28/03/2026
Gold biggest sell:
रूस ने 25 साल बाद अचानक 14 टन सोना बेच दिया,
सोचिए… एक बहुत बड़ा घर है. उस घर का मालिक बहुत ताकतवर है. उसके पास नकदी भी है, जमीन भी है, और सबसे खास-एक तिजोरी भरी हुई है सोने से.वह सोना सिर्फ दिखावे के लिए नहीं, बल्कि मुश्किल वक्त के लिए रखा गया है.लेकिन अब हालात ऐसे हो गए हैं कि उस तिजोरी को खोलना पड़ रहा है…यह कहानी है Russia की....जब खर्च बढ़े और आमदनी घटे…रूस पिछले कुछ सालों से लगातार भारी सैन्य खर्च कर रहा है. युद्ध लंबा खिंचता गया और खर्च भी बढ़ता गया.दूसरी तरफ, तेल की कीमतों में गिरावट और अमेरिका के सख्त प्रतिबंधों ने आमदनी पर चोट कर दी.पहले जहां तेल और गैस से सरकार की कमाई मजबूत रहती थी, अब वह घटकर सिर्फ करीब 20% रह गई-यानी आधी से भी कम.
अब सोचिए… खर्च बढ़ता जाए और कमाई घटती जाए, तो क्या होगा?घाटा बढ़ेगा.रूस के साथ भी यही हुआ. 2025 में सरकार का घाटा 2.6% GDP तक पहुंच गया, जबकि शुरुआत में सिर्फ 0.5% का अनुमान था.
तिजोरी खुली… और सोना बिकने लगा
अब कहानी का सबसे अहम मोड़ आता है.करीब 25 साल बाद रूस ने पहली बार अपनी तिजोरी से “असली सोने की ईंटें” निकालकर बाजार में बेचनी शुरू कर दीं.पहले क्या होता था? सिर्फ कागजों में ट्रांजैक्शन होते थे-सोना तिजोरी में ही रहता था.लेकिन अब हालात बदल गए हैं.जनवरी 2026 में रूस ने 3 लाख औंस सोना बेचा.फरवरी में 2 लाख औंस और यानी सिर्फ दो महीनों में करीब 14 टन सोना बाजार में उतार दिया गया.
इतना सोना क्यों बेचा गया?
अब सवाल-जब सोना सबसे सुरक्षित संपत्ति माना जाता है, तो उसे बेचने की नौबत क्यों आई?असल में, यह “कैश की जरूरत” की कहानी है.रूस को अपने बढ़ते खर्च और घाटे को संभालने के लिए तुरंत पैसे चाहिए थे.और जब नकदी कम पड़ने लगी, तो उसने सबसे मजबूत संपत्ति-सोना-बेचना शुरू किया.
महंगा सोना बना मौका भी
एक दिलचस्प बात और है.इस समय सोने की कीमत $5,000 प्रति औंस के पार पहुंच चुकी है...यानी रूस को अपने सोने की अच्छी कीमत मिल रही है.इससे उसके कुल रिजर्व की वैल्यू भी बढ़कर $800 अरब से ज्यादा हो गई है.यानी एक तरफ मजबूरी है, तो दूसरी तरफ अच्छा मौका भी.
लेकिन चिंता क्यों बढ़ रही है?
रूस के पास अभी भी 2,000 टन से ज्यादा सोना है और वह दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा गोल्ड होल्डर है.फिर भी चिंता इसलिए है क्योंकि-रिजर्व का इस्तेमाल अब सीधे हो रहा है,सोना बेचकर कैश जुटाना पड़ रहा है,युद्ध चौथे साल में पहुंच चुका है यानी “सेफ्टी कुशन” धीरे-धीरे कम हो रहा है.
आगे क्या?
अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि
क्या युद्ध जल्दी खत्म होगा?
क्या तेल की कीमतें संभलेंगी?
और क्या रूस को और ज्यादा सोना बेचना पड़ेगा?
क्योंकि अगर ऐसा हुआ, तो यह सिर्फ रूस की कहानी नहीं रहेगी-यह पूरी दुनिया की इकोनॉमी को प्रभावित कर सकती है.
सवाल 1: आखिर रूस ने ऐसा क्या किया है?
जवाब:Russia ने करीब 25 साल बाद पहली बार अपनी तिजोरी में रखा असली सोना (gold bars) बाजार में बेचना शुरू किया है. पहले सिर्फ कागजों में सोने का लेन-देन होता था, लेकिन अब फिजिकल सोना बेचा जा रहा है.
सवाल 2: रूस को सोना बेचने की जरूरत क्यों पड़ी?
जवाब:सीधा कारण है-बढ़ता सरकारी खर्च और घटती आमदनी.रूस का सैन्य खर्च लगातार बढ़ रहा है, जबकि तेल और गैस से होने वाली कमाई घट गई है. ऊपर से प्रतिबंधों (sanctions) ने भी दबाव बढ़ा दिया. ऐसे में सरकार का बजट घाटा बढ़ गया, जिसे भरने के लिए सोना बेचना पड़ा.
सवाल 3: कितना सोना बेचा गया है?
जवाब:2026 के पहले दो महीनों में ही रूस ने जनवरी में 3 लाख औंस,फरवरी में 2 लाख औंस,यानी कुल मिलाकर करीब 14 टन सोना बेच दिया. यह पिछले कई सालों में सबसे बड़ा सेल है.
सवाल 4: क्या रूस के पास अब सोना कम हो गया है?
जवाब:हां, लेकिन पूरी तरह नहीं.रूस के पास अभी भी करीब 74.3 मिलियन औंस सोना बचा है, जो 4 साल में सबसे कम स्तर है. फिर भी कुल मिलाकर रूस के पास 2,000 टन से ज्यादा सोना है और वह दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा गोल्ड होल्डर है.
सवाल 5: क्या सिर्फ मजबूरी है या कोई रणनीति भी?
जवाब:दोनों.मजबूरी इसलिए क्योंकि घाटा बढ़ रहा है.रणनीति इसलिए क्योंकि अभी सोने की कीमत $5,000 प्रति औंस से ऊपर है.यानी रूस को अपने सोने की अच्छी कीमत मिल रही है, जिससे ज्यादा कैश जुटाया जा सकता है.
सवाल 6: रूस का बजट घाटा कितना बढ़ गया है?
जवाब:2025 में रूस का बजट घाटा करीब 2.6% GDP तक पहुंच गया, जबकि शुरुआत में सिर्फ 0.5% का अनुमान था. कुछ एक्सपर्ट्स के मुताबिक असली घाटा 3.4% के करीब हो सकता है.
सवाल 7: तेल और गैस का इसमें क्या रोल है?
जवाब:बहुत बड़ा रोल है.पहले रूस की आमदनी का बड़ा हिस्सा तेल और गैस से आता था. लेकिन अब यह घटकर सिर्फ करीब 20% रह गया है. यानी कमाई कम और खर्च ज्यादा-यही असली समस्या है.
सवाल 8: क्या रूस के पास और भी पैसे जुटाने के तरीके हैं?
जवाब:हां, रूस कई रास्ते अपना रहा है:National Welfare Fund से पैसा निकालना-सरकारी बॉन्ड (OFZ) ज्यादा जारी करना,VAT टैक्स बढ़ाना,लेकिन इन सबके बावजूद दबाव बना हुआ है, इसलिए अब सोना भी बेचना पड़ रहा है.
सवाल 9: क्या यह चिंता की बात है?
जवाब:हां, क्योंकि जब कोई देश अपनी “सेफ्टी रिजर्व” यानी सोना बेचने लगे, तो यह संकेत होता है कि आर्थिक दबाव बढ़ रहा है.यह दिखाता है कि नकदी की जरूरत ज्यादा हो गई है.
सवाल 10: आम आदमी इसे कैसे समझे?
जवाब:मान लीजिए आपके घर में सोना या FD है, जिसे आप सिर्फ मुश्किल समय के लिए रखते हैं.अगर आप उसे बेचने या तोड़ने लगते हैं, तो इसका मतलब है कि खर्च और आमदनी का बैलेंस बिगड़ गया है.रूस अभी उसी स्थिति से गुजर रहा है.
सवाल 11: आगे क्या होगा?
जवाब:सब कुछ इस बात पर निर्भर करेगा
युद्ध कब खत्म होता है
तेल की कीमतें क्या होती हैं
और रूस की आमदनी कब सुधरती है.
अगर हालात नहीं सुधरे, तो रूस को आगे भी और सोना बेचना पड़ सकता है.