पाबूराम चौधरी- Paburam Choudhary

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कोवे पर बैठे भक्तों का काल्पनिक भगवान का अब रूप चेंज कर गिद्दड पर दैश के कार्टून प्रधानमंत्री की फ़ोटो लगा कर भैजना चाहि...
03/04/2026

कोवे पर बैठे भक्तों का काल्पनिक भगवान का अब रूप चेंज कर गिद्दड पर दैश के कार्टून प्रधानमंत्री की फ़ोटो लगा कर भैजना चाहिय
अब बैकूफ़ो को कोन समझाय की शनि ब्रमांड का एक गृह है लाखो किलोमीटर दूर आकाश मैं इस्थित है और पृथ्वी से हज़ार गुना बड़ा है उसका वजन कोवा कसे सहन कर लेगा
सुबह सुबह काल्पनिक भगवान बना बना कर भजने वाले एक समुदाय का गिरहो है जो दैश मैं अंधविश्वास और पाखंड फैला रखा है और दैश मैं बैकूफ़ो की कमी नहीं है कभी ट्रैम्प की कभी पुतिन को भगवान बना कर पूजा और आरती कर रहे है

28 अप्रैल बाद मै अच्छे दिन आ जायेंगे मार्बल ग्रेनाइट टाइल्स वाले के तो बाकी के भी ढोल नगाड़े बजने तय है कारण देश का कार्...
03/04/2026

28 अप्रैल बाद मै अच्छे दिन आ जायेंगे मार्बल ग्रेनाइट टाइल्स वाले के तो बाकी के भी ढोल नगाड़े बजने तय है कारण देश का कार्टून
इजराइल जा कर गले मै गुलामी की पट्टा डाला ओर आप कुछ भी करो मै ईरान से पहले आपका हु उसका नतीजा पूरा देश भुगतेगा
यह देश को रामलीला का मैदान समझ लिया ओर अलग अलग रूप धारण कर खेल दिखा रहा है अब हो जाओ तैयार भक्तों झोली डंडा ले कर आयेगा तो ,,,,,,,,, ही ??

*नंबरों की बारिश में डूबती प्रतिभा!*परिणाम इतने तेज कि घड़ी भी शर्मा जाए… और अंक इतने ज्यादा कि मेधावी भी सोच में पड़ जा...
02/04/2026

*नंबरों की बारिश में डूबती प्रतिभा!*

परिणाम इतने तेज कि घड़ी भी शर्मा जाए… और अंक इतने ज्यादा कि मेधावी भी सोच में पड़ जाए! शिक्षा व्यवस्था में इन दिनों “नंबरों की सुनामी” ने एक नया सवाल खड़ा कर दिया है—क्या वाकई प्रतिभा बढ़ी है या फिर अंकों का बाजार सज गया है?

बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम इस बार रॉकेट की स्पीड से जारी हुए। छात्रों ने भी ऐसा कमाल दिखाया कि 95% अब सामान्य और 99% “लगभग ठीक-ठाक” माना जाने लगा है। हालत यह है कि मोहल्ले का हर दूसरा बच्चा टॉपर घोषित हो रहा है और *असली टॉपर खुद अपनी पहचान ढूंढता फिर रहा है।* शिक्षाविदों की मानें तो इतने अधिक अंक और इतनी जल्दी परिणाम जारी होना कहीं न कहीं मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है। *कॉपियां जांची जा रही हैं या सिर्फ नंबर बांटे जा रहे हैं—यह बहस अब आम हो चली है।* अब वो दौर आ गया है जब 100 में 100 लाना भी “अच्छा प्रयास” माना जाएगा और 98 लाने वाला बच्चा घर में सफाई देने को मजबूर होगा—“मम्मी, बस दो नंबर ही तो कटे हैं!” वहीं दूसरी ओर, असली प्रतिभाएं जो गहराई से समझती हैं, वे इस नंबरों की भीड़ में कहीं खोती नजर आ रही हैं। यदि यही हाल रहा तो आने वाले समय में डिग्रियां तो सबके पास होंगी, लेकिन असली हुनर और काबिलियत खोजने के लिए शायद अलग से “प्रतिभा खोज अभियान” चलाना पड़ेगा।
99% वाला टॉपर किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में कट ऑफ नंबर लाकर सिलेक्ट भी नहीं हो पाता!!! इन नंबरों की वैल्यू क्या है???? कहीं एडमिशन नहीं होता!!!!

*अब सवाल यही है—क्या हम शिक्षा को बेहतर बना रहे हैं या सिर्फ अंकों का महोत्सव मना रहे हैं?*
यह एक सोची समझी चाल है मनुवादियों की सरकारी स्कूल मै पढ़ा लिखा कंपीटिशन फाइट कर टीचर ,व्याख्याता बनता है ओर प्राइवेट स्कूलों में बेरोजगार युवक युवतियों की भर्ती 8,10 हज़ार रुपए प्रति माह ओर नंबर 99,80
वहा रहे प्राइवेट स्कूल संचालकों बच्चों को किसी काबिल मत छोड़ना अपनी दुकान चलाने के लिय

कल मेरे पैत्रक गांव गिठाला ग्राम भैया कला नागौर  में लोकदेवता वीर वीर तेजाजी महाराज की मूर्ति स्थापना के पावन कार्यक्रम ...
29/03/2026

कल मेरे पैत्रक गांव गिठाला ग्राम भैया कला नागौर में लोकदेवता वीर वीर तेजाजी महाराज की मूर्ति स्थापना के पावन कार्यक्रम सांसद एवम आर, ल, पी के सुप्रीमो भारत के किसान गरीब असहाय एवम् पीड़ित की आवाज उठाने वाले श्री मान हनुमान राम जी बेनीवाल मकराना के वर्तमान विधायक श्री जाकिर हुसैन पूर्व विधायक श्री रूपाराम जी मुरावतिया कई जिला परिषद सदस्य पंचायत समिती सदस्य कई उद्योगपति , मकराना पंचायत समिति के सरपंच, पुलिस प्रशासन एवं मीडिया कर्मी एवं आप पास के गांवों के गणमान्य नागरिकों ओर ग्राम वासियों में शामिल होने का सौभाग्य मिला
शानदार तेजा मंदिर का निर्माण एवम् भव्य कार्यक्रम के लिय गिठाला ग्राम तेजा सेवा समिति द्वारा ग्रामवासियों ने सभी का मेहमानों का आभार व्यक्त किया , जय तेजाजी

25/03/2026

🇮🇷 ईरान ने कहा है कि अगर श्रीलंका 🇱🇰 चाहे,
तो वह उसे तेल या उसकी ज़रूरत की कोई भी चीज़ देने को तैयार है,
क्योंकि मुश्किल वक्त में श्रीलंका ने उसका साथ दिया।

“अगर श्रीलंका मांग करे,
तो हम अतिरिक्त तेल सप्लाई करने के लिए तैयार हैं।
वो हमारे दोस्त हैं।” 🔥

यकीन मानिए
हम भारतीय जो आज मुसीबत में हैं
उसके पीछे खी..खी..खी.. ही..ही.. ही.. करने वाले का हाथ है।

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और मोसाद ने मोदी के गले में "आर्डर आफ दि निस्सेट" का पट्टा डाल भारत को फांसी के ...
25/03/2026

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और मोसाद ने मोदी के गले में "आर्डर आफ दि निस्सेट" का पट्टा डाल भारत को फांसी के फंदे पर लटका दिया है। एक व्यक्ति अपनी व्यक्तिगत खुशी और महत्वाकांक्षा की पूर्ति के लिए अपने राष्ट्रीय हितों की कैसे बलि चढ़ा देता है, मोदी जी इसके सबसे बड़े और उपयुक्त उदाहरण हैं। एप्सटीन फाइल्स की मजबूरियों ने मोदी जी को इतना मजबूर कर दिया है कि वे भारत को ही अमेरिका के हाथों गिरवी रख दिया है, और इजरायल को फादर लैंड कहने के लिए बाध्य हो गये हैं। इसके बाद भी भारत और भारतीयों को अपमान, आर्थिक तबाही, व्यापार घाटा, रुपये की गिरावट, वैश्विक राजनीति में पहचान की संकट, राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का बलिदान, सुरसा की तरह बढ़ता विदेशी कर्ज का बोझ, औद्योगिक विनाश और देश की आमजनता के लिए गरीबी, भूखमरी, महंगाई और बदहाली ही मिला। एक अयोग्य, मूर्ख, अज्ञानी, अदूरदर्शी, अहमक, आत्मकेंद्रित, आत्ममुग्ध और आत्मतुष्ट तथा, मदांध, हीनभावना और कुंठाग्रस्त व्यक्ति का देश का प्रधानमंत्री बनना किसी भी राष्ट्र के लिए कितना घातक हो सकता है, उसका यह प्रामाणिक दस्तावेज है। आज की तारीख में दुनिया का कोई भी देश भारत का मित्र नहीं रह गया है। आज भारत की स्थिति उस जलयान की तरह ही हो गई है, जो महासागर के तुफान में फंसकर जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हिचकोले खा रहा है, जो जिसके पास लहरों से बचकर और दिशाहीन होकर किनारे लगना की दूर-दूर तक कोई संभावना नहीं है।
*जिन्दगी में बहुत ज्यादा उपयोगी बनने के चक्कर में रफ कॉपी मत बनिए..*

*क्योंकि आपकी जिन्दगी के पन्नें सीमित और दुनिया की महत्वकांक्षाएं असीमित हैं!*

हमारा संविधान बेशक वैज्ञानिक सोच बढ़ाने को कहता हो, धार्मिक अंधविश्वास खत्म करने को कहता हो, पर देश में सवैधानिक पदों पर ...
25/03/2026

हमारा संविधान बेशक वैज्ञानिक सोच बढ़ाने को कहता हो, धार्मिक अंधविश्वास खत्म करने को कहता हो, पर देश में सवैधानिक पदों पर बैठने वाले लोगों ने कभी उस संविधान को समझा ही नही, ना वो संविधान के अनुसार चले! धार्मिक अंधविश्वास को बढ़ावा देना धार्मिक पाखण्डों में सराबोर रहना इन लोगों ने अपना मूल कर्तव्य मान लिया! फिर देश के लोगों में वैज्ञानिक सोच कैसे विकसित होती? जब देश चलाने वाले खुद ही अंधविश्वासी पाखण्डी हो? आम लोगों में वैज्ञानिक स्वभाव ( Scientific temperament) तभी बनेगा जब संवैधानिक पदों पर बैठने वाले लोग वैज्ञानिक दृष्टिकोण के हो।
भारतीय लोगों की मानसिकता पर दिवालापन इस कदर छा रखा है कोई सत्य बोलता है या लिखता है वो बर्दाश्त नहीं होता सिर्फ सुबह सुबह मनुवादियों के अपना रोजगार चलाने वाले मनगड्त अपने बनाए हुवे भगवानो के चित्र कोई गधे पर कोई कोवै एर कोई शेर पर कोई हाथी पर कई अतिसुंदर तसवीरे भगवान रूपी महिलाय की तस्वीर फॉरवर्ड करने के अलावा सब भाड़ मैं आप अपने पूर्वजों की पाँचवीं पीढ़ी की फ़ोटो नहीं बता सकते ,किसान और प्रकृति ही ईश्वर है जिसको नजर अंदाज़ कर रखा है इसलिय प्रलय निश्चित है
हे ईश्वर रक्षा करना किसानो की

ट्वीटर, फेसबुक और व्हाट्सएप अपने प्रचंण्ड क्रांतिकारी दौर से गुजर रहा है...हर नौसिखिया क्रांति करना चाहता है...कोई बेडरू...
24/03/2026

ट्वीटर, फेसबुक और व्हाट्सएप अपने प्रचंण्ड क्रांतिकारी दौर से गुजर रहा है...
हर नौसिखिया क्रांति करना चाहता है...

कोई बेडरूम में लेटे-लेटे गौहत्या करने वालों को सबक सिखाने की बातें कर रहा है तो...
किसी के इरादे सोफे पर बैठे-बैठे मँहगाई, बेरोजगारी या बांग्लादेशियों को उखाड़ फेंकने के हो रहे हैं...

हफ्ते में एक दिन नहाने वाले लोग स्वच्छता अभियान की खिलाफत और समर्थन कर रहे हैं।
अपने बिस्तर से उठकर एक गिलास पानी लेने पर नोबेल पुरस्कार की उम्मीद रखने वाले बता रहे हैं कि माँ-बाप की सेवा कैसे करनी चाहिए।

जिन्होंने आजतक बचपन में कंचे तक नहीं जीते वे बता रहे हैं कि भारत रत्न किसे मिलना चाहिए!

जिन्हें "गली-क्रिकेट" में इसी शर्त पर खिलाया जाता था कि बॉल कोई भी मारे पर अगर नाली में गई तो निकालना तुझे ही पड़ेगा वो आज कोहली को समझाते पाए जाएँगे कि उसे कैसे खेलना है।

कई मर्द ऐसे हैं जिन्होंने देश में महिलाओं की कम जनसंख्या को देखते हुए अपनी नकली ID बनाकर जनसंख्या को बराबर कर दिया है।

जिन्हें यह तक नहीं पता कि हुमायूं, बाबर का कौन था? वह आज बता रहे हैं कि किसने कितनों को काटा था ।

कुछ दिन भर शायरियाँ पेलेंगे जैसे 'गालिब' के असली उस्ताद तो यहीं बैठे हैं !

जो नौजवान एक बालतोड़ हो जाने पर रो-रो कर पूरे मोहल्ले में हल्ला मचा देते हैं वे देश के लिए सर कटा लेने की बात करते दिखेंगे!

किसी भी पार्टी का समर्थक होने में समस्या यह है कि...
"भाजपा" समर्थक को अंधभक्त...
"आप" समर्थक उल्लू...
तथा "कांग्रेस"समर्थक बेरोजगार... करार दे दिये जाते हैं!

कॉपी-पेस्ट करनेवालों के तो कहने ही क्या !

किसी की भी पोस्ट चेंप कर ऐसे व्यवहार करेंगे जैसे साहित्य की गंगा उनके घर से ही बहती है...और वो भी 'अवश्य पढ़े' तथा 'मार्केट में नया है' की सूचना के साथ।

एक कप दूध पी लें तो दस्त लग जाएँ, ऐसे लोग हेल्थ की tips दिए जा रहे हैं।
लेकिन समाज के असली जिम्मेदार नागरिक हैं: "टैगिए"...

इन्हें ऐसा लगता है कि जब तक ये गुड मॉर्निंग वाले पोस्ट पर टैग नहीं करेंगे तब तक लोगों को पता ही नहीं चलेगा कि सुबह हो चुकी है !

जिनकी वजह से शादियों में गुलाबजामुन वाले स्टॉल पर एक extra आदमी खड़ा रखना जरूरी है वो आम बजट पर टिप्पणी करते हुए पाए जाते हैं...!

कॉकरोच देखकर चिल्लाते हुये पूरे मोहल्ले में भागने वाले पाकिस्तान को धमका रहे होते हैं कि "अब भी वक्त है सुधर जाओ"!

क्या वक्त आ गया है वाकई ।
धन्य हैं व्हाट्सएप, फेसबुक और ट्वीटर युग के क्रांतिकारी...!!!

*भक्त और भगत सिंह के प्रशंसक एक साथ नहीं हो सकते*भारत की हर पीढ़ी भगत सिंह का नाम लेती है। उनके चेहरे वाले पोस्टर सजते ह...
23/03/2026

*भक्त और भगत सिंह के प्रशंसक एक साथ नहीं हो सकते*

भारत की हर पीढ़ी भगत सिंह का नाम लेती है। उनके चेहरे वाले पोस्टर सजते हैं, उनके ज्वलंत शब्द सोशल मीडिया पर घूमते हैं, और हर 23 मार्च को उनकी शहादत को औपचारिक रूप से याद किया जाता है। लेकिन इसी श्रद्धा के बीच एक गहरी विडंबना छुपी है: आज जो लोग स्वयं को सत्ता-समर्थक भक्त कहते हैं, वे भी खुद को भगत सिंह का प्रशंसक बताने में संकोच नहीं करते। सच्चाई यह है कि दोनों एक साथ संभव नहीं हैं। भगत सिंह को मानना और साथ ही वह सब करना, जिसके खिलाफ उन्होंने लड़ाई लड़ी—यह सिर्फ ढोंग नहीं, बल्कि उनके इतिहास से विश्वासघात है।

*भगत सिंह का नास्तिकवाद बनाम भक्तों का अंधविश्वास*

भगत सिंह ने साफ कहा था: “मैं ईश्वर के अस्तित्व को नकारता हूँ।” उनके लिए अंधविश्वास जनता को जकड़े रखने का औजार था। उनका मानना था कि प्रगति के लिए तर्क, विज्ञान और विवेक ज़रूरी हैं। आज के भक्त अंधविश्वास और अंधभक्ति पर टिके हैं—नेताओं पर अंधविश्वास, प्रतीकों पर अंधविश्वास, मिथकों पर अंधविश्वास। यह वही प्रवृत्ति है, जिसके खिलाफ भगत सिंह ने कलम और जान दोनों से संघर्ष किया।

*भगत सिंह का अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण बनाम भक्तों का संकीर्ण राष्ट्रवाद*

भगत सिंह ने मार्क्स, लेनिन, बाकुनिन जैसे विचारकों को पढ़ा। वे रूस, आयरलैंड और चीन के मजदूर आंदोलनों से प्रेरित थे। उनके लिए भारत की आज़ादी वैश्विक साम्राज्यवाद-विरोधी संघर्ष का हिस्सा थी। भक्तों की दृष्टि इसके विपरीत संकीर्ण और बहिष्कारी है—धर्म और बहुसंख्यकवादी राष्ट्रवाद तक सीमित। जहाँ भगत सिंह ने दुनिया के मेहनतकशों से एकता की बात की, वहीं भक्त भारत को एक धर्म और एक संस्कृति के क़िले में बदलना चाहते हैं।

*भगत सिंह का धर्मनिरपेक्ष दृष्टिकोण बनाम भक्तों का साम्प्रदायिक एजेंडा*

भगत सिंह ने बार-बार चेताया कि अंग्रेज़ हुकूमत ने साम्प्रदायिकता को बढ़ावा देकर भारतीयों को बाँटा। उन्होंने उन नेताओं की आलोचना की जो धर्म की भावनाओं से राजनीति करते हैं। आज भक्त राजनीति ही साम्प्रदायिकता पर टिका चुके हैं—अल्पसंख्यकों को निशाना बनाना, इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करना और नफ़रत फैलाना उनका राजनीतिक हथियार है। भगत सिंह को पूजते हुए सांप्रदायिकता करना, उनके चित्र पर हार चढ़ाकर कांटे सजाने जैसा है।

*भगत सिंह का क्रांतिकारी साहस बनाम भक्तों की चापलूसी*

भगत सिंह ने सिर्फ अंग्रेज़ी साम्राज्यवाद ही नहीं, बल्कि भारतीय समाज के भीतर की ग़लतियों को भी चुनौती दी। वे सवाल पूछने से कभी नहीं डरते थे—even अपने ही नेताओं से। उन्होंने समझौते की राजनीति को नकारा और क्रांति को सर्वोपरि रखा। इसके उलट, भक्त संस्कृति सवाल पूछने से रोकती है, आलोचकों को देशद्रोही कहती है और सत्ता की अंधभक्ति को ही देशभक्ति मानती है।

*आज का संदर्भ*

आज जब असहमति को अपराध बना दिया गया है, जब सत्ता अंधभक्ति मांगती है, जब धर्म को राजनीति का औज़ार बनाया जा रहा है—ठीक इसी समय भगत सिंह की विरासत और भी प्रासंगिक हो जाती है। वे याद दिलाते हैं कि सच्चा देशभक्ति अंधभक्ति नहीं, बल्कि निडर सवाल है; बहिष्कार नहीं, बल्कि एकजुटता है; चुप्पी नहीं, बल्कि प्रतिरोध है।

भगत सिंह कोई शोभा बढ़ाने वाली मूर्ति नहीं हैं जिन्हें सत्ता अपने पक्ष में इस्तेमाल कर ले। वे एक क्रांतिकारी चिंगारी हैं, जो पाखंड को जलाकर राख कर देती है। भक्त और भगत सिंह का प्रशंसक एक साथ होना असंभव है—क्योंकि भगत सिंह वही सब हैं, जिसे भक्त विचारधारा अस्वीकार करती है।

*अगर सचमुच भगत सिंह का सम्मान करना है, तो यह केवल उनके चित्र पर फूल चढ़ाने से नहीं होगा। यह तभी होगा जब हम साम्प्रदायिकता से लड़ेंगे, सत्ता से सवाल पूछेंगे और बराबरी व न्याय पर आधारित समाज बनाएँगे। इससे कम कुछ भी उनकी शहादत का अपमान है*

*मैं कभी प्रार्थना नहीं करूँगा!*मैं नास्तिक इसलिए नहीं बना!कि मैं अभिमानी हूं!पाखण्डी या निरर्थक हूं!मैं न तो किसी का अव...
23/03/2026

*मैं कभी प्रार्थना नहीं करूँगा!*

मैं नास्तिक इसलिए नहीं बना!
कि मैं अभिमानी हूं!
पाखण्डी या निरर्थक हूं!
मैं न तो किसी का अवतार हूं!
न ईश्वर का दूत!
औऱ न ही खुद परमात्मा!

मैं अपना जीवन एक मक़सद के लिए
न्यौछावर करने जा रहा हूं!
औऱ इससे बड़ा आश्वासन
भला क्या हो सकता है!

ईश्वर में विश्वास रखने वाला
एक हिन्दू पुनर्जन्म में एक राजा
बनने की आशा कर सकता है!
एक मुसलमान एक ईसाई को स्वर्ग में
भोग विलास की इच्छा हो सकती है!
अपने कष्ट औऱ कुर्बानियों के बदले
पुरुष्कृत होने की कामना हो सकती है!
लेकिन मुझे क्या आशा करनी चाहिए!

मैं जानता हूं!
कि जिस पल रस्सी का फंदा
मेरे गले में लगेगा!
औऱ मेरे पैरों के नीचे से तख्ता हटेगा!
वो मेरा अंतिम क्षण होगा!

किसी स्वार्थ भावना के बिना!
यहां या यहां के बाद
किसी पुरुष्कार की इच्छा किये बिना!
मैंने अनासक्त भाव से अपने जीवन को
आजादी के नाम कर दिया है!

हमारे पूर्वजों को जरूर किसी
सर्वशक्तिमान में आस्था रही होगी!
कि उस विश्वास के सच या
उस परमात्मा के अस्तित्व को
जो भी चुनौती देता है!
उसे काफिऱ या पाखण्डी कहा जाता है!
चाहे उस व्यक्ति के तर्क इतने
मज़बूत क्यों न हो!
कि उसे ईश्वर के प्रकोप का डर
दिखाकर भी झुकाया नहीं जा सकता!
औऱ इसलिए ऐसे व्यक्ति को
अभिमानी कहकर उसकी निंदा की जाती है!

मैं घमण्ड की बजह से नास्तिक नहीं बना!
ईश्वर पर मेरे अविश्वास ने आज सभी
परिस्थितियों को मेरे प्रतिकूल बना दिया है!
औऱ ये स्थिति औऱ भी ज़्यादा
बिगड़ सकती है!
जऱा सा अध्यात्म इस स्थिति को
काव्यात्मक मोड़ दे सकता है!
लेकिन अपने अंत से मिलने के लिए
मैं कोई तर्क नहीं देना चाहता!

*मैं यथार्थवादी व्यक्ति हूं!*
अपने व्यवहार पर मैं सिर्फ
तर्कशील होकर विजय पाना चाहता हूं!
भले ही मैं हमेशा इन कोशिशों में
कामयाब नहीं रहा हूं!
लेकिन ये मनुष्य का कर्तव्य है!
कि वो कोशिश करता रहे!
क्योंकि सफलता तो
संयोग औऱ हालात पर निर्भर करती है!

आगे बढ़ते रहने वाले
प्रत्येक व्यक्ति के लिए जरूरी है कि
वो पुरानी आस्था के सभी
सिद्धांतों में दोष ढूंढ़े!
उसे एक एक कर पुरानी
मान्यताओं को चुनौती देनी चाहिए!
सभी बारीकियों को
परखना औऱ समझना चाहिए!

अगर कठोर तर्क वितर्क के बाद
वह किसी धारणा तक पहुंचता है!
तो उसके विश्वास को सराहना चाहिए!
उसके तर्कों को गलत या झूठा भी
समझा जा सकता है!
पर संभव है कि
उसे सही ठहराया जायेगा!
क्योंकि तर्क ही जीवन का मार्गदर्शक है!

लेकिन विश्वास!
बल्कि मुझे कहना चाहिए कि
अंधविश्वास बहुत घातक है!
वो एक व्यक्ति की सोच समझ की
शक्ति को मिटा देता है!
और उसे सुधार विरोधी बना देता है!

जो भी व्यक्ति खुद को
यथार्थवादी कहने का दावा करता है!
उसे पुरानी मान्यताओं के सच को
चुनौती देनी होगी!
और यदि आस्था तर्क के प्रहार को
सहन न कर पाये!
तो वो बिखऱ जाती है!

यहां अंग्रेज़ों का शासन इसलिए नहीं है!
क्योंकि ईश्वर ऐसा चाहता है!
बल्कि इसलिए है!
क्योंकि उनके पास ताकत है!
औऱ हममें उसका विरोध करने का
साहस नहीं है!
अंग्रेज़ ईश्वर की मदद से
हमें काबू में नहीं रख रहे हैं!
बल्कि वो बंदूकों पुलिस और सेना
के सहारे ऐसा कर रहे हैं!
और सबसे ज़्यादा!
हमारी बेपऱवाही की बजह से!

मेरे एक दोस्त ने मुझसे
प्रार्थना करने को कहा!
जब मैंने उससे अपने नास्तिक
होने की बात कही!
तो उसने कहा!
जब तुम्हारे आखिरी दिन नजदीक आयेंगे!
तब तुम भी यकीन करने लगोगे!
मैंने कहा!
नहीं मेरे प्यारे मित्र!
ऐसा कभी नहीं होगा!
मैं इसे अपने लिए अपमानजनक
और नैतिक पतन की वजह समझता हूं!
ऐसी स्वार्थी बजह से
*मैं कभी प्रार्थना नहीं करूंगा!*

*~ भगत सिंह* (27 सितम्बर 1907 - 23 मार्च 1931) जेल डायरी से साभार।

*शहीदे आज़म भगत सिंह को उनकी बेशकीमती कुर्बानी के लिये खिराज-ए-अक़ीदत पेश है!*

💐💐💐

23/03/2026

ईरान इस वक्त इजरायल के साथ साथ नौ खाड़ी देशों के साथ जंग लड़ रहा है जहां जहां अमेरिका के एयरबेस हैं इसी कारण ट्रंप की चकरी बना दी है ट्रंप समझौते की पेश कश कर चुका है लेकिन ईरान ने ये कहकर मना कर दिया है कि पहले हर्जाना दो ईरान के पास इस वक्त डाई लाख मिसाइलें मौजूद हैं उसके पास इस वक्त सबसे ज्यादा वैज्ञानिक हैं सबसे ज्यादा बंकर हैं जिनमें दस हजार से भी ज्यादा महिला वैज्ञानिक काम करती हैं
हम लोग सोचते थे कि वहां महिलाओं की जिंदगी कैद है लेकिन वहां पर तो एयरपोर्टों पर भी दुनियां में सबसे ज्यादा महिला टैक्सी ड्राइवर हैं
वहां की जनता 90 प्रतिशत ग्रेजुएट हैं और वहां पर हर रोज दो हजार से ज्यादा ड्रोन तैयार किए जा रहे हैं जिनको बनाने में महिलाओं की तादाद ज्यादा हैं
हमारी महिलाओं को तो जागरणों और जाग्रतों पाखंड से ही फुर्सत नहीं है और टीवी पर दिखाया जाता है कि तुम महान हो और हम ही विश्व गुरु हैं 😀

*डिलीवरी एजेंट बनकर साइबर ठगी का नया तरीका — USSD कॉल फॉरवर्डिंग से सावधान।* डिलीवरी एजेंट बनकर कॉल… और फिर साइबर ठगी।“प...
23/03/2026

*डिलीवरी एजेंट बनकर साइबर ठगी का नया तरीका — USSD कॉल फॉरवर्डिंग से सावधान।*

डिलीवरी एजेंट बनकर कॉल… और फिर साइबर ठगी।

“पता वेरिफिकेशन” के बहाने मोबाइल में कोड डायल करवाते हैं।

*21, *67, *61 जैसे कोड से कॉल फॉरवर्डिंग चालू हो जाती है।

आपके OTP और कॉल सीधे ठग तक पहुंच जाते हैं।

सावधान रहें:

किसी अनजान के कहने पर कोई कोड डायल न करें।

पार्सल की जानकारी सिर्फ आधिकारिक ऐप/वेबसाइट से लें।

अगर आपको कोई संदेह हो तो तुरंत # #002 # डायल करें (कॉल फॉरवर्डिंग बंद)

हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें।

सतर्क रहें, सुरक्षित रहें — एक कोड आपकी मेहनत की कमाई बचा सकता है।

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