23/04/2026
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 111 संगठित अपराध (Organized Crime) से संबंधित है, जो एक या अधिक व्यक्तियों के समूह (गैंग/सिंडिकेट) द्वारा आर्थिक या भौतिक लाभ के लिए की गई आपराधिक गतिविधियों (जैसे किडनैपिंग, सुपारी हत्या, डकैती, जबरन वसूली, साइबर अपराध) पर लागू होती है। इसमें न्यूनतम 5 वर्ष से आजीवन कारावास तक की सजा और भारी जुर्माने (न्यूनतम ₹5 लाख) का प्रावधान है, और यदि अपराध के कारण किसी की मृत्यु होती है, तो मृत्युदंड या आजीवन कारावास हो सकता है।
YouTube
YouTube
+5
धारा 111 बीएनएस के मुख्य बिंदु:
परिभाषा: यह धारा अपराधियों के सिंडिकेट द्वारा किए गए आपराधिक कृत्यों को कवर करती है, जिसका उद्देश्य प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से वित्तीय या अन्य लाभ प्राप्त करना है।
शामिल अपराध: जबरन वसूली (extortion), वाहन चोरी, अपहरण, मानव तस्करी, कॉन्ट्रैक्ट किलिंग (सुपारी हत्या), भूमि हथियाना, साइबर ठगी, हथियारों की अवैध डीलिंग और जाली करेंसी आदि।
सजा का प्रावधान (धारा 111(1)):
मृत्यु के मामले में: यदि संगठित अपराध के परिणामस्वरूप किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है, तो दोषी को मृत्युदंड (death penalty) या आजीवन कारावास, साथ ही कम से कम ₹10 लाख का जुर्माना।
अन्य मामलों में: कम से कम 5 वर्ष की कैद, जो आजीवन कारावास तक हो सकती है, और कम से कम ₹5 लाख का जुर्माना।