तकनिकी जानकारी

तकनिकी जानकारी मानव जीवन का अंतिम लक्ष्य केवल भौतिक सफलता नहीं, बल्कि आंतरिक शांति और आत्मसंतुलन है।

28/11/2025

1. जीवन में परिवर्तन को स्वीकारें- कुछ भी स्थायी नहीं है। स्थिति, रिश्ते, सफलता, असफलता। तनाव कम करने का सबसे आसान तरीका है परिवर्तन को प्राकृतिक मानना।

2. काम करते रहें, परिणाम की चिंता छोड़ें- अपने काम को पूरी निष्ठा से करें, लेकिन परिणाम को लेकर अत्यधिक बेचैनी न पालें। चिंता कम, गुणवत्ता ज्यादा।

3. भावनाओं में बहकर निर्णय न लें- मोह, गुस्सा, डर या लालच निर्णय को अस्पष्ट करते हैं। निर्णय भावनाओं से नहीं, बुद्धि से लो।

4. वर्तमान में जिएँ- क्या खोया, क्या मिलेगा इन चिंताओं में मन उलझा रहता है। सफलता वहीं है जहाँ ध्यान पूरी तरह ‘वर्तमान’ पर हो।

5. अपने काम को एक उच्च उद्देश्य से जोड़ें- भले धार्मिक अर्थ में नहीं, लेकिन अपने काम को किसी बड़े उद्देश्य या मूल्य से जोड़ना व्यक्ति को संघर्षों में स्थिर बनाता है।

6. जीवन को हल्का बनाएँ- वस्तुओं, लोगों और परिस्थितियों पर अत्यधिक नियंत्रण की इच्छा छोड़ें।

जितना पकड़ोगे, उतना तनाव बढ़ेगा,
जितना छोड़ोगे, उतनी शांति बढ़ेगी।

7. सभी के प्रति समान दृष्टि रखें- बड़ों-छोटों, अमीर-गरीब, अपने-पराये में अत्यधिक भेद न रखें। समानता का दृष्टिकोण रिश्तों में अनावश्यक संघर्ष कम करता है।

स्पष्ट सोच, शांत मन, निस्वार्थ कर्म और संतुलित दृष्टि- जिस व्यक्ति ने इन चार बातों को अपनाया, वह जीवन में सफल भी होता है और शांत भी।

20/11/2025

🤨 एक आश्चर्यजनक रीति चल पड़ी है, बुजुर्ग बीमार हुए, एम्बुलेंस बुलाओ, जेब के अनुसार 3 स्टार या 5 स्टार अस्पताल ले जाओ, ICU में भर्ती करो और फिर जैसा जैसा डाक्टर कहता जाए, मानते जाओ।

और
अस्पताल के हर डाक्टर, कर्मचारी के सामने आप कहते है कि "पैसे की चिंता मत करिए, बस इनको ठीक कर दीजिए"

और
डाक्टर एवं अस्पताल कर्मचारी लगे हाथ आपके मेडिकल ज्ञान को भी परख लेते है और फिर आपके भावनात्मक रुख को देखते हुए खेल आरम्भ होता है..

कई तरह की जांचे होने लगती हैं, फिर रोज रोज नई नई दवाइयां दी जाती है, रोग के नए नए नाम बताये जाते हैं और आप सोचते है कि बहुत अच्छा इलाज हो रहा है।

80 साल के बुजुर्ग के हाथों में सुइयां घुसी रहती है, बेचारे करवट तक नही ले पाते। ICU में मरीज के पास कोई रुक नही सकता या बार बार मिल नही सकते। भिन्न नई नई दवाइयों के परीक्षण की प्रयोगशाला बन जाता है 80 वर्षीय शरीर।

आप ये सब क्या कर रहे है एक शरीर के साथ ?
शरीर, आत्मा, मृत्युलोक, परलोक की अवधारणा बताने वाले धर्म की मान्यता है कि ज्ञात मृत्यु सदा सुखद परिस्थिति में होने, लाने का प्रयत्न करना चाहिए।

इसलिए
वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्र में बुजुर्ग अंतिम अवस्था मे घर में हैं तो जिन लोगो को वो अंतिम समय में देखना चाहते हैं, अपना वंश, अपना परिवार, वो सब आसपास रहते हैं।
बुजुर्ग की कुछ इच्छा है खाने की तो तुरन्त उनको दिया जाता है, भले ही वो एक कौर से अधिक नही खा पाएं। लेकिन मन की इच्छा पूरी होना आवश्यक है, आत्मा के शरीर छोड़ने से पहले। मन की अंतिम अवस्था शांत, तृप्त होगी तो अदृश्य परलोक में शांति रहेगी, बेचैनी नहीं।

अस्पताल के ICU में क्या ये संभव होता है?
अस्पताल में कष्टदायक, सुइयां घुसे शरीर से क्या आत्मा प्रसन्न होकर निकलेगी?
क्या अस्पताल के icu में बुजुर्ग की हर इच्छा पूरी होती है?

रोज नई नई दवाइयों का प्रयोग, कष्टदायक यांत्रिक उपचार, मनहूस जैसे दिनभर दिखते अपरिचित चेहरों के बीच बुजुर्ग के शरीर को बचाइए!
यदि आप थोड़ा सा भी उनके प्रति संवेदनशील हो , तो बुजुर्ग को देवलोक गमन का शरीर मानकर सेवा करिये! सफेद कोट वालों के हाथों में चूहा बनाकर मत छोड़िए।
अगर सेवा नहीं होती तो,
अच्छी नर्स को घर मे रखिये, घर में सभी सुविधाएं देने का प्रयत्न कीजिये।

विचार अवश्य करें..!

16/11/2025

Quality is no longer one person’s job — and ISO made that clear by removing this role👇

🧭 Why the Management Representative (MR) Role Was Removed from ISO 9001:2015

In earlier versions of ISO 9001 (like ISO 9001:2008), every organization had to appoint a Management Representative (MR) — a person responsible for ensuring that the Quality Management System (QMS) was implemented and maintained, reports were made to top management, and customer focus was promoted.

However, in ISO 9001:2015, this requirement was removed intentionally — and here’s why:

⚙️ 1. To Promote Shared Responsibility
The role of ensuring quality should not lie with one individual.
The revision aimed to embed quality into the organization’s culture, making it everyone’s responsibility, especially top management.
By removing the MR, ISO emphasized that quality is not delegated — it is led.

🧑💼 2. To Strengthen Leadership Involvement
Earlier, top management often relied on the MR to handle all ISO activities — audits, documentation, and communication with certifying bodies.
Now, the standard requires direct leadership engagement — meaning management must actively:
Integrate QMS into business processes
Promote risk-based thinking
Ensure strategic alignment of the QMS with organizational goals
This ensures leadership accountability, not just oversight.

🔄 3. To Increase Flexibility
Organizations can still appoint an MR internally if it helps in coordination — ISO doesn’t prohibit it.
It’s just not mandatory anymore.
This gives flexibility — especially to smaller companies — to assign responsibilities according to their structure.

🧩 4. To Align with the “High-Level Structure” (Annex SL)
ISO 9001:2015 follows a unified structure (Annex SL) that applies across all ISO management standards (e.g., ISO 14001, ISO 45001, ISO 27001).
Removing MR ensures consistency across standards — focusing on roles and responsibilities, not titles.

💡 In Summary
The Management Representative role was removed to:
Eliminate dependency on a single person
Strengthen top management’s accountability
Embed quality ownership across all levels
Align with modern business structures and other ISO standards

✅ Key Takeaway:
You can still have someone perform the MR’s functions — but quality leadership now belongs to everyone, especially top management.

ताबें के बर्तन में पानी पीना कितना फ़ायदे मंद है ?उत्तर - सेहत के लिए पानी पीना अच्छी आदत है। स्वस्थ रहने के लिए हर इंसान...
14/11/2025

ताबें के बर्तन में पानी पीना कितना फ़ायदे मंद है ?
उत्तर - सेहत के लिए पानी पीना अच्छी आदत है। स्वस्थ रहने के लिए हर इंसान को दिनभर में कम से कम 8-10 गिलास पानी जरूर पीना चाहिए।

आयुर्वेद में कहा गया है सुबह के समय तांबे के पात्र का पानी पीना विशेष रूप से लाभदायक होता है। इस पानी को पीने से शरीर के कई रोग बिना दवा ही ठीक हो जाते हैं। साथ ही, इस पानी से शरीर के जहरीले तत्व बाहर निकल जाते हैं। रात को इस तरह तांबे के बर्तन में संग्रहित पानी को ताम्रजल के नाम से जाना जाता है।

ये ध्यान रखने वाली बात है कि तांबे के बर्तन में कम से कम 8 घंटे तक रखा हुआ पानी ही लाभकारी होता है। जिन लोगों को कफ की समस्या ज्यादा रहती है, उन्हें इस पानी में तुलसी के कुछ पत्ते डाल देने चाहिए। बहुत कम लोग जानते हैं कि तांबे के बर्तन का पानी पीने के बहुत सारे फायदे हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं तांबे के बर्तन में रखे पानी को पीने से होने वाले कुछ बेहतरीन फायदों के बारे में…

1.हमेशा दिखेंगे जवान
कहते हैं, जो पानी ज्यादा पीता है उसकी स्किन पर अधिक उम्र में भी झुर्रियां दिखाई नहीं देती हैं। ये बात एकदम सही है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर आप तांबे के बर्तन में जल को रखकर पिएं तो इससे त्वचा का ढीलापन आदि दूर हो जाता है। डेड स्किन भी निकल जाती है और चेहरा हमेशा चमकता हुआ दिखाई देता है।

2. थायराइड को करता है नियंत्रित
थायरेक्सीन हार्मोन के असंतुलन के कारण थायराइड की बीमारी होती है। थायराइड के प्रमुख लक्षणों में तेजी से वजन घटना या बढ़ना, अधिक थकान महसूस होना आदि हैं। थायराइड एक्सपर्ट मानते है कि कॉपर के स्पर्श वाला पानी शरीर में थायरेक्सीन हार्मोन को बैलेंस कर देता है। यह इस ग्रंथि की कार्यप्रणाली को भी नियंत्रित करता है। तांबे के बर्तन में रखे पानी को पीने से रोग नियंत्रित हो जाता है।

3. गठिया में होता है फायदेमंद
आजकल कई लोगों को कम उम्र में ही गठिया और जोड़ों में दर्द की समस्या सताने लगती हैं। यदि आप भी इस समस्या से परेशान हैं तो रोज तांबे के पात्र का पानी पिएं। गठिया की शिकायत होने पर तांबे के बर्तन में रखा हुआ जल पीने से लाभ मिलता है। तांबे के बर्तन में ऐसे गुण आ जाते हैं, जिनसे बॉडी में यूरिक एसिड कम हो जाता है और गठिया व जोड़ों में सूजन के कारण होने वाले दर्द में आराम मिलता है।

4. स्किन को बनाए स्वस्थ-
अधिकतर लोग हेल्दी स्किन के लिए तरह-तरह के कॉस्मेटिक्स का उपयोग करते हैं। वो मानते हैं कि अच्छे कॉस्मेटिक्स यूज करने से त्वचा सुंदर हो जाती है, लेकिन ये सच नहीं है। स्किन पर सबसे अधिक प्रभाव आपकी दिनचर्या और खानपान का पड़ता है। इसलिए अगर आप अपनी स्किन को हेल्दी बनाना चाहते हैं तो तांबे के बर्तन में रातभर पानी रखें और सुबह उस पानी को पी लें। नियमित रूप से इस नुस्खे को अपनाने से स्किन ग्लोइंग और स्वस्थ लगने लगेगी।

5. दिल को बनाए हेल्दी
तनाव आजकल सभी की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। इसलिए दिल के रोग और तनाव से ग्रसित लोगों की संख्या तेजी बढ़ती जा रही है। यदि आपके साथ भी ये परेशानी है तो तो तांबे के जग में रात को पानी रख दें। सुबह उठकर इसे पी लें। तांबे के बर्तन में रखे हुए जल को पीने से पूरे शरीर में रक्त का संचार बेहतरीन रहता है। कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में रहता है और दिल की बीमारियां दूर रहती हैं।

6. खून की कमी करता है दूर
एनीमिया या खून की कमी एक ऐसी समस्या है जिससे 30 की उम्र से अधिक की कई भारतीय महिलाएं परेशान हैं। कॉपर के बारे में यह तथ्य सबसे ज्यादा आश्चर्यजनक है कि यह शरीर की अधिकांश प्रक्रियाओं में बेहद आवश्यक होता है। यह शरीर के लिए आवश्यक पोषक तत्वों को अवशोषित करने का काम करता है। इसी कारण तांबे के बर्तन में रखे पानी को पीने से खून की कमी या विकार दूर हो जाते हैं।

7. कैंसर से लड़ने में सहायक
कैंसर होने पर हमेशा तांबे के बर्तन में रखा हुआ जल पीना चाहिए। इससे लाभ मिलता है। तांबे के बर्तन में रखा हुआ जल वात, पित्त और कफ की शिकायत को दूर करता है। इस प्रकार के जल में एंटी-ऑक्सीडेंट भी होते हैं, जो इस रोग से लड़ने की शक्ति प्रदान करते हैं। अमेरिकन कैंसर सोसायटी के अनुसार, कॉपर कई तरीके से कैंसर मरीज की हेल्प करता है। यह धातु लाभकारी होती है।

8. सूक्ष्मजीवों को खत्म करता है
तांबे की प्रकृति में ऑलीगोडायनेमिक के रूप में ( बैक्टीरिया पर धातुओं की स्टरलाइज प्रभाव ) माना जाता है। इसीलिए इसके बर्तन में रखे पानी के सेवन से हानिकारक बैक्टीरिया को आसानी से नष्ट किया जा सकता है। इसमें रखे पानी को पीने से डायरिया, दस्त और पीलिया जैसे रोगों के कीटाणु भी मर जाते हैं, लेकिन पानी साफ और स्वच्छ होना चाहिए।

11/11/2025

कुछ लड़कियों और औरतों द्वारा संचालित..आजकल एक नया व्यवसाय बहुत तेजी से फल फूल रहा है...
जिसमें ना तो कोई लागत लगती है और
ना ही विशेष ड्रेस कोड अथवा यूनिफॉर्म की जरूरत है...
ना ही किसी आफिस या दफ्तर खोलने की समस्या..
और...

यह व्यवसाय है....
सेक्स चैट...

सेमी न्यूड वीडियो कालिंग...
फुल न्यूड वीडियो कालिंग...
और फिर "ब्लैकमेलिंग"

इस धंधे/व्यवसाय...जी हां हम बार बार इस असामाजिक कृत्य को धंधा/व्यवसाय ही कहेंगे क्योंकि इसके जरिए कमाई कर रही है स्त्रियां...

इस धंधे के प्रचार के लिए पहले अनगिनत लोगों के मैसेंजर और इनबाक्स
में मैसेज भेजे जाते हैं कि मुझसे चाहे जैसी सेक्सी बात करो , बस भुगतान करो..

कुछ खास मेहनत नहीं करनी पड़ती हैं इस धंधे से जुड़ी स्त्रियों को...बस एकांत वाला कमरा चाहिए या कोई बाथरूम...
जहां वो किसी अंजान पुरुष या स्त्री से अश्लील बातें करके 100/200 रूपए वसूल सकें....
बिकनी ( ब्रा-पैंटी) में या पूर्ण निर्वस्त्र होकर, वीडियो काल पर बात करके Paytm के जरिए 300/500 वसूल सकें...

अब यदि कोई इनके जाल में फंस गया तो ये उस शख्स की बातों का स्क्रीनशॉट और रिकार्डिंग भी कर लेती हैं,
फिर शुरू होती है...
ब्लैकमेलिंग...

अब आप सभी यह कहकर अपना पल्ला मत झाड़ लीजिएगा कि हमसे क्या मतलब...ना तो हमारे घर के पुरूष ऐसे हैं और ना हमारी घर की स्त्रियां और ना हम ऐसे हैं...मत भूलिए कि हम सबके बच्चों के हाथ में आनलाइन पढ़ाई के चलते हुए अब मोबाईल है और हम सबके मैसेंजर पर भी ऐसे मैसेज आए दिन आते रहते हैं...??
आश्चर्यजनक बात तो यह है कि हमारी और आपकी जनहित या सामाजिक मुद्दों पर आधारित पोस्ट पर Community standard का हवाला देते हुए आइडी ब्लाक कर दी जाती है...मगर ऐसे खुलेआम अपने निजी अंगों को दिखाने और अश्लीलता बातों और लेखों वालियों/वालों की आइडी चलती रहती है...??
आखिर हमारे देश के संस्कृति के रक्षक, साइबर एक्सपर्ट और नारी सशक्तिकरण के संरक्षक अथवा स्त्रीत्व का महिमा मंडन करने वाले...
कैसे धृतराष्ट्र बने बैठे हुए हैं..???

 #सबसे_पहले_किसने_किया_था_श्राद्ध_कैसे_शुरू_हुई_श्राद्ध_परंपरा?श्राद्ध के बारे में धर्म ग्रंथों में कई बातें बताई गई हैं...
02/10/2023

#सबसे_पहले_किसने_किया_था_श्राद्ध_कैसे_शुरू_हुई_श्राद्ध_परंपरा?

श्राद्ध के बारे में धर्म ग्रंथों में कई बातें बताई गई हैं। महाभारत के अनुशासन पर्व में भी भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को श्राद्ध के संबंध में कई ऐसी बातें बताई हैं, जो वर्तमान समय में बहुत कम लोग जानते हैं।
महाभारत में ये भी बताया गया है कि श्राद्ध की परंपरा कैसे शुरू हुई और फिर कैसे ये धीरे धीरे जनमानस तक पहुंची।

निमि ने शुरू की श्राद्ध की परंपरा...

महाभारत के अनुसार, सबसे पहले श्राद्ध का उपदेश महर्षि निमि को महातपस्वी अत्रि मुनि ने दिया था। इस प्रकार पहले निमि ने श्राद्ध का आरंभ किया, उसके बाद अन्य महर्षि भी श्राद्ध करने लगे। धीरे धीरे चारों वर्णों के लोग श्राद्ध में पितरों को अन्न देने लगे। लगातार श्राद्ध का भोजन करते करते देवता और पितर पूर्ण तृप्त हो गए।

पितरों को हो गया था अजीर्ण रोग...

श्राद्ध का भोजन लगातार करने से पितरों को अजीर्ण (भोजन न पचना) रोग हो गया और इससे उन्हें कष्ट होने लगा। तब वे ब्रह्माजी के पास गए और उनसे कहा कि, श्राद्ध का अन्न खाते खाते हमें अजीर्ण रोग हो गया है, इससे हमें कष्ट हो रहा है, आप हमारा कल्याण कीजिए।

देवताओं की बात सुनकर ब्रह्माजी बोले, मेरे निकट ये अग्निदेव बैठे हैं, ये ही आपका कल्याण करेंगे। अग्निदेव बोले, देवताओं और पितरों। अब से श्राद्ध में हम लोग साथ ही भोजन किया करेंगे। मेरे साथ रहने से आप लोगों का अजीर्ण दूर हो जाएगा। यह सुनकर देवता व पितर प्रसन्न हुए। इसलिए श्राद्ध में सबसे पहले अग्नि का भाग दिया जाता है।

पहले पिता को देना चाहिए पिंड...

महाभारत के अनुसार, अग्नि में हवन करने के बाद जो पितरों के निमित्त पिंडदान दिया जाता है, उसे ब्रह्मराक्षस भी दूषित नहीं करते। श्राद्ध में अग्निदेव को उपस्थित देखकर राक्षस वहां से भाग जाते हैं। सबसे पहले पिता को, उनके बाद दादा को उसके बाद परदादा को पिंड देना चाहिए। यही श्राद्ध की विधि है। प्रत्येक पिंड देते समय एकाग्रचित्त होकर गायत्री मंत्र का जाप तथा सोमाय पितृमते स्वाहा का उच्चारण करना चाहिए।

कुल के पितरों को करें तृप्त...

रजस्वला स्त्री को श्राद्ध का भोजन तैयार करने में नहीं लगाना चाहिए। तर्पण करते समय पिता पितामह आदि के नाम का स्पष्ट उच्चारण करना चाहिए। किसी नदी के किनारे पहुंचने पर पितरों का पिंडदान और तर्पण अवश्य करना चाहिए। पहले अपने कुल के पितरों को जल से तृप्त करने के पश्चात मित्रों और संबंधियों को जलांजलि देनी चाहिए। चितकबरे बैलों से जुती हुई गाड़ी में बैठकर नदी पार करते समय बैलों की पूंछ से पितरों का तर्पण करना चाहिए क्योंकि पितर वैसे तर्पण की अभिलाषा रखते हैं।

अमावस्या पर जरूर करना चाहिए श्राद्ध...

नाव से नदी पार करने वालों को भी पितरों का तर्पण करना चाहिए। जो तर्पण के महत्व को जानते हैं, वे नाव में बैठने पर एकाग्रचित्त हो अवश्य ही पितरों का जलदान करते हैं। कृष्णपक्ष में जब महीने का आधा समय बीत जाए, उस दिन अर्थात अमावस्या तिथि को श्राद्ध अवश्य करना चाहिए।

इसलिए रखना चाहिए पितरों को प्रसन्न...

पितरों की भक्ति से मनुष्य को पुष्टि, आयु, वीर्य और धन की प्राप्ति होती है। ब्रह्माजी, पुलस्त्य, वसिष्ठ, पुलह, अंगिरा, क्रतु और महर्षि कश्यप-ये सात ऋषि महान योगेश्वर और पितर माने गए हैं। मरे हुए मनुष्य अपने वंशजों द्वारा पिंडदान पाकर प्रेतत्व के कष्ट से छुटकारा पा जाते हैं।

ऐसे करना चाहिए पिंडदान...

महाभारत के अनुसार, श्राद्ध में जो तीन पिंडों का विधान है, उनमें से पहला जल में डाल देना चाहिए। दूसरा पिंड श्राद्धकर्ता की पत्नी को खिला देना चाहिए और तीसरे पिंड की अग्नि में छोड़ देना चाहिए, यही श्राद्ध का विधान है। जो इसका पालन करता है उसके पितर सदा प्रसन्नचित्त और संतुष्ट रहते हैं और उसका दिया हुआ दान अक्षय होता है।

१. पहला पिंड जो पानी के भीतर चला जाता है, वह चंद्रमा को तृप्त करता है और चंद्रमा स्वयं देवता तथा पितरों को संतुष्ट करते हैं।

२. इसी प्रकार पत्नी गुरुजनों की आज्ञा से जो दूसरा पिंड खाती है, उससे प्रसन्न होकर पितर पुत्र की कामना वाले पुरुष को पुत्र प्रदान करते हैं।

३. तीसरा पिंड अग्नि में डाला जाता है, उससे तृप्त होकर पितर मनुष्य की संपूर्ण कामनाएं पूर्ण करते हैं।

08/07/2023

सोना है सदा के लिये -

यद्यपि मेटल के रेट्स कोई प्रेडिक्ट नहीं कर सकता, पर अन्य किसी भी मेटल एसेट के मुक़ाबले सोना सबसे सेफ़ है.

अक्सर प्रश्न उठते हैं कि यदि सोने की नई ख़ान मिल जाये तो क्या सोना लोहे के भाव मिलने लगेगा. इसका उत्तर मेरी समझ से स्ट्रिक्ट नो है. इसकी बड़ी वजह है दुनिया के सभी देशों द्वारा रखा हुआ गोल्ड रिज़र्व.

एक समय था सभी देश उतना ही कैश छपते थे जितना वह सोना रिज़र्व में वाक़ई रखते थे. कभी भी कोई भी अपने नोट वापस कर सोना ले सकता था. समय के साथ इकॉनमी ग्रो हुई. इतना सोना रिज़र्व में रखना संभव न था न इतना सोना था. तो अब करेंसी सोने से लिंक नहीं होती, इसके बावजूद दुनिया की हर सरकार अपने रिज़र्व में पर्याप्त सोना रखती है. कभी भी इकोनॉमिक क्राइसिस आ जाये तो सोना बेच पैसे जुटाना सबसे आसान होता है, भारत ने भी नब्बे के दसक में सोना गिरवी रखा था.

आज की तारीख़ में विश्व में सबसे ज्यादा गोल्ड रिज़र्व अमेरिका के पास है. लगभग आठ हज़ार मेट्रिक टन. भारत सरकार ने भी आठ सौ मेट्रिक टन रिज़र्व में रखा है.

तो यदि सोने का रेट क्रैश होता है तो सबसे ज्यादा प्रभावित सारे देश होंगे, दुनिया की इकॉनमी क्रैश हो जायेगी.

तो भरोसा रखिए अपनी सरकारों पर. कोई अनहोनी कभी हुई भी तो दुनिया के सारे देश मिल जाएँगे, गोल्ड क्रैश नहीं होने देंगे. अन्य कोई भी मेटल के रेट ऊपर नीचे होने से देश को विशेष फ़र्क़ नहीं पड़ता जितना सोने से पड़ता है.

🤔 How much money do I need to save for retirement? 🏖️💰Are you ready for a retirement reality check? Planning for retirem...
08/07/2023

🤔 How much money do I need to save for retirement? 🏖️💰

Are you ready for a retirement reality check?

Planning for retirement is crucial, but figuring out exactly how much money you need can be overwhelming. 📉💸

Let's break it down together: 💪🤝

1️⃣ Assess your current lifestyle: Take a close look at your expenses and determine how much you need to maintain your desired lifestyle during retirement.

Remember to consider housing, healthcare, travel, hobbies, and any other essentials.

2️⃣ Set realistic goals: Factor in your retirement age, life expectancy, and any anticipated changes in expenses. It's essential to strike a balance between enjoying your golden years and being financially secure.

3️⃣ Do the math: Consider your expected sources of income, such as pensions, Social Security, and investments. Then calculate the amount of savings you'll need to bridge the gap between your income and expenses.

4️⃣ Seek expert advice: Consult with a financial planner or retirement specialist to ensure you're on the right track. They can provide personalized guidance based on your unique circumstances and help you make informed decisions.

Remember, saving for retirement is a marathon, not a sprint! ⏳ Start as early as possible, benefit from compound interest, and regularly review and adjust your savings plan.

Share your retirement goals and strategies in the comments below! Let's support each other on this journey. 👇👇

11/10/2022

🌾बाजरा खाइए, हड्डियों के रोग नहीं होंगें।

🌾बाजरे की रोटी का स्वाद जितना अच्छा है, उससे अधिक उसमें गुण भी हैं।
🌾- बाजरे की रोटी खाने वाले को हड्डियों में कैल्शियम की कमी से पैदा होने वाला रोग *आस्टियोपोरोसिस* और खून की कमी यानी *एनीमिया* नहीं होता।
🌾- बाजरा *लीवर* से संबंधित रोगों को भी कम करता है।
🌾- गेहूं और चावल के मुकाबले बाजरे में *ऊर्जा* कई गुना है।
🌾- बाजरे में भरपूर कैल्शियम होता है जो हड्डियों के लिए रामबाण औषधि है। उधर *आयरन* भी बाजरे में इतना अधिक होता है कि खून की कमी से होने वाले रोग नहीं हो सकते।
🌾- खासतौर पर गर्भवती महिलाओं ने कैल्शियम की गोलियां खाने के स्थान पर रोज बाजरे की दो रोटी खाना चाहिए।
🌾- वरिष्ठ चिकित्साधिकारी मेजर डा. बी.पी. सिंह के सेना में सिक्किम में तैनाती के दौरान जब गर्भवती महिलाओं को कैल्शियम और आयरन की जगह बाजरे की रोटी और खिचड़ी दी जाती थी। इससे उनके बच्चों को जन्म से लेकर पांच साल की उम्र तक *कैल्शियम और आयरन* की कमी से होने वाले रोग नहीं होते थे।
🌾-इतना ही नहीं बाजरे का सेवन करने वाली महिलाओं में प्रसव में *असामान्य पीड़ा* के मामले भी न के बराबर पाए गए।
🌾- डाक्टर तो बाजरे के गुणों से इतने प्रभावित है कि इसे अनाजों में *वज्र* की उपाधि देने में जुट गए हैं।
🌾- बाजरे का किसी भी रूप में सेवन लाभकारी है।
🌾*लीवर की सुरक्षा* के लिए भी बाजरा खाना लाभकारी है।
🌾- *उच्च रक्तचाप, हृदय की कमजोरी, अस्थमा से ग्रस्त लोगों तथा दूध पिलाने वाली माताओं में दूध की कमी* के लिये यह टॉनिक का कार्य करता है।
🌾- यदि बाजरे का नियमित रूप से सेवन किया जाय तो यह *कुपोषण, क्षरण सम्बन्धी रोग और असमय वृद्धहोने* की प्रक्रियाओं को दूर करता
🌾- रागी की खपत से शरीर प्राकृतिक रूप से शान्त होता है। *यह एंग्जायटी, डिप्रेशन और नींद* न आने की बीमारियों में फायदेमन्द होता है। यह *माइग्रेन* के लिये भी लाभदायक है।
🌾- इसमें लेसिथिन और मिथियोनिन नामक अमीनो अम्ल होते हैं जो अतिरिक्त वसा को हटा कर *कोलेस्ट्रॉल* की मात्रा को कम करते हैं।
🌾- बाजरे में उपस्थित रसायन पाचन की प्रक्रिया को धीमा करते हैं।
*डायबिटीज़ में यह रक्त में शक्कर* की मात्रा को नियन्त्रित करने में सहायक होता है।
यह मैसेज अगर आपको अच्छा लगे या समझ में आये की यह किसी के लिया रामबाण की तरह काम आएगा तो आप सेनिवेदन है कि इसमैसेज को अपने *परिचित /मित्र/ या आपके व्हाट्स एप्प ग्रुप फ्रेंड्स* तक भेज दे ।आपका यह कदम *स्वस्थ भारत के निर्माण* मैं योगदान के रूप में होगा दुआ मैं बड़ी ताकत होती है।
*स्वस्थ रहो मस्त रहो व्यस्त रहो और सदा खुश रहो*

नंदी जी के कान में क्यों बोली जाती है मनोकामना ?जानिए इसके पीछे का रहस्य . . .जब भी हम किसी शिव मंदिर जाते हैं तो अक्सर ...
17/09/2022

नंदी जी के कान में क्यों बोली जाती है मनोकामना ?

जानिए इसके पीछे का रहस्य . . .

जब भी हम किसी शिव मंदिर जाते हैं तो अक्सर देखते हैं कि कुछ लोग शिवलिंग के सामने बैठे नंदी के कान में अपनी मनोकामना कहते हैं। ये एक परंपरा बन गई है। इस परंपरा के पीछे की वजह एक मान्यता है। आज हम आपको उसी के बारे में बता रहे हैं, जो इस प्रकार है..

इसलिए नंदी के कान में कहते हैं मनोकामना
मान्यता है जहां भी शिव मंदिर होता है, वहां नंदी की स्थापना भी जरूर की जाती है क्योंकि नंदी भगवान शिव के परम भक्त हैं। जब भी कोई व्यक्ति शिव मंदिर में आता है तो वह नंदी के कान में अपनी मनोकामना कहता है। इसके पीछे मान्यता है कि भगवान शिव तपस्वी हैं और वे हमेशा समाधि में रहते हैं। ऐसे में उनकी समाधि और तपस्या में कोई विघ्न ना आए। इसलिए नंदी ही हमारी मनोकामना शिवजी तक पहुंचाते हैं। इसी मान्यता के चलते लोग नंदी को लोग अपनी मनोकामना कहते हैं।

शिव के ही अवतार हैं नंदी
शिलाद नाम के एक मुनि थे, जो ब्रह्मचारी थे। वंश समाप्त होता देख उनके पितरों ने उनसे संतान उत्पन्न करने को कहा। शिलाद मुनि ने संतान भगवान शिव की प्रसन्न कर अयोनिज और मृत्युहीन पुत्र मांगा। भगवान शिव ने शिलाद मुनि को ये वरदान दे दिया। एक दिन जब शिलाद मुनि भूमि जोत रहे थे, उन्हें एक बालक मिला। शिलाद ने उसका नाम नंदी रखा। एक दिन मित्रा और वरुण नाम के दो मुनि शिलाद के आश्रम आए। उन्होंने बताया कि नंदी अल्पायु हैं। यह सुनकर नंदी महादेव की आराधना करने लगे। प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और कहा कि तुम मेरे ही अंश हो, इसलिए तुम्हें मृत्यु से भय कैसे हो सकता है? ऐसा कहकर भगवान शिव ने नंदी का अपना गणाध्यक्ष भी बनाया।

🚩🔱 हर हर महादेव 🔱🚩🙏🙏

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