Jasvinder Singh Astrologer Regal Studio Fort Gate Bhatinda

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12/07/2026
24/05/2026

अंगारक योग 12 भावों में मंगल-राहु की 'महा-ऊर्जा' का महा-प्रभाव!

1. प्रथम भाव (लग्न) - 'स्वयं का विस्फोट'

लग्न में अंगारक योग व्यक्ति को अत्यधिक ऊर्जावान, निडर और महत्वाकांक्षी बनाता है। ऐसे लोग निर्णय लेने में बहुत जल्दबाजी करते हैं। इनमें 'बॉस' बनने की प्रबल इच्छा होती है।

नकारात्मक: जिद्दीपन, सिरदर्द या सिर पर चोट लगने की संभावना, बिना सोचे समझे एक्शन लेना।

सकारात्मक: असीमित आत्मविश्वास। ये लोग अकेले दम पर साम्राज्य खड़ा कर सकते हैं।

2. द्वितीय भाव (धन व कुटुंब) - 'वाणी का बाण'

यहाँ राहु और मंगल व्यक्ति की जुबान को बहुत तीखा (Blunt) बना देते हैं। ये जो सच बोलते हैं, वह दूसरों को तीर की तरह चुभता है।

नकारात्मक: परिवार में पैतृक संपत्ति को लेकर अचानक विवाद, धन का अचानक आना और तेजी से खर्च होना, खान-पान की गलत आदतें।

सकारात्मक: ऐसे लोग रिस्क लेकर बहुत कम समय में भारी धन (Wealth) कमा सकते हैं।

3. तृतीय भाव (पराक्रम) - 'सुपर पावर'

ज्योतिष में तीसरे भाव में क्रूर ग्रह शानदार माने जाते हैं। यहाँ अंगारक योग व्यक्ति को अजेय योद्धा बना देता है।

नकारात्मक: छोटे भाई-बहनों के साथ वैचारिक मतभेद या झगड़े।

सकारात्मक: अद्भुत साहस। खेल (Sports), सेना, पुलिस या मीडिया के क्षेत्र में ये लोग अपना लोहा मनवाते हैं। ये रिस्क लेने से कभी नहीं घबराते।

4. चतुर्थ भाव (सुख व माता) - 'घर में अशांति'

चौथा भाव हमारे घर और शांति का है, और वहां आग और हवा का बवंडर शांति भंग कर देता है।

नकारात्मक: माता के स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव, घरेलू कलह, प्रॉपर्टी से जुड़े विवाद। ऐसे लोग अपने जन्म स्थान पर कभी शांत नहीं बैठ पाते।

सकारात्मक: जन्म स्थान से दूर या विदेश जाकर इन्हें जबरदस्त सफलता और संपत्तियां मिलती हैं। रियल एस्टेट से लाभ हो सकता है।

5. पंचम भाव (संतान व विद्या) - 'बुद्धि का तूफान'

यहाँ मंगल-राहु व्यक्ति के दिमाग को हाइपर-एक्टिव कर देते हैं।

नकारात्मक: शिक्षा में अचानक ब्रेक (Breaks), प्रेम संबंधों में आक्रामकता और धोखा, संतान प्राप्ति में देरी या गर्भपात (Miscarriage) का खतरा।

सकारात्मक: शेयर मार्केट, सट्टा या ट्रेडिंग में अचानक बड़ा लाभ। इनकी बुद्धि आउट-ऑफ-द-बॉक्स सोचती है।

6. षष्ठम भाव (रोग व शत्रु) - 'शत्रुहंता'

तीसरे भाव की तरह यहाँ भी यह योग व्यक्ति को बेहद शक्तिशाली बनाता है।

नकारात्मक: गुप्त शत्रु बनते हैं, रक्त (Blood) या सर्जरी से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं आ सकती हैं।

सकारात्मक: "शत्रुहंता योग"। इनसे जो टकराता है, वह खुद बर्बाद हो जाता है। कोर्ट-कचहरी और मुकदमों में जीत हमेशा इन्ही की होती है। डॉक्टर या सर्जन बनने के लिए यह बेहतरीन योग है।

7. सप्तम भाव (विवाह व साझेदारी) - 'रिश्तों का रणक्षेत्र'

यह अंगारक योग का सबसे संवेदनशील स्थान है।

नकारात्मक: दांपत्य जीवन में अहंकार (Ego) का टकराव। पार्टनर पर हावी होने की कोशिश से तलाक या अलगाव की नौबत आ सकती है। बिजनेस पार्टनरशिप में अचानक धोखा।

सकारात्मक: यदि जीवनसाथी भी उतनी ही ऊर्जा वाला या समझदार हो, तो दोनों मिलकर जीवन में बहुत तरक्की करते हैं।

8. अष्टम भाव (आयु व गुप्त विद्या) - 'रहस्य और जोखिम'

आठवां भाव अचानक होने वाली घटनाओं का है।

नकारात्मक: वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि दुर्घटना या सर्जरी का खतरा रहता है। पाइल्स या गुप्त रोग हो सकते हैं।

सकारात्मक: गुप्त विद्याओं (ज्योतिष, तंत्र-मंत्र), रिसर्च और डिटेक्टिव कार्यों में इन्हें महारत हासिल होती है। ससुराल पक्ष या इंश्योरेंस से अचानक धन लाभ।

9. नवम भाव (भाग्य व धर्म) - 'परंपराओं का विद्रोही'

ये लोग आंख बंद करके किसी परंपरा या गुरु को नहीं मानते।

नकारात्मक: पिता या गुरुजनों के साथ वैचारिक मतभेद। भाग्य में अचानक उतार-चढ़ाव (Extreme Luck or Extreme Bad Luck)।

सकारात्मक: ये खुद के नियम बनाते हैं। लंबी यात्राओं या विदेश से इनके भाग्य का उदय होता है।

10. दशम भाव (कर्म व करियर) - 'करियर का पावरहाउस'

दसवें भाव में मंगल 'दिग्बली' होता है। यहाँ राहु का साथ इसे एक भयंकर वर्कहॉलिक (Workaholic) बना देता है।

नकारात्मक: बॉस या उच्च अधिकारियों से अक्सर झगड़ा होता है। अति-महत्वाकांक्षा के कारण करियर में अचानक बदलाव आते हैं।

सकारात्मक: ये नौकरी से ज्यादा खुद का काम (Business) करने में सफल होते हैं। इंजीनियरिंग, राजनीति या किसी बड़े संस्थान का नेतृत्व करने के लिए यह एक शानदार योग है।

11. एकादश भाव (लाभ) - 'असीमित इच्छाएं'

ग्यारहवें भाव में सभी ग्रह लाभ देते हैं। यहाँ अंगारक योग व्यक्ति को अपनी इच्छाएं पूरी करने के लिए किसी भी हद तक जाने का जुनून देता है।

नकारात्मक: धन कमाने के लिए कई बार गलत या अनैतिक शॉर्टकट अपनाने का मन करता है। बड़े भाई से तनाव।

सकारात्मक: यह "महा-धन दायक" स्थिति है। अचानक भारी मुनाफा, बड़ा नेटवर्क और प्रभावशाली लोगों से संपर्क बनते हैं।

12. द्वादश भाव (व्यय व मोक्ष) - 'नींद और खर्चों का विस्फोट'

नकारात्मक: अत्यधिक खर्च, रातों की नींद खराब होना (Insomnia), बेडरूम लाइफ में समस्याएं और छुपे हुए शत्रुओं का डर। कानूनी पचड़ों या अस्पताल में धन खर्च।

सकारात्मक: विदेश में बसने (Foreign Settlement) के लिए यह बहुत मजबूत योग है। विदेशी कंपनियों या इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट के काम से भारी सफलता।

निष्कर्ष:

जैसा कि पहले भाग में बताया गया था, अपनी कुंडली में अंगारक योग देखकर डरें नहीं। मंगल की इस विस्फोटक ऊर्जा को पहचानें। जो भाव इस आग की चपेट में है, वहां क्रोध करने के बजाय 'कर्म' करें। पसीना बहाएं, खेलकूद या जिम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। जब आप अपनी अतिरिक्त ऊर्जा को सही जगह इन्वेस्ट कर देंगे, तो राहु और मंगल आपको वह देंगे, जो शायद कोई और ग्रह न दे सके!

अस्वीकरण (Disclaimer):

ज्योतिष एक संभावनाओं का विज्ञान है, डराने का नहीं। ऊपर दिए गए परिणाम सामान्य ज्योतिषीय सिद्धांतों पर आधारित हैं। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले कुंडली में इन बातों का सूक्ष्म विश्लेषण करना अत्यंत आवश्यक है:

दोनों ग्रहों (मंगल-राहु) की युति पर किस शुभ या अशुभ ग्रह की दृष्टि है।

मंगल और राहु किस नक्षत्र में बैठे हैं।

आपकी कुंडली के लग्न के अनुसार मंगल और राहु कारक (फायदेमंद) हैं या अकारक (नुकसान दायक)।

इन बिंदुओं के आधार पर इस योग के परिणाम पूरी तरह बदल सकते हैं।

20/02/2026

साढ़े साती बचपन, युवावस्था, वृद्धावस्था में !

साढ़े साती एक 7.5 वर्ष की अवधि होती है जब शनि (शनि ग्रह) तीन राशियों से गुजरता है: चंद्र राशि से पहले की, चंद्र राशि, और उसके बाद की राशि। यह तब शुरू होती है जब शनि चंद्र राशि से पहले वाली राशि में प्रवेश करता है और तब समाप्त होती है जब वह चंद्र राशि के बाद वाली राशि से बाहर निकलता है। चूँकि शनि एक राशि में लगभग 2.5 वर्ष बिताता है, तीन राशियों को पार करने में उसे 7.5 वर्ष लगते हैं, इसलिए इसे "साढ़े साती" कहा जाता है।
व्यक्ति अपने जीवन में तीन बार साढ़े साती का अनुभव करता है: एक बार बचपन में, एक बार युवावस्था में, और एक बार वृद्धावस्था में। हर बार इसका प्रभाव अलग होता है:
बचपन में यह माता-पिता और शिक्षा को प्रभावित करता है।
युवावस्था में यह करियर, आर्थिक स्थिति और परिवार पर प्रभाव डालता है।
वृद्धावस्था में यह मुख्य रूप से स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।

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