Maatangi vastu & jyotish research

Maatangi vastu & jyotish research kundli analysis, match making, vastu consultancy, ratna prescribe

10/02/2019
04/05/2018
*कौन सा रत्न धारण करें************************कौन सा रत्न धारण करें आज कल सभी लोग अपना लक्की रत्न धारण करना चाहते है ताक...
27/04/2018

*कौन सा रत्न धारण करें*
**********************

*कौन सा रत्न धारण करें आज कल सभी लोग अपना लक्की रत्न धारण करना चाहते है ताकि वे जीवन में अधिक से अधिक तरक्की कर सकें! लेकिन सबकी यही समस्या है की आखिर कौन सा रत्न तरक्की देगा ? रत्न धारण करने के लिए हमेशा कुंडली का सही निरिक्षण अति आवश्यक है ! कुंडली के सही निरिक्षण के बिना रत्न धारण करना नुक्सान दायक हो सकता है! आप हमेशा इसी दुविधा में रहते है की क्या में पुखराज धारण कर सकता हूँ अथवा क्या मे नीलम धारण कर सकता हूँ ? यदि मुझे कोई समस्या का समाधान चहिये तो कौन सा रत्न धारण करूँ ! चलो आज हम यह जानने की कोशिश करते है की रत्न धारण करने के पीछे आखिर क्या तथ्य है!*

*वैदिक ज्योतिष के अनुसार हर ग्रह का सम्बन्ध किसी न किसी रत्न से है, और हर रत्न का सम्बन्ध किसी न किसी ग्रह से ! जैसे सूर्य का सम्बन्ध माणिक्य रत्न से, चन्द्र का मोती से, बुध का पन्ने से, गुरु का पुखराज से शुक्र का हीरे से, शनि का नीलं से, राहू का गोमेद से और केतु का लह्सुनिये से! इस प्रकार हमारे नौ ग्रहों का सम्बन्ध नौ रत्नों से है!*

*रत्नों के धारण करने के पीछे सामान्य तथ्य यही है की यदि आप किसी भी ग्रह का प्रतिनिधि रत्न धारण करते है तो आप उस ग्रह की कार्य क्षमता को बढ़ा देते है! चाहे वह ग्रह आपके लिए नुक्सान दायक है अथवा फायदेमंद इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता! क्योकि यदि ग्रह फायदेमंद होगा तो रत्न धारण के पश्चात् अधिक फायदा देगा लेकिन यदि गृह नुक्सान दायक होगा तो रत्न धारण से वह अधिक नुक्सान करेगा! अब यदि आप कोई रत्न धारण करना चाहते है तो आपको यह अवश्य ज्ञात होना चाहिए की आपकी कुंडली के अनुसार आपका कौन सा ग्रह फायदेमंद अथवा नुक्सान दायक है! *

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

ज्योतिष में गुरु चांडाल योग के प्रभाव        💐💐💐💐💐💐💐💐  गुरु का राहु या केतु की युति से गुरु चांडाल योग /दोष का निर्माण ह...
23/03/2018

ज्योतिष में गुरु चांडाल योग के प्रभाव
💐💐💐💐💐💐💐💐
गुरु का राहु या केतु की युति से गुरु चांडाल योग /दोष का निर्माण होता है। जब भी कुंडली में गुरु और राहु ग्रह एक ही राशि में विराजमान होते तो यह कहा जाता है कि आपके कुंडली में गुरु चांडाल योग/दोष है। यदि किसी की जन्मकुंडली में गुरु (बृहस्पति) के साथ राहु या केतु की युति है अथवा गुरु का राहु या केतु के साथ दृष्टि आदि से कोई संबंध बन रहा हो तो ऐसी स्थिति में कुंडली में गुरु चांडाल योग का निर्माण होता है।

गुरु चांडाल योग दोष का जातक के ऊपर प्रभाव
💐💐💐💐💐💐💐
१. यदि लग्न में गुरू चाण्डाल योग बन रहा है तो व्यक्ति का नैतिक चरित्र संदिग्ध रहेगा। धन के मामलें में भाग्यशाली रहेगा। धर्म को ज्यादा महत्व न देने वाला ऐसा जातक आत्म केन्द्रित नहीं होता है।

२. यदि द्वितीय भाव में गुरू चाण्डाल योग बन रहा है और गुरू बलवान है तो व्यक्ति धनवान होगा। यदि गुरू कमजोर है तो जातक धूम्रपान व मदिरापान में ज्यादा आशक्त होगा। धन हानि होगी और परिवार में मानसिक तनाव रहेंगे।

३. तृतीय भाव में गुरू व राहु के स्थित होने से ऐसा जातक साहसी व पराक्रमी होती है। गुरू के बलवान होने पर जातक लेखन कार्य में प्रसिद्ध पाता है और राहु के बलवान होने पर व्यक्ति गलत कार्यो में कुख्यात हो जाता है।

४. चतुर्थ घर में गुरू चाण्डाल योग बनने से व्यक्ति बुद्धिमान व समझदार होता है। किन्तु यदि गुरू बलहीन हो तो परिवार साथ नहीं देता और माता को कष्ट होता है।

५. यदि पंचम भाव में गुरू चाण्डाल योग बन रहा है और बृहस्पति नीच का है तो सन्तान को कष्ट होगा या सन्तान गलत राह पकड़ लेगा। शिक्षा में रूकावटें आयेंगी। राहु के ताकतवर होने से व्यक्ति मन असंतुलित रहेगा।

६. षष्ठम भाव में बनने वाले गुरू चाण्डाल योग में यदि गुरू बलवान है तो स्वास्थ्य अच्छा रहेगा और राहु के बलवान होने से शारीरिक दिक्कतें खासकर कमर से सम्बन्धित दिक्कतें रहेंगी एंव शत्रुओं से व्यक्ति पीडि़त रह सकता है।

७. सप्तम भाव में बनने वाले गुरू चाण्डाल योग में यदि गुरू पाप ग्रहों से पीडि़त है तो वैवाहिक जीवन कष्टकर साबित होगा। राहु के बलवान होने से जीवन साथी दुष्ट स्वभाव का होता है।

८. यदि अष्टम भाव में गुरू चाण्डाल योग बन रहा है और गुरू दुर्बल है तो आकस्मिक दुर्घटनायें, चोट, आपरेशन व विषपान आदि की आशंका रहती है। ससुराल पक्ष से तनाव भी बना रहता है। इस योग के कारण अचानक समस्यायें उत्पन्न होती है।

९. नवम भाव में बनने वाले गुरू चाण्डाल योग में गुरू के क्षीण होने से धार्मिक कार्यो में कम रूचि होती है एंव पिता से वैचारिक सम्बन्ध अच्छे नहीं रहते है। पिता के लिए भी यह योग कष्टकारी साबित होता है।

१०.दशम भाव में बनने वाले गुरू चाण्डाल योग में व्यक्ति में नैतिक साहस की कमी होती, पद, प्रतिष्ठा पाने में बाधायें आती है। व्यवसाय व करियर में समस्यायें आती है। यदि गुरू बलवान है तो आने वाली बाधायें कम हो जाती है।

११. एकादश भाव में बनने वाले गुरू चाण्डाल योग में राहु के बलवान होने से धन गलत तरीके से भी आता है। दुष्ट मित्रों की संगति में पड़कर व्यक्ति गलत रास्ते पर भी चल पड़ता है। यदि गुरू बलवान है तो राहु के अशुभ प्रभावों को कुछ कम कर देगा।

१२. द्वादश भाव में बन रहेे गुरू चाण्डाल योग में आध्यात्मिक आकांक्षाओं की प्राप्ति भी गलत मार्ग से होती है। राहु के बलवान होने से शयन सुख में कमी रहती है। आमदनी अठन्नी खर्चा रूपया रहता है। गुरू यदि बलवान है तो चाण्डाल योग का दुष्प्रभाव कम रहता है।

P O W E R.....  OF....  M O O N...Moon denotes mental & emotional power in human being. Moon is considered tender  by na...
20/03/2018

P O W E R..... OF.... M O O N...
Moon denotes mental & emotional power in human being. Moon is considered tender by nature & represent love & beauty.
Moon has direct affect on females.
Positive moon indicates joy , enthusiasm & peace of mind in life...while negative moon couses tension , depression , suicidal tendency & pessimistic attitude .
Moon reflects the entire personality of a human being ................

वास्तुशास्त्र अनुसार घर की सीडियां〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰निर्माण अनुरूप होने पर मनुष्य को अपने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में कामयाबी...
16/03/2018

वास्तुशास्त्र अनुसार घर की सीडियां
〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰
निर्माण अनुरूप होने पर मनुष्य को अपने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में कामयाबी मिलती है।इसके लिए अपने घर का निर्माण कराते समय निम्नलिखित बिन्दुओं का ध्यान अवश्य रखना चाहिए: 👇

👉 यदि घर में पूर्व से पश्चिम की तरफ चढ़ने वाली सीढ़ियाँ हों तो भवन मालिक को लोकप्रियता और यश की प्राप्ति होती है।

👉 यदि घर में उत्तर से दक्षिण की तरफ चढ़ने वाली सीढ़ियाँ हों तो घर के मालिक को धन की प्राप्ति होती है।

👉 घर की दक्षिण दीवार के सहारे सीढ़ियाँ धनदायक होती हैं।

👉 घर की सीढ़ियाँ प्रकाशमान और चौड़ी होनी चाहिए. सीढ़ियों की विषम संख्या शुभ मानी जाती है. सामान्यतः एक मंजिल पर सत्रह सीढ़ियाँ शुभ मानी जाती हैं।

👉 घर की घुमावदार सीढ़ियाँ श्रेष्ठ मानी जाती हैं. सीढ़ियों का घुमाव घड़ी की परिक्रमा-गति के अनुसार होना चाहिए।

👉 यदि घर की सीढ़ियाँ सीधी हों तो दाहिनी ओर ऊपर जाना चाहिए।

👉 घर के मध्य भाग में भूलकर भी सीढ़ी न बनाएँ अन्यथा सकती है बड़ी हानि हो।

👉 घर के पूर्व दिशा में सीढ़ियाँ हों, तो हृदय रोग बनाती हैं।

👉 यदि घर की सीढ़ियाँ चक्राकार सर्पिल हों, तो 'ची' ऊर्जा, ऊपर की ओर प्रवाहित नहीं हो पातीं, जिससे भवन मालिक को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

👉 घर के ईशान कोण में बनी सीढ़ी पुत्र संतान के विकास में बाधक होती है।

👉 घर के मुख्य दरवाजे के सामने बनी सीढ़ी आर्थिक अवसरों को समाप्त कर देती है।

👉 घर की सीढ़ियों के नीचे पूजाघर का निर्माण नहीं करना चाहिए।

वास्तुशास्त्र के इन छोटे-छोटे उपायों से आप अवश्य ही शांति का अनुभव करेंगे।

** ज्योतिष में शनि का महत्त्व **भारतीय ज्योतिष को मानने वाले अधिकतर लोग शनि ग्रह से सबसे अधिक भयभीत रहते हैं तथा अपनी जन...
10/03/2018

** ज्योतिष में शनि का महत्त्व **

भारतीय ज्योतिष को मानने वाले अधिकतर लोग शनि ग्रह से सबसे अधिक भयभीत रहते हैं तथा अपनी जन्म कुंडली से लेकर गोचर, महादशा तथा साढ़े सती में इस ग्रह की स्थिति और उससे होने वाले लाभ या हानि को लेकर चिंतित रहते हैं तथा विशेष रुप से हानि को लेकर। शनि ग्रह को भारतवर्ष में शनिदेव तथा शनि महाराज के नाम से संबोधित किया जाता है तथा भारतीय ज्योतिष में विश्वास रखने वाले बहुत से लोग यह मानते हैं कि नकारात्मक होने पर यह ग्रह कुंडली धारक को किसी भी अन्य ग्रह की अपेक्षा बहुत अधिक नुकसान पहुंचा सकता है। शनि ग्रह के भारतीय ज्योतिष में विशेष महत्व को इस तथ्य से आसानी से समझा जा सकता है कि भारत में शनि मंदिरों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है तथा इन मंदिरों में आने वाले लोगों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। इनमें से अधिकतर लोग शनि मंदिरों में शनिवार वाले दिन ही जाते हैं तथा शनिदेव की कारक वस्तुएं जैसे कि उड़द की साबुत काली दाल तथा सरसों का तेल शनि महाराज को अर्पण करते हैं तथा उनकी कृपा दृष्टि के लिए प्रार्थना करते हैं।

शनि मुख्य रूप से शारीरिक श्रम से संबंधित व्यवसायों तथा इनके साथ जुड़े व्यक्तियों के कारक होते हैं जैसे कि श्रम उद्योगों में काम करने वाले श्रमिक, इमारतों का निर्माण कार्य तथा इसमें काम करने वाले श्रमिक, निर्माण कार्यों में प्रयोग होने वाले भारी वाहन जैसे रोड रोलर, क्रेन, डिच मशीन तथा इन्हें चलाने वाले चालक तथा इमारतों, सड़कों तथा पुलों के निर्माण में प्रयोग होने वाली मशीनरी और उस मशीनरी को चलाने वाले लोग। इसके अतिरिक्त शनि जमीन के क्रय-विक्रय के व्यवसाय, इमारतों को बनाने या फिर बना कर बेचने के व्यवसाय तथा ऐसे ही अन्य व्यवसायों, होटल में वेटर का काम करने वाले लोगों, द्वारपालों, भिखारियों, अंधों, कोढ़ियों, लंगड़े व्यक्तियों, कसाईयों, लकडी का काम करने वाले लोगों, जन साधारण के समर्थन से चलने वाले नेताओं, वैज्ञानिकों, अन्वेषकों, अनुसंधान क्षेत्र में काम करने वाले लोगों, इंजीनियरों, न्यायाधीशों, परा शक्तियों तथा इसका ज्ञान रखने वाले लोगों तथा अन्य कई प्रकार के क्षेत्रों तथा उनसे जुड़े व्यक्तियों के कारक होते हैं।

शनि मनुष्य के शरीर में मुख्य रूप से वायु तत्व का प्रतिनिधित्व करते हैं तथा ज्योतिष की गणनाओं के लिए ज्योतिषियों का एक र्वग इन्हें तटस्थ अथवा नपुंसक ग्रह मानता है जबकि ज्योतिषियों का एक अन्य वर्ग इन्हें पुरुष ग्रह मानता है। तुला राशि में स्थित होने से शनि को सर्वाधिक बल प्राप्त होता है तथा इस राशि में स्थित शनि को उच्च का शनि भी कहा जाता है। तुला के अतिरिक्त शनि को मकर तथा कुंभ में स्थित होने से भी अतिरिक्त बल प्राप्त होता है जो शनि की अपनी राशियां हैं। शनि के प्रबल प्रभाव वाले जातक आम तौर पर इंजीनियर, जज, वकील, आई टी क्षेत्र में काम करने वाले लोग, रिअल ऐस्टेट का काम करने वाले लोग, परा शक्तियों के क्षेत्रों में काम करने वाले लोग तथा शनि ग्रह के कारक अन्य व्यवसायों से जुड़े लोग ही होते हैं। शनि के जातक आम तौर पर अनुशासन तथा नियम की पालना करने वाले, विश्लेषनात्मक, मेहनती तथा अपने काम पर ध्यान केंद्रित रखने वाले होते हैं। ऐसे जातकों में आम तौर पर चर्बी की
मात्रा सामान्य से कुछ कम ही रहती है अर्थात ऐसे लोग सामान्य से कुछ पतले ही होते हैं।

मेष राशि में स्थित होने पर शनि बलहीन हो जाते हैं तथा इसी कारण मेष राशि में स्थित शनि को नीच का शनि भी कहा जाता है। इसके अतिरिक्त शनि कुंडली में अपनी स्थिति विशेष के कारण अथवा किसी बुरे ग्रह के प्रभाव के कारण भी बलहीन हो सकते हैं। शनि पर किन्ही विशेष बुरे ग्रहों का प्रभाव जातक को जोड़ों के दर्द, गठिया, लकवा, हड्डियों का फ्रैकचर तथा हड्डियों से संबंधित अन्य बिमारियों से पीड़ित कर सकता है। कुंडली में शनि पर किन्ही विशेष ग्रहों का प्रबल प्रभाव कुंडली धारक की सामान्य सेहत तथा आयु पर भी विपरीत प्रभाव डाल सकता है क्योंकि शनि व्यक्ति के आयु के कारक भी होते हैं।

Address

Ambe Business Center, S-2, 2nd Floor, Opposite To LIC Main Branch, Magarpara Road
Bilaspur
495001

Opening Hours

Monday 11am - 1pm
5pm - 8pm
Tuesday 11am - 1pm
5pm - 8pm
Wednesday 11am - 1pm
5pm - 8pm
Thursday 11am - 1pm
5pm - 8pm
Friday 11am - 1pm
5pm - 8pm
Saturday 11am - 1pm
5pm - 8pm

Telephone

+919425503723

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Maatangi vastu & jyotish research posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to Maatangi vastu & jyotish research:

Share