07/12/2025
नागपुर के बड़े अस्पतालों की रोज़ी-रोटी mp के मरीजों से ही चल रही है।
फिर भी mp के लिए न दया है, न इंसानियत, न एक रुपए का डिस्काउंट।
अस्पताल के बाहर MP22,MP28,MP50,MP51,MP17 और MP19 के वाहन ही खड़े दिखते हैं, ये वही मरीज हैं जो अपने शहर के अस्पतालों में पहले ही लाख 50 फूंक, नागपुर डैमेज बॉडी का डेंट–पेंट ठीक कराने आते हैं,.2 3 दिन से, मैं हर रोज बगीचे में सैकड़ों लोगों के पीछे बैठ, चुपके से मोबाइल पर पैसों के जुगाड़ की ही बाते सुन रहा हूं!
कोई गहने बेच रहा है, कोई गोल्ड लोन ले रहा है,
कोई कार गिरवी रख रहा है, कोई पुश्तैनी जमीन बेचने को मजबूर है।
प्रधानमंत्री की 5 लाख वाली आयुष्मान योजना यहां मजाक है, चलती ही नहीं
चल भी जाए, तो इनका क्या उखड़ेगा—
क्योंकि इतना बिल तो सिर्फ पाँच दिन में बना देते हैं।
महंगे इन अस्पतालों में सफलता पूर्वक इलाज तो होता है, मरीज ठीक हो घर भी जाता है और लौट के भी दोबारा नहीं आता, पर रुपए ऐंठने की कला हर एंगल से बखूबी आती है।
मरीज की औकाद देख उसके रुपए पर डाका डालते हैं
फटी धोती, शर्ट, चप्पल, कपड़े, चेहरे से निर्धनता उसकी हैसियत लाख रुपए से ज्यादा की नहीं है तो मानिए उसे दो —2½ लाख में निपटा देंगे, अच्छा इलाज कर घर भेज देंगे।
अस्पताल में अलग अलग बौद्धिक मंजे खिलाड़ी का अपना-अपना, अलग-अलग कंसल्टेंट, परामर्श, डिसकस विभाग है, जो बॉडी लैंग्वेज, हाव-भाव, भाषा-शैली से आंकलन कर लेते हैं, कौन किस स्तर तक डसा जा सकता है।
इनकी चालाकियों का कोई तोड़ नहीं
आप जब भी नागपुर जाओ तो चालाकी से काम लेना
क्या यह मैसेज ज्यादा लोगों तक शेयर नहीं करोगे