्म कूण्डली में गुरु योगकारक होकर कमजोर अवस्था का हो और शुभ फलौ की कमी हो रही हो । उसके लिए गुरु के ये 10 उपाय गुरु से मिलने वाले शुभ फलौ में बढ़ोतरी कर सकते है ।

1 सर्व प्रथम बड़े बुजर्गो का असिरवाद लेवे एवम उनका समान करे।
2, माथे पर केशर या हल्दी का तिलक रोज लागये।
3, हल्दी की माला से गुरु के बीज मंत्र का जप गुरुवार के दिन एक माला नित्य करे।
मन्त्र : ॐ ब्र बहस्पति नमः
4, नित्य स्नान के पश्चात नाभि पर हल्दी का तिलक लागये।
5, केले अथवा केली केझाड में शूद्ध जल चढ़ये।
6,गुरु की वस्तुओं का नित्य दनिक जीवन मे उपयोग लेवे।
केला ,हल्दी, चना दाल, आम ओर पीली वस्तु का उपयोग में ले इनका दान नही करे।
7,गुरुवार के दिन विशेष तौर पर पिला वस्त्र जरूर धारण करे।
8, लाल ,पिला धागा या रोली हेमशा अपने राइट हैंड पर बांधे
9, सोना धारण करे।
10, कूण्डली में गुरु की स्थत्ति देख कर पुखराज या सुनहला रत्न पीतल या सोना धातु में पहलीअंगुली में धारण करे। गुरवार के दिन।
हल्दी की माला गुरु ग्रह के अधीन है। जिनकी जातको की कूण्डली में गुरु अतियोगकारक है। और शुभ भावो में विराजित है । तो वे जातक हल्दी की माला गुरुवार के दिन शुभ मोहरात में धारण कर सकता है ।धारण करने के लिए माला को पहले पूजित स्थान में रख कर पूजित करे एवम अपनी नाभि पर हल्दी का तिलक लागये ।
गुरु कवच का पाठ करे । केले या केली के झाड़ की।पूजा कर के जल अर्पित करे।
फिर माला को धारण करे। उस दिन गुरुवार का व्रत रखें एवम पीले रंग की गाय को दो केले खिलाये।
ये हल्दी की माला पुखराज रत्न के प्रभाव जितना कार्य करेगी ।
ध्यान रहे जिनकी कूण्डली गुरु योगकारक है पर नीच अवस्था का है या मारक भावो का मालिक है उसको हल्दी की माला धरण नही करनी चईये।
उनके लिए हल्दी की माला से ॐ नमो भगवते वासुदेवाय या ॐ ब्र: ब्रहस्पति नमः मंत्र का जाप नित्य करना चईये हल्दी की माला से ताकि गुरु से मिलने वाले शुभ फलों में वर्दी हो अंशुभ फलो की शांति हो।
याद रहे जो जातक माला धारण करते है वो उस माला से जाप नही करे।।
Astrologer Brij Mohan Bhardwaj
Mob- 9988223800

14/01/2020

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कृपया जान लीजिये कि संक्रान्ति अब 15 जनवरी को क्यों हो रही है?
वर्ष 2008 से 2080 तक मकर संक्राति 15 जनवरी को होगी।
विगत 72 वर्षों से (1935 से) प्रति वर्ष मकर संक्रांति 14 जनवरी को ही पड़ती रही है।
2081 से आगे 72 वर्षों तक अर्थात 2153 तक यह 16 जनवरी को रहेगी।
ज्ञातव्य रहे, कि
सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश (संक्रमण) का दिन मकर संक्रांति के रूप में जाना जाता है। इस दिवस से, मिथुन राशि तक में सूर्य के बने रहने पर सूर्य उत्तरायण का तथा कर्क से धनु राशि तक में सूर्य के बने रहने पर इसे दक्षिणायन का माना जाता है।
सूर्य का धनु से मकर राशि में संक्रमण प्रति वर्ष लगभग 20 मिनिट विलम्ब से होता है। स्थूल गणना के आधार पर तीन वर्षों में यह अंतर एक घंटे का तथा 72 वर्षो में पूरे 24 घंटे का हो जाता है।
यही कारण है, कि अंग्रेजी तारीखों के मान से, मकर-संक्रांति का पर्व,72 वषों के अंतराल के बाद
एक तारीख आगे बढ़ता रहता है।
विशेष:-यह धारणा पूर्णतः भ्रामक है,कि मकर संक्रांति का पर्व14जनवरी को आता है।

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