Jasvinder Singh Astrologer Regal Studio Fort Gate Bhatinda

Jasvinder Singh Astrologer Regal Studio Fort Gate Bhatinda I want To Educate People in Astrology, Vastu and Feng shui,I Reply Astrology, Vastu and Feng Shui Ba So That Knowledge May be Used Benefit For All

I want To Educate People in Astrology, Vastu and Feng shui,I Reply Astrology, Vastu and Feng Shui Based Questions with Remedies.I Promote Further Research in This Path.

24/05/2026

अंगारक योग 12 भावों में मंगल-राहु की 'महा-ऊर्जा' का महा-प्रभाव!

1. प्रथम भाव (लग्न) - 'स्वयं का विस्फोट'

लग्न में अंगारक योग व्यक्ति को अत्यधिक ऊर्जावान, निडर और महत्वाकांक्षी बनाता है। ऐसे लोग निर्णय लेने में बहुत जल्दबाजी करते हैं। इनमें 'बॉस' बनने की प्रबल इच्छा होती है।

नकारात्मक: जिद्दीपन, सिरदर्द या सिर पर चोट लगने की संभावना, बिना सोचे समझे एक्शन लेना।

सकारात्मक: असीमित आत्मविश्वास। ये लोग अकेले दम पर साम्राज्य खड़ा कर सकते हैं।

2. द्वितीय भाव (धन व कुटुंब) - 'वाणी का बाण'

यहाँ राहु और मंगल व्यक्ति की जुबान को बहुत तीखा (Blunt) बना देते हैं। ये जो सच बोलते हैं, वह दूसरों को तीर की तरह चुभता है।

नकारात्मक: परिवार में पैतृक संपत्ति को लेकर अचानक विवाद, धन का अचानक आना और तेजी से खर्च होना, खान-पान की गलत आदतें।

सकारात्मक: ऐसे लोग रिस्क लेकर बहुत कम समय में भारी धन (Wealth) कमा सकते हैं।

3. तृतीय भाव (पराक्रम) - 'सुपर पावर'

ज्योतिष में तीसरे भाव में क्रूर ग्रह शानदार माने जाते हैं। यहाँ अंगारक योग व्यक्ति को अजेय योद्धा बना देता है।

नकारात्मक: छोटे भाई-बहनों के साथ वैचारिक मतभेद या झगड़े।

सकारात्मक: अद्भुत साहस। खेल (Sports), सेना, पुलिस या मीडिया के क्षेत्र में ये लोग अपना लोहा मनवाते हैं। ये रिस्क लेने से कभी नहीं घबराते।

4. चतुर्थ भाव (सुख व माता) - 'घर में अशांति'

चौथा भाव हमारे घर और शांति का है, और वहां आग और हवा का बवंडर शांति भंग कर देता है।

नकारात्मक: माता के स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव, घरेलू कलह, प्रॉपर्टी से जुड़े विवाद। ऐसे लोग अपने जन्म स्थान पर कभी शांत नहीं बैठ पाते।

सकारात्मक: जन्म स्थान से दूर या विदेश जाकर इन्हें जबरदस्त सफलता और संपत्तियां मिलती हैं। रियल एस्टेट से लाभ हो सकता है।

5. पंचम भाव (संतान व विद्या) - 'बुद्धि का तूफान'

यहाँ मंगल-राहु व्यक्ति के दिमाग को हाइपर-एक्टिव कर देते हैं।

नकारात्मक: शिक्षा में अचानक ब्रेक (Breaks), प्रेम संबंधों में आक्रामकता और धोखा, संतान प्राप्ति में देरी या गर्भपात (Miscarriage) का खतरा।

सकारात्मक: शेयर मार्केट, सट्टा या ट्रेडिंग में अचानक बड़ा लाभ। इनकी बुद्धि आउट-ऑफ-द-बॉक्स सोचती है।

6. षष्ठम भाव (रोग व शत्रु) - 'शत्रुहंता'

तीसरे भाव की तरह यहाँ भी यह योग व्यक्ति को बेहद शक्तिशाली बनाता है।

नकारात्मक: गुप्त शत्रु बनते हैं, रक्त (Blood) या सर्जरी से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं आ सकती हैं।

सकारात्मक: "शत्रुहंता योग"। इनसे जो टकराता है, वह खुद बर्बाद हो जाता है। कोर्ट-कचहरी और मुकदमों में जीत हमेशा इन्ही की होती है। डॉक्टर या सर्जन बनने के लिए यह बेहतरीन योग है।

7. सप्तम भाव (विवाह व साझेदारी) - 'रिश्तों का रणक्षेत्र'

यह अंगारक योग का सबसे संवेदनशील स्थान है।

नकारात्मक: दांपत्य जीवन में अहंकार (Ego) का टकराव। पार्टनर पर हावी होने की कोशिश से तलाक या अलगाव की नौबत आ सकती है। बिजनेस पार्टनरशिप में अचानक धोखा।

सकारात्मक: यदि जीवनसाथी भी उतनी ही ऊर्जा वाला या समझदार हो, तो दोनों मिलकर जीवन में बहुत तरक्की करते हैं।

8. अष्टम भाव (आयु व गुप्त विद्या) - 'रहस्य और जोखिम'

आठवां भाव अचानक होने वाली घटनाओं का है।

नकारात्मक: वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि दुर्घटना या सर्जरी का खतरा रहता है। पाइल्स या गुप्त रोग हो सकते हैं।

सकारात्मक: गुप्त विद्याओं (ज्योतिष, तंत्र-मंत्र), रिसर्च और डिटेक्टिव कार्यों में इन्हें महारत हासिल होती है। ससुराल पक्ष या इंश्योरेंस से अचानक धन लाभ।

9. नवम भाव (भाग्य व धर्म) - 'परंपराओं का विद्रोही'

ये लोग आंख बंद करके किसी परंपरा या गुरु को नहीं मानते।

नकारात्मक: पिता या गुरुजनों के साथ वैचारिक मतभेद। भाग्य में अचानक उतार-चढ़ाव (Extreme Luck or Extreme Bad Luck)।

सकारात्मक: ये खुद के नियम बनाते हैं। लंबी यात्राओं या विदेश से इनके भाग्य का उदय होता है।

10. दशम भाव (कर्म व करियर) - 'करियर का पावरहाउस'

दसवें भाव में मंगल 'दिग्बली' होता है। यहाँ राहु का साथ इसे एक भयंकर वर्कहॉलिक (Workaholic) बना देता है।

नकारात्मक: बॉस या उच्च अधिकारियों से अक्सर झगड़ा होता है। अति-महत्वाकांक्षा के कारण करियर में अचानक बदलाव आते हैं।

सकारात्मक: ये नौकरी से ज्यादा खुद का काम (Business) करने में सफल होते हैं। इंजीनियरिंग, राजनीति या किसी बड़े संस्थान का नेतृत्व करने के लिए यह एक शानदार योग है।

11. एकादश भाव (लाभ) - 'असीमित इच्छाएं'

ग्यारहवें भाव में सभी ग्रह लाभ देते हैं। यहाँ अंगारक योग व्यक्ति को अपनी इच्छाएं पूरी करने के लिए किसी भी हद तक जाने का जुनून देता है।

नकारात्मक: धन कमाने के लिए कई बार गलत या अनैतिक शॉर्टकट अपनाने का मन करता है। बड़े भाई से तनाव।

सकारात्मक: यह "महा-धन दायक" स्थिति है। अचानक भारी मुनाफा, बड़ा नेटवर्क और प्रभावशाली लोगों से संपर्क बनते हैं।

12. द्वादश भाव (व्यय व मोक्ष) - 'नींद और खर्चों का विस्फोट'

नकारात्मक: अत्यधिक खर्च, रातों की नींद खराब होना (Insomnia), बेडरूम लाइफ में समस्याएं और छुपे हुए शत्रुओं का डर। कानूनी पचड़ों या अस्पताल में धन खर्च।

सकारात्मक: विदेश में बसने (Foreign Settlement) के लिए यह बहुत मजबूत योग है। विदेशी कंपनियों या इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट के काम से भारी सफलता।

निष्कर्ष:

जैसा कि पहले भाग में बताया गया था, अपनी कुंडली में अंगारक योग देखकर डरें नहीं। मंगल की इस विस्फोटक ऊर्जा को पहचानें। जो भाव इस आग की चपेट में है, वहां क्रोध करने के बजाय 'कर्म' करें। पसीना बहाएं, खेलकूद या जिम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। जब आप अपनी अतिरिक्त ऊर्जा को सही जगह इन्वेस्ट कर देंगे, तो राहु और मंगल आपको वह देंगे, जो शायद कोई और ग्रह न दे सके!

अस्वीकरण (Disclaimer):

ज्योतिष एक संभावनाओं का विज्ञान है, डराने का नहीं। ऊपर दिए गए परिणाम सामान्य ज्योतिषीय सिद्धांतों पर आधारित हैं। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले कुंडली में इन बातों का सूक्ष्म विश्लेषण करना अत्यंत आवश्यक है:

दोनों ग्रहों (मंगल-राहु) की युति पर किस शुभ या अशुभ ग्रह की दृष्टि है।

मंगल और राहु किस नक्षत्र में बैठे हैं।

आपकी कुंडली के लग्न के अनुसार मंगल और राहु कारक (फायदेमंद) हैं या अकारक (नुकसान दायक)।

इन बिंदुओं के आधार पर इस योग के परिणाम पूरी तरह बदल सकते हैं।

18/04/2026
20/02/2026

साढ़े साती बचपन, युवावस्था, वृद्धावस्था में !

साढ़े साती एक 7.5 वर्ष की अवधि होती है जब शनि (शनि ग्रह) तीन राशियों से गुजरता है: चंद्र राशि से पहले की, चंद्र राशि, और उसके बाद की राशि। यह तब शुरू होती है जब शनि चंद्र राशि से पहले वाली राशि में प्रवेश करता है और तब समाप्त होती है जब वह चंद्र राशि के बाद वाली राशि से बाहर निकलता है। चूँकि शनि एक राशि में लगभग 2.5 वर्ष बिताता है, तीन राशियों को पार करने में उसे 7.5 वर्ष लगते हैं, इसलिए इसे "साढ़े साती" कहा जाता है।
व्यक्ति अपने जीवन में तीन बार साढ़े साती का अनुभव करता है: एक बार बचपन में, एक बार युवावस्था में, और एक बार वृद्धावस्था में। हर बार इसका प्रभाव अलग होता है:
बचपन में यह माता-पिता और शिक्षा को प्रभावित करता है।
युवावस्था में यह करियर, आर्थिक स्थिति और परिवार पर प्रभाव डालता है।
वृद्धावस्था में यह मुख्य रूप से स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।

05/05/2025

15 मई 2025 से देवगुरु बृहस्पति राशि बदल कर बनायेंगे अनूठा संयोग, जानें सभी 12 राशियों पर प्रभाव !

जसविंदर सिंह एस्ट्रोलॉजर, रीगल स्टूडियो क़िला गेट , भटिंडा पंजाब
फ़ोन- 9888383888
गुरु गोचर साल 2025 में गुरु का गोचर बहुत ही खास रहने वाला है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार देवगुरु बृहस्पति करीब 13 महीनों के बाद ही राशि परिवर्तन करते हैं। लेकिन इस वर्ष गुरु अतिचारी होकर दो बार राशि परिवर्तन करेंगे और दो बार इनकी चाल में बदलाव आएगा। गुरु के दो बार गोचर होने पर यह अतिचारी होकर सभी राशियों पर प्रभाव डालेंगे !
ज्योतिष शास्त्र में गुरु का महत्व
वैदिक ज्योतिष शास्त्र में गुरु ग्रह का विशेष महत्व होता है। गुरु को शुभ, अच्छा फल देने वाला और एक सौम्य ग्रह माना जाता है। देवगुरु बृहस्पति को दो राशियों धनु और मीन राशि का स्वामित्व मिला हुआ है। गुरु कर्क राशि में उच्च के होते हैं। जातक के जीवन में गुरु ग्रह का प्रभाव उनके विवाह, शिक्षा, संतान, धन, धर्म और करियर का कारक माना जाता है। ज्योतिष में गुरु ग्रह को तीन द्दष्टियां पांचवी, सातवीं और नौंवी द्दष्टि मिली हुई है। जिन लोगों की कुंडली में गुरु ग्रह शुभ भाव और मजबूत स्थिति में होते हैं उनके जीवन में ढ़ेर सारा धन, वैभव, मान-सम्मान और तरक्की की प्राप्ति होती है।

साल 2025 में गुरु ग्रह की चाल
गुरु ग्रह का साल 2025 में पहली बार गोचर 15 मई को मिथुन राशि में होगा। फिर इसके बाद दूसरा गोचर 19 अक्तूबर को कर्क राशि में होगा। साल 2025 में गुरु कर्क राशि में रहते हुए अपनी उच्च अवस्था में होंगे। ऐसे में कुछ राशि वालों को इसका विशेष लाभ मिलेगा। 11 नवंबर 2025 को गुरु ग्रह कर्क राशि में रहते हुए वक्री हो जाएंगे। फिर इसी अवस्था में रहते हुए 04 दिसंबर 2025 को फिर से मिथुन राशि में गोचर हो जाएंगे। इस तरह से साल 2025 में गुरु ग्रह वृषभ राशि की अपनी यात्रा को विराम देते हुए मिथुन राशि में ,फिर मिथुन राशि से चंद्रमा की राशि कर्क में गोचर होंगे और कर्क राशि से निकलकर वक्री होकर मिथुन राशि में गोचर करेंगे। 09 जून 2025 को गुरु अस्त हो जाएंगे और 09 जुलाई को उदय हो जाएंगे। इस तरह से गुरु के साल 2025 में दो बार गोचर होने से अतिचारी होंगे। साल 2025 में गुरु के गोचर का प्रभाव सभी राशियों पर किस तरह से पड़ेगा इसका ज्योतिषीय विश्लेषण।

साल 2025 में मेष राशि पर गुरु का प्रभाव
राशिचक्र की पहली राशि मेष में गुरु नवम और द्वादश भाव के स्वामी होते हैं। नवम भाव भाग्य और धर्म का जबकि द्वादश भाव व्यय का माना जाता है। साल 2025 में गुरु का गोचर आपकी राशि से तीसरे भाव में होगा। कुंडली का तीसरा भाव साहस और पराक्रम का होता है। गुरु बृहस्पति आपके तीसरे भाव में विराजमान होकर सप्तम, नवम और एकादश भाव पर अपनी शुभ द्दष्टि डालेंगे। गुरु के साल 2025 में राशि परिवर्तन का शुभ प्रभाव मेष राशि के जातकों पर रहने वाली है। भाग्य में वृद्धि के योग बन रहे हैं। साल 2025 में धार्मिक यात्राएं ज्यादा होंगी। व्यापार में तरक्की और धन लाभ के अच्छे योग होंगे। देवगुरु की शुभ द्दष्टि होने से बिजनेस में तरक्की, वैवाहिक जीवन में सुख-शांति, कार्य में सफलता और आमदनी में बढ़ोतरी के योग बनेंगे। समाज में मान-सम्मान में वृद्धि होगी। जिन लोगों का विवाह अभी नहीं उनका साल 2025 में विवाह हो सकता है

साल 2025 में वृषभ राशि पर गुरु का प्रभाव
वृषभ राशि के जातकों के लिए साल 2025 में गुरु का गोचर विशेष उन्नति दिलाने में सहायक होगा। नौकरी और कारोबार में तरक्की और लाभ के योग बनेंगे। वृषभ राशि के जातकों के लिए देवगुरु बृहस्पति अष्टम और एकादश भाव के स्वामी होकर साल 2025 में मिथुन राशि में गोचर करने पर यह आपके दूसरे भाव यानी धन भाव में प्रवेश करेंगे। कुंडली के दूसरे भाव से धन, वाणी, परिवार और संचित धन का विचार किया जाता है। साल 2025 में गुरु मिथुन राशि में प्रवेश करने से वृषभ राशि के जातकों के लिए दूसरे भाव में विराजमान होकर छठे, अष्टम और दशम भाव पर द्दष्टि रखेंगे। गुरु के गोचर करने से इस राशि के जातकों को पैतृक संपत्ति, अचानक से धन लाभ और व्यापार में अच्छा मुनाफा प्राप्त के योग होगा। गुरु के गोचर करने से वैवाहिक जीवन और संतान सुख की प्राप्ति होगी!

साल 2025 में मिथुन राशि पर गुरु का प्रभाव
मिथुन राशि के जातकों के लिए साल 2025 में देवगुरु बृहस्पति का गोचर बहुत ही लाभकारी साबित होगा। मिथुन राशि में गुरु का गोचर आपके जीवन में काफी प्रभावशाली रहेगा। इस साल जो लोग संतान प्राप्ति की इच्छा रखते हैं उनका सपना पूरा हो सकता है। मिथुन राशि के जातकों के लिए गुरु सप्तम और दशम भाव के स्वामी होते हैं। साल 2025 में देवगुरु बृहस्पति का गोचर आपके लग्न भाव में होगा। ऐसे में आपके विचार और व्यक्तित्व में काफी बदलाव देखने को मिलेगा। साल 2025 में गुरु लग्न भाव में विराजमान होकर आपके पंचम, सप्तम और नवम भाव में द्दष्टि रखेंगे। इससे शिक्षा के क्षेत्र में छात्रों को अच्छी सफलता और दांपत्य जीवन में सुख और संतान की प्राप्ति होती है। भाग्य का अच्छा साथ पूरे वर्ष मिलेगी। जो कार्य अटके चल रहे थे वह साल 2025 में गुरु के गोचर होने के बाद से पूरे होने लगेंगे। जो लोग साल 2025 में विवाह करने के इच्छुक हैं उनका विवाह हो सकता है। धन संबंधित समस्याएं दूर होंगी। नौकरी के लिए अच्छे प्रस्ताव आ सकते हैं और व्यापार में तरक्की और मुनाफे के योग बनेंगे।

साल 2025 में कर्क राशि पर गुरु का प्रभाव
साल 2025 में गुरु का गोचर आपके लिए द्वादश भाव में होगा। कर्क राशि के जातकों के लिए गुरु छठे और नवम भाव के स्वामी होते हैं। कुंडली का द्वादश भाव व्यय, खर्च और आध्यात्म को दर्शाता है। देवगुरु बृहस्पति मिथुन राशि में परिवर्तन करने पर इनकी शुभ द्दष्टि आपक चौथे, छठे और अष्टम भाव पर होगी। साल 2024 में गुरु आपके द्वादश भाव में प्रवेश करने पर धर्म-कर्म के प्रति आपका रूझान बढ़ेगा। धार्मिक कार्यों में आप अच्छा खासा धन खर्च करेंगे। इस दौरान धार्मिक यात्राओं का योग भी बनेगा। इसके अलावा परिवार के सुख के संसाधनों में वृद्धि होगी। आपको अच्छी खबरें सुनने को मिल सकती है। भाग्य का अच्छा साथ मिलेगा। उत्तम शिक्षा, सुख-शाांति और वैवाहिक जीवन अच्छा रहेगा।
साल 2025 में सिंह राशि पर गुरु का प्रभाव
सिंह राशि राशिचक्र की पांचवी राशि होती है। सिंह राशि के जातकों के लिए देवगुरु बृहस्पति पंचम और अष्टम भाव के स्वामी होते हैं। साल 2025 में गुरु का मिथुन राशि में गोचर सिंह राशि के जातकों के लिए एकादश भाव में होंगे। एकादश भाव इच्छापूर्ति और आमदनी का माना जाता है। गुरु के गोचर से आपको जीवन में अच्छी सफलता प्राप्त के योग बन रहे हैं।

साल 2025 में कन्या राशि पर गुरु का प्रभाव
कन्या राशि वालों के लिए साल 2025 कार्यक्षेत्र में चतुराई के साथ काम लेने का समय रहेगा। कन्या राशि के लोगों के लिए देवगुरु बृहस्पति चौथे और सप्तम भाव के स्वामी होते हैं और साल 2025 में मिथुन राशि में गोचर करने के दौरान देवगुरु बृहस्पति दशम भाव में प्रवेश करेंगे। दशम भाव कर्म का भाव माना जाता है। ऐसे में आपको अपने कार्यक्षेत्र में कुछ छोटी-मोटी परेशानियों से जूझना पड़ सकता है।

साल 2025 में तुला राशि पर गुरु का प्रभाव
साल 2025 में गुरु के मिथुन राशि में गोचर होने से यह आपके नवम भाव यानी भाग्य भाव में प्रवेश करेंगे। वहीं तुला राशि के जातकों के जातकों के लिए गुरु आपके तीसरे और छठे भाव के स्वामी होते हैं। गुरु का गोचर आपके नवम भाव में होने से भाग्य में वृद्धि और धार्मिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगे। आपको अपने प्रयासों में अच्छी सफलता मिलेगी।

साल 2025 में वृश्चिक राशि पर गुरु का प्रभाव
वृश्चिक राशि के जातकों के लिए गुरु का गोचर अच्छा नहीं कहा जा सकता है। इस राशि के जातकों को कार्यक्षेत्र में कुछ अड़चनों का सामना करना पड़ सकता है। वृश्चिक राशि के जातकों के लिए गुरु दूसरे और पंचम भाव के स्वामी हैं और साल 2025 में मिथुन राशि में गोचर होने से यह आपके अष्टम भाव में रहेंगे। गुरु का गोचर आपके लिए अच्छा नहीं कहा जा सकता है। बनते हुए काम बिगड़ सकते हैं।

साल 2025 में धनु राशि पर गुरु का प्रभाव
धनु राशि के जातकों के लिए देवगुरु बृहस्पति पहले और चौथे भाव के स्वामी होते हैं। साल 2025 में गुरु का मिथुन राशि में गोचर आपके सप्तम भाव में होने जा रहा है। गुरु साल 2025 में सप्तम भाव में विराजमान होकर आपके एकादश, पहले और तीसरे भाव पर अपनी शुभ द्दष्टि रखेंगे। गुरु का गोचर सप्तम भाव में होने से धनु राशि वालों के लिए शुभ संकेत हैं। कुंडली के सातवें भाव से साझेदारी और जीवनसाथी का विचार किया जाता है। ऐसे में जो लोग किसी के साथ मिलकर कोई काम-धंधा करते हैं तो उनके लिए साल 2025 में गुरु बहुत बड़ा लाभ दिला सकते हैं। वहीं जिन जातकों का विवाह नहीं हो रहा है उनका विवाह तय हो सकता है। साल 2025 में गुरु का गोचर इस राशि के जातकों के जीवन में मधुरता और संपन्नता लाएगा। आपकी आमदनी में वृद्धि के संकेत हैं। इस तरह से धनु राशि के जातकों के लिए देवगुरु बहुत ही शुभ साबित होंगे।

साल 2025 में मकर राशि पर गुरु का प्रभाव
साल 2025 में गुरु का राशि परिवर्तन मकर राशि वालों के लिए मिला-जुला साबित होगा। मकर राशि के जातकों के लिए देवगुरु बृहस्पति तीसरे और द्वादश भाव के स्वामी होकर साल 2025 में आपकी राशि से छठे भाव में गोचर करेंगे। छठे भाव में गोचर से आपकी सेहत में बुरा प्रभाव देखने को मिल सकता है। साल के कुछ महीनों में सेहत संबधित परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। वहीं दूसरी तरफ आपको नौकरी में कुछ अच्छे प्रस्ताव मिल सकते हैं। खर्चों में बढ़ोतरी भी हो सकती है। जीवनसाथी का अच्छा सहयोग प्राप्त होगा। अविवाहित जातकों को विवाह के योग भी बनेंगे। नौकरी में प्रमोशन के योग और व्यापार में अच्छा मुनाफा भी हासिल हो सकता है। गुरु छठे भाव में विराजमान होकर गुरु की द्दष्टि आपके दशम भाव, द्वादश भाव और द्वितीय भाव पर जा रही है।

साल 2025 में कुंभ राशि पर गुरु का प्रभाव
साल 2025 में गुरु का गोचर कुंभ राशि वालों के लिए आर्थिक समृद्धि, कार्यों में सफलता, हर एक इच्छाओं की पूर्ति करने वाला और आमदनी में अच्छा इजाफा होने के प्रबल योग दिखाई दे रहा है। कुंभ राशि वालों के लिए देवगुरु बृहस्पति दूसरे और ग्यारहवें भाव के स्वामी हैं। 14 मई 2025 को गुरु का गोचर आपकी राशि से पंचम भाव में होगा। कुंडली के पंचम भाव से विद्या और संनान के सुख के बारे में विचार किया जाता है। गुरु के राशि परिवर्तन का सकारात्मक प्रभाव नौकरीपेशा जातकों को देखने के मिलेगा। नौकरी पद, प्रतिष्ठा और वेतन में अच्छी बढ़ोतरी के योग हैं। आपकी राशि से पंचम भाव में गुरु के गोचर करने से यह आपके नवम, एकादश और लग्न भाव पर अपनी शुभ द्दष्टि डालेंगे। साल 2025 में कुंभ राशि वालों को शिक्षा में उत्तम सफलता मिलेगी। उच्च शिक्षा ग्रहण करने वाले जातकों अच्छी सफलता मिलेगी। संतान से जुड़ी शुभ सूचनाएं आपको प्राप्त होंगी। हालांकि जब देवगुरु आपके छठे भाव में आएंगे तो सेहत और धन संबंधी मामलों में समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।

साल 2025 में मीन राशि पर गुरु का प्रभाव
साल 2025 में गुरु का गोचर मीन राशि वालों के लिए काफी अहम रहने वाला होगा। देवगुरु बृहस्पति आपकी राशि के स्वामी होने के साथ-साथ दशम भाव के स्वामी होते हैं और इनका गोचर साल 2025 में आपकी राशि से चौथे भाव में होने जा रहा है। यह गोचर आपके जीवन में उतार-चढ़ाव को देखने को मिलेगा। कार्यक्षेत्र में आपको अपने वरिष्ठ अधिकारियों संग सामंजस्य बनाना होगा। कार्य में अच्छा परिणाम प्राप्त करने के लिए आपको ज्यादा मेहनत करने की जररूत होगी। देवगुरु बृहस्पति आपके चौथे भाव में विराजमान होकर आपके अष्टम भाव, दशम और द्वादश भाव पर अपनी द्दष्टि डालेंगे। यहां से गुरु आपके खर्चों में वृद्धि, आयु में वृद्धि और दांपत्य जीवन में अच्छा परिणाम देंगे। कामकाज को लेकर आप इस दौरान कई तरह की यात्राएं करेंगे। वहीं दूसरी ओर जब अक्टूबर माह में गुरु पंचम भाव में गोचर करेंगे। तो आर्थिक सुख और समृद्धि के लिहाज से अच्छा रहेगा।

जसविंदर सिंह एस्ट्रोलॉजर, रीगल स्टूडियो
क़िला गेट , भटिंडा पंजाब
फ़ोन- 9888383888

26/04/2025

भारतीय ज्योतिष और वास्तुशास्त्र में से कुछ उपयोगी बातें !

जसविन्दर सिंह एस्ट्रोलॉजर, रीगल स्टूडियो, किला गेट भटिंडा
फ़ोन -9888383888

[1] मुख्य द्वार के पास कभी भी कूड़ादान ना रखें इससे पड़ोसी शत्रु हो जायेंगे।

[२] सूर्यास्त के समय किसी को भी दूध,दही या प्याज माँगने पर ना दें इससे घर की बरक्कत समाप्त हो जाती है।

[३] छत पर कभी भी अनाज या बिस्तर ना धोएं..हाँ सुखा सकते है इससे ससुराल से सम्बन्ध खराब होने लगते हैं।

[४] फल खूब खाओ स्वास्थ्य के लिए अच्छे है लेकिन उसके छिलके कूडादान में ना डालें वल्कि बाहर फेंकें इससे मित्रों से लाभ होगा।

[५] माह में एक बार किसी भी दिन घर में मिश्री युक्त खीर जरुर बनाकर परिवार सहित एक साथ खाएं अर्थात जब पूरा परिवार घर में इकट्ठा हो उसी समय खीर खाएं तो माँ लक्ष्मी की जल्दी कृपा होती है।

[६] माह में एक बार अपने कार्यालय में भी कुछ मिष्ठान जरुर ले जाएँ उसे अपने साथियों के साथ या अपने अधीन नौकरों के साथ मिलकर खाए तो धन लाभ होगा।

[७] रात्री में सोने से पहले रसोई में बाल्टी भरकर रखें इससे क़र्ज़ से शीघ्र मुक्ति मिलती है और यदि बाथरूम में बाल्टी भरकर रखेंगे तो जीवन में उन्नति के मार्ग में बाधा नही आवेगी।

[८] वृहस्पतिवार के दिन घर में कोई भी पीली वस्तु अवश्य खाएं हरी वस्तु ना खाएं तथा बुधवार के दिन हरी वस्तु खाएं लेकिन पीली वस्तु बिलकुल ना खाएं इससे सुख समृद्धि बड़ेगी।

[९] रात्रि को झूठे बर्तन कदापि ना रखें इसे पानी से निकाल कर रख सकते है हानि से बचोगें।

[१०] स्नान के बाद गीले या एक दिन पहले के प्रयोग किये गये तौलिये का प्रयोग ना करें इससे संतान हठी व परिवार से अलग होने लगती है अपनी बात मनवाने लगती है अतः रोज़ साफ़ सुथरा और सूखा तौलिया ही प्रयोग करें।

[११] कभी भी यात्रा में पूरा परिवार एक साथ घर से ना निकलें आगे पीछे जाएँ इससे यश की वृद्धि होगी।

जसविन्दर सिंह एस्ट्रोलॉजर, रीगल स्टूडियो, किला गेट भटिंडा
फ़ोन -9888383888

20/04/2025

बुध ग्रह का 12 भावों में फल, जानिए आपकी जन्म कुंडली में बुध का प्रभाव कैसा रहता है
जसविन्दर सिंह एस्ट्रोलॉजर,रीगल स्टूडियो, किला गेट भटिंडा
फ़ोन -9888383888

सभी ग्रहों में युवराज कहा गया है। ये मिथुन और कन्या राशि के स्वामी हैं। मीन इनकी नी
बुध को सभी ग्रहों में युवराज कहा गया है। ये मिथुन और कन्या राशि के स्वामी हैं। मीन इनकी नीच तथा कन्या उच्च राशि कही गयी है। किसी भी जातक की जन्म कुंडली में ये विद्या, वाणी, लेखन, प्रकाशन, शिक्षण, बैंकिंग कार्य, वकालत, चार्टर्ड एकाउंटेंट, गीत-संगीत, व्यापार, सलाहकार तथा कुशल वक्ता के रूप में सफलता दिलाने वाले ग्रह के रूप में जाने जाते हैं जो जन्मकुंडली में इनकी स्थिति पर निर्भर करता है। साधारणतः ये लग्न, द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, नवम, दशम तथा एकादश भावों में शुभ फल देता है। इनके द्वारा अथवा इनकी युति से बनने वाले प्रमुख योगों में भद्र योग, बुधादित्य योग, लक्ष्मी-विष्णुयोग, कुशल वक्ता योग आदि प्रमुख हैं। जन्मकुंडली बुध की स्थिति के अनुसार अलग-अलग भावों में कैसा प्रभाव रहता है इसका ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं।

प्रथम भाव
जन्म कुंडली के इस भाव में बुध का रहना अतिशुभ माना गया है। अपनी राशि में रहने पर ये जातक को बुद्धि, वाक्चातुर्यता तथा शारीरिक सुन्दरता देते हैं। ऐसा व्यक्ति सामाजिक पद-प्रतिष्ठा प्राप्त करता है उसके द्वारा कही गई बातों को बड़े गौर से सुना जाता है। सूर्य के साथ यदि बुध विराजमान हों और परस्पर 10 अंश की दूरी भी हो तो बुधादित्य योग का निर्माण होता है जो व्यक्ति को जीवन में सफलताओं के चरम तक ले जाता है, वह मिलन सार और मृदुभाषी होता है।

द्वितीय भाव
जन्मकुंडली के इस भाव में विराजमान बुध जातक को बुद्धिमान, कुशल वक्ता तथा अपनी योजनाओं को फलीभूत करवाने वाला बनता है। ऐसा जातक खोया हुआ धन प्राप्त करता है। उसके जीवन में आकस्मिक धन प्राप्ति के योग भी बने रहते हैं। अपने घर में विराजमान रहने पर यह व्यक्ति को गीत-संगीत के क्षेत्र में अच्छी प्रतिष्ठा दिलाते हैं। ऐसा व्यक्ति न्यायिक प्रक्रिया में विश्वास करने वाला, दूसरों की मदद करने वाला और अपने बाहुबल से धन अर्जित करने वाला होता है।

तृतीय भाव
जन्म कुंडली के इस भाव में बुध के विराजमान रहने जातक अपने बंधुओं से स्नेह अर्जित करता है। उसके द्वारा लिए गए निर्णय और किए गए कार्यों की सराहना होती है। ऐसे लोग रूढ़िवादिता का भी शिकार हो जाते हैं। धर्म एवं अध्यात्म के प्रति गहरी आस्था रहती है। ये घूमने फिरने तथा विदेश प्रवास में अच्छी रुचि रखते हैं। अपने घर में विराजमान रहने पर बुध मनोनुकूल फल प्राप्त कराते हैं किंतु नीच राशि मीन में रहने पर मानसिक विकार भी उत्पन्न कराते हैं।
चतुर्थ भाव
जन्म कुंडली के इस भाव में विराजमान रहने पर बुध व्यक्ति को स्वाभिमानी, कुशल वक्ता, सफल उद्यमी तथा परिश्रमी बनाते हैं। जातक अपने ही बाहुबल पर मकान-वाहन का सुख प्राप्त करता है। मित्रों की संख्या कम रहती है। पाप ग्रहों के साथ रहने पर ये व्यक्ति को वासनाओं की ओर जाने के लिए प्रेरित करते हैं। शिक्षण कार्य, लेखन, पठन-पाठन तथा प्रशासनिक कार्यों में अच्छी सफलता हासिल करते हुए ये जनप्रिय बने रहते हैं। इनमें नेतृत्व शक्ति की प्रधानता रहती है।

पंचम भाव
जन्म कुंडली के इस भाव में विराजमान बुध किसी भी जातक के लिए वरदान से कम नहीं है। यदि ये अपने घर में हों तो ऐसा जातक गायक, संगीतज्ञ, तथा ललित कलाओं का प्रेमी होता है। साधारण से परिवार में जन्म लेने पर भी ऐसे लोग अपनी कुशल बुद्धिमत्ता के बल पर समाज में अच्छी मान प्रतिष्ठा हासिल करते हैं। दूसरों से प्रेम करने वाले, शिक्षा देने वाले और समाज में एक अलग तरह का उदाहरण पेश करने वाले ऐसे लोग कामयाब जीवन व्यतीत करते हैं।

छठे भाव
किसी भी जातक की जन्मकुंडली में बुध इस भाव में विराजमान हों तो उसके जीवन में मिश्रित फल घटता हुआ दिखाई देता है। गुप्त शत्रुओं की अधिकता रहती है ऐसे लोगोंके शत्रु पढ़ेलिखे और सहकर्मी ही होते हैं। जीवनपर्यंत कोर्ट-कचहरी के मामलों से भी दो-चार होना पड़ता है। कई बार देखा गया है कि ऐसे लोगों के करियर में काफी उतार-चढ़ाव रहता है। यदि बुध मिथुन अथवा कन्या राशि में हों तो इन घटनाओं में कुछ कमी आती है। जातक विदेश प्रवास का भी आनंद लेता है।
सप्तम भाव
जन्मकुंडली के इस भाव में विराजमान बुध अति शुभ फल देते हैं। जातक व्यापार के क्षेत्र में अच्छी सफलता हासिल करते हैं। दांपत्य जीवन सुखद रहता है किंतु शनि के साथ ही यदि यहां विराजमान हों तो उनके फल अच्छे नहीं रहते। बुध अपनी राशि के हों तो ऐसे लोगों को ससुराल पक्ष से सहयोग मिलता है और धन का आगमन होता रहता है। ऐसा जातक दीर्घजीवी, प्रसिद्ध, यशस्वी और कुशल प्रशासनिक अधिकारी होता है, अहंकारके कारण अपना नुकसान भी कर लेते हैं।

अष्टम भाव
जन्मकुंडली के इस भाव में विराजमान बुध का फल काफी मिला-जुला रहता है, ऐसे लोगों को कहीं न कहीं स्वास्थ्य संबंधी समस्या जैसे चर्मरोग, एलर्जी, हड्डी और पेट से संबंधित समस्याओं से जूझना पड़ता है। अपने घर में विराजमान बुध जातक को उत्तम स्वास्थ्य और सामाजिक पद-प्रतिष्ठा भी दिलाते हैं, मकान वाहन का सुख तो मिलता ही है सभी भौतिक उपलब्धियों का भी सुख प्राप्त होता है। ये किसी न किसी सरकारी संस्था के द्वारा भी सम्मानित किए जाते हैं।

नवम भाव
किसी भी जातक की जन्मकुंडली के इस भाव में विराजमान बुध का फल बेहतरीन सफलता देता है। ऐसा व्यक्ति धर्म-कर्म में रुचि वाला धार्मिक ग्रंथों का संपादन करने वाला, प्रकाशक और कुशल वक्ता होता है। कई बार सामाजिक जिम्मेदारियों का दबाव उन पर सीधा दिखाई देता है। बुध अपने घर में विराजमान हों तो फल दोगुना हो जाता है। ऐसा जातक जीवन में अच्छी ख्याति अर्जित करता है। देश विदेश का भ्रमण करता है विदेशी कंपनियों में भी बड़े पदों पर आसीन होता है।
दशम भाव
जन्म कुंडली के इस भाव में विराजमान बुध जातक को अति मिलनसार, न्यायिक प्रक्रिया का पालन करने वाला, कुशल प्रशासक और समाजसेवी बनाते हैं। सामान्य परिवार में जन्म लेने के बावजूद ऐसा व्यक्ति अपने जीवन के सर्वोच्च शिखर तक पहुंचता है। यदि ये अपनी राशि में विराजमान हों अथवा कोई बड़ा योग बनाए हों तो उनकी ख्याति दूर-दूर तक पहुंचती है। सभी तरह का निर्णय लेने में कुशल साहसी और निर्भीक प्रकृति का ऐसा जातक सफल जीवन व्यतीत करता है।

एकादश भाव
जन्म कुंडली के इस भाव में विराजमान बुध जातक को बहुमुखी प्रतिभा का धनी बनाते हैं। व्यक्ति नौकरी करें या व्यापार सफलताओं के शिखर तक पहुंचता है। कुशल गणितज्ञ, ज्योतिषी, न्यायिक प्रक्रिया में रुचि रखने वाला, लेखन तथा प्रकाशन के क्षेत्र में अच्छी ख्याति अर्जित करता है। बुध अपने घर में विराजमान हों तो छोटे स्तर से कार्य करके बड़ा व्यापारी बनता है। चाहने वालोंकी लंबी लिस्ट होती है। गीत-संगीत में रुचि रखने वाला ऐसा व्यक्ति अपनी पहचान स्वयं बनाता है।

द्वादश भाव
जन्मकुंडली के इस भाव में विराजमान बुध का फल बड़ा अप्रत्याशित रहता है ऐसे व्यक्ति के जीवन में उतार-चढ़ाव की अधिकता रहती है। यात्राओं के प्रेमी और धार्मिक कार्यों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेने वाले ऐसे लोग खूब सामाजिक प्रतिष्ठा प्राप्त करते हैं। धार्मिक ट्रस्टों, वृद्ध आश्रमों तथा मंदिरों में दानके लिए ऐसे लोगों को जाना जाता है। बुध अपने घर में विराजमान हों तो ऐसा व्यक्ति विदेशी कंपनियों में बड़े पदों पर नौकरी करता है और स्वयं के बलपर विदेश प्रवास करता है।

जसविन्दर सिंह एस्ट्रोलॉजर,रीगल स्टूडियो, किला गेट भटिंडा
फ़ोन -9888383888
🕉️🙏🚩🕉️🙏🚩🕉️

Address

Regal Studio Fort Gate
Bhatinda
151001

Opening Hours

Monday 11am - 7:30pm
Tuesday 11am - 7:30pm
Wednesday 11am - 7:30pm
Thursday 11am - 7:30pm
Friday 11am - 7:30pm
Saturday 11am - 7:30pm

Telephone

+919888383888

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Jasvinder Singh Astrologer Regal Studio Fort Gate Bhatinda posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to Jasvinder Singh Astrologer Regal Studio Fort Gate Bhatinda:

Share