श्याम शर्मा नापासर

श्याम शर्मा  नापासर dp battle 2020 kingston ���

personal Blog

17/08/2024

लड़कों का रोना शुभ नहीं होता है, नहीं, ऐसी मान्यताएं नहीं हैं, पर मुझे लगता है कि लड़कों का रोना अशुभ होता है..मैं जब किसी लड़के को रोते हुए देखता हूँ तो बस यही याद करता हूँ कि मैं आख़िरी बार कब रोया था..शायद मेरी दादी के निधन पर, लेकिन मुझे फ़िर याद आता है कि नहीं, मैं तो तब भी अपने दोस्तों के बीच खड़े होकर दादी की कुछ प्यारी प्यारी बातें याद करके बस हँस रहा था..दादी से मेरा प्रेम अलग ही लेवल का था..शायद वो मुझे मेरी माँ से भी ज्यादा प्रेम करतीं थीं, और मैं भी उन्हें बहुत प्रेम करता था..पर मैंने हँसते हुए उन्हें आख़िरी विदा दी थी..आँसू का नामोनिशान नहीं था कहीं...

लड़के फ़ैल होने पर नहीं रोते, लड़के भूखे रह लेंगे सप्ताह की 4 रातें लेकिन नहीं रोते, लड़के नहीं रोते हैं जब उनके पास महीने के अंतिम दिनों में सुबह की चाय पीने के पैसे नहीं होते हैं, लड़के बाप से जूते खाने के बाद नहीं रोते हैं, लड़के किसी अपने को खो देने के बाद नहीं रोते हैं..अरे ये लड़के तब नहीं रोते जब इनकी प्रेमिका इन्हें छोड़कर चली जाती है, ये तब नहीं रोते जब इनकी प्रेमिका की शादी हो जाती है, या वो किसी और कि हो जाती है...

लड़के अक्सर तब रोया करते हैं जब उनकी समस्याओं का आकार उनके हृदय के आकार से कहीं ज्यादा बड़ा हो जाता है, या उनकी समस्याओं की जड़ें अब उनके हृदय से बाहर निकल आयी हैं, और अब ये जड़ें उनके मष्तिष्क में ज़बरन धँस जाने का प्रयास करने लगी हैं..लड़के अक्सर तब भी मुस्कुराते रहते हैं, उनके अंदर क्या चल रहा है उसे बिना बोले जान लेने का घमंड करने वाली उनकी प्रेमिका को ये पता ही नहीं चलता है कि वो बस उतना जान रही है जितना लड़के उसे ख़ुद बताना चाहते हैं..

लड़के न!! असल में कुत्ते होते हैं शुरू में बाप की नज़र में, फ़िर मोहल्ले वालों की नज़र में, फ़िर रिश्तेदारों की नज़र में, समाज की नज़र में, और कभी अगर धोखे से किसी लड़की को ध्यान से देख ले तब भी लड़के कुत्ते ही रहते हैं..इनकी पूर्व प्रेमिका के लिए ये भूतपूर्व होने के बाद कुत्ते से ज्यादा और कुछ भी नहीं रह जाते है...और तुमने तो सुना होगा न, कुत्तों का रोना अशुभ होता है..इसीलिए मैं कहता हूँ, लड़कों का रोना शुभ नहीं होता है, किसी के लिए भी..❤️

26/06/2022
ये लाल - नीली धमनियाँ देश जोड़ती हैं….इन्हें जलाने का हक़ किसी को नहीं।
17/06/2022

ये लाल - नीली धमनियाँ देश जोड़ती हैं….इन्हें जलाने का हक़ किसी को नहीं।

17/06/2022

मोदी जी जबरदस्ती किसी को अग्निवीर नहीं बना रहे।
जिसकी इच्छा हो फॉर्म भरें जिसकी इच्छा न हो मत भरें।।
वैसे भी नरेगा तो है ही 😎

13/06/2022

किसी भी पार्टी के बङे नेताजी के दौरे का एक सामान्य दृश्य..

मंत्री जी AC गाङी मे बैठकर जयपुर से बीकानेर को निकले आम जनता से मिलने...
सर्किट हाऊस पहूंचे तो वहां छुटभैये नेतालोग लंगर मे खङे थे..
सबने नेताजी को गुलदस्ते दिये और मालाएं पहनाई..
नेताजी इन चमचों की हंसी देखकर आम जनता के दुख भूल गये जिनके लिये असल मे वो जयपुर से चलकर आये हैं..
अब शुरू हूआ सेल्फी का दौर, जो करीबन डेढ-दो घंटे तक चला..
अब नेताजी को ये महसूस होने लगा था कि यहां तो चारों तरफ खुशियां बिखरी पड़ी हैं फिर भी लोग कहते हैं कि जनता दुखी और परेशान है..
मेरे सभी कार्यकर्ता इतने सुखी तो जनता कैसे हो सकती है दुखी ..
इसका मतलब जनता दुखी होने का नाटक कर रही है!!
मंत्री जी ने जनता के लिये निर्धारित पांच घंटों मे से चार घंटे आनंद मयी माहौल मे गुजार कर आखिरी एक घंटे मे जल्दी जल्दी जनता की समस्याएं सुनी और चल पड़े वापस राजधानी की ओर...
उधर छुटभैये लोग अपने मोबाईल मे ली सेल्फी की फोटो मंडवाने के लिये स्टूडियो की तरफ जाते दिख रहे थे ताकि अपने घर और ऑफिस के प्रवेश द्वार पर फोटो टांग कर शान और रौब बढा सकें....
#इधर जनता का इंतजार फिर से शुरू कि अगली बार मंत्री जी आयेंगे तो हमारी समस्याएं दूर करेंगे..!!

इन छुटभैयों को जनता के कामों मे रोङा अटकाने का क्या हक है.. राय देवें!!?

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