28/07/2023
Steel is Yesterday
Green Steel is Tomorrow.
यह Tomorrow वाली राह इतनी आसान नहीं है, जितनी समझी जा रही है । ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग भारतीय इस्पात उद्योग में कितना होगा, यह तो आने वाला समय ही बताएगा । आज विश्व पर्यावरण की रक्षा में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए हमारे देश के 14 मंत्रालयों में कुल 56 प्रोजेक्ट चल रहे हैं। जो बहुत ही प्रशंसनीय है।
ग्रीन हाइड्रोजन का कच्चा उत्पाद पानी है। पानी से हाइड्रोजन निकालने की कवायद में लगने वाला उपकरण इलेक्ट्रोलाइजर हैं, जिसका उत्पादन वर्तमान में बहुत ही सीमित मात्रा में है ।
जहां भारत के कई क्षेत्र भूमिगत जल की समस्या से जूझ रहे हैं, ऐसे में "पानी" व " इलेक्ट्रोलाइजर" दोनों की कमी हमारे देश में है । फिर अंतिम उत्पाद " हाइड्रोजन " को Store व Transportation में सुरक्षा मानकों के परिपालन में लगने वाली पूंजी का भी ध्यान रखना है।
संक्षिप्त में, कच्चा माल की उपलब्धता, अंतिम उत्पाद में बनाने वाले संयंत्र की कमी तथा अंतिम उत्पाद की financial viability तीनों इस राष्ट्रीय मिशन को चुनौती दे रहे हैं।
इन तमाम विसंगतियों के बावजूद भी नेशनल हाइड्रोजन मिशन में 5 मिलीयन टन के उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
इन चुनौतियों से निपटने की दिशा में CII- Soharabji Godrej Green Business Centre द्वारा Decorbonizing the Indian Steel Industry विषय पर दो दिवसीय, 27- 28 जुलाई , राष्ट्रीय संगोष्ठी/ परिचर्चा रायपुर में किया गया, जिसमें देश विदेश की नामी-गिरामी कंपनियों ने अपनी सहभागिता देकर Steel sector में Decorbonizing की समस्या और समाधान पर मंथन किया।