24/06/2023
मोदी के आने के बाद
सबसे ज्यादा खतरा ईसाई मिशनरी और वक्फ बोर्ड को सताने लगा है। कारण भारत की सबसे ज्यादा जमीन इन दोनो के पास है तथा एनजीओ का खेला नेटवर्क भी इन्ही का है।
उनसे बचने का रास्ता भी अंग्रेज दे गए थे फूट डालो राज करो।
नए नए गैंग जैसे मोमबत्ती, अवार्ड वापसी, टुकड़े टुकड़े, खालिस्तानी, कथित किसान, चीन प्रेमी, बामसेफ, दलित प्रेमी, मीम प्रेमी आदि का अचानक जन्म हुवा।
ये आश्चर्य नहीं ये होना ही था। भारत की सरकारें पहले विदेशी सीआईए, मिशनरी और गल्फ देशों के इशारों पर काम करती थी।
अगर मोदी सरकार भी लेकिन नही? वरना मात्र सात साल में भारत विश्व में जगह न बना पता। चिंता का विषय यही है।
अचानक देश में बड़ी घटनाएं जो पहले कभी नहीं हुई। जैसे किसान आंदोलन, जेएनयू, खालिस्तानी एक्टिविस्ट, भीम मीम के नारे, सर तन से जुदा और भी बहुत कुछ आजकल हल्द्वानी।
सब जगह कामयाबी ने मिलने पर अब इनकी दृष्टि दलित ब्राह्मण या सुवर्ण कार्ड पर है।
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दलितों या कहूं भोलेभाले लोगों को मूर्ख बनाने के लिय इनके ही लोग जो पहले से ईसाई धर्म में या नवबौद्ध बने लोगों को एजेंट बनाया गया।
और वो निकल पड़े अपने आकाओं का हुक्म बजाने को।
रावण जिसके पास खटारा बाइक थी और आज
धंधा क्या करता है वो इतनी एक्सयूवी गाडियां
कौन दे रहा फंडिंग
बामसेफ जिसे कोई नही जानता था उसके पैसा इतना धन कहां से आया जो बड़े बड़े कार्यक्रम कैसे। कौन कर रहा फंडिंग।
भीम राव हो या फुले दंपत्ति हम किसी को बुरा नही कहते लेकिन ये खुद सुवर्ण के विरुद्ध बोलते हैं।
एक वो भीम का वंशज जो कभी
भंते तो कभी सूट बूट में समझ नही आता
विदेशी यात्राएं कौन दे रहा खर्चा।
ये लोग हिंदू धर्म के विरुद्ध ही आखिर क्यों बोलते हैं।
मिशनरी और मुस्लिम जो इनका निरंतर धर्म परिवर्तन करती है उनके विरोध में ये कुछ नही कहते।
कैसे बोलेंगे आकाओं के विरुद्ध।
भारत के अंदर फिर से अंग्रेजो। की फूट डालो राज करो।
मूर्ख न बने अपने विवेक से काम लें