20/06/2025
वेद स्वाध्याय
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सामवेद मंत्र १६९७ में जगदीश्वर का वर्णन करते हैं। मंत्र निम्न है।
दाना मृगो न वारणः पुरुत्रा चरथं दधे। न किष्ट्वा नि यमदा सुते गमो महाँश्चरस्योजसा।।
मंत्र का पदार्थ (शब्दार्थ) सामवेद भाष्यकार वेदमूर्ति आचार्य (डॉ०) रामनाथ वेदालंकार जी रचित:- हाथी पशु जैसे गण्डस्थलों पर बहने वाले मदजल को धारण करता है, वैसे ही विपत्तियों का निवारणकर्ता, सज्जनों को खोजने वाला इन्द्र जगदीश्वर बहुत अधिक संचार करने वाले आनन्द-दान को धारण करता है। हे इन्द्र जगदीश्वर! आप हमारे भक्तिरस के उमड़ने पर आओ। आते हुए आपको कोई नहीं रोक सके। महान् आप प्रताप के साथ सर्वत्र व्याप्त हो।
भावार्थ:- जैसे हाथी गण्डस्थलों पर मदजल प्रवाहित करता है, वैसे ही परमेश्वर उपासकों के प्रति आनन्द-रस को बहाता है।
शास्त्री 9977967772