01/10/2021
#जयश्रीमहाँकाल
#श्रीमहाकालेश्वरज्योतिर्लिंग
#उज्जैन
#द्वादशज्योतिर्लिंगों
में से स्वयंभू
दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग
#राजाधिराजअवन्तिकानाथ
#जयश्रीमहाकाल
#जयश्रीमहाकाल
#जयश्रीमहाकाल
#भस्मारतीश्रृंगारदर्शन
#जयश्रीमहाकाल
#श्रीमहाकालेश्वरज्योतिर्लिंग
#जयश्रीमहाकाल
#श्रीमहाकालेश्वरज्योतिर्लिंग
#आजकाभस्मारतीश्रृंगारदर्शन
#जयश्रीमहाकाल
हे नागेश्वर , हे शिव शंकर
हे हर हर , दूर विषाद रहे ।
है तेरा नाम , मुक्ति का धाम ,
अब आठो याम , तेरी याद रहे ।
जब नृत्य करे , तिहु लोक डरे ,
डमरू का अनहद नाद रहे ।
मनवा बोले , बम बम भोले ,
मन में ना कोई अवसाद रहे ।।
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|| हर हर महादेव||
#हमसभीपरकालोकेकाल
#महाकालकीअमृतमयी
कृपा सदैव बनीरहे
#01अक्टूबर2021
#विक्रमसम्वत2078
#आनन्दनामसम्वत
शिव आदि जगत गुरू है
श्री आशुतोष आदिदेव आराध्यदेव देवादिदेव महादेव राजाधिराज योगीराज त्रिलोकपति त्रिलोकीनाथ अवन्तिकानाथ स्वयंभू दक्षिणमुखी महाकालेश्वर महादेव जी महाराज क्षिप्रा नदी के तट उज्जैन अवन्तिका मध्यप्रदेश में निवास करते हैं
जय जय श्री अवन्तिकानाथ स्वयंभू दक्षिणमुखी महाकालेश्वर महादेव जी महाराज
चिंतामन_ चिंता_हरे
क्षिप्रा_करे_निहाल
-दया_करें__ मां हरसिद्धि_
रक्षा_करे _महाकाल
🕉 बाबा _श्री महाकाल _की जय _हो_
बाबा _कृपा _बनाए_रखना 🕉
महाकाल की जय
जागो हे महा काल, जागो जीवन आधार,
भस्म करो पापी के पाप को,धरती पुकारे प्रभु आपको ।
तुम को जगा रहा नीला गगन ।तुम को जगाये प्रभु पूरा पवन ॥
कंदों पे नुसत धरो, डमरू पे ताल दो ।तीसरे नयन की आज ज्वाला निकाल दो ॥
फूंक दो यह कष्टों की कालिमा ।भर दो कानो में नयी लालिमा ॥
अवन्तिकायां विहितावतारम् मुक्तिप्रदानाय च सज्जनानाम।
अकालमृत्यो: परिरक्षणार्थं वन्दे महाकालमहं सुरेशम्।।
ॐ ॐ ॐ काराय विद्महे डमरुजातस्य धीमहि तन्नः प्रणवः प्रचोदयात्
महाकाल नमो नमः
महा -कालेश्वर मंगलम सोमवार मंगलम शिव मंगलम
मन में रख लो शिव जी काएतबार मंगलम
शिव मंगलम शिवा मंगलम शुभ लाभ शम्भू शंकर मंगलम
सोमवार मंगलम शिव ज्योति लिंग मंगलम
हर हर महादेव मंगलम मा पार्वती मंगलम
सदा शिव मंगलम मंगलम सम्पूर्ण मंगलम
भोले नाथ मंगलम शिव लोक मंगलम
देव आदि देव मंगलम बाबा भोले शम्भू महादेव मंगलम
सोमनाथ मंगलम महा -कालेश्वर मंगलम
बैधनाथ मंगलम पशुपति नाथ मंगलम
काशी विश्वनाथ मंगलम अमर नाथ मंगलम
श्री शिव कवचम् ¡¡
ॐ नमः शिवायेति च मस्तकं मे सदाऽवतु ।
ॐ नमः शिवायेति च स्वाहा भालं सदाऽवतु ॥ १॥
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं शिवायेति स्वाहा नेत्रे सदाऽवतु ।
ॐ ह्रीं क्लीं हूं शिवायेति नमो मे पातु नासिकाम् ॥ २॥
ॐ नमः शिवाय शान्ताय स्वाहा कण्ठं सदाऽवतु ।
ॐ ह्रीं श्रीं हूं संसार कर्त्रे स्वाहा कर्णौ सदावतु ॥ ३॥
ॐ ह्रीं श्रीं पञ्चवक्त्राय स्वाहा दन्तं सदावतु ।
ॐ ह्रीं महेशाय स्वाहा चाऽधरं पातु मे सदा ॥ ४॥
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं त्रिनेत्राय स्वाहा केशान् सदाऽवतु ।
ॐ ह्रीं ऐं महादेवाय स्वाहा वक्षः सदाऽवतु ॥ ५॥
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं मे रुद्राय स्वाहा नाभिं सदाऽवतु ।
ॐ ह्रीं ऐं श्रीं श्रीं ईश्वराय स्वाहा पृष्ठं सदाऽवतु ॥ ६॥
ॐ ह्रीं क्लीं मृतुञ्जयाय स्वाहा भ्रुवौ सदाऽवतु ।
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ईशानाय स्वाहा पार्श्वं सदाऽवतु ॥ ७॥
ॐ ह्रीं ईश्वराय स्वाहा चोदरं पातु मे सदा ।
ॐ श्रीं ह्रीं मृत्युञ्जयाय स्वाहा बाहू सदाऽवतु ॥ ८॥
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ईश्वराय स्वाहा पातु करौ मम ।
ॐ महेश्वराय रुद्राय नितम्बं पातु मे सदा ॥ ९॥
ॐ ह्रीं श्रीं भूतनाथाय स्वाहा पादौ सदाऽवतु ।
ॐ सर्वेश्वराय शर्वाय स्वाहा पादौ सदाऽवतु ॥ १०
प्राच्यां मां पातु भूतेशः आग्नेय्यां पातु शङ्करः ।
दक्षिणे पातु मां रुद्रो नैॠत्यां स्थाणुरेव च ॥ ११॥
पश्चिमे खण्डपरशुर्वायव्यां चन्द्रशेखरः ।
उत्तरे गिरिशः पातु चैशान्यां ईश्वरः स्वयम् ॥ १२॥
ऊर्ध्वे मृडः सदा पातु चाऽधो मृत्युञ्जयः स्वयम् ।
जले स्थले चाऽन्तरिक्षे स्वप्ने जागरणे सदा ॥ १३॥
पिनाकी पातु मां प्रीत्या भक्तं वै भक्तवत्सलः ॥ १४॥