Lovely pepule By.Jagdish Raj Ramani

Lovely pepule By.Jagdish Raj Ramani महत्वपूर्ण एवं उपयोगी जानकारियां

22/06/2024
16/06/2024
04/06/2024
02/06/2024
26/05/2024

बंजर भूमि को उपजाऊ बनाती हरी खाद :- ढैंचा करता है पोषक तत्वो की पूर्ति

किसान भाई कई वर्षों से लगातार अपने खेतों में रासायनिक खाद-उर्वरक तथा अन्य जहरीले रसायनो का प्रयोग करके खेती कर रहे है। गोबर की विभिन्न तरह की खादो व अन्य जैविक खादों का प्रयोग लगभग न के बराबर हो रहा है अथवा बंद कर दिया गया है। जिसके परिणाम स्वरूप हमारी भूमि में ऑर्गेनिक कार्बन, मित्र सूक्ष्म जीव,मित्र फंगस, आवश्यक पोषक तत्वों की कमी होती जा रही है। भूमि की भौतिक व रासायनिक संरचना बिगड़ चुकी है, जमीन का पोलापन कठोरता में बदल रहा है। भूमि में लवणीयता तथा क्षारीयता बढ़ रही है। हमारी भूमि मृत होती जा रही है। जिससे फसलों का उत्पादन स्थिर हो गया है अथवा कम होता जा रहा है। अगर यही हाल रहा तो एक दिन हमारी खेती बंजर हो सकती है।

यदि हमें अपने खेतों को बंजर होने से बचाना है तथा अपनी अगली पीढ़ी के लिए कृषि क्षेत्र में एक अच्छा भविष्य देना है, तो हमे अपने खेतों में नियमित गोबर से बनी विभन्न तरह की खादो व हरी खादो का प्रयोग करना होगा।

हरी खाद :- हरी खाद सबसे अच्छा , सरल, कम लागत वाला एक ऐसा तरीका है जिसके माध्यम से भूमि को उपजाऊ बनाया जा सकता है। इसके प्रयोग से भूमि में देशी केंचुओं की संख्या में वृद्धि होती है तथा फसलों के लिए आवश्यक सभी मुख्य व सूक्ष्म पोषक तत्वों, आर्गेनिक कार्बन, एंजाइम्स- विटामिन्स-हार्मोन्स, विभिन्न मित्र बैक्टेरिया व मित्र फंगस, आर्गेनिक एसिड्स आदि में वृद्धि होती है तथा हमारी भूमि उपजाऊ बनती है।

इसके लिए हमे गेंहू की कटाई के बाद पानी की व्यवस्था वाले खेतो में अप्रैल या मई माह में तथा सूखे क्षेत्रो में मानसून आने पर हरी खाद की बुआई करनी चाहिए। हरी खाद के लिए तेजी से बढ़ने वाली दलहनी फसलें जैसे- ढेंचा, सनई, लोबिया, ग्वार, मूंग उड़द आदि की बुआई कर सकते है। मेरे अनुभव के हिसाब से हरी खाद के लिए ढेंचा एवं सनई सबसे उपयुक्त रहती है, जो जल्दी बढ़ती है तथा इनसे बायोमास भी अधिक मिलता है। ढेंचा एक ऐसी फसल है जो अंकुरित होने के बाद पानी की कमी या सूखा को भी सह लेती है तथा वर्षा के मौषम में अधिक पानी गिरने पर पानी भराव को भी सहन कर सकता है।

हरी खाद को बुआई के बाद गलभग 50 से 60 दिनों में फूल आने के पूर्व खेत मे लोहा हल, डिस्क हैरो अथवा रोटावेटर से मिट्टी में पलट दिया जाता है, इस समय खेत मे पर्याप्त नमी होनी चाहिए जिससे हरी खाद शीघ्र ही डिकॉम्पोज़ हो जाए, खाद पलटते समय खेत मे जीवामृत, वेस्ट डिकॉम्पोज़र अथवा यूरिया डालने से फसल जल्दी ही डिकॉम्पोज़ हो जाती है। दलहनी फसल में एक विशेष गुण होता है कि वह वायुमण्डलीय नाइट्रोजन को अपनी जड़ो में राइजोबियम बैक्टेरिया के माध्यम से भूमि में भंडारित कर लेती है, जिससे खेत मे बोई जाने वाली अगली फसल को पर्याप्त मात्रा में नाइट्रोजन तथा अन्य सभी आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध हो जाते है। जिससे एक तरफ़ तो हमारी भूमि का स्वास्थ्य सुधरता है तथा दूसरी ओर रासायनिक खादों का प्रयोग भी कम किया जा सकता है।

धान लगाने के पूर्व किसान अपने खेती में हरी खाद की बुआई कर मानसून आने पर हरी खाद को खेत मे पलटकर धान की रोपाई कर रासायनिक उर्वरक के खर्चे को कम कर सकते है।
अतः किसान भाइयों से निवेदन है कि आप भी हरी खाद लगाकर अपने खेतों को उपजाऊ बनाये।

हरित कृषि राज ऑर्गेनिक विकास संस्थान से संपर्क कर सकते हैं 9630349171 9993969171

26/05/2024

किसान खुद कर सकते हैं असली–नकली उर्वरक की पहचान -

कृषि उत्पादन बढ़ाने में उर्वरकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। किसान खुद आसान तरीके अपनाकर असली उर्वरकों की पहचान कर सकते हैं। सीधी के उपसंचालक (कृषि ) श्री संजय कुमार श्रीवास्तव ने किसानों को असली उर्वरकों की पहचान करने के कुछ आसान तरीके सुझाए हैं।

यूरिया- किसान ज्यादा उत्पादन लेने फसल में किसी उर्वरक का सबसे अधिक इस्तेमाल करते हैं तो वो यूरिया है। इसकी कीमत सबसे कम होना बड़ी वजह है। यूरिया के दाने सफेद चमकदार और आकार में गोल होते हैं। ये पानी में घुलनशील होता है तथा घोल को छूने पर ठंडा महसूस होता है। यूरिया हथेली पर रखकर और मुट्ठी बंद कर फूंक मारने से हल्का गीला हो जाता है। खुले में रखने पर यह वातावरण की नमी अवशोषित कर गीला हो जाता है तथा गरम तवे पर डालने से वह पिघल जाता है। तेज आंच करने पर इससे अमोनिया की तीक्ष्ण गंध आती है।

डीएपी- कठोर दानेदार, भूरा, काला या बादामी रंग का होता है। नाखूनों से तोड़ने पर यह आसानी से नहीं टूटता। यूरिया की तरह डीएपी भी मुट्ठी में भरकर फूंक मारने पर हल्का गीला हो जाता है। इसके दानों में चूना मिलाकर हाथ से रगड़ने पर तीक्ष्ण गंध आती है। तवे पर धीमी आंच में गरम करने पर इसके दाने फूलकर बड़े हो जाते हैं।

सुपर फास्फेट- डीएपी के विपरीत सुपर फास्फेट नरम दानेदार तथा भूरा, काला या बादामी रंग का होता है। नाखूनों से तोड़ने पर यह टूट जाता है। सुपर फास्फेट के दाने गरम करने पर यथावत बने रहते हैं, डीएपी की तरह फूलते नहीं हैं। सुपर फास्फेट भूरे मटमैले रंग के पाउडर में भी होता है। पाउडर को खुले में रखने पर वातावरण की नमी अवशोषित कर गीला हो जाता है।

म्यूरेट ऑफ पोटाश– म्यूरेट ऑफ पोटाश पिसे नमक की तरह सफेद, लाल रंग की ईंट के पावडर अथवा सफेद नमक और लाल मिर्च के पावडर के मिश्रण जैसा होता है। गीला करने पर इसके कण आपस में चिपकते नहीं है। पानी में घोलने पर पोटाश का लाल भाग ऊपर तैरने लगता है।

एनपीके- तवे पर धीमी आंच में गरम करने से एनपीके के दाने लाई की तरह फूलकर बड़े हो जाते हैं। खुले में रखने पर यह वातावरण की नमी अवशोषित कर गीला हो जाता है।

जिंक सल्फेट– जिंक सल्फेट के दाने हल्के सफेद, पीले तथा भूरे बारीक कणों के आकार के होते हैं। डीएपी के घोल में जिंक सल्फेट का घोल मिलाने पर थक्केदार घना अवशेष बन जाता है।


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22/05/2024
22/05/2024

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